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बाल्यावस्था | Class 11 Home Science Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 6 मिनट का पठन

बाल्यावस्था | Class 11 Home Science Notes

बाल्यावस्था – this guide gives you a concise, exam-ready overview of बाल्यावस्था from Class 11 Home Science, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

विकास की अवस्थाएँ

बाल्यावस्था के विकास को विभिन्न अवस्थाओं में वर्गीकृत किया गया है, जो विकास की उपलब्धियों पर आधारित हैं। ये अवस्थाएँ हैं:

1. शैशवावस्था (जन्म से 2 वर्ष): इस दौरान बच्चे में तीव्र शारीरिक वृद्धि होती है। नवजात शिशु में प्रतिवर्ती क्रियाएँ होती हैं जैसे चूषण प्रतिवर्त, आँख झपकाना आदि। संवेदनात्मक क्षमताएँ जैसे देखने, सुनने, स्वाद और स्पर्श की क्षमता जन्म से ही विकसित होती हैं।

2. आरम्भिक बाल्यावस्था या पूर्व-विद्यालयी वर्ष (2-6 वर्ष): इस चरण में बच्चे की भाषा, सामाजिक, भावनात्मक और संज्ञानात्मक क्षमताओं का विकास होता है।

3. मध्य बाल्यावस्था (7-11 वर्ष): इस दौरान बच्चे की सोच अधिक तर्कशील होती है और वह सामाजिक नियमों को समझने लगता है।

4. किशोरावस्था (11-18 वर्ष): इस चरण में बच्चे की सोच अमूर्त और तर्कपूर्ण होती है। वे अपनी पहचान और अहम् की खोज करते हैं।

नवजात शिशु असहाय प्रतीत होता है, लेकिन उसमें कई अंतर्जात क्षमताएँ होती हैं जो उसे अपने परिवेश के अनुरूप अनुकूलित करती हैं। शैशवावस्था में बच्चे का कद और वजन तीव्रता से बढ़ता है। उदाहरण के लिए, जन्म के समय बच्चे का वजन लगभग 3 से 3.3 कि.ग्रा. होता है जो एक वर्ष की आयु तक तीन गुना हो जाता है।

क्रियात्मक विकास में स्थूल क्रियात्मक कौशल पहले विकसित होते हैं, उसके बाद सूक्ष्म क्रियात्मक कौशल। बच्चे के विकास में आयु के अनुसार विभिन्न क्रियात्मक उपलब्धियाँ होती हैं, जिन्हें विकास के मानदंड के रूप में देखा जाता है।

📊 Diagram: सारणी 1 – आयु के अनुसार वजन; सारणी 2 – आयु के अनुसार कद; सारणी 3 – क्रियात्मक विकास उपलब्धियाँ

🧪 Activity: क्रियाकलाप 7: परिवार में माता-पिता के बच्चों के साथ व्यवहार के तरीके का अवलोकन और चर्चा।

🔗 Connection: यह खंड बाल्यावस्था के विभिन्न विकास चरणों के विशिष्ट लक्षणों और विकास के मानदंडों की विस्तृत चर्चा के लिए आधार प्रदान करता है।

Table on page 10 (9×3)

सारणी 1 – आयु के अनुसार वजन
आयु सीमालड़कियाँ ( कि.ग्रा. )लड़के ( कि.ग्रा. )
0 - 2 वर्ष3.2 - 11.53.3 - 12.2
2 - 5 वर्ष11.7 - 18.212.4 - 18.3
5 - 6 वर्ष18.3 - 20.218.5 - 20.5
6 - 7 वर्ष20.3 - 22.420.7 - 22.9
7 - 8 वर्ष22.6 - 25.023.1 - 25.4
8 - 9 वर्ष25.3 - 28.225.6 - 28.1
9 - 10 वर्ष28.5 - 31.928.3 - 31.2

Table on page 10 (8×3)

सारणी 2 – आयु के अनुसार कद
आयु सीमालड़कियाँ ( से.मी. )लड़के ( से.मी. )
2-5 वर्ष85.7 - 109.487.1 - 110.0
5-8 वर्ष109.6 - 126.6110.3 - 127.3
8-11 वर्ष127.0 - 145.0127.7 - 143.1
11-14 वर्ष145.5 - 159.8143.6 - 163.2
14-17 वर्ष160.0 - 162.9163.7 - 175.2
17-19 वर्ष162.9 - 163.2175.3 - 176.5

Table on page 11 (9×3)

सारणी 3 – क्रियात्मक विकास उपलब्धियाँ
क्र. सं.आयुउपलब्धि का स्वरूप
1.जन्म से 3 माह तक• सिर को उठाना और उठाए रखना
2.नवजात• नवजात शिशु अपने सिर को थोड़ा-सा इधर-उधर हिला सकते हैं।
3.1 माह• वे अपना सिर उठा सकते हैं।
4.2 माह• वे पेट के बल लेटे हुए अपनी छाती को ऊपर उठा सकते हैं (अधोमुख स्थिति)।
5.3 माह• शिशु अपना सिर उठाकर टिकाना शुरू कर देता है और यह विकास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यदि शिशु ऐसा 6 माह की आयु तक भी करने में असमर्थ रहता है तो यह दर्शाता है कि विकास में विलम्ब हो रहा है।
6.4 – 6 माह• वह पीठ से पेट के बल तथा पेट से पीठ के बल उलटा-सीधा हो सकता है।

| 7. | 6 – 8 माह | • वह किसी बड़े व्यक्ति (वयस्क) की सहायता से अथवा सहारा देने वाली पट्टी के सहयोग से बैठ सकता है।

Table on page 11 (1×3)

9.10 – 11 माह• बैठने की स्थिति से उठकर खड़ा हो सकता है, थोड़े-से समय के लिए अपने आप स्वतंत्र रूप से खड़ा हो सकता है।

| 10. | 12 – 18 माह | • चलना (आरम्भ में बच्चे की चाल असंतुलित होती है किंतु धीरे-धीरे उसमें संतुलन आ जाता है।)

Table on page 11 (1×3)

11.18 – 24 माह• किसी का हाथ पकड़कर दोनों पैर प्रत्येक सीढ़ी पर रखते हुए सीढ़ियाँ चढ़ना।

| 12. | 2 वर्ष | • उलटा चलना, फिसल कर नीचे खिसकना, सीढ़ी पर चढ़ना।

Table on page 11 (4×3)

14.3 – 4 वर्ष• वह वयस्कों की भांति एक-एक पैर रख कर किसी सहारे को पकड़ कर सीढ़ी पर ऊपर की ओर चढ़ सकता है।
15.5 वर्ष• उछल-कूद करना तथा तिपहिया साइकिल को पैडल मार कर चलाना।
16.6 वर्ष• भलीभांति समन्वित ढंग से कूदना, छलांग लगाना तथा चढ़ना।
17.7 वर्ष• संतुलन बनाना तथा दुपहिया साइकिल को पैडल मार कर चलाना।
18.8 – 10 वर्ष• उसमें संतुलन, समन्वय तथा शक्ति आ जाती है जो विभिन्न खेलों तथा जिमनास्टिक्स में बच्चे को प्रतिभागिता हेतु सक्षम बनाती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. बच्चों से संबंधित संस्था या कार्यक्रम का दौरा करना (सरकारी/गैर सरकारी संगठन)। 2. संस्था या कार्यक्रम के क्रियाकलापों का अवलोकन करना। 3. अपने अवलोकनों के आधार पर रिपोर्ट लिखना।

1. अपने क्षेत्र में बच्चों से संबंधित किसी सरकारी या गैर सरकारी संस्था या कार्यक्रम का चयन करें और उसका दौरा करें। 2. दौरे के दौरान संस्था या कार्यक्रम के विभिन्न क्रियाकलापों का ध्यानपूर्वक अवलोकन करें, जैसे कि शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, मनोरंजन आदि से जुड़ी गतिविधियाँ। 3. अपने अवलोकनों के आधार पर संस्था के उद्देश्य, आयु वर्ग, कार्यकर्ता, क्रियाकलाप, धन स्रोत आदि की जानकारी एकत्रित करें। 4. लगभग चार पृष्ठों में एक रिपोर्ट तैयार करें जिसमें संस्था के विभिन्न पहलुओं का वर्णन हो और अंत में निष्कर्ष

बाल्यावस्था में 'उत्तरजीविता' का क्या अर्थ है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?

उत्तरजीविता का अर्थ है जीवित बने रहना और जीवन संबंधी अनिवार्य कार्य करते रहना। यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बच्चों की उचित देखभाल, पर्याप्त पोषण और संक्रमणों से सुरक्षा से ही वे स्वस्थ रह पाते हैं। उदाहरण के लिए, बच्चों को तपेदिक, काली खाँसी जैसे रोगों से बचाने के लिए टीकाकरण आवश्यक है।

निम्नलिखित में से कौन सा रोग भारत में पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु का प्रमुख कारण है?

अतिसार

वृद्धि और विकास में क्या अंतर है? उदाहरण सहित समझाइए।

वृद्धि का संबंध शरीर के आकार, वजन और अंगों के भौतिक मापन से है, जबकि विकास गुणात्मक परिवर्तन है जैसे बच्चे का सिर उठाना, बैठना, चलना। उदाहरण के लिए, बच्चे का वजन बढ़ना वृद्धि है और चलना सीखना विकास है।

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