दुःख का अधिकार | Class 9 Hindi Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 2 मिनट का पठन

दुःख का अधिकार – this guide gives you a concise, exam-ready overview of दुःख का अधिकार from Class 9 Hindi, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
बच्चेंद्री पाल
इस अनुभाग में बच्चेंद्री पाल के जीवन परिचय और उनके प्रारंभिक संघर्षों का वर्णन है। बच्चेंद्री पाल का जन्म 24 मई 1954 को उत्तरांचल के चमोली जिले के बंपा गाँव में हुआ। वे अपनी माँ हंसादेई नेगी और पिता किशन सिंह पाल की तीसरी संतान हैं। उनके पिता पढ़ाई का खर्च उठाने में असमर्थ थे, इसलिए बच्चेंद्री को आठवीं कक्षा के बाद अपनी पढ़ाई का खर्च सिलाई-कढ़ाई करके जुटाना पड़ा। दसवीं कक्षा पास करने के बाद उनके स्कूल के प्रिंसिपल ने उनके पिता को उनकी आगे की पढ़ाई के लिए सहमत किया। विषम परिस्थितियों के बावजूद बच्चेंद्री ने संस्कृत में एम.ए. और फिर बी.एड. की डिग्री हासिल की।
बच्चेंद्री को बचपन से ही पहाड़ों पर चढ़ने का शौक था। उनके बड़े भाई उन्हें पहाड़ पर चढ़ने से रोकते थे, जबकि छोटे भाई को प्रोत्साहित करते थे। यह उनके लिए एक चुनौती थी कि लड़कियों को कोमल और नाजुक क्यों समझा जाता है। परिवार के मौसम के अनुसार वे साल के कुछ महीने ऊँचाई वाले गाँव में और कुछ महीने तराई के गाँव में बिताते थे। तराई वाले गाँव में स्कूल जाने के लिए बच्चेंद्री को पाँच-छह मील की पहाड़ी चढ़ाई करनी पड़ती थी।
बच्चेंद्री की पढ़ाई पूरी होने पर इंडियन माउंटेन फाउंडेशन ने एवरेस्ट अभियान के लिए महिलाओं की खोज शुरू की। बच्चेंद्री इस अभियान दल में शामिल हो गईं। ट्रेनिंग के दौरान उन्होंने 7500 मीटर ऊँची मान चोटी पर सफलतापूर्वक चढ़ाई की। कई महीनों के अभ्यास के बाद उन्होंने एवरेस्ट विजय के लिए यात्रा शुरू की।
📊 Diagram: Figure 0957CH02; बच्चेंद्री पाल का जन्म उत्तरांचल के चमोली जिले में बंपा गाँव में 24 मई 1954 को हुआ। बच्चेंद्री अपनी माँ हंसादेई नेगी और पिता किशन सिंह पाल की तीसरी संतान हैं। पिता पढ़ाई का खर्च उठाने में असमर्थ थे, अ
🧪 Activity: इस अनुभाग में कोई विशेष गतिविधि नहीं दी गई है।
🔗 Connection: यह अनुभाग बच्चेंद्री पाल के प्रारंभिक जीवन और संघर्षों को समझाने के बाद अगली कड़ी में उनके एवरेस्ट अभियान की यात्रा का वर्णन करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कफन के संदर्भ में लेखक ने किस पर व्यंग्य किया है ?
सामाजिक रूढ़िवादिता पर
दुःख का अधिकार कहानी का केंद्रीय पात्र कौन है ?
बूढी स्त्री
2. प्रश्न - भगवाना निर्वाह कैसे करता था?
खरबूजे बेचकर
माँ , बहू और बच्चे भगवना से लिपट-लिपट कर रोने लगे। ` में कौन सा रस है ?
करूण रस
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