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भीष्म साहनी – गांधी, नेहरू और यास्सेर अरफ़ात: कक्षा 12 हिंदी का महत्वपूर्ण पाठ

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 4 मिनट का पठन

भीष्म साहनी – गांधी, नेहरू और यास्सेर अरफ़ात: कक्षा 12 हिंदी का महत्वपूर्ण पाठ

भीष्म साहनी – गांधी, नेहरू और यास्सेर अरफ़ात पाठ में लेखक के जीवन के अनुभव और तीन महान नेताओं से उनकी मुलाकात का वर्णन है। यह कक्षा 12 हिंदी के छात्रों के लिए महत्वपूर्ण है जो इतिहास और साहित्य से जुड़ी जानकारी चाहते हैं।

भीष्म साहनी का जीवन परिचय

भीष्म साहनी का जन्म 1915 में रावलपिंडी (अब पाकिस्तान) में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा घर पर प्राप्त की और बाद में गवर्नमेंट कालेज, लाहौर से अंग्रेजी साहित्य में एम.ए. की डिग्री हासिल की। पंजाब विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि प्राप्त करने के बाद वे साहित्य और अध्यापन के क्षेत्र में सक्रिय हुए। विभाजन के बाद उन्होंने मुंबई में नाटक मंडली और अध्यापन कार्य किया।

वे दिल्ली विश्वविद्यालय के जाकिर हुसैन कॉलेज में स्थायी रूप से साहित्य पढ़ाने लगे। इसके अतिरिक्त, भीष्म साहनी ने रूस में विदेशी भाषा प्रकाशन गृह मास्को में अनुवादक के रूप में भी कार्य किया, जहाँ उन्होंने रूसी भाषा और साहित्य का गहरा अध्ययन किया।

‘गांधी, नेहरू और यास्सेर अरफ़ात’ का परिचय

यह पाठ भीष्म साहनी की रचना 'आज के अतीत' का एक अंश है। इसमें लेखक ने अपने जीवन के महत्वपूर्ण अनुभवों को साझा किया है, जिनमें गांधीजी, जवाहरलाल नेहरू और यास्सेर अरफ़ात से उनकी मुलाकात शामिल है।

लेखक ने गांधीजी से सेवाग्राम में मुलाकात की थी, जहाँ उन्होंने उनके व्यक्तित्व और विचारों को करीब से जाना। नेहरूजी के साथ एक भोजन के दौरान अनातोले फ्रांस की कहानी सुनना भी लेखक के अनुभवों में शामिल है। यह पाठ छात्रों को इतिहास और साहित्य के महत्वपूर्ण पहलुओं से परिचित कराता है।

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भीष्म साहनी की भाषा शैली और साहित्यिक योगदान

भीष्म साहनी की भाषा शैली सरल, प्रभावी और संवाद प्रधान है। वे उर्दू और पंजाबी शब्दों का प्रयोग करते हैं, जिससे उनकी रचनाओं में आत्मीयता और स्थानीयता का भाव आता है। उनकी भाषा में छोटे-छोटे वाक्यों का प्रयोग विषय को रोचक बनाता है।

उनकी प्रमुख कृतियों में 'तमस', 'भाग्यरेखा', 'माधवी', 'कड़ियाँ' आदि शामिल हैं। 'तमस' उपन्यास के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वे प्रगतिशील लेखक संघ से जुड़े रहे और हिंदी साहित्य में उनका योगदान अमूल्य है।

भीष्म साहनी के अनुभव: गांधीजी से मुलाकात

सेवाग्राम में गांधीजी से भीष्म साहनी की मुलाकात उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण अनुभव थी। यहाँ उन्होंने गांधीजी के सरल जीवन, विचारों और आदर्शों को करीब से देखा। गांधीजी की विचारधारा और उनके सत्याग्रह के सिद्धांतों ने लेखक को गहराई से प्रभावित किया।

यह अनुभव पाठ में लेखक की भावनाओं और उनके दृष्टिकोण को समझने में मदद करता है। इससे छात्रों को गांधीजी के व्यक्तित्व की झलक मिलती है और इतिहास के साथ साहित्य का मेल समझ आता है।

नेहरू और यास्सेर अरफ़ात के साथ संस्मरण

लेखक ने जवाहरलाल नेहरू के साथ बिताए कुछ समय का उल्लेख किया है, जिसमें नेहरू ने खाने की टेबल पर अनातोले फ्रांस की कहानी सुनाई। यह घटना नेहरू के सहज और ज्ञानवर्धक व्यक्तित्व को दर्शाती है।

यास्सेर अरफ़ात के साथ भी लेखक के अनुभव उनके व्यापक दृष्टिकोण और राजनीतिक समझ को दर्शाते हैं। ये संस्मरण छात्रों को वैश्विक और राष्ट्रीय नेताओं के बीच के संबंधों को समझने में मदद करते हैं।

भीष्म साहनी की प्रमुख कृतियाँ और पुरस्कार

भीष्म साहनी की साहित्यिक यात्रा में कई महत्वपूर्ण कृतियाँ शामिल हैं:

  • 'तमस' (उपन्यास) – साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता
  • 'भाग्यरेखा' (कहानी संग्रह)
  • 'माधवी' (उपन्यास)
  • 'कड़ियाँ' (कहानी संग्रह)
  • 'मुआवजे' (नाटक)

उनके कार्यों में सामाजिक और राजनीतिक विषयों की गहरी समझ मिलती है। हिंदी अकादमी, दिल्ली ने उन्हें शालाका सम्मान से भी सम्मानित किया।

भीष्म साहनी की भाषा और शैली का तुलनात्मक अध्ययन

भीष्म साहनी की भाषा शैली में पंजाबी और उर्दू शब्दों का समावेश उनकी रचनाओं को विशेष बनाता है। नीचे एक तुलना तालिका प्रस्तुत है:

विशेषताभीष्म साहनी की शैलीसामान्य हिंदी शैली
शब्द चयनउर्दू और पंजाबी शब्दों का प्रयोगशुद्ध हिंदी शब्दों का प्रयोग
वाक्य संरचनाछोटे, प्रभावी वाक्यकभी-कभी जटिल वाक्य
संवादजीवंत और ताजगीपूर्णऔपचारिक या वर्णनात्मक
विषयसामाजिक, राजनीतिक, मानवीयविविध विषय

यह तुलना छात्रों को भीष्म साहनी की भाषा की विशेषताओं को समझने में मदद करती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भीष्म साहनी का जन्म कब और कहाँ हुआ था?

भीष्म साहनी का जन्म 1915 में रावलपिंडी (अब पाकिस्तान) में हुआ था।

‘गांधी, नेहरू और यास्सेर अरफ़ात’ भीष्म साहनी की किस रचना का अंश है?

यह अंश भीष्म साहनी की रचना 'आज के अतीत' का हिस्सा है।

भीष्म साहनी ने गांधीजी से कहाँ मुलाकात की थी?

भीष्म साहनी ने गांधीजी से सेवाग्राम में मुलाकात की थी।

जवाहरलाल नेहरू ने खाने की टेबल पर किसकी कहानी सुनाई थी?

नेहरू ने अनातोले फ्रांस की कहानी सुनाई थी।

भीष्म साहनी के किस उपन्यास को साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला?

उनके उपन्यास 'तमस' को साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

भीष्म साहनी ने रूसी भाषा में क्या कार्य किया?

उन्होंने रूस में विदेशी भाषा प्रकाशन गृह मास्को में अनुवादक के रूप में काम किया और कई रूसी पुस्तकों का अनुवाद किया।

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