पदुमलाल पुन््ननालाल बख््शशी | Class 9 Hindi Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 2 मिनट का पठन

पदुमलाल पुन््ननालाल बख््शशी – this guide gives you a concise, exam-ready overview of पदुमलाल पुन््ननालाल बख््शशी from Class 9 Hindi, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
दूर के ढोल सुहावने होते हैं
इस भाग में लेखक ने 'दूर के ढोल सुहावने होते हैं' कहावत का अर्थ और उसके पीछे की सामाजिक-सांस्कृतिक व्याख्या की है। लेखक बताते हैं कि ढोल की कर्कश ध्वनि पास बैठने वालों के लिए कष्टदायक होती है, लेकिन दूर बैठे व्यक्ति के लिए वही ध्वनि मधुर लगती है। यह इसलिए क्योंकि दूर से आने वाली आवाज़ की तीव्रता कम हो जाती है और वह आनंद, उत्सव, प्रेम के संगीत के साथ जुड़ जाती है।
लेखक ने यह भी बताया कि जीवन में दूर से देखे गए वस्तु या अनुभव मनमोहक लगते हैं, जबकि निकट से उनकी वास्तविकता कठोर हो सकती है। युवा पीढ़ी भविष्य को उज्ज्वल देखती है, जबकि वृद्ध अतीत के गौरव को याद करते हैं। दोनों ही वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं, लेकिन उनकी असंतुष्टता के कारण भिन्न होते हैं। यही कारण है कि समाज में सुधारों की आवश्यकता सदैव बनी रहती है।
इतिहास में अनेक समाज सुधारक हुए हैं जैसे बुद्धदेव, महावीर स्वामी, नागार्जुन, शंकराचार्य, कबीर, नानक, राजा राममोहन राय, स्वामी दयानंद और महात्मा गांधी। जीवन में दोष और सुधार दोनों अनंत हैं। जो कभी सुधार थे, वे आज दोष बन सकते हैं, और नए सुधारों की आवश्यकता होती है।
📊 Diagram: दो चित्र: एक उत्सव में ढोल बजाते लोग और दूसरा नदी के किनारे संध्या का दृश्य जहाँ दूर से ध्वनि मधुर लगती है।
🧪 Activity: पाठ में वर्णित लोकोक्ति 'दूर के ढोल सुहावने होते हैं' के अर्थ पर चर्चा।
🔗 Connection: अगले खंड में हिंदी साहित्य में प्रगतिशीलता और समाज सुधार की निरंतरता पर चर्चा की गई है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पदुमलाल पुन््ननालाल बख्शशी कौन थे और उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में किस प्रकार की भूमिका निभाई?
पदुमलाल पुन््ननालाल बख्शशी एक प्रसिद्ध भारतीय स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक और राजनेता थे। उन्होंने सत्याग्रह और अहिंसा के सिद्धांतों को अपनाकर महात्मा गांधी के साथ मिलकर अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन में भाग लिया।
पदुमलाल पुन््ननालाल बख्शशी के प्रारंभिक जीवन में उनकी शिक्षा और सामाजिक रुचियों का वर्णन करें।
पदुमलाल का जन्म एक समृद्ध परिवार में हुआ था। उन्होंने संस्कृत, हिंदी, गुजराती और अंग्रेजी भाषाओं में शिक्षा प्राप्त की। बचपन से ही उनमें देशभक्ति और सामाजिक न्याय की रुचि थी। उच्च शिक्षा के दौरान वे साहित्य, इतिहास और दर्शन में रुचि लेने लगे।
पदुमलाल पुन््ननालाल बख्शशी ने स्वतंत्रता संग्राम के किन प्रमुख आंदोलनों में भाग लिया था?
असहयोग आंदोलन, दांडी मार्च, भारत छोड़ो आंदोलन
पदुमलाल पुन््ननालाल बख्शशी ने सामाजिक सुधारों के क्षेत्र में कौन-कौन से मुद्दों पर काम किया?
जाति प्रथा, बाल विवाह, अंधविश्वास के खिलाफ कार्य
इस अध्याय में महारत हासिल करें
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