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धर्मनिरपेक्षता | Class 11 Political Science Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 5 मिनट का पठन

धर्मनिरपेक्षता | Class 11 Political Science Notes

धर्मनिरपेक्षता – this guide gives you a concise, exam-ready overview of धर्मनिरपेक्षता from Class 11 Political Science, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

धर्मनिरपेक्षता क्या है?

धर्मनिरपेक्षता का अर्थ है राज्य का किसी एक धर्म को मान्यता न देना और सभी धर्मों के प्रति समान दृष्टिकोण रखना। यह सिद्धांत यह सुनिश्चित करता है कि राज्य और धर्म के बीच स्पष्ट विभाजन हो, जिससे किसी भी धार्मिक समुदाय के प्रति भेदभाव न हो। इतिहास में देखा गया है कि विभिन्न देशों में धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव और उत्पीड़न के उदाहरण मौजूद हैं, जैसे इजरायल में गैर-यहूदी अल्पसंख्यकों की स्थिति, पाकिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों की दुर्दशा। भारत में भी धार्मिक आधार पर हिंसा और भेदभाव के कई उदाहरण मिलते हैं, जैसे 1984 के सिख विरोधी दंगे, कश्मीरी पंडितों का पलायन, और 2002 के गुजरात दंगे। ये सभी उदाहरण अंतर-धार्मिक वर्चस्व और धार्मिक उत्पीड़न के रूप हैं।

धर्मनिरपेक्षता न केवल अंतर-धार्मिक वर्चस्व का विरोध करती है, बल्कि धर्म के अंदर छिपे वर्चस्व, जैसे जाति, लिंग आदि के आधार पर भेदभाव का भी विरोध करती है। धर्मनिरपेक्षता का उद्देश्य एक ऐसा समाज बनाना है जो धार्मिक वर्चस्व से मुक्त हो, जहाँ सभी धर्मों के प्रति समानता और स्वतंत्रता हो। यह धर्मों के अंदर आजादी और समानता को बढ़ावा देती है। इस प्रकार धर्मनिरपेक्षता एक व्यापक सामाजिक और राजनीतिक सिद्धांत है जो धार्मिक समानता, स्वतंत्रता और न्याय की गारंटी देता है।

🔗 Connection: यह अनुभाग धर्मनिरपेक्षता की मूल अवधारणा को समझाता है, जो अगले अनुभाग में धर्मनिरपेक्ष राज्य की भूमिका और आवश्यकताओं की चर्चा के लिए आधार प्रदान करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

निम्न में से कौन-सी बातें धर्मनिरपेक्षता के विचार से संगत हैं? कारण सहित बताइये। (क) किसी धार्मिक समूह पर दूसरे धार्मिक समूह का वर्चस्व न होना। (ख) किसी धर्म को राज्य के धर्म के रूप में मान्यता देना। (ग) सभी धर्मों को राज्य का समान आश्रय होना। (घ) विद्यालयों में अनिवार्य प्रार्थना होना। (ड.) किसी अल्पसंख्यक समुदाय को अपने पृथक शैक्षिक संस्थान बनाने की अनुमति होना। (च) सरकार द्वारा धार्मिक संस्थाओं की प्रबंधन समितियों की नियुक्ति करना। (छ) किसी मंदिर में दलितों के प्रवेश के निषेध को रोकने के लिए सरकार का हस्तक्षेप।

धर्मनिरपेक्षता का अर्थ है राज्य का किसी एक धर्म को मान्यता न देना और सभी धर्मों के प्रति समान दृष्टिकोण रखना।

(क) संगत है क्योंकि धर्मनिरपेक्षता में किसी एक धार्मिक समूह का दूसरे पर वर्चस्व नहीं होता। (ख) असंगत है क्योंकि धर्मनिरपेक्षता में किसी धर्म को राज्य का धर्म नहीं माना जाता। (ग) संगत है क्योंकि सभी धर्मों को समान आश्रय मिलता है। (घ) असंगत है क्योंकि अनिवार्य प्रार्थना से धर्मनिरपेक्षता का उल्लंघन होता है। (ड) संगत है क्योंकि अल्पसंख्यक समुदायों को अपनी संस्थाएँ बनाने की अनुमति धर्मनिरपे

धर्मनिरपेक्षता के पश्चिमी और भारतीय मॉडल की कुछ विशेषताओं का आपस में घालमेल हो गया है। उन्हें अलग करें और एक नई सूची बनाएँ। | पश्चिमी धर्मनिरपेक्षता | भारतीय धर्मनिरपेक्षता | | --- | --- | | धर्म और राज्य का एक दूसरे के मामले में हस्तक्षेप न करने की अटल नीति | राज्य द्वारा समर्थित धार्मिक सुधारों की अनुमति | | विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच समानता एक मुख्य सरोकार होना | एक धर्म के भिन्न पंथों के बीच समानता पर जोर देना | | अल्पसंख्यक अधिकारों पर ध्यान देना। | समुदाय आधारित अधिकारों पर कम ध्यान देना | | व्यक्ति और उसके अधिकारों को केंद्रीय महत्व दिया जाना | व्यक्ति और धार्मिक समुदायों दोनों के अधिकारों का संरक्षण |

पश्चिमी धर्मनिरपेक्षता की विशेषताएँ:

  • धर्म और राज्य का एक-दूसरे के मामलों में हस्तक्षेप न करना।
  • विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच समानता पर जोर।
  • अल्पसंख्यक अधिकारों पर विशेष ध्यान।
  • व्यक्ति और उसके अधिकारों को केंद्रीय महत्व देना।

भारतीय धर्मनिरपेक्षता की विशेषताएँ:

  • राज्य द्वारा धार्मिक सुधारों का समर्थन।
  • एक धर्म के भिन्न पंथों के बीच समानता पर जोर।
  • समुदाय आधारित अधिकारों पर कम ध्यान।
  • व्यक्ति और धार्मिक समुदायों दोनों के अधिकारों का संरक्षण।

इस प्रकार, पश्चिमी मॉडल अधिक व्यक्तिगत अ

धर्म निरपेक्षता से आप क्या समझते हैं? क्या इसकी बराबरी धार्मिक सहनशीलता से की जा सकती है।

धर्मनिरपेक्षता का अर्थ है राज्य का किसी धर्म को विशेष स्थान न देना और सभी धर्मों के प्रति समान दृष्टिकोण रखना। यह एक राजनीतिक और सामाजिक सिद्धांत है जो धर्म और राज्य के बीच स्पष्ट दूरी बनाए रखता है।

धार्मिक सहनशीलता का अर्थ है विभिन्न धर्मों और उनकी मान्यताओं के प्रति सहिष्णुता और सम्मान। यह एक नैतिक और सामाजिक गुण है जो लोगों को एक-दूसरे के धर्मों का सम्मान करने के लिए प्रेरित करता है।

धर्मनिरपेक्षता और धार्मिक सहनशीलता दोनों संबंधित हैं लेकिन समान नहीं हैं। धर्मनिरपेक्षता एक संस्थागत और कानू

क्या आप नीचे दिए गए कथनों से सहमत हैं? उनके समर्थन या विरोध के कारण भी दीजिए। (क) धर्मनिरपेक्षता हमें धार्मिक पहचान बनाए रखने की अनुमति नहीं देती है। (ख) धर्मनिरपेक्षता किसी धार्मिक समुदाय के अंदर या विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच असमानता के खिलाफ है। (ग) धर्मनिरपेक्षता के विचार का जन्म पश्चिमी और ईसाई समाज में हुआ है। यह भारत के लिए उपयुक्त नहीं है।

(क) असहमत। धर्मनिरपेक्षता धार्मिक पहचान बनाए रखने की अनुमति देती है, बस यह सुनिश्चित करती है कि राज्य किसी धर्म को विशेष स्थान न दे।

(ख) सहमत। धर्मनिरपेक्षता धार्मिक समुदायों के बीच समानता और असमानता के खिलाफ है।

(ग) असहमत। धर्मनिरपेक्षता का विचार पश्चिमी और ईसाई समाज में विकसित हुआ लेकिन भारत ने इसे अपनी सांस्कृतिक और सामाजिक परिस्थितियों के अनुसार अपनाया है, इसलिए यह भारत के लिए उपयुक्त है।

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