Hindiकक्षा 9ल्हासा की ओरहिंदी

ल्हासा की ओर | Class 9 Hindi Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन

ल्हासा की ओर | Class 9 Hindi Notes

ल्हासा की ओर – this guide gives you a concise, exam-ready overview of ल्हासा की ओर from Class 9 Hindi, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

राहुल सांकृत्यायन

इस अनुभाग में राहुल सांकृत्यायन के जीवन और उनके साहित्यिक योगदान का विस्तृत परिचय दिया गया है। राहुल सांकृत्यायन का जन्म 1893 में उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के ननिहाल गाँव पंदहा में हुआ था। उनका मूल नाम केदार पांडेय था। उन्होंने काशी, आगरा और लाहौर में शिक्षा प्राप्त की। 1930 में श्रीलंका जाकर उन्होंने बौद्ध धर्म ग्रहण किया और तब से उनका नाम राहुल सांकृत्यायन हो गया। वे अनेक भाषाओं जैसे पालि, प्राकृत, अपभ्रंश, तिब्बती, चीनी, जापानी, रूसी आदि के ज्ञाता थे, इसलिए उन्हें महापंडित कहा जाता था।

राहुल सांकृत्यायन ने उपन्यास, कहानी, आत्मकथा, यात्रावृत्त, जीवनी, आलोचना, शोध आदि अनेक साहित्यिक विधाओं में कार्य किया। उनकी प्रमुख कृतियों में मेरी जीवन यात्रा (छह भाग), दर्शन-दिग्दर्शन, बाइसवीं सदी, वोल्गा से गंगा, भागो नहीं दुनिया को बदलो, दिमागी गुलामी, घुमक्कड़ शास्त्र आदि शामिल हैं। उन्होंने अनेक ग्रंथों का हिंदी में अनुवाद भी किया। इसके अतिरिक्त दर्शन, राजनीति, धर्म, इतिहास, विज्ञान जैसे विषयों पर लगभग 150 पुस्तकें लिखीं। राहुल जी ने लुप्तप्राय सामग्री का उद्धार कर महत्वपूर्ण कार्य किया।

यात्रावृत्त लेखन में उनका स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने घुमक्कड़ी का शास्त्र रचा और यात्रा को मंजिल से अधिक महत्व दिया। उनकी यात्राओं में मनोरंजन, ज्ञानवर्धन, भाषा और संस्कृति का आदान-प्रदान होता था। उन्होंने विभिन्न स्थानों के भौगोलिक और जन-जीवन का सुंदर चित्रण प्रस्तुत किया। इस खंड में प्रस्तुत यात्रा-वृत्तांत उनकी प्रथम तिब्बत यात्रा का अंश है, जो उन्होंने 1929-30 में नेपाल के रास्ते की थी। उस समय भारतीयों को तिब्बत जाने की अनुमति नहीं थी, इसलिए वे भिखमंगे के छद्म वेश में गए थे। इस यात्रा-वृत्तांत से तिब्बती समाज की भी जानकारी मिलती है।

📊 Diagram: Figure 0955CH02; राहुल सांकृत्यायन का जन्म सन् 1893 में उनके ननिहाल गाँव पंदहा, जिला आजमगढ़ (उत्तर प्रदेश) में हुआ। उनका पैतृक गाँव कनैला था। उनका मूल नाम केदार पांडेय था। उनकी शिक्षा काशी, आगरा और लाहौर में हुई। सन् 1930 में उन्होंने श्रीलंका जाकर बौद्ध धर्म ग्रहण कर लिया। तबसे उनका नाम राहुल सांकृत्यायन हो गया।

🧪 Activity: इस खंड में कोई विशेष गतिविधि नहीं दी गई है।

🔗 Connection: यह परिचय तिब्बत यात्रा के वर्णन की ओर ले जाता है, जहाँ लेखक की यात्रा की शुरुआत और मार्ग का वर्णन है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

थोड़ला के पहले के आखिरी गाँव पहुँचने पर भिखमंगे के वेश में होने के बावजूद लेखक को ठहरने के लिए उचित स्थान मिला जबकि दूसरी यात्रा के समय भद्र वेश भी उन्हें उचित स्थान नहीं दिला सका। क्यों?

पहली यात्रा में लेखक भिखमंगे के वेश में था, जिससे वह लोगों को अपनी स्थिति का एहसास नहीं होने देता था और इसलिए उसे ठहरने के लिए उचित स्थान मिला। दूसरी यात्रा में भद्र वेश होने के कारण लोग उसकी असली पहचान समझ गए और इसलिए उसे उचित स्थान नहीं मिला।

उस समय के तिब्बत में हथियार का कानून न रहने के कारण यात्रियों को किस प्रकार का भय बना रहता था?

तिब्बत में हथियार रखने का कोई कानून न होने के कारण यात्रियों को डाकुओं और लुटेरों के हमले का भय बना रहता था। वे हमेशा सतर्क रहते थे कि कहीं उनका सामान या जीवन खतरे में न पड़ जाए।

लेखक लड़कोर के मार्ग में अपने साथियों से किस कारण पिछड़ गया?

लेखक लड़कोर के मार्ग में अपने साथियों से इसलिए पिछड़ गया क्योंकि वह रास्ते में रुका, आसपास के दृश्य और वातावरण का आनंद लिया और धीरे-धीरे चलने लगा, जबकि अन्य साथी तेज़ी से आगे बढ़ गए।

लेखक ने शेकर विहार में सुमति को उनके यजमानों के पास जाने से रोका, परंतु दूसरी बार रोकने का प्रयास क्यों नहीं किया?

पहली बार लेखक ने सुमति को यजमानों के पास जाने से इसलिए रोका क्योंकि वह चाहता था कि सुमति उसके साथ रहे और उसकी सहायता करे। दूसरी बार उसने रोकने का प्रयास नहीं किया क्योंकि वह समझ गया कि सुमति का यजमानों के साथ जाना आवश्यक है और उसे उसकी आज़ादी देनी चाहिए।

इस अध्याय में महारत हासिल करें

पूरा ल्हासा की ओर अध्याय — इंटरैक्टिव नोट्स, चित्र, हल किए गए प्रश्न, पोल्स और मुफ़्त अभ्यास क्विज़ — ConceptScroll ऐप में।

ConceptScroll में खोलें →

ConceptScroll के साथ स्मार्ट पढ़ें

रोज़ाना एनसीईआरटी रील्स, एआई डाउट सॉल्विंग और अध्याय क्विज़ — सब मुफ़्त।

मुफ़्त सीखना शुरू करें
#cbse notes#class 9#hindi#ncert

और पढ़ें