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क्या लिखूँ | Class 9 Hindi Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 2 मिनट का पठन

क्या लिखूँ | Class 9 Hindi Notes

क्या लिखूँ – this guide gives you a concise, exam-ready overview of क्या लिखूँ from Class 9 Hindi, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

पदुमलाल पुननालाल बख्शी

पदुमलाल पुननालाल बख्शी का जन्म सन् 1894 में खैरागढ़, राजनंदगांव, छत्तीसगढ़ (तत्कालीन मध्यप्रदेश) में हुआ था। वे हिंदी साहित्य के एक बहुमुखी लेखक थे, जिनकी ख्याति कुशल आलोचक, कवि, निबंधकार, हास्य व्यंग्यकार के रूप में है। विशेष रूप से निबंध लेखन के क्षेत्र में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। उनकी प्रमुख रचनाओं में निबंध संग्रह जैसे पंच-पात्र, पद्म-वन, प्रबंध पारिजात, कुछ बिखरे पन्ने, काव्य संग्रह अश्रुदल, शातदल, कहानी संग्रह झालमला, त्रिवेणी, और आलोचनात्मक ग्रंथ विश्व साहित्य, हिंदी कहानी साहित्य, हिंदी साहित्य विमर्श, हिंदी उपन्यास साहित्य शामिल हैं।

पदुमलाल पुननालाल बख्शी ने सरस्वती और छाया पत्रिकाओं का संपादन भी किया, जो हिंदी साहित्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थीं। उनके लेखन में अध्यात्म, समाज-सुधार, लोकजीवन की झलक मिलती है। उन्होंने भारतीय कृषि और सामाजिक संबंधों का तार्किक मूल्यांकन किया और भारतीय एवं पाश्चात्य साहित्य के सिद्धांतों का सामंजस्य प्रस्तुत किया। उनका निधन सन् 1971 में हुआ।

उनका निबंध 'क्या लिखूँ?' निबंध लेखन की प्रक्रिया को समझाने वाला एक महत्वपूर्ण पाठ है, जिसमें वे निबंध लेखन की कठिनाइयों, विषय चयन, सामग्री संग्रह, और शैली निर्धारण जैसे विषयों पर विचार करते हैं। इस निबंध में वे दो विषयों — 'दूर के ढोल सुहावने होते हैं' और 'समाज-सुधार' — पर निबंध लिखने की चुनौती को प्रस्तुत करते हैं।

📊 Diagram: 0901CHO2; Figure on page 1; पदुमलाल पुननालाल बख्शी ने अपने लेखन में अध्यात्म, समाज-सुधार, लोकजीवन को प्रमुखता दी है। उन्होंने अपने निबंधों में भारतीय कृषि एवं सामाजिक संबंधों का तार्किक मूल्यांकन और विश्लेषण किया है। उनकी रचनाओं

🧪 Activity: इस अनुभाग में कोई विशेष गतिविधि नहीं है, पर पाठक को पदुमलाल पुननालाल बख्शी के जीवन और रचनाओं पर शोध करने के लिए प्रेरित किया गया है।

🔗 Connection: यह अनुभाग निबंध 'क्या लिखूँ?' के विषय परिचय की ओर ले जाता है, जहाँ लेखक निबंध लेखन की मानसिक स्थिति और कठिनाइयों पर विचार करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कवि धर्मवीर भारती की कविता 'अंधा युग' में अंधकार का क्या प्रतीकात्मक अर्थ है?

मानसिक और सामाजिक अज्ञानता

कविता 'अंधा युग' में कवि ने जीवन के किन पहलुओं को उजागर किया है?

संघर्ष, निराशा और आशा के बीच जद्दोजहद

कवि ने 'अंधा युग' कविता में प्रकाश को किसका प्रतीक बताया है?

ज्ञान, सत्य और न्याय

कविता 'अंधा युग' की भाषा की विशेषता क्या है?

सरल, स्पष्ट और प्रभावशाली भाषा

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