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नागरिकता | Class 11 Political Science Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन

नागरिकता | Class 11 Political Science Notes

नागरिकता – this guide gives you a concise, exam-ready overview of नागरिकता from Class 11 Political Science, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

6.3 समान अधिकार

समान अधिकार का अर्थ है कि सभी नागरिकों को, चाहे वे अमीर हों या गरीब, कुछ बुनियादी अधिकार और न्यूनतम जीवन स्तर की गारंटी दी जानी चाहिए। इस संदर्भ में शहरी गरीबों की समस्या प्रमुख है। भारत के शहरों में झोपड़पट्टियों और अवैध बस्तियों में रहने वाले लाखों लोग हैं जो कम मजदूरी पर काम करते हैं, लेकिन उन्हें अक्सर समाज में अवांछनीय माना जाता है। इनके रहने की स्थिति खराब होती है, जैसे कि जलापूर्ति, सफाई और शौचालय की कमी।

झोपड़पट्टियों के निवासी अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं, जैसे फेरीवाले, घरेलू नौकर, मिस्त्री आदि। सरकार और स्वयंसेवी संस्थाएं उनकी स्थिति सुधारने के लिए जागरूकता बढ़ा रही हैं। उदाहरण के लिए, 2004 में फुटपाथी दुकानदारों के लिए राष्ट्रीय नीति बनाई गई ताकि उन्हें सरकारी नियमों के तहत संरक्षण मिले।

झोपड़पट्टियों के निवासियों को वोट देने में भी कठिनाई होती है क्योंकि मतदाता सूची में स्थायी पते की आवश्यकता होती है। इसके अलावा आदिवासी और वनवासी भी अपनी आजीविका और जीवनशैली के संकट से जूझ रहे हैं। प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव और खनन, पर्यटन उद्योग उनके लिए खतरा हैं।

टी.एच. मार्शल ने नागरिकता को 'किसी समुदाय के पूर्ण सदस्यों को प्रदत्त प्रतिष्ठा' के रूप में परिभाषित किया, जिसमें समानता की भावना निहित है। उन्होंने नागरिकता के तीन अधिकार बताए - नागरिक, राजनीतिक और सामाजिक अधिकार। ये अधिकार व्यक्ति को जीवन, आजादी, शिक्षा और रोजगार की सुरक्षा देते हैं।

1985 में सर्वोच्च न्यायालय ने झोपड़पट्टियों में रहने वालों के अधिकारों को संविधान की धारा-21 के तहत जीने के अधिकार में शामिल किया। यदि उन्हें हटाना हो तो वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराना आवश्यक है। इस प्रकार समान नागरिकता का अर्थ केवल कानूनी समानता नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक समानता भी है।

📊 Diagram: नागरिकता महज एक कानूनी अवधारणा नहीं है। इसका समानता और अधिकारों के व्यापक उद्देश्यों से भी घनिष्ठ संबंध है। इस संबंध का सर्वसम्मत सूत्रीकरण अंग्रेज समाजशास्त्री टी.एच.मार्शल (1893-1981) ने किया है। अपनी पुस्तक ‘नागरिकता और सामाजिक वर्ग’ (1950) में मार्शल ने नागरिकता को ‘किसी समुदाय के पूर्ण सदस्यों को प्रदत्त प्रतिष्ठा’ के रूप में परिभाषित किया है। इस प्रतिष्ठा को ग्रहण करने वाले सभी लोग प्रतिष्ठा में अंतर्भूत अधिकारों और कर्तव्यों के मामले में बराबर होते हैं।

🧪 Activity: अपने घर, विद्यालय या आसपास कार्यरत तीन कामगार परिवारों का सर्वेक्षण करें और उनकी जीवन स्थिति का अध्ययन करें।

🔗 Connection: अगले खंड में नागरिक और राष्ट्र के बीच संबंध और राष्ट्रीय पहचान की अवधारणा पर चर्चा होगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रपति का महाभियोग ............ में शुरू किया जा सकता है।

संसद के किसी भी सदन में

निम्नलिखित में से किसमें राष्ट्रीय आपातकाल के प्रावधान का उल्लेख है?

अनुच्छेद 352

निम्नलिखित में से कौन सा अनुच्छेद प्रधानमंत्री और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति से संबंधित है?

अनुच्छेद 75

निम्नलिखित में से कौन मुख्य न्यायाधीश और उच्चतम न्यायालय के अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति करता है?

राष्ट्रपति

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