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Chapter 2

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Chapter 2अध्ययन नोट्स

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पदुमलाल पुननालाल बख्शी

व्याख्या

पदुमलाल पुननालाल बख्शी

पदुमलाल पुननालाल बख्शी का जन्म सन् 1894 में खैरागढ़, राजनंदगांव, छत्तीसगढ़ (तत्कालीन मध्यप्रदेश) में हुआ था। वे हिंदी साहित्य के एक बहुमुखी लेखक थे, जिनकी ख्याति कुशल आलोचक, कवि, निबंधकार, हास्य व्यंग्यकार के रूप में है। विशेष रूप से निबंध लेखन के क्षेत्र में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। उनकी प्रमुख रचनाओं में निबंध संग्रह जैसे पंच-पात्र, पद्म-वन, प्रबंध पारिजात, कुछ बिखरे पन्ने, काव्य संग्रह अश्रुदल, शातदल, कहानी संग्रह झालमला, त्रिवेणी, और आलोचनात्मक ग्रंथ विश्व साहित्य, हिंदी कहानी साहित्य, हिंदी साहित्य विमर्श, हिंदी उपन्यास साहित्य शामिल हैं। पदुमलाल पुननालाल बख्शी ने सरस्वती और छाया पत्रिकाओं का संपादन भी किया, जो हिंदी साहित्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थीं। उनके लेखन में अध्यात्म, समाज-सुधार, लोकजीवन की झलक मिलती है। उन्होंने भारतीय कृषि और सामाजिक संबंधों का तार्किक मूल्यांकन किया और भारतीय एवं पाश्चात्य साहित्य के सिद्धांतों का सामंजस्य प्रस्तुत किया। उनका निधन सन् 1971 में हुआ। उनका निबंध 'क्या लिखूँ?' निबंध लेखन की प्रक्रिया को समझाने वाला एक महत्वपूर्ण पाठ है, जिसमें वे निबंध लेखन की कठिनाइयों, विषय चयन, सामग्री संग्रह, और शैली निर्धारण जैसे विषयों पर विचार करते हैं। इस निबंध में वे दो विषयों — 'दूर के ढोल सुहावने होते हैं' और 'समाज-सुधार' — पर निबंध लिखने की चुनौती को प्रस्तुत करते हैं।

  • पदुमलाल पुननालाल बख्शी का जन्म 1894 में छत्तीसगढ़ में हुआ।
  • वे हिंदी के कुशल आलोचक, कवि, निबंधकार और हास्य व्यंग्यकार थे।
  • उनकी प्रमुख रचनाओं में निबंध, कविता, कहानी और आलोचना शामिल हैं।
  • उन्होंने सरस्वती और छाया पत्रिकाओं का संपादन किया।
  • उनके लेखन में अध्यात्म, समाज-सुधार और लोकजीवन की झलक मिलती है।
  • उनका निधन 1971 में हुआ।
  • 📌 निबंधकार: वह लेखक जो निबंध लिखता है।
  • 📌 आलोचक: साहित्य या कला की समीक्षा करने वाला व्यक्ति।
  • 📌 हास्य व्यंग्यकार: जो हास्य और व्यंग्य के माध्यम से समाज की आलोचना करता है।

क्या लिखूँ?

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क्या लिखूँ?

इस अनुभाग में लेखक निबंध लेखन की मानसिक स्थिति और प्रक्रिया पर विचार करता है। अंग्रेजी के प्रसिद्ध निबंधकार ए.जी. गार्डिनर के कथन के अनुसार, लिखने की एक विशेष मानसिक स्थिति होती है जिसमें मन में उमंग, हृदय में स्फूर्ति और मस्तिष्क में आवेग उत्पन्न होता है, जिससे लेख लिखना अनिवार्य हो जाता है। उस समय विषय की चिंता नहीं होती, बल्कि मन के भाव ही लेखन की वस्तु होते हैं। लेखक स्वयं इस मानसिक स्थिति का अनुभव नहीं करता, इसलिए उसके लिए निबंध लिखना कठिन होता है। उसे सोच-समझकर, परिश्रम करके निबंध लिखना पड़ता है। उसे दो विषयों पर निबंध लिखने हैं — 'दूर के ढोल सुहावने होते हैं' और 'समाज-सुधार' — जो परीक्षा में आ चुके हैं। लेखक को इन विषयों पर आदर्श निबंध लिखने में कठिनाई होती है क्योंकि विषय व्यापक और जटिल हैं। लेखक निबंधशास्त्र के आचार्यों की राय जानने का प्रयास करता है। एक विद्वान के अनुसार निबंध छोटा होना चाहिए क्योंकि बड़ा निबंध सुंदरता नहीं बनाए रख पाता। निबंध के दो प्रधान अंग होते हैं: सामग्री और शैली। सामग्री के लिए विचार-समूह संचित करना आवश्यक है, और शैली में भाषा का प्रवाह होना चाहिए। लेखक को सामग्री संग्रह के लिए समय और संसाधन नहीं मिलते, इसलिए वह अपने ज्ञान पर भरोसा कर लिखने का निर्णय लेता है। लेखक को निबंध की रूपरेखा बनाने में भी कठिनाई होती है क्योंकि वह सोचता है कि निबंध के लिए पहले सारांश या रूपरेखा बनाना आवश्यक है, पर वह इसे सहज नहीं पाता। शैली के लिए छोटे-छोटे वाक्य लिखने की सलाह दी जाती है, पर लेखक चाहता है कि वाक्य लंबे और प्रभावशाली हों। अंग्रेजी निबंधकारों की पद्धति अलग है, जिसमें वे अपने अनुभव और अनुभूतियों को सहजता से व्यक्त करते हैं। लेखक भी इस पद्धति को अपनाने का विचार करता है। अंत में वह अमीर खुसरो की कहानी का उल्लेख करता है, जिसमें खुसरो ने चार विषयों पर एक पद्य में कविता बनाई। इसी प्रकार लेखक भी दोनों विषयों को एक निबंध में समाहित करने का निर्णय करता है।

  • लेखन के लिए विशेष मानसिक स्थिति की आवश्यकता होती है।
  • लेखक को विषय पर सोच-समझकर और परिश्रम से निबंध लिखना पड़ता है।
  • निबंध के दो मुख्य अंग हैं: सामग्री और शैली।
  • निबंध छोटा और संक्षिप्त होना चाहिए।
  • अंग्रेजी निबंधकार अनुभव आधारित लेखन करते हैं।
  • लेखक दोनों विषयों को एक निबंध में जोड़ने का प्रयास करता है।
  • 📌 निबंधशास्त्र: निबंध लेखन का सिद्धांत और नियम।
  • 📌 रूपरेखा: निबंध की संरचना या प्रारूप।
  • 📌 शैली: अभिव्यक्ति का ढंग।

दूर के ढोल सुहावने होते हैं

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दूर के ढोल सुहावने होते हैं

इस अनुभाग में लेखक 'दूर के ढोल सुहावने होते हैं' लोकोक्ति का अर्थ और उसके पीछे के भावों का विश्लेषण करता है। ढोल की ध्वनि समीपस्थ लोगों के लिए कर्कश और कटु हो सकती है, लेकिन दूर से सुनने पर वही ध्वनि मधुर और सुहावनी लगती है। यह इस बात का प्रतीक है कि

अभ्यास प्रश्नChapter 2

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.1. “हैट टॉगने के लिए कोई भी खूंटी काम दे सकती है... असली वस्तु है हैट, खूंटी नहीं।” निबंध में ‘हैट’ और ‘खूंटी’ का उल्लेख किस भाव को सबसे अधिक उजागर करता है? (क) विषय से अधिक लेखक के भावों की प्रधानता को दर्शाना (ख) विचार से अधिक तथ्य आधारित सामग्री को प्रमुख बताना (ग) शैली से अधिक भाषा व्यवस्था की उपयोगिता बताना (घ) उदाहरण से अधिक सिद्धांत आधारित लेखन का समर्थन करना
A.क) विषय से अधिक लेखक के भावों की प्रधानता को दर्शाना
B.ख) विचार से अधिक तथ्य आधारित सामग्री को प्रमुख बताना
C.ग) शैली से अधिक भाषा व्यवस्था की उपयोगिता बताना
D.घ) उदाहरण से अधिक सिद्धांत आधारित लेखन का समर्थन करना

उत्तर:

सही उत्तर है (क) विषय से अधिक लेखक के भावों की प्रधानता को दर्शाना। 'हैट' और 'खूंटी' का उल्लेख इस बात को दर्शाता है कि निबंध में विषय से अधिक लेखक के अपने भाव और दृष्टिकोण महत्वपूर्ण हैं। 'हैट' असली वस्तु है, जबकि 'खूंटी' केवल सहायक है, जो लेखक के भावों की प्रधानता को दर्शाता है।

व्याख्या:

यहाँ 'हैट' और 'खूंटी' के माध्यम से लेखक यह बताना चाहता है कि निबंध का मूल विषय (हैट) महत्वपूर्ण है, जबकि सहायक तत्व (खूंटी) कम महत्वपूर्ण हैं। इसका अर्थ है कि लेखक के भाव और दृष्टिकोण विषय से अधिक महत्व रखते हैं। अतः विकल्प (क) उपयुक्त है।

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Q2.2. “उनमें लेखक की सच्ची अनुभूति रहती है... उसका उल्लास रहता है।” मानटेन की पद्धति लेखक के लिए किस निर्णय का आधार बनती है? (क) शैली और स्पष्ट-सहज भाषा को महत्व न देना (ख) परंपरागत निबंधकारों को अस्वीकार करना (ग) अध्ययन के बिना अपने विचार प्रस्तुत कर देना (घ) अनुभव आधारित स्वच्छंद लेखन को अपनाना
A.क) शैली और स्पष्ट-सहज भाषा को महत्व न देना
B.ख) परंपरागत निबंधकारों को अस्वीकार करना
C.ग) अध्ययन के बिना अपने विचार प्रस्तुत कर देना
D.घ) अनुभव आधारित स्वच्छंद लेखन को अपनाना

उत्तर:

सही उत्तर है (घ) अनुभव आधारित स्वच्छंद लेखन को अपनाना। मानटेन की पद्धति में लेखक अपने अनुभवों, देखे-सुने और अनुभूतियों को निबंध में प्रस्तुत करता है, जो स्वच्छंद और सहज होता है।

व्याख्या:

मानटेन की पद्धति में निबंध लेखन का आधार लेखक के अपने अनुभव और अनुभूतियाँ होती हैं। इसलिए यह पद्धति अनुभव आधारित स्वच्छंद लेखन को प्रोत्साहित करती है, न कि केवल अध्ययन या परंपरागत विधियों को। अतः विकल्प (घ) सही है।

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Q3.3. “तरुणों के लिए भविष्य उज्ज्वल... वृद्धों के लिए अतीत सुखद...” यह तुलना किस पर आधारित है? (क) तर्क और भावना (ख) ज्ञान और शिक्षा (ग) परिश्रम और उपलब्धि (घ) अभिलाषा और अनुभव
A.क) तर्क और भावना
B.ख) ज्ञान और शिक्षा
C.ग) परिश्रम और उपलब्धि
D.घ) अभिलाषा और अनुभव

उत्तर:

सही उत्तर है (घ) अभिलाषा और अनुभव। यहाँ तरुणों की आशाएँ और अभिलाषाएँ भविष्य की ओर होती हैं, जबकि वृद्धों के अनुभव अतीत की स्मृतियों से जुड़े होते हैं।

व्याख्या:

तरुणों के लिए भविष्य उज्ज्वल होता है क्योंकि उनकी अभिलाषाएँ और आकांक्षाएँ होती हैं, जबकि वृद्ध अतीत के सुखद अनुभवों को संजोते हैं। अतः यह तुलना अभिलाषा और अनुभव के आधार पर की गई है।

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Q4.4. निबंध में अमीर खुसरो की कहानी का उल्लेख किस संदर्भ में किया गया है? (क) कविता लेखन की कला को समझाने के लिए (ख) एक साथ कई विषयों को संबोधित करने की प्रतिभा दिखाने के लिए (ग) डोल के महत्व को दर्शाने के लिए (घ) सामाजिक सुधार के उदाहरण के रूप में
A.क) कविता लेखन की कला को समझाने के लिए
B.ख) एक साथ कई विषयों को संबोधित करने की प्रतिभा दिखाने के लिए
C.ग) डोल के महत्व को दर्शाने के लिए
D.घ) सामाजिक सुधार के उदाहरण के रूप में

उत्तर:

सही उत्तर है (ख) एक साथ कई विषयों को संबोधित करने की प्रतिभा दिखाने के लिए। अमीर खुसरो की कहानी का उल्लेख निबंध में उनकी बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाने के लिए किया गया है।

व्याख्या:

अमीर खुसरो को एक ऐसे कवि और विद्वान के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिन्होंने एक साथ कई विषयों को संबोधित किया। इसलिए उनकी कहानी का उल्लेख इस संदर्भ में किया गया है।

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Q5.5. निबंध में समाज-सुधार के संदर्भ में क्या कहा गया है? (क) सुधारों की आवश्यकता हर युग में बनी रहती है। (ख) सुधार केवल बड़े विचारकों द्वारा संभव हैं। (ग) सुधार केवल आधुनिक युग की देन हैं। (घ) सुधारों का कोई अंत नहीं, लेकिन दोष समाप्त हो जाते हैं।
A.क) सुधारों की आवश्यकता हर युग में बनी रहती है।
B.ख) सुधार केवल बड़े विचारकों द्वारा संभव हैं।
C.ग) सुधार केवल आधुनिक युग की देन हैं।
D.घ) सुधारों का कोई अंत नहीं, लेकिन दोष समाप्त हो जाते हैं।

उत्तर:

सही उत्तर है (क) सुधारों की आवश्यकता हर युग में बनी रहती है। निबंध में यह बताया गया है कि समाज में सुधार की आवश्यकता सदैव बनी रहती है।

व्याख्या:

समाज में समय-समय पर सुधारों की आवश्यकता होती रहती है, जो हर युग में बनी रहती है। इसलिए विकल्प (क) उपयुक्त है।

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Q6.1. निबंध लेखन के विषय में ए.जी. गार्डिनर और लेखक के विचारों में क्या अंतर है?

उत्तर:

ए.जी. गार्डिनर निबंध लेखन को एक निश्चित विधि और नियमों के अनुसार मानते हैं, जबकि लेखक अनुभव आधारित, सहज और स्वच्छंद लेखन को महत्व देता है। गार्डिनर का दृष्टिकोण अधिक औपचारिक है, जबकि लेखक का दृष्टिकोण अधिक व्यक्तिगत और भावनात्मक है।

व्याख्या:

गॉर्डिनर के अनुसार निबंध लेखन में विषय की स्पष्टता, नियमों का पालन और संरचना आवश्यक है, जबकि लेखक मानता है कि निबंध में लेखक की अपनी अनुभूति, अनुभव और सहजता प्रमुख होनी चाहिए। इसलिए दोनों के विचारों में विधि और भाव के बीच अंतर है।

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Q7.2. लेखक के अनुसार वृद्ध और तरुण दोनों ही वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं, पर दोनों की असंतुष्टि के कारण भिन्न हैं। आपके विचार से उनकी असंतुष्टि के क्या-क्या कारण हो सकते हैं?

उत्तर:

लेखक के अनुसार, वृद्ध लोग अपने अतीत की यादों और अनुभवों से जुड़े होते हैं, इसलिए वे वर्तमान में बदलाव या नई चीजों को स्वीकारने में असंतुष्ट रहते हैं। वहीं तरुणों की असंतुष्टि भविष्य की आशाओं और आकांक्षाओं से जुड़ी होती है, वे वर्तमान को बेहतर बनाने के लिए उत्सुक होते हैं। अतः वृद्ध अनुभवों के कारण और तरुण अभिलाषाओं के कारण असंतुष्ट रहते हैं।

व्याख्या:

वृद्धों की असंतुष्टि उनके अनुभवों और परंपराओं से जुड़ी होती है, जो वे खोते हुए देखते हैं। तरुणों की असंतुष्टि नई संभावनाओं और बदलाव की चाह से उत्पन्न होती है। इसलिए दोनों की असंतुष्टि के कारण भिन्न हैं।

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Q8.3. नमिता और अमिता किन विषयों पर निबंध लिखवाना चाहती हैं? उनके द्वारा सुझाए गए विषयों पर निबंध लिखने में लेखक को क्या-क्या कठिनाइयाँ आईं?

उत्तर:

नमिता और अमिता ने लेखक से ‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’ और ‘समाज-सुधार’ विषयों पर निबंध लिखवाना चाहा। लेखक को इन विषयों पर निबंध लिखने में कठिनाइयाँ इसलिए आईं क्योंकि ये विषय लेखक के अनुभव से दूर थे और लेखक को इन विषयों पर सहजता से लिखना कठिन लगा।

व्याख्या:

लेखक का मानना है कि निबंध लेखन में अनुभव और व्यक्तिगत अनुभूति महत्वपूर्ण होती है। जब विषय लेखक के अनुभव से मेल नहीं खाते, तो निबंध लिखना कठिन हो जाता है। इसलिए इन विषयों पर लेखक को कठिनाई हुई।

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