विचित्र: साक्षी | Class 10 Sanskrit Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 7 मिनट का पठन

विचित्र: साक्षी – this guide gives you a concise, exam-ready overview of विचित्र: साक्षी from Class 10 Sanskrit, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
शब्दावली पुनरावलोकन
अध्याय के अंत में शब्दावली का पुनरावलोकन किया गया है जिसमें मुख्य शब्दों के अर्थ, पर्यायवाची और उनके प्रयोग को संक्षेप में प्रस्तुत किया गया है। यह पुनरावलोकन छात्रों को शब्दों को याद रखने और उनका सही प्रयोग करने में सहायता करता है। शब्दावली में जैसे 'भूरि', 'उपार्जितवान्', 'निवसन्', 'प्रसूते', 'गृही', 'दैवगति:', 'पलायित:', 'प्रबुद्ध:', 'क्रोशितुम्', 'तारस्वरेण', 'अभर्त्सयन्', 'नीतवान्', 'दोषभाजनम्', 'आरक्षिणम्', 'आदिष्टवान्' आदि शब्द शामिल हैं। इस खंड से छात्र संस्कृत शब्दों की समझ को मजबूत करते हैं और भाषा के ज्ञान को बढ़ाते हैं।
📊 Diagram: Table on page 3 (17×4); Table on page 4 (18×7); Table on page 5 (16×4)
🧪 Activity: शब्दावली के शब्दों को याद करें और वाक्यों में उनका प्रयोग करें।
🔗 Connection: अगले खंड में अध्याय का समापन कर न्याय, सत्य और नैतिकता के महत्व को पुनः रेखांकित किया जाएगा।
Table on page 3 (17×4)
| भूरि | - पर्याप्तम् | - अत्यधिक | - Plenty |
|---|---|---|---|
| उपार्जितवान् | - अर्जितवान् | - कमाया | - Earned |
| निवसन् | - वासं कुर्वन् | - रहते हुए | - While residing |
| प्रसूते | - विस्तृते | - फैले हुए | - Spreaded |
| विजने प्रदेशे | - एकान्तप्रदेशे | - एकान्त प्रदेश में | - In a desolate place |
| शुभावहा | - कल्याणप्रदा | - कल्याणकारी | - Charitable |
| गृही | - गृहस्वामी | - गृहस्थ | - House holder |
| दैवगति: | - भाग्यस्थिति: | - भाग्य की लीला | - Destiny |
| पलायित: | - वेगेन निर्गत:/पलायनमकरोत् | - भाग गया, चला गया | - Ran away |
| प्रबुद्ध: | - जागृत: | - जागा हुआ | - Awakened |
| त्वरितम् | - शीघ्रम् | - शीघ्रगामी | - Swift |
| प्रस्थित: | - गत: | - चला गया | - Went |
| अर्थकाश्यैन | - धनस्य अभावेन | - धनाभाव के कारण | - Scarcity of money |
| पदातिरेव | - पादाभ्याम् एव | - पैदल ही | - On foot |
| पुंस: | - पुरुषस्य | - मनुष्य का | - Human's |
| निहिताम् | - स्थापिताम् | - रखी हुई | - Placed/kept |
| अन्वधावत् | - अन्वगच्छत्, अनु+अधावत् | - पीछे-पीछे गया | - He/she followed |
Table on page 4 (18×7)
| क्रोशितुम् | - | चीत्कर्तुम् | - | ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने | - | Shouting |
|---|---|---|---|---|---|---|
| तारस्वरेण | - | उच्चस्वरेण | - | ऊँची आवाज़ में | - | Loudly |
| अभर्त्सयन् | - | भर्त्सनाम् अकुर्वन् | - | भला-बुरा कहा | - | They criticized |
| प्रख्याप्य | - | स्थाप्य | - | स्थापित करके | - | Establishing |
| चौर्याभियोगे | - | चौरकर्मणि, चौर्यदोषारोपे | - | चोरी के आरोप में | - | On an allegation of stealing |
| नीतवान् | - | अनयत् | - | ले गया | - | (He) took |
| अवगत्य | - | ज्ञात्वा | - | जानकर | - | Knowing |
| दोषभाजनम् | - | दोषपात्रम् | - | दोषी | - | Culprit |
| उपस्थातुम् | - | समक्षमायातुम् | - | उपस्थित होने के लिए | - | To be presented |
| आरक्षिणम् | - | सैनिकम् (रक्षक-पुरुषम्) | - | सैनिक को | - | To guard |
| आदिष्टवान् | - | आज्ञां दत्तवान् | - | आज्ञा दी | - | (He) ordered |
| स्थापितवन्तौ | - | न्यस्तवन्तौ | - | रखा | - | Kept |
| तत्रव्य: | - | तत्र भव: | - | वहाँ का | - | Of that place |
| न्यवेदयत | - | प्रार्थयत | - | प्रार्थना की | - | (He/she) requested |
| क्रोशाद्वयान्तराले | - | द्वयोः क्रोशयोः मध्ये | - | दो कोस के मध्य | - | At the distance of around two miles |
| आदिश्यताम् | - | आदेशः दीयताम् | - | आज्ञा दीजिए | - | Order |
| उपेत्व | - | समीपं गत्वा | - | पास जाकर | - | Going near |
| काष्ठपटले | - | काष्ठस्य पटले | - | लकड़ी के तख्ते पर | - | On a wooden board |
Table on page 5 (16×4)
| कृशकाय: | - दुर्बलं शरीरम् | - कमज़ोर शरीरवाला | - Lean body |
|---|---|---|---|
| भारवत: | - भारवाहिन: | - भारवाही | - Of heavy built |
| भारवेदनया | - भारपीडया | - भार की पीड़ा से | - By the pain of the load |
| क्रन्दनम् | - रोदनम् | - रोने को | - Weeping |
| निशाम्य | - श्रुत्वा, आकण्य | - सुन करके | - Listening |
| मुदित: | - प्रसन्न: | - प्रसन्न | - Happy |
| भुङ्गश्व | - भोगं कुरु | - भोगो | - Meet the nemesis |
| चत्वरे | - शृङ्गाटके/चतुष्पथे | - चौराहे पर | - At square |
| लप्यसे | - प्राप्यसे | - प्राप्त करोगे | - You will get |
| प्रावारकम् | - आच्छादनवस्त्रम् | - ऊपर ओढ़ा हुआ वस्त्र | - Covering cloth |
| अपसार्य | - अपवार्य | - दूर करके | - Removing |
| अभिवाद्य | - अभिवादनं कृत्वा | - अभिवादन करके | - Saluting |
| अध्वनि | - मार्ग | - रास्ते में | - On the way |
| यदुक्तम् | - यत् कथितम् | - जो कहा गया | - Whatever was said |
| वारित: | - निवारित: | - रोका गया | - Stopped |
| मुक्तवान् | - अत्यजत् | - छोड़ दिया | - Released |
| समालम्ब्य | - आश्रयं गृहीत्वा | - सहारा लेकर | - Taking recourse |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. एकपदेन उत्तरं लिखत- (क) कीदृशे प्रदेशे पदयात्रा न सुखावहा? (ख) अतिथि: केन प्रबुद्ध:? (ग) कृशकाय: क: आसीत्? (घ) न्यायाधीश: कस्मै कारागारदण्डम् आदिष्टवान्? (ङ) कं निकषा मृतशरीरम् आसीत्?
1. (क) वह प्रदेश जहाँ पदयात्रा सुखद नहीं होती, वह कठिन और असुविधाजनक क्षेत्र होता है। (ख) अतिथि को चौर के पादध्वनि से प्रबुद्ध किया गया। (ग) कृशकाय व्यक्ति वह था जो न्यायाधीश के आदेशानुसार कारागार दण्ड भुगत रहा था। (घ) न्यायाधीश ने उस व्यक्ति को कारागार दण्ड दिया जो चोरी के आरोप में था। (ङ) मृतशरीर निकषा में था जो न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था।
2. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत- (क) निर्धन: जन: कथं वित्तम् उपार्जितवान्? (ख) जन: किमर्थ पदाति: गच्छति? (ग) प्रसूते निशान्धकारे स किम् अचिन्तयत्? (घ) वस्तुत: चौर: क: आसीत्? (ङ) जनस्य क्रन्दनं निशम्य आरक्षी किमुक्तवान्? (च) मतिवैभवशालिन: दुष्कराणि कार्याणि कथं साधयन्ति?
2. (क) निर्धन: जन: परिश्रम्य वित्तम् उपार्जितवान्। (ख) जन: पदाति: गच्छति कारणं न्यायालयं गन्तुं। (ग) प्रसूते निशान्धकारे स मृतशरीरस्य विषयं चिन्तयत्। (घ) वस्तुत: चौर: वह व्यक्ति आसीत् जो चोरी कृत्य में लिप्त था। (ङ) जनस्य क्रन्दनं निशम्य आरक्षी न्यायाधीशं सूचितवान्। (च) मतिवैभवशालिन: बुद्धि और चातुर्येन दुष्कराणि कार्याणि सरलतया साधयन्ति।
3. रेखाङ्कितपदमाधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत- (क) पुत्रं द्रष्टुं स: प्रस्थित:। (ख) करुणापरो गृही तस्मै आश्रयं प्रायच्छत्। (ग) चौरस्य पादध्वनिना अतिथि: प्रबुद्ध:। (घ) न्यायाधीश: बंकिमचन्द्र: आसीत्। (ङ) स भारवेदनया क्रन्दति स्म। (च) उभौ शवं चत्वरे स्थापितवन्तौ।
3. (क) पुत्रं द्रष्टुं स: कः प्रस्थित:? (ख) करुणापरो गृही तस्मै किम् आश्रयं प्रायच्छत्? (ग) चौरस्य पादध्वनिना अतिथि: कथं प्रबुद्ध:? (घ) न्यायाधीश: बंकिमचन्द्र: कः आसीत्? (ङ) स भारवेदनया कथं क्रन्दति स्म? (च) उभौ शवं चत्वरे कथं स्थापितवन्तौ?
4. यथानिर्देशमुत्तरत— (क) ‘आदेश’ प्राप्य उभौ अचलताम्’ अत्र किं कर्तृपदम्? (ख) ‘एतेन आरक्षिणा अर्ध्वनि यदुक्तं तत् वर्णयामि’–अत्र ‘मार्गे’ इत्यर्थे किं पदं प्रयुक्तम्? (ग) ‘करुणापरो गृही तस्मै आश्रयं प्रायच्छत्’– अत्र ‘तस्मै’ इति सर्वनामपदं कस्मै प्रयुक्तम्? (घ) ‘ततोऽस्मौ तौ अग्रिमे दिने उपस्थातुम् आदिष्टवान्’ अस्मिन् वाक्ये किं क्रियापदम्? (ङ) ‘दुष्कराण्यपि कर्माणि’– अत्र विशेष्यपदं किम्?
4. (क) कर्तृपदम् 'उभौ'। (ख) 'मार्गे' पदात् अर्थ: 'मार्गे' अर्थात् 'मार्गे' (पथ में)। (ग) 'तस्मै' सर्वनामपदं 'गृही' क्रियापदम् प्रयुक्तम्। (घ) क्रियापदम् 'आदिष्टवान्'। (ङ) विशेष्यपदं 'कर्माणि'।
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