वस्त्रों की देखभाल तथा रखरखाव | Class 11 Home Science Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 9 मिनट का पठन
वस्त्रों की देखभाल तथा रखरखाव – this guide gives you a concise, exam-ready overview of वस्त्रों की देखभाल तथा रखरखाव from Class 11 Home Science, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
वस्त्र की देखभाल को प्रभावित करने वाले कारक
कपड़ों की देखभाल कई कारकों पर निर्भर करती है जैसे कपड़े में रेशे का प्रकार, धागे की संरचना, रंग अनुप्रयोग, वस्त्र निर्माण और फिनिशिंग। विभिन्न रेशों की विशेषताएँ उनकी देखभाल की आवश्यकताओं को प्रभावित करती हैं। उदाहरण के लिए, सूती और लिनन मजबूत होते हैं, उच्च तापमान सह सकते हैं, लेकिन अम्लीय पदार्थों से कमजोर हो सकते हैं। ऊन कमजोर होता है, क्षारीय पदार्थों से क्षतिग्रस्त होता है और इसे हल्के हाथों से धोना चाहिए। रेशम गीला होने पर कमजोर होता है और इसे कम तापमान पर धोना चाहिए। रेयान सापेक्षिक रूप से कमजोर होता है और जल्दी सिकुड़ता है। नायलॉन मजबूत होता है, अम्लों से प्रभावित हो सकता है। पोलिएस्टर में लोच अच्छी होती है लेकिन तेल के दाग नहीं निकलते। एक्रेलिक मजबूत और लोचदार होता है लेकिन आग पकड़ने में संवेदनशील होता है। धागे की संरचना और वस्त्र निर्माण भी देखभाल को प्रभावित करते हैं। रंग और फिनिशिंग कपड़ों की देखभाल का एक महत्वपूर्ण पहलू है क्योंकि रंग निकलने से कपड़े खराब हो सकते हैं।
📊 Diagram: Table on page 12 (18×3); Table on page 13 (18×3); Table on page 14 (13×3)
🔗 Connection: वस्त्र की देखभाल के लिए आवश्यक निर्देश देने वाले देखभाल संबंधी लेबलों की जानकारी अगले खंड में दी गई है।
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| सारणी 2 – रेशों की विशेषताएँ जो कपड़ों की देखभाल तथा रखरखाव की प्रभावित करती हैं | ||
|---|---|---|
| रेशा | विशेषताएँ | देखभाल संबंधी आवश्यकताएँ |
| सूत तथा लिनन | मजबूत रेशे, गीले होने पर अधिक मजबूत, कठोर घर्षण का सामना कर सकते हैं। | |
| क्षार प्रतिरोधी, सशक्त डिटर्जेंटों का प्रयोग कर आसानी से धोए जा सकते हैं। | ||
| उच्च तापमान को सह सकते हैं, आवश्यकता पड़ने पर उबाले भी जा सकते हैं। | ||
| जैव विलायक तथा विरंजक प्रतिरोधी, अम्लीय पदार्थ वस्त्र को कमजोर बना सकते हैं। | प्रयुक्त किए गए अम्लीय अभिकर्मक खंगाल कर प्रभावहीन किए जाने चाहिए। | |
| शीघ्र सलवटें पड़ जाती हैं, सलवटें हटाने के लिए इन पर उचित ढंग से इस्तरी करना पड़ता है। | इन पर इस्तरी करते समय ये नम होने चाहिए अन्यथा इन पर जलने के दाग पड़ सकते हैं। | |
| इन पर फंफूदी तथा फंगस लग सकती है। | पूर्णतया सूखे होने चाहिए तथा कम नमी वाले वातावरण में इनका भंडारण किया जाना चाहिए। | |
| यदि इनमें अधिक स्टार्च लगाई जाए तो इनमें सिलवर फिश नामक कीड़ा लग सकता है। | यदि इन्हें लंबी अवधि के लिए संभाल कर रखा जाना है तो इन्हें स्टार्च रहित किया जाना आवश्यक है। | |
| ऊन | कमजोर रेशे, तथा गीला होने पर और भी कमजोर हो जाते हैं। | धुलाई के दौरान हल्के हाथों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। |
| क्षारीय पदार्थों से जल्दी क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। | प्रबल डिटर्जेंटों या साबुनों का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। | |
| ड्राइक्लीनिंग विलायकों तथा दाग-धब्बे हटाने वाले अभिकर्मकों का कोई हानिकारक प्रभाव नहीं पड़ता। | विरंजक का प्रयोग सावधानीपूर्वक किया जाना आवश्यक है। | |
| जब ऊनी वस्त्रों पर यांत्रिक प्रक्रिया का प्रयोग किया जाता है, जैसे-धुलाई के दौरान हिलाते-डुलाते हैं तो उनमें सिकुड़ने की प्रवृत्ति होती है। | कम-से-कम हिलाते हुए ठंडे पानी में धोने की सलाह दी जाती है। | |
| ऊन से बुनी गई वस्तुओं का आकार धुलाई के दौरान फेल कर बिगड़ सकता है। | धुलाई से पहले वस्त्र की रूपरेखा बनाई जाती है तथा धुलाई के बाद वस्त्र को उसी रूपरेखा पर फैला दिया जाता है। | |
| इसमें अच्छी लोच क्षमता है तथा इसमें सलवटें नहीं पड़ती, इस्तरी करना आवश्यक नहीं। | कपड़े पर सीधी इस्तरी नहीं की जानी चाहिए, यदि आवश्यक हो तो स्टीम प्रेस कराएँ। | |
| ऊनी प्रोटीन के कारण कीटों द्वारा क्षति के प्रति विशेष रूप प्रवण हैं जैसे कपड़े के कीड़े तथा कारपेट बीटल। | भंडारण के दौरान संघटक रसायनों का आवर्ती छिड़काव करके क्षति से बचा जा सकता है। कीड़ा लगने से रोकथाम के लिए नेफथिलीन की गोलियाँ प्रभावपूर्ण होती हैं। | |
| रेशम | मजबूत रेशा, किंतु गीले होने के दौरान यह कमजोर हो जाते हैं। रेशम की धुलाई में सावधानी बरतना आवश्यक है। | धुलाई के समय केवल हल्की रगड़ का प्रयोग करें। |
| प्रबल क्षारों से नुकसान पहुँचता है, अंतिम धुलाई में जैव अम्लों का प्रयोग किया जाता है। | धुलाई के लिए हल्के डिटर्जेंट का प्रयोग किया जाना चाहिए। |
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| ड्राइ-क्लीनिंग विलायक तथा तत्क्षण धब्बा हटाने वाले अभिकर्मक रेशम को क्षति नहीं पहुँचाते | विरंजक का प्रयोग सावधानीपूर्वक किया जाना चाहिए । | |
|---|---|---|
| धोने पर फैलता या सिकुड़ता नहीं, इसमें सिकुड़न से बचाव की क्षमता मध्यम है जिसके कारण प्रयोग के दौरान इसमें सिलवटें पड़ जाती हैं। | इसे इस्तरी किया जाना आवश्यक है। | |
| कपड़े पर पानी का छिड़काव करे बगैर उच्च तापमान पर इस्तरी करने से जल्दी जल जाता है। | यह पूर्णतया नम होना चाहिए तथा इस पर निम्न तापमान पर इस्तरी की जानी चाहिए। | |
| पसीने से भी कपड़े को हानि पहुँचती है। | रखने से पहले ड्राइक्लीन किया जाना तथा अच्छी प्रकार हवा लगवाना आवश्यक है। | |
| अधिक समय तक धूप में रखने से रेशम कमजोर हो जाता है। | धूप में नहीं सुखाया जाना चाहिए। | |
| फंफूदी तथा बैक्टीरिया के आक्रमण का प्रतिरोध कर लेता है किंतु कारपेट बीटल इसे खा लेते हैं। | यदि गंदे हों तो अंदर नहीं रखना चाहिए। | |
| रेयान | अधिकांश रेयान सापेक्षिक रूप से कमजोर होते हैं तथा उनकी मजबूती गीला होने पर और भी कम हो जाती है। | धुलाई के दौरान सावधानी बरतना अपेक्षित है। |
| रासायनिक रूप से सूत के समान किंतु प्रबल क्षार इसे हानि पहुँचा सकते हैं। | हल्के साबुन तथा डिटर्जेंट का प्रयोग करना सुरक्षित है। | |
| यह ड्राइ-क्लीनिंग विलायकों तथा दाग-धब्बे हटाने वाले अभिकर्मकों को सह सकते हैं। | ||
| धोने पर रेयान सिकुड़ जाते हैं। | धुलाई के दौरान सावधानी बरती जानी अपेक्षित है। | |
| रेयान से बने वस्त्रों में सलवटें शीघ्र पड़ जाती हैं तथा वे सहजता से फैल भी जाते हैं क्योंकि उनकी लोच एवं लोच के पुन: स्थिति में आने की क्षमता कम होती है। | इसे इस्तरी करना सरल है। | |
| फंफूदी तथा सिल्वर फिश, रेयान को हानि पहुँचाते हैं, इसे सड़ाने-गलाने वाले जीवाणु भी नुकसान पहुँचा सकते हैं। | इन्हें पूर्णतया स्वच्छ तथा शुष्क स्थिति में भंडारित किया जाना चाहिए। | |
| नायलॉन | काफ़ी मजबूत, गीला होने पर भी काफी मजबूत रहता है। | इसके लिए किसी विशेष देखभाल की आवश्यकता नहीं है। |
| क्षार इसे प्रभावित नहीं करते किंतु अम्लों से रेशे नष्ट हो सकते हैं। | यदि अम्लीय अभिकर्मक प्रयुक्त किए जाते हैं तो इन्हें अच्छी प्रकार खंगाला जाना चाहिए। | |
| ड्राइ-क्लीनिंग विलायक, दाग धब्बे हटाने वाले अभिकर्मक, डिटर्जेंट तथा विरंजक का प्रयोग करना सुरक्षित होता है। | ||
| ये अन्य गंदी वस्तुओं की गंदगी को ग्रहण कर सकते हैं। | इन्हें अलग से धोया जाना चाहिए | |
| ये जल को अवशोषित नहीं करते और इसलिए जल्दी सूख जाते हैं। | ||
| धूप नायलॉन को हानि पहुँचाती है तथा ज्यादा समय तक धूप में रखने से इनकी मजबूती में स्पष्ट रूप से कमी आ जाती है। | खिड़की के पर्दों के लिए यह उपयुक्त नहीं है। |
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| नायलॉन अधिकांश कीटों तथा सूक्ष्म जीवाणुओं के आक्रमण का अत्यधिक प्रतिरोधी हैं। | ||
|---|---|---|
| पोलिएस्टर | गीला होने पर पोलिएस्टर की मजबूती कम नहीं होती (इसे आसानी से धोया जा सकता है)। | |
| इसमें अच्छा इलास्टिक, पुन:सुधार तथा लोच क्षमता होती है। | इसे गर्म इस्तरी की आवश्यकता नहीं है। | |
| इसकी सतह पर छोटी-छोटी रेशेगुमा गोलियाँ बन जाती हैं जिन्हें हटाया नहीं जा सकता। | ||
| पोलिएस्टर की नमी सोखने की क्षमता बहुत कम होती है अर्थात् यह सहजता से पानी नहीं सोखता। | गर्म जलवायु में आरामदायक नहीं है। | |
| यदि इस कपड़े पर तेल टपक जाए या गिर जाए तो उसका दाग इससे छूटता नहीं। | तैलीय दागों के प्रति सावधानी बरतनी चाहिए। | |
| यह सूक्ष्म जीवाणु तथा कीट प्रतिरोधी हैं। | ||
| एक्रेलिक | इसकी मजबूती सूती वस्त्रों के समान है। | बिना किसी विशेष देखभाल के इसे आसानी से धोया जा सकता है। |
| अच्छी इलास्टिक, पुन: बहाली सहित यह अधिक खिंच सकता है, अत: इसमें जल्दी सलवटें नहीं पड़ती। | ||
| एक्रेलिक में नमी बहुत कम ठहरती है तथा वस्त्र जल्दी सूख जाते हैं। | ||
| अधिकांश क्षार तथा अम्लों का यह अच्छा प्रतिरोधी हैं तथा अधिकांश ड्राइक्लीनिंग विलायक इसके रेशों को हानि नहीं पहुँचाते। | ||
| इन रेशों में धूप, सभी प्रकार के साबुन, सॉफिल्ट डिटर्जेंट तथा विरंजक के प्रति उत्कृष्ट प्रतिरोध क्षमता है। कीड़े इसे हानि नहीं पहुँचाते। | ||
| यह आग को जल्दी पकड़ लेता है तथा अन्य सॉफिल्ट रेशों के विपरीत अधिक समय तक पिघलता तथा जलता रहता है। | सावधानी बरती जानी आवश्यक है। बच्चों के लिए खतरनाक हो सकता है। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
4-5 विद्यार्थियों का समूह बनाएँ तथा अन्य वस्त्रों के प्रेक्षणों की भी तुलना करें।
इस प्रश्न में विद्यार्थियों को समूह बनाकर विभिन्न वस्त्रों के प्रेक्षणों की तुलना करनी है। इसके लिए वे अलग-अलग रंगीन वस्त्रों के नमूनों पर हुए रंग परिवर्तन और सफेद कपड़े पर लगे दागों का निरीक्षण करेंगे। तुलना के आधार पर वे यह समझ पाएंगे कि कौन सा रंग पक्का है और कौन सा नहीं। इस अभ्यास से वस्त्रों की देखभाल के लिए उचित धोने की विधि का चयन करना आसान होगा।
वस्त्रों की देखभाल तथा रखरखाव का मुख्य उद्देश्य क्या है?
कपड़ों को स्वच्छ, सुंदर और टिकाऊ बनाए रखना
कपड़ों की मरम्मत में कौन-कौन से कार्य शामिल होते हैं?
मरम्मत में कटे, फटे, छेद हुए कपड़ों की मरम्मत करना, बटनों/बंधनों को पुनः लगाना, तथा सिलाई और तुरपाई को पुनः करना शामिल होता है। उदाहरण के लिए, यदि कपड़े का बटन खुल गया हो तो उसे सिलाई द्वारा ठीक करना।
धुलाई की प्रक्रिया में पानी, साबुन और डिटर्जेंट की क्या भूमिका होती है?
पानी कपड़े को गीला करता है और गंदगी को ढीला करता है। साबुन और डिटर्जेंट गंदगी को पानी में निलंबित रखते हैं जिससे वह पुनः कपड़े पर नहीं जमती। उदाहरण के लिए, साबुन पानी के सतह तनाव को कम करता है जिससे धुलाई प्रभावी होती है।
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