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जल संसाधन | Class 10 Social Science Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 5 मिनट का पठन

जल संसाधन | Class 10 Social Science Notes

जल संसाधन – this guide gives you a concise, exam-ready overview of जल संसाधन from Class 10 Social Science, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

वर्षा जल संग्रहण

वर्षा जल संग्रहण एक प्राचीन और प्रभावी जल संरक्षण तकनीक है जिसमें वर्षा के पानी को संचित कर भविष्य में उपयोग के लिए रखा जाता है। भारत के विभिन्न भागों में स्थानीय पारिस्थितिकी और जल आवश्यकताओं के अनुसार वर्षा जल संग्रहण के कई पारंपरिक तरीके विकसित हुए हैं।

पश्चिमी हिमालय में 'गुल' या 'कुल' जैसी वाहिकाएँ बनाकर नदी के जल को खेतों में सिंचाई के लिए लाया जाता था। राजस्थान के शुष्क क्षेत्रों में 'खादीन' और 'जोहड़' जैसे जल संचयन तंत्र प्रचलित थे। यहाँ भूमिगत टाँका बनाए जाते थे जो छतों से वर्षा जल को पाइप के माध्यम से एकत्रित करते थे। वर्षा के पहले पानी को छत और पाइपों की सफाई के लिए उपयोग किया जाता था, उसके बाद का जल संग्रहित किया जाता था।

यह जल अगली वर्षा ऋतु तक संग्रहित रहता था और शुष्क मौसम में पीने और सिंचाई के लिए उपयोग होता था। वर्षा जल संग्रहण से जल संकट कम होता है और जल का विवेकपूर्ण उपयोग सुनिश्चित होता है। आज भी कई ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में वर्षा जल संग्रहण प्रचलित है।

कुछ राज्यों जैसे तमिलनाडु में हर घर में वर्षा जल संग्रहण तंत्र बनाना अनिवार्य है। इस तकनीक से जल संरक्षण के साथ-साथ भूजल स्तर में वृद्धि होती है और जल की उपलब्धता बढ़ती है।

📊 Diagram: (अ) हैंडपंप के माध्यम से पुनर्भरण; चित्र 3.3; (ब) बेकार पड़े कुएँ के माध्यम से पुनर्भरण; एक कुल से वर्तुल ग्रामीण तालाब बनता है (काजा गाँव के चित्र के अनुसार), जिससे जरूरत पड़ने पर पानी छोड़ सकते हैं।; छतजल संग्रहण धार के सभी शहरों और ग्रामों में प्रचलित था। वर्षा जल जो कि घरों की ढालू छतों पर गिरता है, उसे पाइप द्वारा भूमिगत टाँका के अंदर ले जाते हैं (भूमि में गोल छिद्र) जो मुख्य घर अथवा आँगन में बना होता है।

🧪 Activity: अपने क्षेत्र में पाए जाने वाले अन्य वर्षाजल संग्रहण तंत्रों के बारे में पता लगाएँ।

🔗 Connection: यह अनुभाग वर्षा जल संग्रहण के महत्व को समझाने के बाद जल संरक्षण के अन्य आधुनिक तरीकों जैसे बाँस ड्रिप सिंचाई प्रणाली की चर्चा करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. बहुवैकल्पिक प्रश्न (i) नीचे दी गई सूचना के आधार पर स्थितियों को ‘जल की कमी से प्रभावित’ या ‘जल की कमी से अप्रभावित’ में वर्गीकृत कीजिए। (क) अधिक वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्र (ख) अधिक वर्षा और अधिक जनसंख्या वाले क्षेत्र (ग) अधिक वर्षा वाले परंतु अत्यधिक प्रदूषित जल क्षेत्र (घ) कम वर्षा और कम जनसंख्या वाले क्षेत्र (ii) निम्नलिखित में से कौन-सा वक्तव्य बहुउद्देशीय नदी परियोजनाओं के पक्ष में दिया गया तर्क नहीं है? (क) बहुउद्देशीय परियोजनाएँ उन क्षेत्रों में जल लाती है जहाँ जल की कमी होती है। (ख) बहुउद्देशीय परियोजनाएँ जल बहाव की नियंत्रित करके बाढ़ पर काबू पाती है। (ग) बहुउद्देशीय परियोजनाओं से बृहत् स्तर पर विस्थापन होता है और आजीविका खत्म होती है। (घ) बहुउद्देशीय परियोजनाएँ हमारे उद्योग और घरों के लिए विद्युत पैदा करती हैं। (iii) यहाँ कुछ गलत वक्तव्य दिए गए हैं। इसमें गलती पहचाने और दोबारा लिखें। (क) शहरों की बढ़ती संख्या, उनकी विशालता और सघन जनसंख्या तथा शहरी जीवन शैली ने जल संसाधनों के सही उपयोग में मदद की है। (ख) नदियों पर बाँध बनाने और उनको नियंत्रित करने से उनका प्राकृतिक बहाव और तलछट बहाव प्रभावित नहीं होता। (ग) आज राजस्थान में इंदिरा गांधी नहर से उपलब्ध पेयजल के बावजूद छत वर्षा जल संग्रहण लोकप्रिय हो रहा है।

(i) वर्गीकरण:

  • जल की कमी से प्रभावित: (ख) अधिक वर्षा और अधिक जनसंख्या वाले क्षेत्र, (ग) अधिक वर्षा वाले परंतु अत्यधिक प्रदूषित जल क्षेत्र
  • जल की कमी से अप्रभावित: (क) अधिक वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्र, (घ) कम वर्षा और कम जनसंख्या वाले क्षेत्र

व्याख्या: अधिक वर्षा वाले क्षेत्र में जल प्रचुर मात्रा में होता है, अतः जल की कमी नहीं होती। परंतु यदि जनसंख्या अधिक हो या जल प्रदूषित हो तो जल की कमी हो सकती है। कम वर्षा और कम जनसंख्या वाले क्षेत्र में जल की मांग कम होती है, इसलिए जल की कमी कम होती है।

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए। (i) व्याख्या करें कि जल किस प्रकार नवीकरण योग्य संसाधन है? (ii) जल दुर्लभता क्या है और इसके मुख्य कारण क्या हैं? (iii) बहुउद्देशीय परियोजनाओं से होने वाले लाभ और हानियों की तुलना करें।

(i) जल नवीकरण योग्य संसाधन है क्योंकि यह प्रकृति में लगातार वर्षा, नदियों, झरनों आदि के माध्यम से पुनः प्राप्त होता रहता है। जल चक्र के कारण जल का पुनः निर्माण होता है, इसलिए इसे नवीकरण योग्य संसाधन कहा जाता है।

(ii) जल दुर्लभता का अर्थ है जल की कमी या उपलब्ध जल संसाधनों की अपर्याप्तता। इसके मुख्य कारण हैं - बढ़ती जनसंख्या, जल प्रदूषण, जल का अपव्यय, जल स्रोतों का अत्यधिक दोहन, और जल संरक्षण की कमी।

(iii) बहुउद्देशीय परियोजनाओं के लाभ:

  • जल की उपलब्धता बढ़ती है
  • बाढ़ नियंत्रण होता है
  • विद्युत
3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 120 शब्दों में दीजिए। (i) राजस्थान के अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में वर्षा जल संग्रहण किस प्रकार किया जाता है? व्याख्या कीजिए। (ii) परंपरागत वर्षा जल संग्रहण की पद्धतियों को आधुनिक काल में अपना कर जल संरक्षण एवं भंडारण किस प्रकार किया जा रहा है।

(i) राजस्थान के अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में वर्षा जल संग्रहण के लिए विभिन्न पारंपरिक और आधुनिक उपाय अपनाए जाते हैं। इनमें छत वर्षा जल संग्रहण, तालाबों और बावड़ियों का निर्माण, नालों में जल संचयन, और भूमिगत जल पुनर्भरण शामिल हैं। छत वर्षा जल संग्रहण में छत पर गिरने वाले वर्षा जल को टैंकों में संग्रहित किया जाता है, जिससे पेयजल की उपलब्धता बढ़ती है। तालाबों और बावड़ियों में वर्षा जल जमा कर सिंचाई और घरेलू उपयोग के लिए रखा जाता है।

(ii) परंपरागत वर्षा जल संग्रहण की पद्धतियों को आधुनिक तकनीकों के साथ

पृथ्वी के कुल जल भंडार में से अलवणीय जल का अनुपात क्यों कम है और यह जल मानव जीवन के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

अलवणीय जल पृथ्वी के कुल जल भंडार में बहुत कम होता है क्योंकि अधिकांश जल समुद्री जल होता है जो लवणीय होता है। अलवणीय जल सतही जल स्रोतों जैसे नदियाँ, झीलें और भूमिगत जल से प्राप्त होता है जो मानव जीवन के लिए पीने, सिंचाई और उद्योगों में आवश्यक होता है।

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