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पोषण, स्वास्थ्य एवं स्वस्थता | Class 11 Home Science Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 5 मिनट का पठन

पोषण, स्वास्थ्य एवं स्वस्थता | Class 11 Home Science Notes

पोषण, स्वास्थ्य एवं स्वस्थता – this guide gives you a concise, exam-ready overview of पोषण, स्वास्थ्य एवं स्वस्थता from Class 11 Home Science, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

9.3 विद्यालय-पूर्व बच्चों (1-6 वर्ष) का पोषण, स्वास्थ्य एवं स्वस्थता

विद्यालय-पूर्व बच्चे शारीरिक, मानसिक और मनोवैज्ञानिक विकास के महत्वपूर्ण चरण में होते हैं। इस उम्र में बच्चे अपनी खाने की आदतों का विकास कर रहे होते हैं और चबाने, निगलने का कौशल सीख रहे होते हैं। इसलिए इस अवधि में पौष्टिक आहार और सही खान-पान की आदतें विकसित करना आवश्यक है। उनकी पोषण आवश्यकताएँ उम्र, कद, वजन, स्वास्थ्य स्थिति और सक्रियता स्तर के अनुसार भिन्न होती हैं। आई.सी.एम.आर. द्वारा विद्यालय-पूर्व बच्चों के लिए ऊर्जा, प्रोटीन, वसा, कैल्सियम, लौह तत्व, विटामिन आदि की अनुशंसित मात्रा निर्धारित की गई है। बच्चों को परिवार के साथ सुखद वातावरण में भोजन करना चाहिए, विविधता होनी चाहिए, भोजन का समय नियमित होना चाहिए, और बच्चों को भोजन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना चाहिए। संतुलित आहार योजना में अनाज, दाल, दूध, फल, सब्जियाँ, चीनी, घी/तेल शामिल होते हैं। अल्पाहार (स्नैक्स) भी बच्चों को आवश्यक कैलोरी और पोषक तत्व प्रदान करते हैं।

📊 Diagram: Table on page 8 (5×3): विद्यालय-पूर्व बच्चों के लिए पोषक तत्वों की अनुशंसित मात्रा; Table on page 9 (10×3): विद्यालय-पूर्व बच्चों के लिए पोषक तत्वों की विस्तृत मात्रा; Table on page 10 (7×4): विद्यालय-पूर्व बच्चों के लिए संतुलित आहार।

🧪 Activity: क्रियाकलाप 2: चार वर्षीय बच्चे के लिए प्रातः 10 बजे से सायं 6 बजे तक संतुलित आहार और अल्पाहार की योजना बनाएं।

🔗 Connection: अगले अनुभाग में विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों के पोषण और प्रतिरक्षण कार्यक्रम पर चर्चा होगी।

Table on page 8 (5×3)

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पोषक तत्ववर्षों में उम्र – 1-3 वर्षवर्षों में उम्र – 4-6 वर्ष
ऊर्जा (किलो कैलोरी)12401690
प्रोटीन (ग्राम)2230
वसा (ग्राम)2525
कैल्सियम (मि. ग्रा.)400400

Table on page 9 (10×3)

लौह तत्व (मि. ग्रा.)1218
विटामिन — रेटिनॉल (माइक्रो ग्रा.)400400
अथवा बीटा केरोटीन (माइक्रो ग्रा.)16001600
थायमिन (मि. ग्रा.)0.60.9
राइबोफ्लेविन (मि. ग्रा.)0.71.0
नियासिन (मि. ग्रा.)811
विटामिन सी (मि. ग्रा.)4040
पाइरिडॉक्सिन (मि. ग्रा.)0.90.9
फॉलिक अम्ल (माइक्रो ग्रा.)3040
विटामिन बी-12 (माइक्रो ग्रा.)0.2-10.2-1

Table on page 10 (7×4)

सारणी 5 – विद्यालय-पूर्व बच्चों के लिए संतुलित आहार (आई.सी.एम.आर. द्वारा अनुशासित)
क्र.सं.खाद्य समूहमात्रा (ग्राम)
1-3 वर्ष4-6 वर्ष
1.अनाज एवं मिलेट (ज्वार-बाजरा आदि)120210
2.दालें3045
3.दूध (मिली)500500

| 4. | फल तथा सब्जियाँ

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. हमें विद्यालय जाने वाले बच्चे के आहार में संतृप्त वसा, अतिरिक्त चीनी तथा नमक की मात्रा को सीमित क्यों करना चाहिए?

विद्यालय जाने वाले बच्चे के आहार में संतृप्त वसा, अतिरिक्त चीनी तथा नमक की मात्रा को सीमित इसलिए करना चाहिए क्योंकि अत्यधिक वसा युक्त भोजन, अधिक नमक, कम रेशा एवं चीनी मिले पेय से बच्चों में मोटापा बढ़ता है जो स्वास्थ्य के लिए खतरा बनता है। यह असक्रिय जीवन-शैली के साथ मिलकर टाइप 2 मधुमेह, उच्च रक्तदाब तथा हृदय रोग जैसी बीमारियों का कारण बन सकता है। इसलिए संतुलित और पौष्टिक आहार देना आवश्यक है ताकि बच्चे स्वस्थ रहें और उनकी शारीरिक तथा मानसिक वृद्धि सही ढंग से हो सके।

2. भोजन की योजना बनाने में बच्चों को शामिल करना स्वस्थ खान-पान में किस प्रकार सहायक होता है?

भोजन की योजना बनाने में बच्चों को शामिल करने से वे स्वस्थ खान-पान के महत्व को समझते हैं और अपनी पसंद के अनुसार पौष्टिक विकल्प चुनने लगते हैं। इससे उनकी रुचि बढ़ती है और वे भोजन को लेकर जागरूक होते हैं। बच्चों को योजना में शामिल करने से वे संतुलित आहार की आदतें विकसित करते हैं, जो उनके शारीरिक विकास और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होती हैं।

3. बचपन में मोटापे में वृद्धि हो रही है। कारण बताइए?

बचपन में मोटापे में वृद्धि के कारण हैं: (i) आहार में अत्यधिक वसा युक्त भोजन, अधिक नमक, कम रेशा तथा चीनी मिले पेय पदार्थों का अधिक सेवन, (ii) असक्रिय जीवन-शैली, जिसमें शारीरिक गतिविधि की कमी होती है, (iii) अधिक समय तक टेलीविजन देखना और खेल-कूद में भाग न लेना, (iv) उच्च सामाजिक-आर्थिक वर्ग के बच्चों में पोषण की असंतुलित आदतें। ये सभी कारण मिलकर बच्चों में अतिरिक्त वसा के जमाव और वजन बढ़ने का कारण बनते हैं।

4. ‘‘मध्याह्न भोजन योजना’’ से किस प्रकार बच्चों के स्वास्थ्य एवं विद्यालय के कार्य निष्पादन में वृद्धि हुई है?

मध्याह्न भोजन योजना के अंतर्गत विद्यालय में निःशुल्क पौष्टिक भोजन प्रदान किया जाता है जिससे बच्चों को पर्याप्त पोषण मिलता है। इससे बच्चों की कुपोषण की समस्या कम हुई है, उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ी है, जिससे वे कम बीमार पड़ते हैं। इसके परिणामस्वरूप बच्चों का ध्यान केंद्रित करने की क्षमता बढ़ी है और विद्यालय में उनका कार्य निष्पादन बेहतर हुआ है। साथ ही विद्यालय में नामांकन बढ़ा है और विद्यालय छोड़ने की दर में कमी आई है। बालिकाओं की संख्या में वृद्धि से शिक्षा में लिंग भेद भी कम हुआ है।

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