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बाल्यावस्था | Class 11 Home Science Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन

बाल्यावस्था | Class 11 Home Science Notes

बाल्यावस्था – this guide gives you a concise, exam-ready overview of बाल्यावस्था from Class 11 Home Science, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

उत्तरजीविता, वृद्धि तथा विकास

इस खंड में हम बाल्यावस्था के महत्वपूर्ण पहलुओं — उत्तरजीविता, वृद्धि और विकास — के बारे में विस्तार से समझेंगे। उत्तरजीविता का अर्थ है जीवित बने रहना और जीवन संबंधी अनिवार्य कार्यों को कर पाना। बच्चों की उचित देखभाल, पर्याप्त पोषण और संक्रमणों से सुरक्षा उनकी उत्तरजीविता के लिए आवश्यक है। कुपोषण और संक्रमणों से होने वाली बीमारियाँ जैसे तपेदिक, काली खाँसी, डिप्थीरिया, पोलियो, टिटनेस, मलेरिया, न्यूमोनिया आदि बच्चों की मृत्यु का कारण बनती हैं। भारत में पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु का एक बड़ा कारण अतिसार है, जो कुपोषण से जुड़ा होता है।

वृद्धि का संबंध बच्चे के शरीर के आकार, वजन, कद और अंगों के भौतिक विकास से है, जिसे मापा जा सकता है। विकास का अर्थ है गुणात्मक परिवर्तन, जैसे बच्चे का सिर उठाना, बैठना, चलना आदि। विकास बहुआयामी होता है जिसमें शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक परिवर्तन शामिल होते हैं। विकास क्रमागत और विकासोन्मुख होता है, अर्थात् यह पूर्ववर्ती विकास पर आधारित होता है और बच्चे को अधिक परिष्कृत कौशल प्रदान करता है।

वृद्धि और विकास के बीच अंतर को समझना आवश्यक है क्योंकि केवल शारीरिक वृद्धि स्वास्थ्य का संकेत नहीं होती, बल्कि संपूर्ण विकास के लिए उचित पोषण, स्वास्थ्य देखभाल और सामाजिक वातावरण जरूरी है। बच्चों की वृद्धि की निगरानी के लिए वृद्धि वक्र का उपयोग किया जाता है, जो सामान्यतः ऊपर की ओर बढ़ता है। यदि वृद्धि वक्र समतल हो जाए तो इसका अर्थ है वृद्धि रुक गई है, और नीचे गिरना स्वास्थ्य में गिरावट का संकेत है। उचित पोषण और संक्रमणों का उपचार वृद्धि को पुनः सक्रिय कर सकता है।

📊 Diagram: चित्र 1 – बच्चों का आयु के अनुसार आकार

🧪 Activity: कृयाकलाप 3: वृद्धि वक्र के आधार पर अतिसार से प्रभावित बच्चे की वृद्धि वक्र की स्थिति और कुपोषित बच्चे को अच्छा भोजन देने पर वृद्धि वक्र में अंतर का विश्लेषण।

🔗 Connection: यह खंड बाल्यावस्था के विकास के विभिन्न क्षेत्रों और अवस्थाओं के अध्ययन की ओर ले जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. बच्चों से संबंधित संस्था या कार्यक्रम का दौरा करना (सरकारी/गैर सरकारी संगठन)। 2. संस्था या कार्यक्रम के क्रियाकलापों का अवलोकन करना। 3. अपने अवलोकनों के आधार पर रिपोर्ट लिखना।

1. अपने क्षेत्र में बच्चों से संबंधित किसी सरकारी या गैर सरकारी संस्था या कार्यक्रम का चयन करें और उसका दौरा करें। 2. दौरे के दौरान संस्था या कार्यक्रम के विभिन्न क्रियाकलापों का ध्यानपूर्वक अवलोकन करें, जैसे कि शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, मनोरंजन आदि से जुड़ी गतिविधियाँ। 3. अपने अवलोकनों के आधार पर संस्था के उद्देश्य, आयु वर्ग, कार्यकर्ता, क्रियाकलाप, धन स्रोत आदि की जानकारी एकत्रित करें। 4. लगभग चार पृष्ठों में एक रिपोर्ट तैयार करें जिसमें संस्था के विभिन्न पहलुओं का वर्णन हो और अंत में निष्कर्ष

बाल्यावस्था में 'उत्तरजीविता' का क्या अर्थ है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?

उत्तरजीविता का अर्थ है जीवित बने रहना और जीवन संबंधी अनिवार्य कार्य करते रहना। यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बच्चों की उचित देखभाल, पर्याप्त पोषण और संक्रमणों से सुरक्षा से ही वे स्वस्थ रह पाते हैं। उदाहरण के लिए, बच्चों को तपेदिक, काली खाँसी जैसे रोगों से बचाने के लिए टीकाकरण आवश्यक है।

निम्नलिखित में से कौन सा रोग भारत में पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु का प्रमुख कारण है?

अतिसार

वृद्धि और विकास में क्या अंतर है? उदाहरण सहित समझाइए।

वृद्धि का संबंध शरीर के आकार, वजन और अंगों के भौतिक मापन से है, जबकि विकास गुणात्मक परिवर्तन है जैसे बच्चे का सिर उठाना, बैठना, चलना। उदाहरण के लिए, बच्चे का वजन बढ़ना वृद्धि है और चलना सीखना विकास है।

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