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Chapter 2

🎓 Class 6📖 Jigyasa📖 8 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~12 मिनट
Chapter 1अध्याय 2 / 12Chapter 3

Chapter 2अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 8 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

सजीव जगत में विविधता

अवधारणा

सजीव जगत में विविधता

सजीव जगत में विविधता का अर्थ है हमारे चारों ओर पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के पौधे और जीव-जंतु। प्रकृति में हमें अनेक प्रकार के पौधे, पक्षी, कीट, जानवर, और अन्य जीव मिलते हैं, जिनकी आकृति, रंग, आकार, जीवन शैली और अन्य विशेषताएँ भिन्न होती हैं। इस विविधता को देखकर हमें प्रकृति की सुंदरता और जटिलता का अनुभव होता है। यह विविधता जीवन के संरक्षण और पर्यावरण के संतुलन के लिए अत्यंत आवश्यक है। अध्याय की शुरुआत में एक सुभाषित प्रस्तुत किया गया है जो बड़े वृक्षों की छाया और उनके फल दूसरों के लिए होने की बात करता है, जो अच्छे मनुष्यों के स्वभाव का प्रतीक है। इस अध्याय में हम प्रकृति की सैर के माध्यम से पौधों और जंतुओं की विविधता का अवलोकन करेंगे और समझेंगे कि किस प्रकार हम उन्हें समूहों में बाँट सकते हैं।

  • सजीव जगत में अनेक प्रकार के पौधे और जंतु पाए जाते हैं।
  • प्रत्येक जीव की आकृति, रंग, आकार और जीवन शैली में भिन्नता होती है।
  • विविधता से प्रकृति की सुंदरता और जीवन का संतुलन बनता है।
  • अच्छे मनुष्य भी वृक्षों की तरह दूसरों के लिए फल और छाया प्रदान करते हैं।
  • 📌 सजीव जगत: जीवित प्राणी और पौधे जो हमारे चारों ओर पाए जाते हैं।
  • 📌 विविधता: विभिन्न प्रकार के जीवों और पौधों की भिन्नता।
  • 📌 जैव विविधता: किसी क्षेत्र में पाए जाने वाले जीवों और पौधों की विविधता।

2.1 हमारे आस-पास के पौधों और जंतुओं में विविधता

व्याख्या

2.1 हमारे आस-पास के पौधों और जंतुओं में विविधता

हमारे आस-पास के वातावरण में अनेक प्रकार के पौधे और जंतु पाए जाते हैं, जिनमें विभिन्न प्रकार की विशेषताएँ होती हैं। पौधों में तना, पत्तियाँ, फूल, जड़ें आदि की बनावट और संरचना में भिन्नता होती है। उदाहरण के लिए, घास का तना कोमल और पतला होता है जबकि तुलसी का तना कठोर और पतला होता है। गुड़हल और नीम के तने भी कठोर होते हैं लेकिन नीम का तना मोटा होता है। पत्तियों के आकार, रंग और अभिविन्यास में भी भिन्नता होती है। जंतुओं में भी विविधता होती है जैसे कि कौआ वृक्षों पर रहता है और कीट खाता है, जबकि चींटी मिट्टी में रहती है और पत्तियाँ, बीज और कीट खाती है। जंतुओं की गति के प्रकार भी भिन्न होते हैं जैसे चलना, दौड़ना, उड़ना आदि। इस विविधता को समझने के लिए हम पौधों और जंतुओं की विशेषताओं को तालिकाओं में अंकित करते हैं। **Table on page 3 (6×6)** | क्रम सं. | स्थानीय नाम | तना | पत्तियाँ (पत्तियों की आकृति या अभिविन्यास) | फूल | कोई अन्य अवलोकन एवं विशेषताएँ | | --- | --- | --- | --- | --- | --- | | 1. | सामान्य घास | कोमल और पतला | तने के भिन्न बिंदुओं से एकांतरी रूप से एक पत्ता निकलता है। | | हरी पत्तियाँ | | 2. | तुलसी | कठोर और पतला | पत्तियाँ जोड़ी में एक दूसरे के सम्मुख व्यवस्थित होती हैं। | गुलाबी–बैंगनी | | | 3. | गुड़हल | कठोर | | | | | 4. | नीम | कठोर और मोटा | | | चिकनी सतह वाली पत्तियाँ | | 5. | अन्य | | | | | **Table on page 4 (4×5)** | --- | --- | --- | --- | --- | | कौआ | वृक्ष | कीट | उड़ना और चलना | चोंच में टहनी लिए हुए | | चींटी | मिट्टी एवं बिलों में रहती हैं | पत्तियाँ, बीज और कीट | | छह पाद होते हैं | | गाय | | घास, पत्तियाँ | | | | अन्य | | | | | **Table on page 8 (9×9)** | क्रम सं. | पौधे का नाम | ऊँचाई | तने की प्रकृति | | | शाखाओं का प्रकटन | | पादप समूह का नाम | | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | | | | छोटा/ मध्यम/ऊँचा | हरा/भूरा | कठोर/ कोमल | मोटा/ पतला | भूमि के निकट | तने में ऊँचाई पर | | | 1 | आम | ऊँचा | भूरा | कठोर | मोटा | | हाँ | वृक्ष | | 2 | गुलाब | मध्यम | भूरा | कठोर | पतला | हाँ | | झाड़ी | | 3 | टमाटर | छोटा | हरा | कोमल | पतला | हाँ | | शाक | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | **Table on page 11 (6×4)** | क्रम सं. | पौधे का नाम | पत्तियों के शिरा-विन्यास का प्रकार (जालिकारूपी या समांतर) | जड़ के प्रकार (झकड़ा या मूसला) | | --- | --- | --- | --- | | 1. | लेमन घास | समांतर | झकड़ा (रेशेदार) | | 2. | | | | | 3. | | | | | 4. | | | | | 5. | | | | **Table on page 21 (9×3)** | अनुकूलन | एकबीजपत्री पौधे | विश्लेषण करना | | --- | --- | --- | | उभयचर | समांतर शिरा-विन्यास | तुलना करना | | जलीय | जालिकारूपी शिरा-विन्यास | सृजन करना | | जैव विविधता | पवित्र उपवन | अन्वेषण करना | | बीजपत्र | झाड़ियाँ | समूह बनाना | | द्विबीजपत्री पौधे | मूसला जड़ | अवलोकन करना | | झकड़ा (रेशेदार) जड़ | थलीय | अंकित करना | | आवास | वृक्ष | संबंध ढूँढ़ना | | शाक | शिरा-विन्यास | | **Table on page 24 (3×4)** | समूह | बीज का प्रकार | जड़ का प्रकार | उदाहरण | | --- | --- | --- | --- | | क | द्विबीजपत्री | मूसला जड़ | | | ख | एकबीजपत्री | झकड़ा जड़ | |

  • पौधों के तने, पत्तियाँ, फूल और जड़ें विभिन्न प्रकार की होती हैं।
  • जंतुओं के रहने का स्थान, भोजन और गति के प्रकार भिन्न होते हैं।
  • पौधों और जंतुओं की विशेषताओं को तालिकाओं में अंकित कर उनकी विविधता समझी जा सकती है।
  • प्रकृति में पौधों और जंतुओं के साथ छेड़छाड़ न करें और उनका सम्मान करें।
  • 📌 तना: पौधे का मुख्य भाग जो जमीन से ऊपर होता है।
  • 📌 पत्ती: पौधे का वह भाग जो प्रकाश संश्लेषण करता है।
  • 📌 गति के प्रकार: जंतुओं द्वारा स्थान परिवर्तन के तरीके जैसे चलना, उड़ना।

2.2 पौधों और जंतुओं के समूह कैसे बनाएँ?

अवधारणा

2.2 पौधों और जंतुओं के समूह कैसे बनाएँ?

प्रकृति में पाए जाने वाले पौधे और जंतु इतने विविध हैं कि उन्हें समझना और याद रखना कठिन होता है। इसलिए हम उनकी समानताओं और भिन्नताओं के आधार पर समूह बनाते हैं। समूह बनाने से हमें पौधों और जंतुओं को व्यवस्थित रूप से समझने और अध्ययन करने में सहायता मिलत

अभ्यास प्रश्नChapter 2

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.आपके द्वारा एकत्रित किए गए पौधों की जड़ों में क्या समानताएँ और क्या भिन्नताएँ हैं? चित्र 2.5 (क) और चित्र 2.5 (ख) में प्रदर्शित पौधों की जड़ों में आप क्या भिन्नताएँ देखते हैं? चित्र 2.5 (क) में सरसों के पौधे की जड़ों का ध्यानपूर्वक अवलोकन करें। इस पौधे की जड़ में एक मुख्य जड़ होती है जिससे छोटी-छोटी पाश्व जड़ें निकलती हैं। ऐसी जड़ों को मूसला जड़ कहते हैं। मूसला जड़ वाले एक अन्य पौधे का उदाहरण गुड़हल है जिसे आपने क्रियाकलाप 2.1 में देखा और तालिका 2.1 में अंकित किया है। चित्र 2.5 (ख) में दिखाया गया पौधा एक सामान्य घास का पौधा है। इस पौधे की जड़ें समान माप की पतली जड़ों के गुच्छों के रूप में दिखाई देती हैं जो तने के आधार से निकलती हैं। ऐसी जड़ों को झकड़ा जड़ अथवा रेशेदार जड़ कहते हैं। क्या आपके संग्रह में कोई अन्य घास सम्मिलित है? यदि हाँ, तो इसकी जड़ें किस प्रकार की हैं? क्या किसी पौधे की पत्ती में शिरा-विन्यास के प्रकार और उसकी जड़ के प्रकार के बीच कोई संबंध होता है? हम कैसे इसका पता लगा सकते हैं?

उत्तर:

समानताएँ: दोनों प्रकार की जड़ों का उद्देश्य पौधे को मिट्टी में पकड़ना और पानी तथा खनिजों को अवशोषित करना होता है। भिन्नताएँ: चित्र 2.5 (क) में सरसों की जड़ मूसला जड़ होती है जिसमें एक मुख्य जड़ होती है और उससे छोटी-छोटी पाश्व जड़ें निकलती हैं। चित्र 2.5 (ख) में घास की जड़ झकड़ा जड़ होती है जो समान माप की पतली जड़ों के गुच्छे के रूप में होती हैं। यदि आपके संग्रह में अन्य घास है, तो उसकी जड़ें भी झकड़ा प्रकार की होंगी। पत्ती के शिरा-विन्यास और जड़ के प्रकार के बीच संबंध होता है। मूसला जड़ वाले पौधों की पत्तियों में जालिकारूपी शिरा-विन्यास होता है जबकि झकड़ा जड़ वाले पौधों की पत्तियों में समांतर शिरा-विन्यास होता है। इसका पता लगाने के लिए आप विभिन्न पौधों की जड़ों और पत्तियों का अवलोकन कर तालिका बना सकते हैं।

व्याख्या:

मूसला जड़ में मुख्य जड़ और पाश्व जड़ें होती हैं, झकड़ा जड़ में समान माप की पतली जड़ें होती हैं। पत्ती के शिरा-विन्यास के प्रकार से जड़ के प्रकार का संबंध होता है। इस संबंध को विभिन्न पौधों के अवलोकन से समझा जा सकता है।

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Q2.क्या आपको इन पौधों की पत्तियों के शिरा-विन्यास और जड़ों के प्रकार के मध्य कोई संबंध दिखाई देता है? सदाबहार के पौधे में मूसला जड़ें और पत्तियों में जालिकारूपी शिरा-विन्यास होता है। यह जानने की कोशिश करें कि क्या जालिकारूपी शिरा-विन्यास वाले अन्य पौधों में भी मूसला जड़ें होती हैं? दूसरी ओर, लेमन घास के पौधों में झकड़ा जड़ें और पत्तियों में समांतर शिरा-विन्यास होता है। क्या अन्य पौधे, जिनमें समांतर शिरा-विन्यास होता है, उनमें भी झकड़ा जड़ें होती हैं? सामान्यतः: जिन पौधों में जालिकारूपी शिरा-विन्यास होता है उनमें मूसला जड़ें होती हैं, जबकि जिनमें समांतर शिरा-विन्यास होता है उनमें झकड़ा जड़ें होती हैं।

उत्तर:

हाँ, पत्तियों के शिरा-विन्यास और जड़ों के प्रकार के बीच संबंध होता है। जालिकारूपी शिरा-विन्यास वाले पौधों में सामान्यतः मूसला जड़ें होती हैं, जैसे सदाबहार और चना। समांतर शिरा-विन्यास वाले पौधों में झकड़ा जड़ें होती हैं, जैसे लेमन घास और गेहूँ। इस संबंध को विभिन्न पौधों के अवलोकन और तुलनात्मक अध्ययन से समझा जा सकता है।

व्याख्या:

पत्तियों के शिरा-विन्यास और जड़ों के प्रकार के बीच एक निश्चित संबंध होता है। यह संबंध पौधों के वर्गीकरण में सहायक होता है।

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Q3.क्या किसी पौधे के बीज, जड़ के प्रकार और पत्ती के शिरा-विन्यास में परस्पर संबंध है? क्या सभी बीज एक जैसे होते हैं?

उत्तर:

हाँ, पौधे के बीज, जड़ के प्रकार और पत्ती के शिरा-विन्यास में परस्पर संबंध होता है। डिबीजपत्री पौधों में दो बीजपत्र होते हैं, जिनकी जड़ मूसला होती है और पत्तियों में जालिकारूपी शिरा-विन्यास होता है। एकबीजपत्री पौधों में एक बीजपत्र होता है, जिनकी जड़ झकड़ा होती है और पत्तियों में समांतर शिरा-विन्यास होता है। सभी बीज एक जैसे नहीं होते, वे डिबीजपत्री और एकबीजपत्री में विभाजित होते हैं।

व्याख्या:

बीजपत्रों की संख्या, जड़ के प्रकार और पत्ती के शिरा-विन्यास के बीच संबंध पौधों के वर्गीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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Q4.चने और मक्का के कुछ बीजों को दो या तीन दिन के लिए पानी में भिगोएँ। चने के बीज का आवरण हटा कर बीजों की संरचना को देखें। अब चने और मक्का के बीजों की संरचना का अवलोकन करें। क्या वे समान हैं अथवा भिन्न हैं?

उत्तर:

चने के बीज में दो बीजपत्र होते हैं, इसलिए इसे डिबीजपत्री बीज कहते हैं। मक्का के बीज में एक बीजपत्र होता है, इसलिए इसे एकबीजपत्री बीज कहते हैं। चने और मक्का के बीजों की संरचना भिन्न होती है। चने के बीज में बीजपत्र दो भागों में विभाजित होते हैं जबकि मक्का के बीज में एक पतला बीजपत्र होता है।

व्याख्या:

डिबीजपत्री और एकबीजपत्री बीजों की संरचना में मुख्य अंतर बीजपत्रों की संख्या है, जो पौधों के वर्गीकरण में सहायक होती है।

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Q5.चित्र 2.7 को देखकर यह बताने का प्रयास करें कि जंतुओं द्वारा गति के लिए शरीर के किस अंग का उपयोग किया जाता है? - इन जंतुओं को तालिका 2.5 में सूचीबद्ध करें। - इन जंतुओं में गति करने के तरीकों को देखें और उनके चलने के लिए उपयोग किए जाने वाले शरीर के अंगों के नाम बताएँ। तालिका 2.5 में कुछ उदाहरण दिए गए हैं।

उत्तर:

चित्र 2.7 में दिखाए गए जंतुओं द्वारा गति के लिए विभिन्न शरीर के अंगों का उपयोग किया जाता है जैसे टाँगें, पैर, पंख आदि। उदाहरण के लिए, चींटी टाँगों से चलती है, बकरी टाँगों से चलती और कूदती है, कबूतर पैर और पंखों से चलता और उड़ता है, मक्खी पैर और पंखों से चलती और उड़ती है, मछली पंखों से तैरती है। इन जंतुओं को तालिका 2.5 में सूचीबद्ध कर उनके गति के प्रकार और प्रयुक्त अंगों को अंकित करें।

व्याख्या:

जंतुओं की गति उनके शरीर के अंगों पर निर्भर करती है। चलने, कूदने, उड़ने और तैरने के लिए वे विभिन्न अंगों का उपयोग करते हैं।

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Q6.सजीव जगत में विविधता का क्या अर्थ है?
A.A) केवल पौधों की विभिन्नता
B.B) केवल जंतुओं की विभिन्नता
C.C) हमारे आस-पास पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के पौधे और जंतु
D.D) केवल पक्षियों की आवाज़ों की विभिन्नता

उत्तर:

हमारे आस-पास पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के पौधे और जंतु

व्याख्या:

सजीव जगत में विविधता का अर्थ है हमारे आस-पास पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के पौधे और जंतु, जिनकी आकृति, रंग, आकार, जीवन शैली और अन्य विशेषताएँ भिन्न होती हैं।

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Q7.प्रकृति की सैर के दौरान पौधों और जंतुओं का अवलोकन करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
A.A) पौधों और जंतुओं को छेड़छाड़ करना और फूल-पत्ती तोड़ना
B.B) पौधों और जंतुओं का सम्मान करना और उनसे छेड़छाड़ न करना
C.C) केवल पक्षियों की आवाज़ सुनना
D.D) केवल फूलों का रंग देखना

उत्तर:

पौधों और जंतुओं का सम्मान करना और उनसे छेड़छाड़ न करना

व्याख्या:

प्रकृति की सैर के दौरान हमें सभी जीवित प्राणियों का सम्मान करना चाहिए और बिना अनुमति उनके साथ छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए ताकि उनकी सुरक्षा हो सके।

Easy
Q8.तालिका 2.1 में तुलसी के तने की प्रकृति कैसी है?
A.A) कोमल और मोटा
B.B) कठोर और पतला
C.C) कोमल और पतला
D.D) कठोर और मोटा

उत्तर:

कठोर और पतला

व्याख्या:

तालिका 2.1 के अनुसार तुलसी का तना कठोर और पतला होता है।

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