सुभाषितानि | Class 10 Sanskrit Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 5 मिनट का पठन

सुभाषितानि – this guide gives you a concise, exam-ready overview of सुभाषितानि from Class 10 Sanskrit, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
सुभाषितानि - शब्दार्थ तालिकाएँ
इस अध्याय में दो महत्वपूर्ण शब्दार्थ तालिकाएँ प्रस्तुत की गई हैं, जो सुभाषितों के शब्दों के अर्थ को स्पष्ट करती हैं। पहली तालिका में संस्कृत शब्दों के हिंदी और अंग्रेजी अर्थ दिए गए हैं, जैसे 'प्रकुप्यति' का अर्थ है 'अतिकोपं करोति' अर्थात् अत्यधिक क्रोध करना। दूसरी तालिका में भी कई शब्दों के अर्थ विस्तार से दिए गए हैं, जैसे 'दैवात्' का अर्थ है 'भाग्य से'। इन तालिकाओं का उद्देश्य विद्यार्थियों को कठिन शब्दों को समझने में सहायता प्रदान करना है ताकि वे श्लोकों का सही अर्थ ग्रहण कर सकें। शब्दार्थ तालिकाएँ संस्कृत भाषा के अध्ययन में अत्यंत उपयोगी होती हैं, क्योंकि वे शब्दों के विभिन्न अर्थों और प्रयोगों को स्पष्ट करती हैं।
📊 Diagram: Table on page 3 (21×4); Table on page 4 (6×7); Table on page 4 (1×7)
🔗 Connection: अगले अनुभाग में श्लोकानाम् अन्वय एवं व्याकरण पर चर्चा होगी, जिससे श्लोकों के शब्दों का क्रम और व्याकरणिक विश्लेषण समझा जाएगा।
Table on page 3 (21×4)
| प्रकुप्यति | - अतिकोपं करोति | - अत्यधिक क्रोध करता है | - Gets very angry |
|---|---|---|---|
| ध्रुवं | - निश्चितम् | - निश्चित रूप से | - Certainly |
| अपगमे | - समाप्ते | - समाप्त होने पर | - At the end |
| प्रसीदति | - प्रसन्न: भवति | - प्रसन्न होता है | - Appease |
| अकारणद्वेषि मनः | - अकारणं द्वेषं करोति | - अकारण ही द्वेष करनेवाला मन | - Mind which holds enemity without reason |
| परितोषचिष्यति | - परितोषं दास्यति | - सन्तुष्ट करेगा | - Will satisfy |
| उद्दीरितः | - उक्त:, कथित: | - कहा हुआ | - Said/told |
| गृह्यते | - प्राप्यते | - प्राप्त किया जाता है | - Accepted |
| हया: | - अश्वा: | - घोड़े | - Horses |
| नागा: | - हस्तिन:, गजा: | - हाथी | - Elephants |
| ऊहति | - निर्धार्यति | - अंदाजा लगाता है | - Assumes |
| इद्भितज्ञानफला: | - इद्भितं ज्ञानम्, इद्भितज्ञानमेव फलं यस्याः ताः | - सद्भेतजन्य ज्ञान रूपी फलं वाले | - Which under stand by indications |
| पण्डितः | - विद्वान्, बुद्धिमान् | - बुद्धिमान् | - Scholar |
| वह्निः | - अग्निः | - आग | - Fire |
| दहते | - ज्वालयति | - जलाता है | - Burns |
| अनुब्रजन्ति | - पश्चात् गच्छन्ति | - पीछे-पीछे जाते हैं, अनुसरण करते हैं | - Follows |
| तुरगाः | - अश्वाः | - घोड़े | - Horses |
| सुधियः | - विद्वांसः | - विद्वान्, मनीषी | - Learned People |
| व्यसनेषु | - दुर्व्यसनेषु | - बुरी आदतों में | - In addictions |
| सख्यम् | - मैत्री | - मित्रता | - Friendship |
| सेवितव्यः | - आश्रयितव्यः | - आश्रय लेने योग्य | - Should be taken as a shelter |
Table on page 4 (6×7)
| दैवात् | - | भाग्यात् | - | भाग्य से | - | By luck |
|---|---|---|---|---|---|---|
| निवार्यते | - | निवारणं क्रियते | - | रोका जाता है | - | Being prevented |
| अमन्त्रम् | - | न मन्त्रं, अमन्त्रमश्रं इति | - | मन्त्रहीन | - | Powerless word |
| मन्त्र: | - | मननयोग्य: | - | मनन योग्य/सारवान् | - | Hymn |
| मूलम् | - | पादपानाम् अधोभाग: | - | जड् | - | Root |
| औषधम् | - | औषधि+अण्
Table on page 4 (1×7)
| सविता | - | सूर्य: | - | सूर्य | - | The sun |
|---|---|---|---|---|---|---|
| खर: | - | गर्दभ:, रासभ: | - | गधा | - | Donkey |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. एकपदेन उत्तरं लिखत— (क) मनुष्याणां महान् रिपुः कः? (ख) गुणी किं वेत्ति? (ग) केषां सम्पत्तौ च विपत्तौ च महताम् एकरूपता? (घ) पशुना अपि कौद्दृशः गृह्यते? (ङ) उदयसमये अस्तसमये च कः रक्तः भवति?
उत्तर: (क) मनुष्याणां महान् रिपुः क्रोधः। (ख) गुणी गुणं जानाति। (ग) महताम् सम्पत्तौ च विपत्तौ च एकरूपता। (घ) पशुना अपि कौद्दृशः गृह्यते। (ङ) उदयसमये अस्तसमये च रक्तः भवति।
2. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत— (क) केन समः बन्धुः नास्ति? (ख) वसन्तस्य गुणं कः जानाति? (ग) बुद्धयः कौद्दृश्यः भवन्ति? (घ) नराणां प्रथमः शत्रुः कः? (ङ) सुधियः सख्यं केन सह भवति? (च) अस्माभिः कौद्दृशः वृक्षः सेवितव्यः?
उत्तर: (क) समः बन्धुः नास्ति केन? - बुद्धिभ्यः। (ख) वसन्तस्य गुणं कः जानाति? - गुणी जनः। (ग) बुद्धयः कौद्दृश्यः भवन्ति? - कौद्दृश्याः। (घ) नराणां प्रथमः शत्रुः कः? - क्रोधः। (ङ) सुधियः सख्यं केन सह भवति? - सुधियः सख्यं गुणिभ्यः सह भवति। (च) अस्माभिः कौद्दृशः वृक्षः सेवितव्यः? - समानशीलः वृक्षः।
3. अधोलिखिते अन्वयद्र्ये रिक्तस्थानपूर्ति कुरुत— (क) यः ... उद्दिश्य प्रकुप्यति तस्य ... सः ध्रुवं प्रसीदति। यस्य मनः अकारणद्रेषि अस्ति, ... तं कथं परितोष्यिष्यति? (ख) ... संसारे खलु ... निरर्थकम् नास्ति। अश्वः चेत् ... वीरः, खरः ... वहने (वीरः) (भवति)।
उत्तर: (क) यः निमित्तम् उद्दिश्य प्रकुप्यति तस्यापगमे सः ध्रुवं प्रसीदति। यस्य मनः अकारणद्रेषि अस्ति, स तं कथं परितोष्यिष्यति? (ख) संसारे खलु निरर्थकम् नास्ति। अश्वः चेत् वीरः, खरः वहने (वीरः) भवति।
4. अधोलिखितानां वाक्यानां कृते समानार्थकान् श्लोकांशान् पाठात् चित्वा लिखत— (क) विद्वान् स एव भवति यः अनुक्तम् अपि तथ्यं जानाति। (ख) मनुष्यः समस्वभावैः जनैः सह मित्रतां करोति। (ग) परिश्रमं कुर्वाण: नर: कदापि दु:खं न प्राप्नोति। (घ) महान्त: जना: सर्वदैव समप्रकृतय: भवन्ति।
उत्तर: (क) विद्वान् स एव भवति यः अनुक्तम् अपि तथ्यं जानाति। (ख) मनुष्यः समस्वभावैः जनैः सह मित्रतां करोति। (ग) परिश्रमं कुर्वाण: नर: कदापि दु:खं न प्राप्नोति। (घ) महान्त: जना: सर्वदैव समप्रकृतय: भवन्ति।
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