मानव विकास | Class 11 Psychology Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 4 मिनट का पठन

मानव विकास – this guide gives you a concise, exam-ready overview of मानव विकास from Class 11 Psychology, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
शैशवावस्था
शैशवावस्था जन्म के पहले और बाद की वह अवधि है जिसमें मस्तिष्क तीव्र गति से विकसित होता है। नवजात शिशु में अधिकांश मस्तिष्कीय कोशिकाएँ जन्म के समय मौजूद होती हैं, और तंत्रिकीय संधियाँ तेजी से बनती हैं। नवजात शिशु जीवन के लिए आवश्यक क्रियाएँ जैसे साँस लेना, चूसना, निगलना आदि कर सकता है। जन्म के कुछ घंटों में वे माँ की आवाज़ पहचान सकते हैं और सामान्य हावभावों का अनुकरण कर सकते हैं। शैशु में प्रतिवर्त (reflexes) होते हैं, जो स्वाभाविक और अनैच्छिक प्रतिक्रियाएँ होती हैं, जैसे रूटिंग, मोरो, पकड़ना और बेबिन्स्की। ये प्रतिवर्त कुछ महीनों में विलुप्त हो जाते हैं। शारीरिक विकास शिर:पदाभिमुख (सिर से पैर की ओर) और समीप-दूराभिमुख (धड़ से अंगों की ओर) होता है। संवेदी योग्यताओं में दृष्टि, श्रवण, स्पर्श, स्वाद और गंध शामिल हैं। नवजात शिशु वस्तु स्थायित्व की अवधारणा से वंचित होते हैं, अर्थात वे छिपी हुई वस्तुओं को नहीं खोजते। पियाजे के अनुसार, शैशवावस्था संवेदी-प्रेरक अवस्था है जिसमें बच्चे संवेदी अनुभवों और शारीरिक क्रियाओं के माध्यम से संसार का अन्वेषण करते हैं। सामाजिक-संवेगात्मक विकास में शिशु परिचित चेहरों को वरीयता देता है और आसक्ति (attachment) विकसित करता है। एरिक एरिक्सन के अनुसार, जीवन का प्रथम वर्ष विश्वास या अविश्वास के विकास का समय होता है।
📊 Diagram: तालिका 3.1 नवजात शिशुओं में उपस्थित कुछ मुख्य प्रतिवर्त
🔗 Connection: शैशवावस्था के बाद बाल्यावस्था की अवस्था का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा।
Table on page 8 (5×3)
| प्रतिवर्त | विवरण | विकासात्मक क्रम |
|---|---|---|
| रूटिंग | गाल को छूने पर सिर को घुमाना एवं मुख खोलना। | 3 से 6 माह में विलुप्त हो जाते हैं। |
| मोरो | यदि तीव्र शोर होता है तो बच्चा अपनी कमर को मोड़ते हुए भुजा को आगे की ओर फेंकता है और फिर अपनी भुजाओं को एक साथ लाता है जैसे कुछ पकड़ रहा हो। | 6 से 7 माह में विलुप्त हो जाते हैं (यद्यपि तीव्र शोर के प्रति अनुक्रिया स्थायी होती है)। |
| पकड़ना | बच्चे की हथेली को यदि उँगली अथवा किसी अन्य वस्तु से दबाया जाता है तो बच्चे की उँगलियाँ उसके इर्द-गिर्द लिपट जाती हैं। | 3 से 4 माह में विलुप्त हो जाते हैं। ऐच्छिक पकड़ से विस्थापित हो जाते हैं। |
| बेबिन्स्की | यदि बच्चे के पैर के तलवे को ठोका जाता है तो पैर की उँगलियाँ ऊपर की ओर जाती हैं और फिर आगे की ओर मुड़ जाती हैं। | 8 से 12 माह में विलुप्त हो जाते हैं। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मानव विकास क्या है? इसे परिभाषित करें और एक उदाहरण दें।
मानव विकास जीवनभर होने वाली गतिशील, क्रमबद्ध और पूर्वकथनीय परिवर्तनों की प्रक्रिया है, जिसमें जैविक, संज्ञानात्मक और समाज-संवेगात्मक प्रक्रियाएँ शामिल होती हैं। उदाहरण के लिए, एक बच्चा जन्म के बाद चलना और बोलना सीखता है।
विकास की प्रक्रिया में जैविक, संज्ञानात्मक और समाज-संवेगात्मक प्रक्रियाओं की भूमिका को समझाइए।
जैविक प्रक्रियाएँ आनुवंशिक गुणों पर आधारित होती हैं, जैसे लंबाई और मस्तिष्क विकास। संज्ञानात्मक प्रक्रियाएँ सोचने, सीखने और समस्या समाधान से संबंधित हैं। समाज-संवेगात्मक प्रक्रियाएँ व्यक्ति के सामाजिक संबंधों और भावनाओं के विकास से जुड़ी हैं। उदाहरण के लिए, एक बच्चे का अपनी माँ से लगाव समाज-संवेगात्मक विकास को दर्शाता है।
विकास के जीवनपर्यंत परिप्रेक्ष्य के अनुसार विकास की कौन-कौन सी मान्यताएँ हैं? दो उदाहरण सहित समझाइए।
a) विकास जीवनभर चलता रहता है: विकास गर्भाधान से लेकर वृद्धावस्था तक होता है, जिसमें प्राप्तियाँ और हानियाँ दोनों शामिल होती हैं। उदाहरण के लिए, वृद्धावस्था में शारीरिक ह्रास होता है लेकिन अनुभव बढ़ता है। b) विकास बहु-दिशात्मक है: कुछ आयामों में वृद्धि होती है जबकि अन्य में कमी आ सकती है। उदाहरण के लिए, उम्र बढ़ने पर बुद्धिमत्ता बढ़ सकती है लेकिन शारीरिक गति कम हो सकती है। c) विकास लचीला होता है: व्यक्ति के अनुभवों और परिवेश के अनुसार विकास में संशोधन संभव है। उदाहरण के लिए, शिक्षा और अभ्यास से क
निम्नलिखित में से कौन सा विकास का जीवनपर्यंत परिप्रेक्ष्य की मान्यताओं में शामिल नहीं है?
विकास केवल बचपन तक सीमित होता है
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