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मानव विकास | Class 11 Psychology Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 4 मिनट का पठन

मानव विकास | Class 11 Psychology Notes

मानव विकास – this guide gives you a concise, exam-ready overview of मानव विकास from Class 11 Psychology, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

बाल्यावस्था

बाल्यावस्था शैशवावस्था के बाद की अवधि है जिसमें शारीरिक संवृद्धि धीमी होती है लेकिन संज्ञानात्मक, सामाजिक और भावनात्मक विकास तेज होता है। इस अवधि में बच्चे की ऊँचाई और वजन बढ़ता है, वे चलना, दौड़ना, कूदना सीखते हैं और सामाजिक रूप से परिवार, विद्यालय और समसमूह के साथ अधिक जुड़ते हैं। शारीरिक विकास शिर:पदाभिमुख (सिर से पैर की ओर) और समीप-दूराभिमुख (धड़ से अंगों की ओर) प्रवृत्तियों का अनुसरण करता है। स्थूल पेशीय कौशलों में भुजाओं और पैरों का उपयोग करना और सूक्ष्म पेशीय कौशलों में उँगलियों की निपुणता शामिल है। संज्ञानात्मक विकास में पियाजे की पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था प्रमुख है, जिसमें प्रतीकात्मक विचार विकसित होते हैं, वस्तु स्थायित्व की समझ बढ़ती है, लेकिन अहंकेंद्रवाद और केंद्रीकरण जैसी सीमाएँ होती हैं। सामाजिक-संवेगात्मक विकास में बच्चे में स्व की पहचान विकसित होती है, जो प्रारंभ में शारीरिक विशेषताओं तक सीमित होती है और बाद में आंतरिक गुणों और सामाजिक समूहों तक विस्तृत होती है। नैतिक विकास में बच्चे सही और गलत के बीच अंतर करना सीखते हैं, जो कोहलबर्ग के नैतिक विकास सिद्धांत के अनुसार विभिन्न चरणों से गुजरता है।

📊 Diagram: तालिका 3.2 पियाजे द्वारा प्रतिपादित संज्ञानात्मक विकास की अवस्थाएँ; तालिका 3.3 स्थूल एवं सूक्ष्म पेशीय कौशलों में प्रमुख उपलब्धियाँ

🧪 Activity: क्रियाकलाप 3.2: जल के समान मात्रा वाले गिलासों के प्रयोग से बच्चों की संज्ञानात्मक प्रतिक्रिया का अध्ययन।

🔗 Connection: बाल्यावस्था के बाद किशोरावस्था की चुनौतियों और विकास की चर्चा की जाएगी।

Table on page 9 (5×3)

अवस्थासन्निकट आयुविशेषताएँ
संवेदी-प्रेरक0-2 वर्षशिशु संवेदी अनुभवों का शारीरिक क्रियाओं के साथ समन्वय करते हुए संसार का अन्वेषण करता है।
पूर्व-संक्रियात्मक2-7 वर्षप्रतीकात्मक विचार विकसित होते हैं; वस्तु स्थायित्व उत्पन्न होता है; बच्चा वस्तु के विभिन्न भौतिक गुणों को समन्वित नहीं कर पाता है।
मूर्त सक्रियात्मक7-11 वर्षबच्चा मूर्त घटनाओं के संबंध में युक्तिसंगत तर्कना कर सकता है और वस्तुओं को विभिन्न समूहों में वर्गीकृत कर सकता है। वस्तुओं की मानस प्रतिमाओं पर प्रतिवर्तनीय मानसिक सक्रियाएँ करने में सक्षम होता है।
औपचारिक सक्रियात्मक11-15 वर्षकिशोर तर्क का अनुप्रयोग अधिक अमूर्त रूप से कर सकते हैं; परिकल्पनात्मक चिंतन विकसित होते हैं।

Table on page 11 (5×3)

तालिका 3.3 स्थूल एवं सूक्ष्म पेशीय कौशलों में प्रमुख उपलब्धियाँ
आयु वर्ष मेंस्थूल पेशीय कौशलसूक्ष्म पेशीय कौशल
3 वर्षउछलना, कूदना, दौड़नाब्लॉक बनाना, तर्जनी एवं अँगूठे की सहायता से वस्तुओं को उठाना
4 वर्षप्रत्येक पादान पर एक-एक पैर रखते हुए सीढ़ियों पर चढ़ना एवं उतरनाचित्रात्मक पहेलियों को भली-भाँति जोड़ना
5 वर्षतेज दौड़ना, दौड़ प्रतिस्पर्धा का आनंद लेनाहाथ, भुजा एवं शरीर ये सभी, आँख की गति के साथ समन्वित होते हैं

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मानव विकास क्या है? इसे परिभाषित करें और एक उदाहरण दें।

मानव विकास जीवनभर होने वाली गतिशील, क्रमबद्ध और पूर्वकथनीय परिवर्तनों की प्रक्रिया है, जिसमें जैविक, संज्ञानात्मक और समाज-संवेगात्मक प्रक्रियाएँ शामिल होती हैं। उदाहरण के लिए, एक बच्चा जन्म के बाद चलना और बोलना सीखता है।

विकास की प्रक्रिया में जैविक, संज्ञानात्मक और समाज-संवेगात्मक प्रक्रियाओं की भूमिका को समझाइए।

जैविक प्रक्रियाएँ आनुवंशिक गुणों पर आधारित होती हैं, जैसे लंबाई और मस्तिष्क विकास। संज्ञानात्मक प्रक्रियाएँ सोचने, सीखने और समस्या समाधान से संबंधित हैं। समाज-संवेगात्मक प्रक्रियाएँ व्यक्ति के सामाजिक संबंधों और भावनाओं के विकास से जुड़ी हैं। उदाहरण के लिए, एक बच्चे का अपनी माँ से लगाव समाज-संवेगात्मक विकास को दर्शाता है।

विकास के जीवनपर्यंत परिप्रेक्ष्य के अनुसार विकास की कौन-कौन सी मान्यताएँ हैं? दो उदाहरण सहित समझाइए।

a) विकास जीवनभर चलता रहता है: विकास गर्भाधान से लेकर वृद्धावस्था तक होता है, जिसमें प्राप्तियाँ और हानियाँ दोनों शामिल होती हैं। उदाहरण के लिए, वृद्धावस्था में शारीरिक ह्रास होता है लेकिन अनुभव बढ़ता है। b) विकास बहु-दिशात्मक है: कुछ आयामों में वृद्धि होती है जबकि अन्य में कमी आ सकती है। उदाहरण के लिए, उम्र बढ़ने पर बुद्धिमत्ता बढ़ सकती है लेकिन शारीरिक गति कम हो सकती है। c) विकास लचीला होता है: व्यक्ति के अनुभवों और परिवेश के अनुसार विकास में संशोधन संभव है। उदाहरण के लिए, शिक्षा और अभ्यास से क

निम्नलिखित में से कौन सा विकास का जीवनपर्यंत परिप्रेक्ष्य की मान्यताओं में शामिल नहीं है?

विकास केवल बचपन तक सीमित होता है

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