Chapter 9
Chapter 9 — अध्ययन नोट्स
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9.1 प्रस्तावना
व्याख्या9.1 प्रस्तावना
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) भारत की आर्थिक विकास प्रक्रिया में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये उद्यम स्थानीय कच्चे माल और स्वदेशी कौशल का उपयोग करते हुए उत्पादन, रोजगार सृजन और निर्यात में योगदान करते हैं। MSME क्षेत्र देश के औद्योगिक परिदृश्य में श्रम बल के बड़े अनुपात के साथ व्यापक रूप से फैला हुआ है और निर्यात क्षमता में भी महत्वपूर्ण है। यह क्षेत्र सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 29.7 प्रतिशत और निर्यात का लगभग 49.66 प्रतिशत योगदान देता है। MSME क्षेत्र में लगभग 28.5 मिलियन उद्यम हैं जो लगभग 60 मिलियन लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं। ये उद्यम बड़े उद्योगों के पूरक के रूप में कार्य करते हैं और स्वदेशी कौशल, नवाचार और उद्यमिता के विकास के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करते हैं। MSME क्षेत्र में उत्पादों की विविधता बहुत व्यापक है, जो साधारण उपभोक्ता वस्तुओं से लेकर उच्च तकनीकी और परिष्कृत उत्पादों तक फैली हुई है। भारत सरकार ने इस क्षेत्र को आत्मनिर्भरता और ग्रामीण औद्योगीकरण के उद्देश्य से प्रोत्साहित किया है। MSME क्षेत्र में पारंपरिक और आधुनिक दोनों प्रकार के उद्योग शामिल हैं, जिनमें हथकरघा, हस्तशिल्प, खादी, ग्रामोद्योग, लघु उद्योग और पावरलूम जैसे उपसमूह आते हैं। MSME क्षेत्र ने अंतरिक्ष मिशनों जैसे मंगलयान और चंद्रयान-2 के लिए भी महत्वपूर्ण घटकों का उत्पादन किया है, जो इस क्षेत्र की तकनीकी क्षमता और महत्व को दर्शाता है। इस प्रकार MSME क्षेत्र भारत के समावेशी और संतुलित आर्थिक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। **Table on page 4 (4×3)** | इकाइयों का प्रकार | संयंत्र और मशीनरी में निवेश | कुल बिक्री या कारोबार | | --- | --- | --- | | सूक्ष्म उद्यम | 1 करोड़ | 5 करोड़ से अधिक नहीं होता | | लघु उद्यम | 10 करोड़ | 50 करोड़ से अधिक नहीं होता | | मध्यम उद्यम | 50 करोड़ | 250 करोड़ से अधिक नहीं होता | **Table on page 4 (3×2)** | सूक्ष्म उद्यम | 99.4% | | --- | --- | | लघु उद्यम | 0.52% | | मध्यम उद्यम | 0.1% |
- MSME क्षेत्र भारत की आर्थिक विकास प्रक्रिया में महत्वपूर्ण है।
- यह क्षेत्र सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 29.7% और निर्यात का 49.66% योगदान देता है।
- लगभग 28.5 मिलियन उद्यम MSME क्षेत्र में हैं जो 60 मिलियन लोगों को रोजगार देते हैं।
- MSME क्षेत्र बड़े उद्योगों के पूरक के रूप में कार्य करता है।
- यह क्षेत्र स्थानीय कच्चे माल और स्वदेशी कौशल का उपयोग करता है।
- MSME ने मंगलयान और चंद्रयान-2 जैसे अंतरिक्ष मिशनों के लिए घटक प्रदान किए हैं।
- 📌 सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME): छोटे आकार के उद्योग जो संयंत्र और मशीनरी में निवेश के आधार पर परिभाषित होते हैं।
- 📌 स्वदेशी कौशल: स्थानीय रूप से विकसित और उपलब्ध कौशल।
- 📌 आत्मनिर्भरता: आर्थिक रूप से स्वतंत्र होना।
9.2 सूक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्यम
व्याख्या9.2 सूक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्यम
भारत में सूक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्यमों (MSME) की परिभाषा संयंत्र और मशीनरी में निवेश तथा कुल बिक्री या कारोबार के आधार पर की जाती है। व्यवसाय की इकाइयों के आकार को मापने के लिए विभिन्न मापदंडों का उपयोग किया जाता है, जैसे कि नियोजित व्यक्तियों की संख्या, पूंजी निवेश, कारोबार आदि। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास अधिनियम, 2006 ने इन उद्यमों की परिभाषा को स्पष्ट किया है और उन्हें एक एकीकृत कानूनी ढाँचे के अंतर्गत लाया है। इस अधिनियम के अनुसार, सूक्ष्म उद्यम वह होता है जिसमें संयंत्र और मशीनरी में निवेश 1 करोड़ रुपये तक और कुल बिक्री 5 करोड़ रुपये तक होती है। लघु उद्यम में संयंत्र और मशीनरी में निवेश 10 करोड़ रुपये तक और कुल बिक्री 50 करोड़ रुपये तक होती है। मध्यम उद्यम में संयंत्र और मशीनरी में निवेश 50 करोड़ रुपये तक और कुल बिक्री 250 करोड़ रुपये तक होती है। इस प्रकार, MSME क्षेत्र में विभिन्न आकार के उद्यम शामिल हैं जो आर्थिक गतिविधियों के विभिन्न स्तरों पर कार्य करते हैं। छोटे उद्यमों का विस्तार मध्यम उद्यमों में हो रहा है और उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिके रहने के लिए उच्च तकनीकों को अपनाना आवश्यक हो गया है। MSME क्षेत्र में सेवा क्षेत्र के उद्यम भी शामिल किए गए हैं, जिससे इसका दायरा और व्यापक हुआ है। **Table on page 4 (4×3)** | इकाइयों का प्रकार | संयंत्र और मशीनरी में निवेश | कुल बिक्री या कारोबार | | --- | --- | --- | | सूक्ष्म उद्यम | 1 करोड़ | 5 करोड़ से अधिक नहीं होता | | लघु उद्यम | 10 करोड़ | 50 करोड़ से अधिक नहीं होता | | मध्यम उद्यम | 50 करोड़ | 250 करोड़ से अधिक नहीं होता |
- MSME की परिभाषा संयंत्र और मशीनरी में निवेश तथा कुल बिक्री के आधार पर होती है।
- सूक्ष्म उद्यम में निवेश 1 करोड़ और बिक्री 5 करोड़ तक होती है।
- लघु उद्यम में निवेश 10 करोड़ और बिक्री 50 करोड़ तक होती है।
- मध्यम उद्यम में निवेश 50 करोड़ और बिक्री 250 करोड़ तक होती है।
- MSME अधिनियम 2006 ने इन उद्यमों को एक कानूनी ढाँचे में लाया।
- सेवा क्षेत्र के उद्यम भी MSME के अंतर्गत आते हैं।
- 📌 MSME अधिनियम, 2006: सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए कानूनी ढाँचा।
- 📌 संयंत्र और मशीनरी निवेश: उद्यम में मशीनरी और संयंत्र पर किया गया पूंजी निवेश।
- 📌 कुल बिक्री/कारोबार: उद्यम की वार्षिक बिक्री या कारोबार।
9.3 सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम की भूमिका
व्याख्या9.3 सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम की भूमिका
भारत में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) सामाजिक-आर्थिक विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये उद्यम रोजगार सृजन, क्षेत्रीय विकास, निर्यात, और उत्पादन में योगदान करते हैं। MSME क्षेत्र भारत की औद्योगिक इकाइयों का लगभग 95 प्रतिशत हिस्सा है औ
अभ्यास प्रश्न — Chapter 9
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.1. सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास अधिनियम किस वर्ष पारित हुआ?
उत्तर:
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास अधिनियम वर्ष 2006 में पारित हुआ।
व्याख्या:
यह अधिनियम भारत सरकार द्वारा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के विकास के लिए बनाया गया था।
Q2.2. सूक्ष्म उद्यम क्या है?
उत्तर:
सूक्ष्म उद्यम वे छोटे व्यवसाय होते हैं जिनका निवेश और उत्पादन सीमित होता है, जैसे कि छोटे कुटीर उद्योग।
व्याख्या:
सूक्ष्म उद्यम छोटे पैमाने पर होते हैं और स्थानीय स्तर पर रोजगार प्रदान करते हैं।
Q3.3. कुटीर उद्योग क्या है?
उत्तर:
कुटीर उद्योग वे छोटे-छोटे उद्योग होते हैं जो घर या छोटे कार्यशालाओं में संचालित होते हैं और जिनमें पूंजी निवेश कम होता है।
व्याख्या:
कुटीर उद्योग पारंपरिक और हस्तशिल्प आधारित होते हैं, जो ग्रामीण क्षेत्रों में आम हैं।
Q4.4. ग्राम और खादी उद्योग से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
ग्राम उद्योग वे छोटे उद्योग हैं जो ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित होते हैं और खादी उद्योग विशेष रूप से खादी वस्त्रों के उत्पादन से संबंधित हैं।
व्याख्या:
ग्राम और खादी उद्योग ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाते हैं और स्थानीय रोजगार प्रदान करते हैं।
Q5.5. उद्यमिता विकास की कोई दो विशेषताएँ दें।
उत्तर:
1. नवाचार और जोखिम लेने की क्षमता। 2. आर्थिक विकास में योगदान।
व्याख्या:
उद्यमिता विकास में नए विचारों को लागू करना और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना शामिल है।
Q6.1. सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम क्या है?
उत्तर:
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम वे व्यवसाय हैं जिनका निवेश, उत्पादन और कर्मचारियों की संख्या सीमित होती है। सूक्ष्म उद्यम सबसे छोटे होते हैं, उसके बाद लघु और फिर मध्यम उद्यम आते हैं।
व्याख्या:
ये उद्यम आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और नवाचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
Q7.2. उद्यमिता का अर्थ बताइए।
उत्तर:
उद्यमिता का अर्थ है नए व्यवसाय की स्थापना करना, जोखिम लेना और संसाधनों का कुशल प्रबंधन करना।
व्याख्या:
यह आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और नवाचार को प्रोत्साहित करने की प्रक्रिया है।
Q8.3. सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम और उद्यमिता परस्पर जुड़े हुए हैं। क्या आप सहमत हैं? दो कारण बताइए।
उत्तर:
हाँ, मैं सहमत हूँ। कारण: (1) उद्यमिता के बिना सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम स्थापित नहीं हो सकते। (2) ये उद्यम उद्यमिता के माध्यम से नवाचार और आर्थिक विकास को बढ़ावा देते हैं।
व्याख्या:
उद्यमिता नए व्यवसायों की शुरुआत और विकास की प्रक्रिया है, जो सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए आवश्यक है।
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Business Studies · Class 11