जल संसाधन
जल संसाधन — अध्ययन नोट्स
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जल दुर्लभता और जल संरक्षण एवं प्रबंधन की आवश्यकता
व्याख्याजल दुर्लभता और जल संरक्षण एवं प्रबंधन की आवश्यकता
जल संसाधन हमारे जीवन का आधार हैं। पृथ्वी का लगभग तीन-चौथाई भाग जल से ढका हुआ है, लेकिन उसमें से केवल अलवणीय जल का ही उपयोग मानव जीवन के लिए संभव है। यह अलवणीय जल सतही जल स्रोतों जैसे नदियाँ, झीलें, तालाब और भूमिगत जल स्रोतों से प्राप्त होता है, जिनका नवीकरण जलीय चक्र द्वारा होता रहता है। जलीय चक्र में जल लगातार परिवर्तित होकर नवीनीकृत होता है, जिससे जल संसाधन नवीकरणीय होते हैं। फिर भी, विश्व के कई देशों और भारत के विभिन्न भागों में जल की कमी का सामना करना पड़ता है। यह जल दुर्लभता मुख्यतः जल के अतिशोषण, बढ़ती जनसंख्या, जल प्रदूषण, जल संसाधनों का असमान वितरण, और असमान वर्षा वितरण के कारण होती है। भारत में कुछ क्षेत्र जैसे राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्र जल की कमी के लिए प्रसिद्ध हैं। इसके अलावा, शहरीकरण और औद्योगीकरण के कारण जल की मांग बढ़ी है, जिससे जल संसाधनों पर दबाव बढ़ा है। जल दुर्लभता का प्रभाव कृषि, उद्योग, घरेलू उपयोग और पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ता है। सिंचित कृषि में जल की अधिकतम खपत होती है, इसलिए शुष्क कृषि तकनीकों और सूखा प्रतिरोधी फसलों के विकास की आवश्यकता है। जल संरक्षण और प्रबंधन के बिना जल संकट गहरा होता जाएगा, जिससे खाद्यान्न सुरक्षा, जीवनयापन और पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव पड़ेंगे। इसलिए जल संरक्षण, विवेकपूर्ण उपयोग और समुचित प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है ताकि जल संसाधनों का सतत उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
- पृथ्वी का लगभग तीन-चौथाई भाग जल से ढका है, लेकिन अलवणीय जल की मात्रा सीमित है।
- जल संसाधन जलीय चक्र द्वारा नवीनीकृत होते हैं।
- जल दुर्लभता के मुख्य कारण हैं: बढ़ती जनसंख्या, जल प्रदूषण, असमान वितरण और अतिशोषण।
- शहरीकरण और औद्योगीकरण से जल की मांग बढ़ी है।
- सिंचित कृषि में जल की खपत सबसे अधिक होती है।
- जल संरक्षण और प्रबंधन से जल संकट को कम किया जा सकता है।
- 📌 जल दुर्लभता: जल की कमी या उपलब्धता में असंतुलन की स्थिति।
- 📌 अलवणीय जल: ऐसा जल जिसमें लवणों की मात्रा कम हो, जो मानव उपयोग के लिए उपयुक्त हो।
- 📌 जलीय चक्र: जल का निरंतर परिवर्तन और नवीनीकरण प्रक्रिया।
बहु-उद्देशीय नदी परियोजनाएँ और समन्वित जल संसाधन प्रबंधन
व्याख्याबहु-उद्देशीय नदी परियोजनाएँ और समन्वित जल संसाधन प्रबंधन
प्राचीन भारत में जल संरक्षण और सिंचाई के लिए बाँध, जलाशय, झीलों के तटबंध और नहरों जैसी जलीय कृतियाँ बनाई गई थीं। उदाहरण के लिए, ईसा से एक शताब्दी पहले इलाहाबाद के नजदीक शिंगवेरा में गंगा नदी की बाढ़ के जल को संरक्षित करने के लिए जल संग्रहण तंत्र विकसित किया गया था। मौर्य काल में बड़े पैमाने पर सिंचाई तंत्रों का निर्माण हुआ। मध्यकाल में दिल्ली में हौज खास जैसे जलाशय बनाए गए। आधुनिक भारत में भी इस परंपरा को जारी रखते हुए नदियों के बेसिनों में बड़े बाँध बनाए गए हैं। बाँधों का उद्देश्य केवल सिंचाई नहीं, बल्कि विद्युत उत्पादन, घरेलू और औद्योगिक जल आपूर्ति, बाढ़ नियंत्रण, मनोरंजन, नौचालन और मछली पालन भी होता है। इसलिए इन्हें बहुउद्देशीय परियोजनाएँ कहा जाता है। बाँधों से जल का संचयन होता है, जिससे शुष्क क्षेत्रों में सिंचाई संभव होती है और बाढ़ नियंत्रण में मदद मिलती है। उदाहरण के लिए, सतलुज-ब्यास बेसिन की भाखड़ा-नांगल परियोजना और महानदी बेसिन की हीराकुड परियोजना। हालांकि, बाँधों के निर्माण से नदियों के प्राकृतिक बहाव में बाधा आती है, तलछट का जमाव होता है, जलीय जीवों के आवास प्रभावित होते हैं, और बाढ़ के मैदानों की वनस्पति जलमग्न हो जाती है। इसके अलावा, बड़े बाँधों के कारण विस्थापन और आजीविका पर प्रभाव भी पड़ता है। इसलिए, बहुउद्देशीय परियोजनाओं का समन्वित प्रबंधन आवश्यक है ताकि इनके लाभों के साथ-साथ पर्यावरणीय और सामाजिक हानियों को भी कम किया जा सके।
- प्राचीन भारत में जल संरक्षण के लिए बाँध और जलाशय बनाए गए।
- आधुनिक बाँध बहुउद्देशीय होते हैं – सिंचाई, विद्युत, जल आपूर्ति, बाढ़ नियंत्रण।
- भाखड़ा-नांगल और हीराकुड परियोजनाएँ प्रमुख उदाहरण हैं।
- बाँधों से नदियों के प्राकृतिक बहाव और तलछट प्रवाह प्रभावित होते हैं।
- बाँधों के कारण विस्थापन और पारिस्थितिकी पर प्रभाव पड़ता है।
- समन्वित जल संसाधन प्रबंधन से इन समस्याओं का समाधान संभव है।
- 📌 बाँध: जल को रोकने, संचय करने और नियंत्रित करने के लिए बनाई गई संरचना।
- 📌 बहुउद्देशीय परियोजना: ऐसी परियोजना जो सिंचाई, विद्युत उत्पादन, जल आपूर्ति आदि के लिए जल का उपयोग करती है।
- 📌 तलछट: नदी या जलाशय में जमा होने वाली मिट्टी और कण।
बहुउद्देशीय परियोजनाओं के लाभ और हानि
व्याख्याबहुउद्देशीय परियोजनाओं के लाभ और हानि
बहुउद्देशीय परियोजनाएँ जल संसाधनों के संरक्षण और प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ये परियोजनाएँ जल को नियंत्रित कर सिंचाई, विद्युत उत्पादन, जल आपूर्ति और बाढ़ नियंत्रण जैसे कई उद्देश्यों को पूरा करती हैं। इससे कृषि उत्पादन बढ़ता है, उद्योगों
अभ्यास प्रश्न — जल संसाधन
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.1. बहुवैकल्पिक प्रश्न (i) नीचे दी गई सूचना के आधार पर स्थितियों को ‘जल की कमी से प्रभावित’ या ‘जल की कमी से अप्रभावित’ में वर्गीकृत कीजिए। (क) अधिक वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्र (ख) अधिक वर्षा और अधिक जनसंख्या वाले क्षेत्र (ग) अधिक वर्षा वाले परंतु अत्यधिक प्रदूषित जल क्षेत्र (घ) कम वर्षा और कम जनसंख्या वाले क्षेत्र (ii) निम्नलिखित में से कौन-सा वक्तव्य बहुउद्देशीय नदी परियोजनाओं के पक्ष में दिया गया तर्क नहीं है? (क) बहुउद्देशीय परियोजनाएँ उन क्षेत्रों में जल लाती है जहाँ जल की कमी होती है। (ख) बहुउद्देशीय परियोजनाएँ जल बहाव की नियंत्रित करके बाढ़ पर काबू पाती है। (ग) बहुउद्देशीय परियोजनाओं से बृहत् स्तर पर विस्थापन होता है और आजीविका खत्म होती है। (घ) बहुउद्देशीय परियोजनाएँ हमारे उद्योग और घरों के लिए विद्युत पैदा करती हैं। (iii) यहाँ कुछ गलत वक्तव्य दिए गए हैं। इसमें गलती पहचाने और दोबारा लिखें। (क) शहरों की बढ़ती संख्या, उनकी विशालता और सघन जनसंख्या तथा शहरी जीवन शैली ने जल संसाधनों के सही उपयोग में मदद की है। (ख) नदियों पर बाँध बनाने और उनको नियंत्रित करने से उनका प्राकृतिक बहाव और तलछट बहाव प्रभावित नहीं होता। (ग) आज राजस्थान में इंदिरा गांधी नहर से उपलब्ध पेयजल के बावजूद छत वर्षा जल संग्रहण लोकप्रिय हो रहा है।
उत्तर:
(i) वर्गीकरण: - जल की कमी से प्रभावित: (ख) अधिक वर्षा और अधिक जनसंख्या वाले क्षेत्र, (ग) अधिक वर्षा वाले परंतु अत्यधिक प्रदूषित जल क्षेत्र - जल की कमी से अप्रभावित: (क) अधिक वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्र, (घ) कम वर्षा और कम जनसंख्या वाले क्षेत्र व्याख्या: अधिक वर्षा वाले क्षेत्र में जल प्रचुर मात्रा में होता है, अतः जल की कमी नहीं होती। परंतु यदि जनसंख्या अधिक हो या जल प्रदूषित हो तो जल की कमी हो सकती है। कम वर्षा और कम जनसंख्या वाले क्षेत्र में जल की मांग कम होती है, इसलिए जल की कमी कम होती है। (ii) बहुउद्देशीय परियोजनाओं के पक्ष में न होने वाला तर्क: (ग) बहुउद्देशीय परियोजनाओं से बृहत् स्तर पर विस्थापन होता है और आजीविका खत्म होती है। यह तर्क बहुउद्देशीय परियोजनाओं के खिलाफ है क्योंकि यह परियोजनाओं के नकारात्मक प्रभावों को दर्शाता है। (iii) गलत वक्तव्य सुधार: (क) गलत: "शहरों की बढ़ती संख्या, उनकी विशालता और सघन जनसंख्या तथा शहरी जीवन शैली ने जल संसाधनों के सही उपयोग में मदद की है।" सही: "शहरों की बढ़ती संख्या, उनकी विशालता और सघन जनसंख्या तथा शहरी जीवन शैली ने जल संसाधनों के सही उपयोग में बाधा डाली है।" (ख) गलत: "नदियों पर बाँध बनाने और उनको नियंत्रित करने से उनका प्राकृतिक बहाव और तलछट बहाव प्रभावित नहीं होता।" सही: "नदियों पर बाँध बनाने और उनको नियंत्रित करने से उनका प्राकृतिक बहाव और तलछट बहाव प्रभावित होता है।" (ग) सही वक्तव्य है, अतः कोई सुधार आवश्यक नहीं।
व्याख्या:
प्रत्येक उपप्रश्न के लिए विस्तार से उत्तर दिया गया है। (i) में जल की कमी से प्रभावित और अप्रभावित क्षेत्रों का वर्गीकरण किया गया है। (ii) में बहुउद्देशीय परियोजनाओं के पक्ष और विपक्ष के तर्कों की पहचान की गई है। (iii) में दिए गए गलत वक्तव्यों की पहचान कर उन्हें सही रूप में लिखा गया है।
Q2.2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए। (i) व्याख्या करें कि जल किस प्रकार नवीकरण योग्य संसाधन है? (ii) जल दुर्लभता क्या है और इसके मुख्य कारण क्या हैं? (iii) बहुउद्देशीय परियोजनाओं से होने वाले लाभ और हानियों की तुलना करें।
उत्तर:
(i) जल नवीकरण योग्य संसाधन है क्योंकि यह प्रकृति में लगातार वर्षा, नदियों, झरनों आदि के माध्यम से पुनः प्राप्त होता रहता है। जल चक्र के कारण जल का पुनः निर्माण होता है, इसलिए इसे नवीकरण योग्य संसाधन कहा जाता है। (ii) जल दुर्लभता का अर्थ है जल की कमी या उपलब्ध जल संसाधनों की अपर्याप्तता। इसके मुख्य कारण हैं - बढ़ती जनसंख्या, जल प्रदूषण, जल का अपव्यय, जल स्रोतों का अत्यधिक दोहन, और जल संरक्षण की कमी। (iii) बहुउद्देशीय परियोजनाओं के लाभ: - जल की उपलब्धता बढ़ती है - बाढ़ नियंत्रण होता है - विद्युत उत्पादन होता है - सिंचाई के लिए जल उपलब्ध होता है हानियाँ: - विस्थापन और सामाजिक समस्याएँ - पर्यावरणीय प्रभाव - तलछट का जमाव और नदी के प्राकृतिक प्रवाह में बाधा - आर्थिक भार बढ़ना
व्याख्या:
प्रत्येक प्रश्न का संक्षिप्त और स्पष्ट उत्तर दिया गया है। जल के नवीकरण योग्य होने का कारण जल चक्र है। जल दुर्लभता के कारणों में मानव गतिविधियाँ प्रमुख हैं। बहुउद्देशीय परियोजनाओं के लाभ और हानियों की तुलना से इनके सकारात्मक और नकारात्मक पहलुओं का ज्ञान होता है।
Q3.3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 120 शब्दों में दीजिए। (i) राजस्थान के अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में वर्षा जल संग्रहण किस प्रकार किया जाता है? व्याख्या कीजिए। (ii) परंपरागत वर्षा जल संग्रहण की पद्धतियों को आधुनिक काल में अपना कर जल संरक्षण एवं भंडारण किस प्रकार किया जा रहा है।
उत्तर:
(i) राजस्थान के अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में वर्षा जल संग्रहण के लिए विभिन्न पारंपरिक और आधुनिक उपाय अपनाए जाते हैं। इनमें छत वर्षा जल संग्रहण, तालाबों और बावड़ियों का निर्माण, नालों में जल संचयन, और भूमिगत जल पुनर्भरण शामिल हैं। छत वर्षा जल संग्रहण में छत पर गिरने वाले वर्षा जल को टैंकों में संग्रहित किया जाता है, जिससे पेयजल की उपलब्धता बढ़ती है। तालाबों और बावड़ियों में वर्षा जल जमा कर सिंचाई और घरेलू उपयोग के लिए रखा जाता है। (ii) परंपरागत वर्षा जल संग्रहण की पद्धतियों को आधुनिक तकनीकों के साथ मिलाकर जल संरक्षण किया जा रहा है। आधुनिक छत वर्षा जल संचयन प्रणालियाँ, जल पुनर्भरण संरचनाएँ, ड्रिप सिंचाई, और जल संरक्षण के लिए सरकारी योजनाएँ इस दिशा में मदद कर रही हैं। इससे जल का संरक्षण, पुनः उपयोग और भंडारण बेहतर तरीके से हो पाता है, जो जल संकट को कम करने में सहायक है।
व्याख्या:
प्रश्न (i) में राजस्थान के अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में वर्षा जल संग्रहण के पारंपरिक और आधुनिक तरीकों का वर्णन किया गया है। प्रश्न (ii) में परंपरागत पद्धतियों को आधुनिक तकनीकों के साथ जोड़कर जल संरक्षण के उपाय बताए गए हैं। दोनों उत्तरों में जल संरक्षण के महत्व और तरीकों को विस्तार से समझाया गया है।
Q4.पृथ्वी के कुल जल भंडार में से अलवणीय जल का अनुपात क्यों कम है और यह जल मानव जीवन के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर:
अलवणीय जल पृथ्वी के कुल जल भंडार में बहुत कम होता है क्योंकि अधिकांश जल समुद्री जल होता है जो लवणीय होता है। अलवणीय जल सतही जल स्रोतों जैसे नदियाँ, झीलें और भूमिगत जल से प्राप्त होता है जो मानव जीवन के लिए पीने, सिंचाई और उद्योगों में आवश्यक होता है।
व्याख्या:
अलवणीय जल मानव जीवन के लिए आवश्यक है क्योंकि यह पीने योग्य और कृषि, उद्योगों में उपयोगी होता है। पृथ्वी का तीन-चौथाई भाग जल से ढका होने के बावजूद अधिकांश जल समुद्री जल है जो लवणीय होता है। इसलिए अलवणीय जल की उपलब्धता सीमित होती है।
Q5.जल संसाधन के नवीकरणीय होने का अर्थ क्या है और जलीय चक्र इस प्रक्रिया में किस प्रकार सहायक होता है?
उत्तर:
जल संसाधन नवीकरणीय हैं क्योंकि जल जलीय चक्र के माध्यम से निरंतर परिवर्तित होकर पुनः प्राप्त होता है। जलीय चक्र में जल वाष्पीकरण, संघनन, वर्षा और सतही प्रवाह के माध्यम से सतत रूप से पुनर्भरण होता रहता है।
व्याख्या:
जल संसाधन नवीकरणीय हैं क्योंकि जल जलीय चक्र में गतिशील रहता है। वाष्पीकरण से जल वायु में जाता है, बादल बनते हैं और वर्षा के रूप में वापस धरातल पर आता है। इससे सतही और भीमजल स्रोतों का पुनर्भरण होता है।
Q6.भारत में जल दुर्लभता के मुख्य कारण क्या हैं? निम्नलिखित में से कौन सा कारण जल दुर्लभता का मुख्य कारण नहीं है?
उत्तर:
जल का असीमित और समान वितरण
व्याख्या:
जल दुर्लभता के कारणों में जल का अतिशोषण, असमान वितरण, बढ़ती जनसंख्या और शहरीकरण शामिल हैं। जल का असीमित और समान वितरण जल दुर्लभता का कारण नहीं होता बल्कि जल की उपलब्धता को बढ़ाता है।
Q7.जल की कमी के बावजूद कुछ क्षेत्रों में जल दुर्लभता क्यों होती है? इसके सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभाव क्या हो सकते हैं?
उत्तर:
कुछ क्षेत्रों में जल की मात्रा पर्याप्त होने के बावजूद जल दुर्लभता जल प्रदूषण, जल की खराब गुणवत्ता और असमान वितरण के कारण होती है। इससे मानव स्वास्थ्य प्रभावित होता है, कृषि और उद्योग प्रभावित होते हैं तथा पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचता है।
व्याख्या:
जल प्रदूषण घरेलू, औद्योगिक और कृषि अपशिष्टों से होता है जिससे जल उपयोग के योग्य नहीं रह जाता। जल की असमान उपलब्धता और गुणवत्ता की कमी से जल दुर्लभता होती है। इसका प्रभाव खाद्यान्न सुरक्षा, जीवन स्तर और पर्यावरण पर पड़ता है।
Q8.चित्र 3.1 में जल की कमी/दुर्लभता को दर्शाया गया है। इस चित्र में जल दुर्लभता के कौन-कौन से कारण और परिणाम दिखाए गए हैं? (चित्र विवरण: एक बच्चा कोलकाता में भारी वर्षा के बाद पीने के पानी के लिए जल संग्रह करता है; कश्मीर में भूकंप पीड़ित बर्फ में जल ले जाता है।)
उत्तर:
चित्र में जल दुर्लभता के कारणों में असमान जल वितरण, प्रदूषण, और प्राकृतिक आपदाएँ जैसे बाढ़ और भूकंप शामिल हैं। परिणामस्वरूप जीवन में कठिनाई, जल की उपलब्धता में कमी और स्वास्थ्य समस्याएँ दिखाई गई हैं।
व्याख्या:
चित्र में दिखाए गए दृश्य जल की कमी के विभिन्न पहलुओं को दर्शाते हैं जैसे शहरी बाढ़ के बाद जल की समस्या, प्राकृतिक आपदाओं के कारण जल संकट और जल संरक्षण की आवश्यकता। यह जल दुर्लभता के सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभावों को समझाता है।
Samkalin Bharat के सभी 7 अध्याय
Social Science · Class 10