Sanskritकक्षा 10बुद्धिर्बलवती सदाहिंदी

बुद्धिर्बलवती सदा | Class 10 Sanskrit Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 4 मिनट का पठन

बुद्धिर्बलवती सदा | Class 10 Sanskrit Notes

बुद्धिर्बलवती सदा – this guide gives you a concise, exam-ready overview of बुद्धिर्बलवती सदा from Class 10 Sanskrit, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

हनू (मारना) धातो: रूपम्

इस भाग में संस्कृत के 'हन' धातु के विभिन्न कालों में रूपों का विस्तार से अध्ययन किया गया है। 'हन' का अर्थ है 'मारना'। यहाँ लट् लकार (वर्तमान काल), लृट् लकार (भविष्यत् काल), लङ् लकार (अतीत काल), लोट् लकार (आज्ञार्थक रूप), विधिलिङ्लकार (निषेधार्थक रूप) के रूपों को तालिका के माध्यम से समझाया गया है।

लट् लकार में प्रथम पुरुष एकवचन 'हन्ति', द्विवचन 'हतः', बहुवचन 'ध्वन्ति' हैं। लृट् लकार में प्रथम पुरुष एकवचन 'हनिष्यति', द्विवचन 'हनिष्यतः', बहुवचन 'हनिष्यन्ति' हैं। लङ् लकार में मध्यम पुरुष एकवचन 'अहन', द्विवचन 'अहताम्', बहुवचन 'अघ्नन्' हैं।

आज्ञार्थक रूपों में मध्यम पुरुष एकवचन 'हनतु', द्विवचन 'हताम्', बहुवचन 'घ्नन्तु' हैं। विधिलिङ्लकार में मध्यम पुरुष एकवचन 'हन्यात्', द्विवचन 'हन्याताम्', बहुवचन 'हन्यु:' हैं।

इन रूपों को जानना संस्कृत भाषा के व्याकरण में अत्यंत आवश्यक है क्योंकि ये क्रियाओं के सही प्रयोग में सहायक होते हैं।

📊 Diagram: Table on page 8 (4×4); Table on page 9 (4×4); Table on page 9 (4×4)

🧪 Activity: ‘हन’ धातु के विभिन्न कालों के रूपों का अभ्यास करना।

🔗 Connection: यह व्याकरणिक ज्ञान संस्कृत भाषा के अन्य पाठों में क्रियाओं के प्रयोग में सहायक होगा।

Table on page 8 (4×4)

एकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथमपुरुष:हन्तिहत:ध्वन्ति
मध्यमपुरुष:हन्सिहथ:हथ
उत्तमपुरुष:हन्मिहन्व:हन्म:

Table on page 8 (4×4)

एकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथमपुरुष:हनिष्यतिहनिष्यत:हनिष्यन्ति
मध्यमपुरुष:हनिष्यसिहनिष्यथ:हनिष्यथ
उत्तमपुरुष:हनिष्यामिहनिष्याव:हनिष्याम:

Table on page 9 (4×4)

प्रथमपुरुष:एकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
मध्यमपुरुष:अहन्अहताम्अघ्नन्
उत्तमपुरुष:अह:अहतम्अहत
अहनम्अहन्वअहन्म

Table on page 9 (4×4)

प्रथमपुरुष:एकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
मध्यमपुरुष:हन्तुहताम्घ्नन्तु
उत्तमपुरुष:जहिहतम्हत
हनानिहनावहनाम

Table on page 9 (4×4)

प्रथमपुरुष:एकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
मध्यमपुरुष:हन्यात्हन्याताम्हन्यु:
उत्तमपुरुष:हन्या:हन्यातम्हन्यात
हन्याम्हन्यावहन्याम

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. एकपदेन उत्तरं लिखत- (क) बुद्धिमती कुत्र व्याघ्रं ददर्श? (ख) भामिनी कया विमुक्ता? (ग) सर्वदा सर्वकार्येषु का बलवती? (घ) व्याघ्र: कस्मात् बिभेति? (ङ) प्रत्युत्पन्नमति: बुद्धिमती किम् आक्षिपन्ती उवाच?

उत्तर: (क) बुद्धिमती वनमार्गे व्याघ्रं ददर्श। (ख) भामिनी बुद्धिमतीया विमुक्ता। (ग) बुद्धिमती सर्वदा सर्वकार्येषु बलवती। (घ) व्याघ्र: भयात् बिभेति। (ङ) प्रत्युत्पन्नमति: बुद्धिमतीं शृंगालं आक्षिपन्ती उवाच।

2. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत- (क) बुद्धिमती केन उपेता पितृगृहं प्रति चलिता? (ख) व्याघ्र: किं विचार्य पलायित:? (ग) लोके महतो भयात् क: मुच्यते? (घ) जम्बुक: किं वदन् व्याघ्रस्य उपहासं करोति? (ङ) बुद्धिमती शृंगालं किम् उक्तवती?

उत्तर: (क) बुद्धिमती पुत्रद्व्येन उपेता पितृगृहं प्रति चलिता। (ख) व्याघ्र: व्याघ्रमारी इयमिति मत्वा पलायित:। (ग) महतो भयात् बुद्धिमती मुच्यते। (घ) जम्बुक: व्याघ्रस्य उपहासं करोति यत् व्याघ्र: भयाकुलचित्त: अस्ति। (ङ) बुद्धिमती शृंगालं प्रत्युत्पन्नमति: आक्षिपन्ती उवाच।

3. स्थूलपदमाधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत- (क) तत्र राजसिंहो नाम राजपुत्र: वसति स्म। (ख) बुद्धिमती चपेटया पुत्रौ प्रहतवती। (ग) व्याघ्रं दृष्ट्वा धूर्त: शृंगाल: अवदत्। (घ) त्वं मानुषात् बिभेषि। (ङ) पुरा त्वया महां व्याघ्रत्रयं दत्तम्।

उत्तर: (क) राजसिंहो कुत्र वसति? (ख) बुद्धिमती किम् अकुर्वत पुत्रयोः? (ग) धूर्त: शृंगाल: व्याघ्रं दृष्ट्वा किं अवदत्? (घ) त्वं कस्यात् बिभेषि? (ङ) त्वया किम् दत्तम्?

प्रत्येक वाक्य से प्रश्न बनाए गए हैं, जो पाठ के अनुसार सही हैं।

4. अधोलिखितानि वाक्यानि घटनाक्रमानुसारेण योजयत- (क) व्याघ्र: व्याघ्रमारी इयमिति मत्वा पलायित:। (ख) प्रत्युत्पन्नमति: सा शृंगालम् आक्षिपन्ती उवाच। (ग) जम्बुककृतोत्साह: व्याघ्र: पुन: काननम् आगच्छत्। (घ) मार्गे सा एकं व्याघ्रम् अपश्यत्। (ङ) व्याघ्रं दृष्ट्वा सा पुत्रौ ताडयन्ती उवाच-अधुना एकमेव व्याघ्र: विभज्य भुज्यताम्। (च) बुद्धिमती पुत्रद्व्येन उपेता पितुर्गृहं प्रति चलिता। (छ) ‘त्वं व्याघ्रत्र्यम् आनेतुं’ प्रतिज्ञाय एकमेव आनीतवान्। (ज) गलबद्धश्रृंगालक: व्याघ्र: पुन: पलायित:

उत्तर: घटनाक्रम: 1. मार्गे सा एकं व्याघ्रम् अपश्यत्। 2. व्याघ्र: व्याघ्रमारी इयमिति मत्वा पलायित:। 3. गलबद्धश्रृंगालक: व्याघ्र: पुन: पलायित:। 4. प्रत्युत्पन्नमति: सा शृंगालम् आक्षिपन्ती उवाच। 5. व्याघ्रं दृष्ट्वा सा पुत्रौ ताडयन्ती उवाच-अधुना एकमेव व्याघ्र: विभज्य भुज्यताम्। 6. बुद्धिमती पुत्रद्व्येन उपेता पितुर्गृहं प्रति चलिता। 7. ‘त्वं व्याघ्रत्र्यम् आनेतुं’ प्रतिज्ञाय एकमेव आनीतवान्। 8. जम्बुककृतोत्साह: व्याघ्र: पुन: काननम् आगच्छत्।

इस अध्याय में महारत हासिल करें

पूरा बुद्धिर्बलवती सदा अध्याय — इंटरैक्टिव नोट्स, चित्र, हल किए गए प्रश्न, पोल्स और मुफ़्त अभ्यास क्विज़ — ConceptScroll ऐप में।

ConceptScroll में खोलें →

ConceptScroll के साथ स्मार्ट पढ़ें

रोज़ाना एनसीईआरटी रील्स, एआई डाउट सॉल्विंग और अध्याय क्विज़ — सब मुफ़्त।

मुफ़्त सीखना शुरू करें
#cbse notes#class 10#ncert#sanskrit

और पढ़ें