Chapter 8 — Study Notes
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सत्रिया नृत्य का परिचय
Explanationसत्रिया नृत्य का परिचय
सत्रिया नृत्य असम राज्य का एक प्रमुख पारंपरिक नृत्य है, जो भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और उनके जीवन की कथाओं को प्रस्तुत करता है। यह नृत्य 15वीं शताब्दी के महान संत और नाटककार महापुरुष शंकरदेव द्वारा प्रारंभ किया गया था। सत्रिया नृत्य का उद्देश्य धार्मिक और आध्यात्मिक भावनाओं को जागृत करना है। यह नृत्य न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि यह भक्ति और संस्कृति का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम है। सत्रिया नृत्य में कलाकार पारंपरिक वेशभूषा पहनते हैं और शास्त्रीय संगीत की ताल पर नृत्य करते हैं। इसमें भगवान कृष्ण के जीवन के विभिन्न प्रसंगों को नाटकीय रूप में प्रस्तुत किया जाता है। इस नृत्य की विशेषता इसकी सरलता, भक्ति और शास्त्रीयता है। सत्रिया नृत्य असम के सत्रों (मठों) में नियमित रूप से प्रस्तुत किया जाता है। यह नृत्य असम की सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा है।
- सत्रिया नृत्य असम का पारंपरिक नृत्य है।
- शंकरदेव ने इस नृत्य की स्थापना की।
- यह भगवान श्रीकृष्ण की कथाओं पर आधारित है।
- सत्रिया नृत्य में भक्ति और आध्यात्मिकता का समावेश है।
- कलाकार पारंपरिक वेशभूषा पहनते हैं।
- असम के सत्रों में यह नृत्य नियमित रूप से होता है।
- 📌 सत्रिया नृत्य: असम का पारंपरिक भक्ति नृत्य जो भगवान कृष्ण की कथाओं पर आधारित है।
- 📌 शंकरदेव: असम के महान संत जिन्होंने सत्रिया नृत्य की स्थापना की।
- 📌 सत्र: असम में धार्मिक मठ जहाँ सत्रिया नृत्य का आयोजन होता है।
सत्रिया नृत्य की विशेषताएँ
Explanationसत्रिया नृत्य की विशेषताएँ
सत्रिया नृत्य की कई विशेषताएँ हैं जो इसे अन्य नृत्यों से अलग बनाती हैं। सबसे पहली विशेषता इसका धार्मिक स्वरूप है। यह नृत्य भगवान कृष्ण की भक्ति में समर्पित है और इसे भजन-कीर्तन के साथ प्रस्तुत किया जाता है। दूसरी विशेषता इसकी शास्त्रीयता है। सत्रिया नृत्य में शास्त्रीय संगीत और नृत्य के नियमों का पालन किया जाता है। तीसरी विशेषता इसकी वेशभूषा है, जिसमें कलाकार पारंपरिक असमी पोशाक पहनते हैं, जैसे कि धोती, कुर्ता, और सिर पर मुकुट। चौथी विशेषता इसकी प्रस्तुति की शैली है, जो सरल, सौम्य और भावपूर्ण होती है। पाँचवीं विशेषता इसका सामूहिक प्रदर्शन है, जिसमें कई कलाकार एक साथ नृत्य करते हैं। यह नृत्य मुख्यतः असम के सत्रों में धार्मिक उत्सवों के दौरान प्रस्तुत किया जाता है। सत्रिया नृत्य में संगीत का बहुत महत्व है, जिसमें मृदंग, बाँसुरी, और ढोलक जैसे वाद्य यंत्रों का प्रयोग होता है।
- सत्रिया नृत्य धार्मिक और भक्ति प्रधान है।
- यह शास्त्रीय संगीत और नृत्य का पालन करता है।
- कलाकार पारंपरिक असमी वेशभूषा पहनते हैं।
- सामूहिक रूप से प्रस्तुत किया जाता है।
- वाद्य यंत्रों का प्रयोग होता है जैसे मृदंग और बाँसुरी।
- असम के सत्रों में इसका आयोजन होता है।
- 📌 मृदंग: एक प्रकार का पारंपरिक भारतीय ढोलक वाद्य यंत्र।
- 📌 रासलीला: भगवान कृष्ण और गॉव की गोपियों के बीच नृत्य और प्रेम का दृश्य।
- 📌 शास्त्रीय संगीत: भारतीय संगीत की वह शैली जो नियमबद्ध और परंपरागत होती है।
बिहू नृत्य का परिचय
Explanationबिहू नृत्य का परिचय
बिहू नृत्य असम का एक जीवंत और उत्साहपूर्ण लोकनृत्य है, जो मुख्यतः असम के बिहू त्योहार के दौरान किया जाता है। यह नृत्य असम की कृषि संस्कृति और जीवनशैली का प्रतिनिधित्व करता है। बिहू नृत्य में युवा पुरुष और महिलाएं पारंपरिक पोशाक पहनकर नृत्य करते हैं।
Practice Questions — Chapter 8
Includes NCERT exercise questions with answers
Q1.(क) अनु के खिलौने कैसे थे? लंदन में एंजेला के खिलौने कैसे रहे होंगे? (ख) आप घर पर कौन-कौन से खिलौनों से खेलते रहे हैं? उनके नाम बताइए। (ग) भारत के प्रत्येक प्रांत में हाथ से बच्चों के अनोखे खिलौने बनाए जाते हैं। आपके यहाँ बच्चों के लिए हाथ से बने कौन-कौन से खिलौने मिलते हैं? (घ) भारत के बच्चे स्वयं भी अपने लिए अनोखे खिलौने बना लेते हैं। आप भी तो कागज, मिट्टी आदि से कोई न कोई खिलौना बनाना जानते होंगे? आप अपने हाथों से बनाए किसी खिलौने को कक्षा में लाकर दिखाइए और उसे बनाने का तरीका सबको सिखाइए।
Answer:
उत्तर: (क) अनु के खिलौने सरल, पारंपरिक और हाथ से बने होते थे, जो बच्चों के लिए उपयोगी और मनोरंजक थे। लंदन में एंजेला के खिलौने आधुनिक, फैशनेबल और संभवतः मशीन से बने होते होंगे, जो अधिक चमकीले और आकर्षक होते। (ख) मैं घर पर गुड़िया, कार, गेंद, पजल, और बोर्ड गेम जैसे खिलौनों से खेलता/खेलती हूँ। (ग) मेरे यहाँ मिट्टी के खिलौने, लकड़ी के खिलौने, कागज के गुब्बारे, और कपड़े के गुड़िया जैसे हाथ से बने खिलौने मिलते हैं। (घ) हाँ, मैं कागज से पतंग बनाना जानता/जानती हूँ। इसे बनाने के लिए कागज को त्रिकोण और चौकोर आकार में काटकर, डोरी लगाकर पतंग बनाई जाती है। कक्षा में मैं इसे दिखाकर सबको सिखाऊंगा/सिखाऊंगी।
Explanation:
प्रत्येक उपप्रश्न में बच्चों के खिलौनों के प्रकार, उनके अनुभव और स्थानीय हस्तशिल्प खिलौनों के बारे में वर्णन करना है। अंतिम भाग में स्वयं द्वारा बनाए गए खिलौने का परिचय और निर्माण विधि साझा करनी होती है।
Q2.(क) मान लीजिए आप एंजेला हैं। आप लंदन लौट चुकी हैं और आपको भारत की बहुत याद आ रही है। अपनी सखी अनु को पत्र लिखकर बताइए कि आपको कैसा अनुभव हो रहा है। (ख) आप जानते होंगे कि पत्र लिखने के लिए आवश्यक सामग्री, जैसे—पोस्टकार्ड, अंतर्देशीय लिफाफे आदि डाकघर से खरीदे जा सकते हैं। संभव हो तो आप भी अपने घर के पास के डाकघर में जाइए और एक पोस्टकार्ड खरीदकर पत्र लिखने के लिए उसका उपयोग कीजिए। (ग) क्या आपने कभी डाक-टिकट देखा है? संसार के सभी देश डाक-टिकट जारी करते हैं। भारत का डाक-विभाग भी समय-समय पर डाक-टिकट जारी करता है। डाक-टिकट किसी देश की संस्कृति के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी भी उपलब्ध कराते हैं। इसलिए अनेक लोग देश-विदेश के डाक-टिकटों को एकत्रित करना पसंद करते हैं। नीचे भारत के विभिन्न लेखकों के सम्मान में जारी किए गए कुछ डाक-टिकटों के चित्र दिए गए हैं। इन्हें ध्यान से देखिए— (क) आपको इनमें से कौन-सा डाक-टिकट सबसे अच्छा लगा और क्यों? (ख) डाक-टिकटों पर लेखकों के बारे में कौन-कौन सी जानकारी दी गई है?
Answer:
उत्तर: (क) प्रिय अनु, मैं लंदन लौट आई हूँ, पर भारत की याद बहुत आ रही है। वहाँ की रंगीन संस्कृति, खिलौने, और तुम्हारे साथ बिताए पल मेरे मन में बसे हुए हैं। भारत की मिट्टी की खुशबू और लोक नृत्यों की धुनें मुझे बार-बार याद आती हैं। आशा है तुम स्वस्थ और प्रसन्न हो। जल्दी मिलने की इच्छा है। तुम्हारी मित्र, एंजेला (ख) डाकघर जाकर मैंने एक पोस्टकार्ड खरीदा और उस पर पत्र लिखा। यह अनुभव अच्छा रहा क्योंकि इससे पत्र भेजने की प्रक्रिया समझ में आई। (ग)(क) मुझे जो डाक-टिकट सबसे अच्छा लगा वह था जिस पर लेखक की छवि और उनकी प्रसिद्धि दर्शाई गई थी। यह टिकट रंगीन और आकर्षक था, जिससे उसकी सांस्कृतिक महत्ता स्पष्ट होती है। (ग)(ख) डाक-टिकटों पर लेखकों के नाम, उनकी तस्वीरें, जन्म और मृत्यु वर्ष, तथा उनकी प्रमुख कृतियों के बारे में जानकारी दी गई है। इससे पता चलता है कि वे साहित्य जगत में कितने महत्वपूर्ण हैं।
Explanation:
प्रत्येक भाग में पत्र लेखन, डाकघर से पोस्टकार्ड खरीदने का अनुभव, और डाक-टिकटों की सांस्कृतिक तथा ऐतिहासिक जानकारी पर आधारित उत्तर देने हैं।
Q3.(क) आपको इनमें से कौन-सा डाक-टिकट सबसे अच्छा लगा और क्यों? (ख) डाक-टिकटों पर लेखकों के बारे में कौन-कौन सी जानकारी दी गई है?
Answer:
उत्तर: (क) मुझे वह डाक-टिकट सबसे अच्छा लगा जिस पर लेखक की छवि स्पष्ट और रंगीन थी, क्योंकि इससे लेखक की पहचान और सम्मान स्पष्ट होता है। (ख) डाक-टिकटों पर लेखकों के नाम, उनकी तस्वीरें, जन्म और मृत्यु वर्ष, तथा उनकी प्रमुख कृतियाँ दी गई हैं, जिससे उनकी साहित्यिक महत्ता का पता चलता है।
Explanation:
यह प्रश्न डाक-टिकटों के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व को समझने के लिए है।
Q4.आपको इस लेख में दी गई कौन-सी जानकारी सबसे अच्छी लगी? क्यों? अपने समूह में बताइए।
Answer:
उत्तर: मुझे असम के सुप्रसिद्ध मूंगा सिल्क के बारे में दी गई जानकारी सबसे अच्छी लगी क्योंकि यह कपड़ा न केवल सुंदर और मजबूत है, बल्कि इसके औषधीय गुण भी हैं। यह असम की सांस्कृतिक पहचान और प्राकृतिक उपहार है। इसकी धुलाई में आसानी और दीर्घायुता इसे विशेष बनाती है। मैंने यह जानकारी अपने समूह में साझा की और सभी ने इसे बहुत रोचक पाया।
Explanation:
यह प्रश्न लेख की समझ और उसमें दी गई जानकारी के प्रति व्यक्तिगत प्रतिक्रिया जानने के लिए है।
Q5.सत्रिया नृत्य किस राज्य का प्रमुख पारंपरिक नृत्य है और इसका मुख्य विषय क्या है?
Answer:
असम, भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और जीवन की कथाएँ
Explanation:
सत्रिया नृत्य असम राज्य का पारंपरिक नृत्य है जो भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और उनके जीवन की कथाओं को प्रस्तुत करता है। यह नृत्य धार्मिक और आध्यात्मिक भावनाओं को जागृत करता है।
Q6.सत्रिया नृत्य की स्थापना किस महापुरुष ने की थी और किस शताब्दी में?
Answer:
महापुरुष शंकरदेव, 15वीं शताब्दी
Explanation:
सत्रिया नृत्य की स्थापना 15वीं शताब्दी में महान संत और नाटककार महापुरुष शंकरदेव ने की थी। उन्होंने इस नृत्य के माध्यम से भक्ति और धार्मिक भावनाओं को बढ़ावा दिया।
Q7.सत्रिया नृत्य में कलाकार कौन-कौन से पारंपरिक वेशभूषा पहनते हैं?
Answer:
धोती, कुर्ता, सिर पर मुकुट
Explanation:
सत्रिया नृत्य में कलाकार पारंपरिक असमी पोशाक पहनते हैं, जिसमें धोती, कुर्ता और सिर पर मुकुट शामिल होते हैं। यह वेशभूषा नृत्य की धार्मिक और शास्त्रीयता को दर्शाती है।
Q8.सत्रिया नृत्य का मुख्य उद्देश्य क्या है?
Answer:
सत्रिया नृत्य का मुख्य उद्देश्य धार्मिक और आध्यात्मिक भावनाओं को जागृत करना है। यह नृत्य भक्ति और संस्कृति का माध्यम है।
Explanation:
सत्रिया नृत्य धार्मिक उत्सवों में भगवान कृष्ण की भक्ति को प्रकट करता है। इसका उद्देश्य लोगों में भक्ति भाव और आध्यात्मिक जागरूकता फैलाना है। यह नृत्य मनोरंजन के साथ-साथ सांस्कृतिक शिक्षा का भी माध्यम है।