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पोषण, स्वास्थ्य एवं स्वस्थता | Class 11 Home Science Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 6 मिनट का पठन

पोषण, स्वास्थ्य एवं स्वस्थता | Class 11 Home Science Notes

पोषण, स्वास्थ्य एवं स्वस्थता – this guide gives you a concise, exam-ready overview of पोषण, स्वास्थ्य एवं स्वस्थता from Class 11 Home Science, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

9.2 शैशव (जन्म से 12 माह तक) के दौरान पोषण, स्वास्थ्य एवं स्वस्थता

शैशवावस्था में बच्चे की वृद्धि अत्यंत तीव्र होती है, विशेषकर जन्म से 6 माह तक। इस अवधि में बच्चे को माँ का दूध देना सर्वोत्तम पोषण माना जाता है क्योंकि माँ का दूध सभी आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर होता है और आसानी से पच जाता है। शिशु को जन्म के तुरंत बाद स्तनपान शुरू करना चाहिए। प्रारंभिक 2-3 दिनों में नवदुग्ध (कोलॉस्ट्रम) दिया जाना चाहिए जो पीला रंग का तरल होता है और प्रतिरक्षी तत्वों से भरपूर होता है। शिशु की ऊर्जा, प्रोटीन, कैल्सियम, लौह तत्व, विटामिन ए, थायमिन, नियासीन, राइबोफ्लेविन, विटामिन सी, फोलिक अम्ल आदि की आवश्यकताएँ आई.सी.एम.आर. द्वारा निर्धारित की गई हैं। माँ के दूध के साथ-साथ 6 माह की उम्र के बाद पूरक आहार देना आवश्यक होता है, जो धीरे-धीरे शिशु की बढ़ती पोषण आवश्यकताओं को पूरा करता है। पूरक आहार के प्रकारों में तरल पूरक, अर्द्धदोस पूरक और दोस पूरक आहार शामिल हैं। पूरक आहार देते समय स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए ताकि संक्रमण से बचाव हो सके। कम वजन वाले शिशुओं के लिए माँ का दूध सर्वोत्तम आहार है क्योंकि यह रोगाणुनिरोधी गुणों से भरपूर होता है।

📊 Diagram: Figure on page 3: नवदुग्ध (कोलॉस्ट्रम) पीते शिशु का चित्र; Table on page 3 (17×3): शिशुओं के पोषक तत्वों की अनुशंसित दैनिक मात्रा; Table on page 5 (4×3): पूरक आहार के प्रकार।

🧪 Activity: क्रियाकलाप 1: अपने परिवार के सदस्यों से पारंपरिक पूरक भोजन के बारे में पूछें और उनकी पौष्टिकता पर चर्चा करें।

🔗 Connection: अगले अनुभाग में राष्ट्रीय प्रतिरक्षण कार्यक्रम और शिशुओं के स्वास्थ्य संरक्षण के उपायों पर चर्चा की जाएगी।

Table on page 3 (17×3)

सारणी 1 – शिशुओं के पोषक तत्वों की अनुशंसित दैनिक मात्रा
आई.सी.एम.आर. द्वारा अनुशंसित
पोषक तत्वजन्म से 6 माह तक6–12 माह तक
ऊर्जा (किलो कैलोरी)108 कि.ग्रा. शरीर वजन98 कि.ग्रा. शरीर वजन
प्रोटीन (ग्राम)2.05 कि.ग्रा. शरीर वजन1.65 कि.ग्रा. शरीर वजन
कैल्सियम (मि.ग्रा.)500500
विटामिन ए
रेटिनॉल (माइक्रो ग्राम)350350
अथवा
बीटा कैरोटीन (माइक्रो ग्राम)12001200
थायमिन (माइक्रो ग्राम)55 / कि.ग्रा. शरीर वजन50 / कि.ग्रा. शरीर वजन
नियासीन (माइक्रो ग्राम)710 / कि.ग्रा. शरीर वजन650 / कि.ग्रा. शरीर वजन
राईबोफ्लेविन (माइक्रो ग्राम)65 / कि.ग्रा. शरीर वजन60 / कि.ग्रा. शरीर वजन
पाईरिडॉक्सिन (माइक्रो ग्राम)0.10.4
एस्कार्बिक अम्ल (विटामिन सी) (माइक्रो ग्राम)2525
फोलिक अम्ल (माइक्रो ग्राम)2525
विटामिन बी 12 (माइक्रो ग्राम)0.20.2

Table on page 5 (4×3)

तरल पूरकअर्द्धदोस पूरक आहार 5-6 माह तक शुरू करनादोस पूरक – 10 माह से एक वर्ष तक, जब शिशु दांत निकालता है
3:1 के अनुपात में उबले पानी के साथ मिला दूध। तत्पश्चात् कुछ सप्ताह में बिना पानी वाला दूधअच्छी तरह पकी हुई एवं मसली हुई सब्जीदाल, अनाज, टुकड़े किया गया मांस जिसमें अनेक चीजें मिलाकर पकाई गई हों।
संतरे, मौसमी जैसे स्ट्रॉज फलों का रस, 4 माह पर 5 मि. ली. से शुरू करते हुए एक वर्ष तक 85 मि. ली. तक बढ़ानादालें और अनाज अलग से अच्छी तरह पका हुआ अथवा मिलाया हुआ। दूध तथा चीनी मिलाई जा सकती है।भोजन के रूप में हाथों से पकड़कर खाया जाने वाला कच्चा सलाद एवं फल
सूप : सब्जी, दाल, छना हुआ सूप 4-5 माह पर। लगभग एक वर्ष के बाद नमक और प्याज के साथ बिना छना सूपअंडपीतक: 7 माह तक, आधे चम्मच अंडे की पीली जर्दी से शुरू करके एक वर्ष तक एक बड़ी चम्मच अंडे की जर्दीपकाई गई और मसली हुई मछली एवं मांस एक वर्ष के पूरा होने पर शुरू किया जाए।

Table on page 14 (6×4)

थायमिन (मि. ग्रा.)1.01.11.0
राइबोलेविन (मि. ग्रा.)1.21.31.2
पाइरिडॉक्सिन (मि. ग्रा.)1.61.61.6
फोलिक अम्ल (माइक्रो ग्राम)607070
ऐस्कार्बिक अम्ल (मि. ग्रा.)404040
विटामिन बी 12 (मि. ग्रा.)0.2.10.2-10.2-1
नियासिन (मि. ग्रा.)131513

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. हमें विद्यालय जाने वाले बच्चे के आहार में संतृप्त वसा, अतिरिक्त चीनी तथा नमक की मात्रा को सीमित क्यों करना चाहिए?

विद्यालय जाने वाले बच्चे के आहार में संतृप्त वसा, अतिरिक्त चीनी तथा नमक की मात्रा को सीमित इसलिए करना चाहिए क्योंकि अत्यधिक वसा युक्त भोजन, अधिक नमक, कम रेशा एवं चीनी मिले पेय से बच्चों में मोटापा बढ़ता है जो स्वास्थ्य के लिए खतरा बनता है। यह असक्रिय जीवन-शैली के साथ मिलकर टाइप 2 मधुमेह, उच्च रक्तदाब तथा हृदय रोग जैसी बीमारियों का कारण बन सकता है। इसलिए संतुलित और पौष्टिक आहार देना आवश्यक है ताकि बच्चे स्वस्थ रहें और उनकी शारीरिक तथा मानसिक वृद्धि सही ढंग से हो सके।

2. भोजन की योजना बनाने में बच्चों को शामिल करना स्वस्थ खान-पान में किस प्रकार सहायक होता है?

भोजन की योजना बनाने में बच्चों को शामिल करने से वे स्वस्थ खान-पान के महत्व को समझते हैं और अपनी पसंद के अनुसार पौष्टिक विकल्प चुनने लगते हैं। इससे उनकी रुचि बढ़ती है और वे भोजन को लेकर जागरूक होते हैं। बच्चों को योजना में शामिल करने से वे संतुलित आहार की आदतें विकसित करते हैं, जो उनके शारीरिक विकास और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होती हैं।

3. बचपन में मोटापे में वृद्धि हो रही है। कारण बताइए?

बचपन में मोटापे में वृद्धि के कारण हैं: (i) आहार में अत्यधिक वसा युक्त भोजन, अधिक नमक, कम रेशा तथा चीनी मिले पेय पदार्थों का अधिक सेवन, (ii) असक्रिय जीवन-शैली, जिसमें शारीरिक गतिविधि की कमी होती है, (iii) अधिक समय तक टेलीविजन देखना और खेल-कूद में भाग न लेना, (iv) उच्च सामाजिक-आर्थिक वर्ग के बच्चों में पोषण की असंतुलित आदतें। ये सभी कारण मिलकर बच्चों में अतिरिक्त वसा के जमाव और वजन बढ़ने का कारण बनते हैं।

4. ‘‘मध्याह्न भोजन योजना’’ से किस प्रकार बच्चों के स्वास्थ्य एवं विद्यालय के कार्य निष्पादन में वृद्धि हुई है?

मध्याह्न भोजन योजना के अंतर्गत विद्यालय में निःशुल्क पौष्टिक भोजन प्रदान किया जाता है जिससे बच्चों को पर्याप्त पोषण मिलता है। इससे बच्चों की कुपोषण की समस्या कम हुई है, उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ी है, जिससे वे कम बीमार पड़ते हैं। इसके परिणामस्वरूप बच्चों का ध्यान केंद्रित करने की क्षमता बढ़ी है और विद्यालय में उनका कार्य निष्पादन बेहतर हुआ है। साथ ही विद्यालय में नामांकन बढ़ा है और विद्यालय छोड़ने की दर में कमी आई है। बालिकाओं की संख्या में वृद्धि से शिक्षा में लिंग भेद भी कम हुआ है।

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