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पोषण, स्वास्थ्य एवं स्वस्थता | Class 11 Home Science Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 5 मिनट का पठन

पोषण, स्वास्थ्य एवं स्वस्थता | Class 11 Home Science Notes

पोषण, स्वास्थ्य एवं स्वस्थता – this guide gives you a concise, exam-ready overview of पोषण, स्वास्थ्य एवं स्वस्थता from Class 11 Home Science, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

9.4 विद्यालय जाने वाले बच्चों का स्वास्थ्य, पोषण एवं स्वस्थता (7-12 वर्ष)

विद्यालय जाने वाले बच्चे शारीरिक रूप से सक्रिय होते हैं और उनकी पोषण आवश्यकताएँ बढ़ जाती हैं। 9 वर्ष तक लड़कों और लड़कियों की पोषण आवश्यकताएँ समान होती हैं, इसके बाद लड़कियों को मासिक धर्म की तैयारी के लिए प्रोटीन, कैल्शियम और लौह तत्व अधिक चाहिए होते हैं। आई.सी.एम.आर. द्वारा 7-12 वर्ष के बच्चों के लिए ऊर्जा, प्रोटीन, वसा, कैल्शियम, लौह तत्व, विटामिन आदि की अनुशंसित मात्रा निर्धारित की गई है। बच्चों को विविधता युक्त आहार देना चाहिए जिसमें सब्जियाँ, फल, साबुत अनाज, दालें शामिल हों। संतृप्त वसा, नमक और चीनी का सेवन सीमित करना चाहिए क्योंकि ये मोटापे, मधुमेह और उच्च रक्तदाब का कारण बन सकते हैं। नाश्ता छोड़ना उचित नहीं है क्योंकि यह शारीरिक और मानसिक कार्य निष्पादन को प्रभावित करता है। बच्चों को भोजन की योजना बनाने में शामिल करना उनकी रुचि बढ़ाता है। स्वस्थ आदतें विकसित करने के लिए खान-पान की अच्छी आदतें, शारीरिक गतिविधि, भोजन की सुरक्षा और आहार की मात्रा पर नियंत्रण आवश्यक है।

📊 Diagram: Table on page 14 (11×4): विद्यालय जाने वाले बच्चों की पोषक तत्वों की अनुशासित मात्रा; Table on page 16 (8×5): विद्यालयी बच्चों के लिए संतुलित आहार।

🧪 Activity: क्रियाकलाप 3: 9 वर्ष की बहन और 11 वर्ष के भाई के लिए सुबह का नाश्ता और रात्रि भोजन योजना बनाएं।

🔗 Connection: अगले अनुभाग में बच्चों की खान-पान की आदतों को प्रभावित करने वाले कारकों और स्वास्थ्य समस्याओं पर चर्चा होगी।

Table on page 14 (11×4)

सारणी 7 – विद्यालय जाने वाले बच्चों की पोषक तत्वों की अनुशासित मात्रा (7-12 वर्ष)
(आई.सी.एम.आर. द्वारा अनुशासित)
पोषक तत्वआयु (वर्षों में)
7.910.12
बालकबालिका
ऊर्जा (कि. कैलोरी)195021901970
प्रोटीन (ग्राम)415457
वसा (ग्राम)252222
कैल्सियम (मि. ग्रा.)400600600
लौह तत्व (मि. ग्रा.)263419

| विटामिन ए

Table on page 16 (8×5)

सारणी 8 – विद्यालयी बच्चों के लिए संतुलित आहार (आई.सी.एम.आर.)
क्र.सं.खाद्य वर्गमात्रा (ग्राम)
7-9 वर्ष10-12 वर्ष
लड़कालड़की
1.अनाज एवं मिलेट (ज्वार-बाजार इत्यादि)270330270
2.दालें एवं फलियाँ606060
3.दुग्ध एवं उनके उत्पाद500500500

| 4. | फल तथा सब्जियाँ

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. हमें विद्यालय जाने वाले बच्चे के आहार में संतृप्त वसा, अतिरिक्त चीनी तथा नमक की मात्रा को सीमित क्यों करना चाहिए?

विद्यालय जाने वाले बच्चे के आहार में संतृप्त वसा, अतिरिक्त चीनी तथा नमक की मात्रा को सीमित इसलिए करना चाहिए क्योंकि अत्यधिक वसा युक्त भोजन, अधिक नमक, कम रेशा एवं चीनी मिले पेय से बच्चों में मोटापा बढ़ता है जो स्वास्थ्य के लिए खतरा बनता है। यह असक्रिय जीवन-शैली के साथ मिलकर टाइप 2 मधुमेह, उच्च रक्तदाब तथा हृदय रोग जैसी बीमारियों का कारण बन सकता है। इसलिए संतुलित और पौष्टिक आहार देना आवश्यक है ताकि बच्चे स्वस्थ रहें और उनकी शारीरिक तथा मानसिक वृद्धि सही ढंग से हो सके।

2. भोजन की योजना बनाने में बच्चों को शामिल करना स्वस्थ खान-पान में किस प्रकार सहायक होता है?

भोजन की योजना बनाने में बच्चों को शामिल करने से वे स्वस्थ खान-पान के महत्व को समझते हैं और अपनी पसंद के अनुसार पौष्टिक विकल्प चुनने लगते हैं। इससे उनकी रुचि बढ़ती है और वे भोजन को लेकर जागरूक होते हैं। बच्चों को योजना में शामिल करने से वे संतुलित आहार की आदतें विकसित करते हैं, जो उनके शारीरिक विकास और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होती हैं।

3. बचपन में मोटापे में वृद्धि हो रही है। कारण बताइए?

बचपन में मोटापे में वृद्धि के कारण हैं: (i) आहार में अत्यधिक वसा युक्त भोजन, अधिक नमक, कम रेशा तथा चीनी मिले पेय पदार्थों का अधिक सेवन, (ii) असक्रिय जीवन-शैली, जिसमें शारीरिक गतिविधि की कमी होती है, (iii) अधिक समय तक टेलीविजन देखना और खेल-कूद में भाग न लेना, (iv) उच्च सामाजिक-आर्थिक वर्ग के बच्चों में पोषण की असंतुलित आदतें। ये सभी कारण मिलकर बच्चों में अतिरिक्त वसा के जमाव और वजन बढ़ने का कारण बनते हैं।

4. ‘‘मध्याह्न भोजन योजना’’ से किस प्रकार बच्चों के स्वास्थ्य एवं विद्यालय के कार्य निष्पादन में वृद्धि हुई है?

मध्याह्न भोजन योजना के अंतर्गत विद्यालय में निःशुल्क पौष्टिक भोजन प्रदान किया जाता है जिससे बच्चों को पर्याप्त पोषण मिलता है। इससे बच्चों की कुपोषण की समस्या कम हुई है, उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ी है, जिससे वे कम बीमार पड़ते हैं। इसके परिणामस्वरूप बच्चों का ध्यान केंद्रित करने की क्षमता बढ़ी है और विद्यालय में उनका कार्य निष्पादन बेहतर हुआ है। साथ ही विद्यालय में नामांकन बढ़ा है और विद्यालय छोड़ने की दर में कमी आई है। बालिकाओं की संख्या में वृद्धि से शिक्षा में लिंग भेद भी कम हुआ है।

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