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सजीव जगत में विविधता | Class 6 Science Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 5 मिनट का पठन

सजीव जगत में विविधता | Class 6 Science Notes

सजीव जगत में विविधता – this guide gives you a concise, exam-ready overview of सजीव जगत में विविधता from Class 6 Science, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

2.3 विभिन्न परिवेश में पौधे और जंतु

प्रकृति में विभिन्न प्रकार के परिवेश होते हैं जैसे मरुस्थल, पर्वतीय क्षेत्र, महासागर, जंगल आदि। प्रत्येक परिवेश में रहने वाले पौधे और जंतु वहाँ की विशेष परिस्थितियों के अनुसार अनुकूलित होते हैं। उदाहरण के लिए, मरुस्थल में पाए जाने वाले पौधों के तने मोटे और मांसल होते हैं ताकि वे जल को संगृहित कर सकें। पर्वतीय क्षेत्रों में देवदार के वृक्ष शंक्वाकार होते हैं और उनकी शाखाएँ नीचे झुकी होती हैं ताकि हिमपात आसानी से फिसल जाए। मरुस्थल में रहने वाले ऊँटों के पैर लंबे और चौड़े खुर वाले होते हैं जो रेतीली जमीन में चलने में मदद करते हैं। ठंडे मरुस्थल के ऊँटों के पैर छोटे होते हैं और उनके शरीर पर लंबे बाल होते हैं जो ठंड से बचाते हैं। इस प्रकार, पौधे और जंतु अपने आवास के अनुसार विशेष अनुकूलन प्रदर्शित करते हैं। आवास वह स्थान होता है जहाँ जीव रहते हैं और उन्हें जीवन के लिए आवश्यक संसाधन मिलते हैं। आवास की क्षति से जैव विविधता को नुकसान पहुँचता है, इसलिए हमें जैव विविधता के संरक्षण की आवश्यकता है।

📊 Diagram: (क) मछली अपने पखों की सहायता से पानी में तैरती है; (ख) बकरी अपनी टांगों की सहायता से भूमि पर चलती है; चित्र 2.9—मरुस्थल में मोटे और मांसल तने युक्त नागफनी के पौधे; चित्र 2.10—पर्वतीय क्षेत्र में देवदार का वृक्ष; चित्र 2.11—राजस्थान के गरम मरुस्थल में रहने वाला ऊँट; चित्र 2.12—लद्दाख के ठंडे मरुस्थल में रहने वाला ऊँट; चित्र 2.13—बुरांस की भिन्न विशेषताएँ

🧪 Activity: विभिन्न परिवेशों में पाए जाने वाले पौधों और जंतुओं का अवलोकन करना और उनकी विशेषताओं को तालिका में अंकित करना।

🔗 Connection: अगले खंड में हम जैव विविधता के संरक्षण के महत्व और उपायों के बारे में जानेंगे।

Table on page 16 (4×6)

क्रम सं.मरुस्थल मेंपर्वतीय क्षेत्र मेंमहासागर मेंजंगल मेंअन्य
1ऊँटदेवदार का वृक्षमछलीशेर
2अन्य
3

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आपके द्वारा एकत्रित किए गए पौधों की जड़ों में क्या समानताएँ और क्या भिन्नताएँ हैं? चित्र 2.5 (क) और चित्र 2.5 (ख) में प्रदर्शित पौधों की जड़ों में आप क्या भिन्नताएँ देखते हैं? चित्र 2.5 (क) में सरसों के पौधे की जड़ों का ध्यानपूर्वक अवलोकन करें। इस पौधे की जड़ में एक मुख्य जड़ होती है जिससे छोटी-छोटी पाश्व जड़ें निकलती हैं। ऐसी जड़ों को मूसला जड़ कहते हैं। मूसला जड़ वाले एक अन्य पौधे का उदाहरण गुड़हल है जिसे आपने क्रियाकलाप 2.1 में देखा और तालिका 2.1 में अंकित किया है। चित्र 2.5 (ख) में दिखाया गया पौधा एक सामान्य घास का पौधा है। इस पौधे की जड़ें समान माप की पतली जड़ों के गुच्छों के रूप में दिखाई देती हैं जो तने के आधार से निकलती हैं। ऐसी जड़ों को झकड़ा जड़ अथवा रेशेदार जड़ कहते हैं। क्या आपके संग्रह में कोई अन्य घास सम्मिलित है? यदि हाँ, तो इसकी जड़ें किस प्रकार की हैं? क्या किसी पौधे की पत्ती में शिरा-विन्यास के प्रकार और उसकी जड़ के प्रकार के बीच कोई संबंध होता है? हम कैसे इसका पता लगा सकते हैं?

समानताएँ: दोनों प्रकार की जड़ों का उद्देश्य पौधे को मिट्टी में पकड़ना और पानी तथा खनिजों को अवशोषित करना होता है। भिन्नताएँ: चित्र 2.5 (क) में सरसों की जड़ मूसला जड़ होती है जिसमें एक मुख्य जड़ होती है और उससे छोटी-छोटी पाश्व जड़ें निकलती हैं। चित्र 2.5 (ख) में घास की जड़ झकड़ा जड़ होती है जो समान माप की पतली जड़ों के गुच्छे के रूप में होती हैं। यदि आपके संग्रह में अन्य घास है, तो उसकी जड़ें भी झकड़ा प्रकार की होंगी। पत्ती के शिरा-विन्यास और जड़ के प्रकार के बीच संबंध होता है। मूसला जड़ वाले पौध

क्या आपको इन पौधों की पत्तियों के शिरा-विन्यास और जड़ों के प्रकार के मध्य कोई संबंध दिखाई देता है? सदाबहार के पौधे में मूसला जड़ें और पत्तियों में जालिकारूपी शिरा-विन्यास होता है। यह जानने की कोशिश करें कि क्या जालिकारूपी शिरा-विन्यास वाले अन्य पौधों में भी मूसला जड़ें होती हैं? दूसरी ओर, लेमन घास के पौधों में झकड़ा जड़ें और पत्तियों में समांतर शिरा-विन्यास होता है। क्या अन्य पौधे, जिनमें समांतर शिरा-विन्यास होता है, उनमें भी झकड़ा जड़ें होती हैं? सामान्यतः: जिन पौधों में जालिकारूपी शिरा-विन्यास होता है उनमें मूसला जड़ें होती हैं, जबकि जिनमें समांतर शिरा-विन्यास होता है उनमें झकड़ा जड़ें होती हैं।

हाँ, पत्तियों के शिरा-विन्यास और जड़ों के प्रकार के बीच संबंध होता है। जालिकारूपी शिरा-विन्यास वाले पौधों में सामान्यतः मूसला जड़ें होती हैं, जैसे सदाबहार और चना। समांतर शिरा-विन्यास वाले पौधों में झकड़ा जड़ें होती हैं, जैसे लेमन घास और गेहूँ। इस संबंध को विभिन्न पौधों के अवलोकन और तुलनात्मक अध्ययन से समझा जा सकता है।

क्या किसी पौधे के बीज, जड़ के प्रकार और पत्ती के शिरा-विन्यास में परस्पर संबंध है? क्या सभी बीज एक जैसे होते हैं?

हाँ, पौधे के बीज, जड़ के प्रकार और पत्ती के शिरा-विन्यास में परस्पर संबंध होता है। डिबीजपत्री पौधों में दो बीजपत्र होते हैं, जिनकी जड़ मूसला होती है और पत्तियों में जालिकारूपी शिरा-विन्यास होता है। एकबीजपत्री पौधों में एक बीजपत्र होता है, जिनकी जड़ झकड़ा होती है और पत्तियों में समांतर शिरा-विन्यास होता है। सभी बीज एक जैसे नहीं होते, वे डिबीजपत्री और एकबीजपत्री में विभाजित होते हैं।

चने और मक्का के कुछ बीजों को दो या तीन दिन के लिए पानी में भिगोएँ। चने के बीज का आवरण हटा कर बीजों की संरचना को देखें। अब चने और मक्का के बीजों की संरचना का अवलोकन करें। क्या वे समान हैं अथवा भिन्न हैं?

चने के बीज में दो बीजपत्र होते हैं, इसलिए इसे डिबीजपत्री बीज कहते हैं। मक्का के बीज में एक बीजपत्र होता है, इसलिए इसे एकबीजपत्री बीज कहते हैं। चने और मक्का के बीजों की संरचना भिन्न होती है। चने के बीज में बीजपत्र दो भागों में विभाजित होते हैं जबकि मक्का के बीज में एक पतला बीजपत्र होता है।

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