राग भैरव | Class 11 Sangeet Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 2 मिनट का पठन

राग भैरव – this guide gives you a concise, exam-ready overview of राग भैरव from Class 11 Sangeet, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
राग भैरव
राग भैरव भारतीय शास्त्रीय संगीत का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्राचीन राग है। इसकी उत्पत्ति भैरव थाट से मानी जाती है। इस राग में ऋषभ और धैवत स्वर कोमल होते हैं जबकि शेष स्वर शुद्ध होते हैं। राग भैरव की जाति संपूर्ण है, अर्थात् इसमें सभी सात स्वर प्रयोग होते हैं। इसका वादी स्वर धैवत है और संवादी स्वर ऋषभ। आरोह में ऋषभ का अल्प प्रयोग होता है, और राग की विशेषता रे और ध स्वर पर निर्भर करती है। मध्यम से ऋषभ की मॉड इस राग में बहुत सुंदर दिखाई देती है। राग भैरव का गायन समय प्रातःकाल होता है और इसका भाव गंभीर, स्थिर तथा आध्यात्मिक होता है। कर्नाटक संगीत में इसे 'मायामालवगौल' के नाम से जाना जाता है। कुछ संगीत मनीषियों ने इसे आदि राग भी माना है। इस राग की प्रस्तुति में धीमी गति और स्थिरता का विशेष ध्यान रखा जाता है।
📊 Diagram: Figure 11154CH06
🧪 Activity: राग भैरव के आरोह और अवरोह के स्वर क्रम का अभ्यास करें और रे व ध स्वर की मधुरता पर ध्यान दें।
🔗 Connection: इस राग के बाद, राग भैरव की विभिन्न बंदिशों और तालों के अभ्यास पर चर्चा की जाएगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. राग भैरव का परिचय दीजिए।
राग भैरव भारतीय शास्त्रीय संगीत का एक प्रमुख और प्राचीन राग है, जो भैरव थाट से उत्पन्न होता है। इसे सुबह के समय, विशेष रूप से सूर्योदय के आस-पास, प्रस्तुत किया जाता है। राग भैरव का स्वरूप गंभीर, स्थिर और आध्यात्मिक होता है।
2. राग भैरव की स्वर संरचना लिखिए।
राग भैरव की स्वर संरचना में सात स्वरों का प्रयोग होता है: सा, रे (शुद्ध), ग, म, प, ध (शुद्ध), नि। इस राग में आरोह और अवरोह दोनों में ही सभी स्वर शुद्ध होते हैं।
3. राग भैरव के विशिष्ट स्वर कौन-से हैं और उनकी भूमिका क्या है?
राग भैरव के विशिष्ट स्वर रे (शुद्ध) और ध (शुद्ध) हैं। इन स्वरों की भूमिका राग के भाव को गंभीरता और स्थिरता प्रदान करने में होती है। रे और ध स्वर की मधुरता और गहराई से राग का स्वरूप और अधिक गंभीर बनता है।
4. राग भैरव का भाव और प्रस्तुति समझाइए।
राग भैरव का भाव अत्यंत गंभीर, स्थिर और आध्यात्मिक होता है। इसे सुनने से मन में शांति, भक्ति और गंभीरता का अनुभव होता है। इस राग की प्रस्तुति में धीमी गति और स्थिरता का विशेष ध्यान रखा जाता है ताकि राग का भाव सही रूप में प्रकट हो सके।
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