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Chapter 8

🎓 Class 12📖 Bharat log aur arthvyasastha(Bhugol)📖 7 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~11 मिनट
Chapter 7अध्याय 8 / 9Chapter 9

Chapter 8अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 7 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

अंतर्राष्ट्रीय व्यापार

व्याख्या

अंतर्राष्ट्रीय व्यापार

अंतर्राष्ट्रीय व्यापार वह व्यापार है जो दो या दो से अधिक देशों के बीच वस्तुओं, सेवाओं, पूंजी और प्रौद्योगिकी के आदान-प्रदान के रूप में होता है। कोई भी देश पूर्णतः आत्मनिर्भर नहीं होता, इसलिए सभी देशों को अपने आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं के लिए अन्य देशों पर निर्भर रहना पड़ता है। भारत का अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पिछले दशकों में मात्रा, संघटन और व्यापार की दिशा के संदर्भ में महत्वपूर्ण बदलावों से गुजरा है। वर्ष 1950-51 में भारत का विदेशी व्यापार मूल्य मात्र 1,214 करोड़ रुपए था, जो 2021-22 में बढ़कर 77,19,796 करोड़ रुपए हो गया। इस वृद्धि के पीछे विनिर्माण क्षेत्र में तेजी, सरकार की उदार नीतियाँ और बाजारों की विविधता जैसे कारण हैं। भारत का निर्यात और आयात दोनों ही बढ़े हैं, लेकिन आयात का मूल्य निर्यात से अधिक है, जिससे व्यापार संतुलन में घाटा बना रहता है। भारत की वैश्विक अर्थव्यवस्था में भागीदारी कुल विश्व व्यापार का लगभग एक प्रतिशत है, फिर भी इसका महत्व कम नहीं है। भारत के निर्यात और आयात के संघटन में समय के साथ बदलाव आए हैं, जैसे कि कृषि उत्पादों की हिस्सेदारी में कमी और विनिर्मित वस्तुओं तथा पेट्रोलियम उत्पादों की हिस्सेदारी में वृद्धि। इस प्रकार, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार भारत की आर्थिक प्रगति का एक महत्वपूर्ण आधार है, जो देश के विकास, रोजगार सृजन और वैश्विक आर्थिक संबंधों को मजबूत करता है।

  • अंतर्राष्ट्रीय व्यापार देशों के बीच वस्तुओं, सेवाओं, पूंजी और प्रौद्योगिकी का आदान-प्रदान है।
  • 1950-51 में भारत का विदेशी व्यापार मूल्य 1,214 करोड़ रुपए था, जो 2021-22 में 77,19,796 करोड़ रुपए हो गया।
  • भारत का व्यापार संतुलन निर्यात की तुलना में आयात अधिक होने के कारण ऋणात्मक है।
  • भारत के निर्यात संघटन में कृषि उत्पादों की हिस्सेदारी कम हुई, जबकि विनिर्मित वस्तुओं और पेट्रोलियम उत्पादों की बढ़ी।
  • भारत विश्व व्यापार में लगभग 1% भागीदारी रखता है।
  • सरकार की उदार नीतियाँ और बाजारों की विविधता व्यापार वृद्धि के प्रमुख कारण हैं।
  • 📌 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार: दो या अधिक देशों के बीच वस्तुओं, सेवाओं, पूंजी और प्रौद्योगिकी का आदान-प्रदान।
  • 📌 व्यापार संतुलन: निर्यात और आयात के बीच का अंतर।
  • 📌 निर्यात संघटन: निर्यात में शामिल विभिन्न वस्तुओं का अनुपात।

भारत के निर्यात-संघटन के बदलते प्रारूप

व्याख्या

भारत के निर्यात-संघटन के बदलते प्रारूप

भारत के निर्यात संघटन में समय के साथ महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं। 1950-51 में कृषि उत्पादों का निर्यात प्रमुख था, लेकिन अब विनिर्मित वस्तुएँ, पेट्रोलियम उत्पाद, रत्न और आभूषण निर्यात में अधिक हिस्सेदारी रखते हैं। 2015-16 से 2021-22 तक के आंकड़ों के अनुसार कृषि एवं समवर्गी उत्पादों का निर्यात लगभग 12% के आसपास रहा है, जबकि विनिर्मित वस्तुओं का हिस्सा लगभग 68% तक पहुंच गया है। पेट्रोलियम और अपरिष्कृत उत्पादों का निर्यात भी बढ़ा है, जो 16.4% तक पहुंच गया है। पारंपरिक कृषि उत्पादों जैसे काजू के निर्यात में गिरावट आई है, लेकिन फूल, ताजे फल, समुद्री उत्पाद और चीनी के निर्यात में वृद्धि हुई है। मणि-रत्न और आभूषणों का निर्यात भी भारत के विदेशी व्यापार में महत्वपूर्ण योगदान देता है। इस बदलाव के कारणों में वैश्विक बाजार की मांग, तकनीकी उन्नति, उत्पादन क्षमता में वृद्धि और सरकार की निर्यात प्रोत्साहन नीतियाँ शामिल हैं। निर्यात संघटन में यह बदलाव भारत की अर्थव्यवस्था के विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों के विकास को दर्शाता है। **Table on page 2 (6×5)** | वस्तुएँ/माल | 2015-16 | 2016-17 | 2020-21 | 2021-22 | | --- | --- | --- | --- | --- | | कृषि एवं समवर्गी उत्पाद | 12.6 | 12.3 | 14.3 | 11.9 | | अयस्क एवं खनिज | 1.6 | 1.9 | 3.2 | 2.0 | | विनिर्मित वस्तुएँ | 72.9 | 73.6 | 71.2 | 67.8 | | पेट्रोलियम व अपरिष्कृत उत्पाद | 11.9 | 11.7 | 9.2 | 16.4 | | अन्य वस्तुएँ | 1.1 | 0.5 | 2.1 | 1.9 | **Table on page 3 (5×2)** | वस्तुएँ | 2021-22 | | --- | --- | | कृषि एवं समवर्गी उत्पाद | 3,75,742 | | अयस्क एवं खनिज | 63,754 | | विनिमित्त वस्तुएँ | 21,32,296 | | खनिज ईंधन और स्नेहक | 5,15,310 | **Table on page 2 (6×4)** | वर्ष | निर्यात | आयात | व्यापार संतुलन (मूल्य करोड़ रुपये में) | | --- | --- | --- | --- | | 2004-05 | 3,75,340 | 5,01,065 | -1,25,725 | | 2009-10 | 8,45,534 | 13,63,736 | -5,18,202 | | 2013-14 | 19,05,011 | 27,15,434 | -8,10,423 | | 2016-17 | 18,52,340 | 25,77,422 | -7,25,082 | | 2021-22 | 31,47,021 | 45,72,775 | -14,25,753 |

  • 2015-16 से 2021-22 तक कृषि उत्पादों का निर्यात लगभग 12% के आसपास रहा।
  • विनिर्मित वस्तुओं का निर्यात 67.8% तक बढ़ा।
  • पेट्रोलियम और अपरिष्कृत उत्पादों का निर्यात 16.4% तक पहुंचा।
  • पारंपरिक कृषि उत्पादों जैसे काजू का निर्यात घटा।
  • फूल, ताजे फल, समुद्री उत्पादों का निर्यात बढ़ा।
  • मणि-रत्न और आभूषणों का निर्यात भारत के लिए महत्वपूर्ण है।
  • 📌 निर्यात संघटन: निर्यात में विभिन्न वस्तुओं का प्रतिशत अनुपात।
  • 📌 मणि-रत्न: कीमती पत्थर जो आभूषणों में उपयोग होते हैं।

भारत के आयात-संघटन के बदलते प्रारूप

व्याख्या

भारत के आयात-संघटन के बदलते प्रारूप

भारत के आयात संघटन में भी समय के साथ बड़े बदलाव आए हैं। 1950-60 के दशक में खाद्यान्न, पूंजीगत माल, मशीनरी और उपस्कर मुख्य आयात वस्तुएँ थीं। हरित क्रांति के बाद खाद्यान्न आयात में कमी आई, लेकिन 1973 के ऊर्जा संकट के बाद पेट्रोलियम उत्पादों के आयात में

अभ्यास प्रश्नChapter 8

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए। (i) दो देशों के मध्य व्यापार कहलाता है- (क) अंतर्देशीय व्यापार (ख) बाह्य व्यापार (ग) अंतर्राष्ट्रीय व्यापार (घ) स्थानीय व्यापार (ii) निम्नलिखित में से कौन-सा एक स्थलबद्ध पोताश्रय है? (क) विशाखापट्टनम (ख) मुंबई (ग) कामराजार (एन्नोर) (घ) हल्दिया (iii) भारत का अधिकांश विदेशी व्यापार वहन होता है- (क) स्थल और समुद्र द्वारा (ख) स्थल और वायु द्वारा (ग) समुद्र और वायु द्वारा (घ) समुद्र द्वारा
A.(i) (क) अंतर्देशीय व्यापार, (ख) बाह्य व्यापार, (ग) अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, (घ) स्थानीय व्यापार
B.(ii) (क) विशाखापट्टनम, (ख) मुंबई, (ग) कामराजार (एन्नोर), (घ) हल्दिया
C.(iii) (क) स्थल और समुद्र द्वारा, (ख) स्थल और वायु द्वारा, (ग) समुद्र और वायु द्वारा, (घ) समुद्र द्वारा

उत्तर:

(i) दो देशों के मध्य व्यापार को अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कहा जाता है। अतः सही उत्तर है (ग) अंतर्राष्ट्रीय व्यापार। (ii) स्थलबद्ध पोताश्रय वह होता है जहाँ पोत स्थायी रूप से लंगर डाले रहते हैं। कामराजार (एन्नोर) एक स्थलबद्ध पोताश्रय है। अतः सही उत्तर है (ग) कामराजार (एन्नोर)। (iii) भारत का अधिकांश विदेशी व्यापार समुद्र द्वारा होता है। अतः सही उत्तर है (घ) समुद्र द्वारा।

व्याख्या:

प्रत्येक प्रश्न के विकल्पों का विश्लेषण करते हुए सही विकल्प चुना गया है। (i) अंतर्देशीय व्यापार देश के भीतर होता है, जबकि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार दो देशों के बीच होता है। (ii) विशाखापट्टनम, मुंबई, हल्दिया पोताश्रय हैं, लेकिन स्थलबद्ध पोताश्रय कामराजार (एन्नोर) है। (iii) भारत का अधिकांश विदेशी व्यापार समुद्र मार्ग से होता है क्योंकि भारत एक समुद्री देश है।

EasyNCERT
Q2.निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर लगभग 30 शब्दों में दें। (i) भारत के विदेशी व्यापार की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। (ii) पतन और पोताश्रय में अंतर बताइए। (iii) पृष्ठप्रदेश के अर्थ को स्पष्ट कीजिए। (iv) उन महत्वपूर्ण मदों के नाम बताइए जिन्हें भारत विभिन्न देशों से आयात करता है? (v) भारत के पूर्वी तट पर स्थित पत्तनों के नाम बताइए।

उत्तर:

(i) भारत के विदेशी व्यापार की प्रमुख विशेषताएँ हैं: निर्यात और आयात दोनों में विविधता, समुद्री मार्गों का प्रमुख उपयोग, मुख्य निर्यात वस्तुएँ जैसे कपड़ा, ज्वेलरी, कृषि उत्पाद, और आयात में कच्चा तेल, मशीनरी आदि शामिल हैं। (ii) पतन वह बंदरगाह होता है जहाँ जहाज लंगर डालते हैं, जबकि पोताश्रय वह स्थान है जहाँ जहाज स्थायी रूप से खड़े रहते हैं या लंगर डाले रहते हैं। (iii) पृष्ठप्रदेश का अर्थ है वह क्षेत्र जो किसी विशेष भौगोलिक या आर्थिक संदर्भ में आधार या पृष्ठभूमि प्रदान करता है। (iv) भारत मुख्य रूप से कच्चा तेल, मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, रसायन, और सोना आदि वस्तुएँ विभिन्न देशों से आयात करता है। (v) भारत के पूर्वी तट पर स्थित प्रमुख बंदरगाह हैं: विशाखापट्टनम, कोलकाता, हल्दिया, चेन्नई।

व्याख्या:

प्रत्येक प्रश्न का संक्षिप्त और सटीक उत्तर दिया गया है जो पाठ्यपुस्तक की जानकारी पर आधारित है।

MediumNCERT
Q3.निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दें। (i) भारत में निर्यात और आयात व्यापार के संयोजन का वर्णन कीजिए। (ii) भारत के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की बदलती प्रकृति पर एक टिप्पणी लिखिए।

उत्तर:

(i) भारत में निर्यात और आयात व्यापार का संयोजन देश की आर्थिक वृद्धि और विकास के लिए महत्वपूर्ण है। निर्यात से विदेशी मुद्रा आती है जो देश की आर्थिक स्थिति को मजबूत करती है। भारत मुख्य रूप से कृषि उत्पाद, वस्त्र, ज्वेलरी, और औद्योगिक उत्पाद निर्यात करता है। आयात में कच्चा तेल, मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, और रसायन शामिल हैं जो देश के उद्योगों और उपभोक्ताओं की आवश्यकताओं को पूरा करते हैं। निर्यात और आयात के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है ताकि व्यापार घाटा न हो और आर्थिक स्थिरता बनी रहे। (ii) भारत के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की प्रकृति समय के साथ बदल रही है। पहले भारत मुख्य रूप से कृषि उत्पादों का निर्यात करता था, लेकिन अब तकनीकी और औद्योगिक उत्पादों का निर्यात बढ़ा है। साथ ही, आयात में भी विविधता आई है। वैश्वीकरण और उदारीकरण के बाद भारत ने विदेशी निवेश को आकर्षित किया है और व्यापार में प्रतिस्पर्धा बढ़ी है। इसके परिणामस्वरूप भारत का व्यापार अधिक वैश्विक और बहुआयामी हो गया है।

व्याख्या:

प्रत्येक प्रश्न का विस्तृत उत्तर दिया गया है जिसमें भारत के निर्यात-आयात व्यापार की भूमिका, महत्व और बदलती प्रवृत्तियों को समझाया गया है।

MediumNCERT
Q4.भारत के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में वर्ष 1950-51 से 2021-22 तक मूल्य वृद्धि कितनी प्रतिशत हुई? यदि वर्ष 1950-51 में मूल्य 1,214 करोड़ रुपए था और 2021-22 में 77,19,796 करोड़ रुपए हो गया।
A.635,000%
B.635,600%
C.636,000%
D.636,600%

उत्तर:

635,600%

व्याख्या:

Given: वर्ष 1950-51 का मूल्य = 1,214 करोड़ रुपए वर्ष 2021-22 का मूल्य = 77,19,796 करोड़ रुपए Find: प्रतिशत वृद्धि Formula: प्रतिशत वृद्धि = ((अंतिम मूल्य - प्रारंभिक मूल्य) / प्रारंभिक मूल्य) × 100 Solution: Step 1: (77,19,796 - 1,214) = 77,18,582 Step 2: (77,18,582 / 1,214) × 100 = 635,600% Answer: 635,600% Note: विद्यार्थियों द्वारा प्रतिशत वृद्धि में प्रारंभिक और अंतिम मानों को उलटने की गलती हो सकती है।

Medium
Q5.निम्नलिखित में से भारत के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की वैश्विक भागीदारी का सही प्रतिशत क्या है?
A.1%
B.5%
C.10%
D.0.1%

उत्तर:

1%

व्याख्या:

भारत की वैश्विक अर्थव्यवस्था में भागीदारी कुल विश्व व्यापार का लगभग 1% है। यह आंकड़ा भारत के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की वास्तविक स्थिति को दर्शाता है।

Easy
Q6.भारत के निर्यात और आयात में समय के साथ क्या मुख्य परिवर्तन हुए हैं?

उत्तर:

भारत के निर्यात में कृषि एवं समवर्गी उत्पादों की हिस्सेदारी कम हुई है जबकि विनिर्मित वस्तुओं और पेट्रोलियम उत्पादों की हिस्सेदारी बढ़ी है। आयात में पेट्रोलियम उत्पादों का हिस्सा बढ़ा है और पूंजीगत वस्तुओं का हिस्सा घटा है। उदाहरण के लिए, 2015-16 से 2021-22 तक विनिर्मित वस्तुओं का निर्यात लगभग 67.8% तक पहुंच गया।

व्याख्या:

भारत के निर्यात में कृषि उत्पादों की हिस्सेदारी में कमी आई है और विनिर्मित वस्तुओं तथा पेट्रोलियम उत्पादों की हिस्सेदारी बढ़ी है। आयात में पेट्रोलियम और उसके उत्पादों की हिस्सेदारी सबसे अधिक है, जबकि पूंजीगत वस्तुओं का आयात घटा है। यह बदलाव भारत की अर्थव्यवस्था के विकास और वैश्विक मांग के अनुसार हुआ है। उदाहरण के लिए, 2021-22 में विनिर्मित वस्तुओं का निर्यात 67.8% था।

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Q7.नीचे दी गई तालिका 8.1 के अनुसार वर्ष 2021-22 में भारत का व्यापार संतुलन क्या था और इसका क्या अर्थ है? | वर्ष | निर्यात (करोड़ रुपये) | आयात (करोड़ रुपये) | व्यापार संतुलन (करोड़ रुपये) | |-------|-----------------------|--------------------|----------------------------| | 2021-22 | 31,47,021 | 45,72,775 | -14,25,753 |

उत्तर:

वर्ष 2021-22 में भारत का व्यापार संतुलन -14,25,753 करोड़ रुपये था, जिसका अर्थ है कि आयात निर्यात से अधिक था और देश को व्यापार घाटा हुआ। यह दिखाता है कि भारत अधिक वस्तुएँ विदेशों से खरीदता है और निर्यात कम करता है। उदाहरण के लिए, आयात 45,72,775 करोड़ रुपये था जबकि निर्यात 31,47,021 करोड़ रुपये।

व्याख्या:

व्यापार संतुलन आयात और निर्यात के बीच अंतर को दर्शाता है। यदि व्यापार संतुलन ऋणात्मक है, तो इसका अर्थ है कि आयात निर्यात से अधिक है, जिसे व्यापार घाटा कहते हैं। वर्ष 2021-22 में भारत का व्यापार घाटा 14,25,753 करोड़ रुपये था, जो यह दर्शाता है कि देश ने विदेशों से अधिक वस्तुएँ खरीदीं।

Easy
Q8.भारत के निर्यात संघटन में 2015-16 से 2021-22 के बीच कृषि एवं समवर्गी उत्पादों की हिस्सेदारी में क्या बदलाव आया है? नीचे दिए गए आंकड़ों के आधार पर उत्तर दें: 2015-16: 12.6%, 2016-17: 12.3%, 2020-21: 14.3%, 2021-22: 11.9%
A.कृषि उत्पादों की हिस्सेदारी में स्थिरता रही
B.कृषि उत्पादों की हिस्सेदारी में वृद्धि हुई
C.कृषि उत्पादों की हिस्सेदारी में कमी हुई
D.कृषि उत्पादों की हिस्सेदारी में उतार-चढ़ाव के बाद कमी हुई

उत्तर:

कृषि उत्पादों की हिस्सेदारी में उतार-चढ़ाव के बाद कमी हुई

व्याख्या:

आंकड़ों से पता चलता है कि कृषि एवं समवर्गी उत्पादों की हिस्सेदारी में कुछ उतार-चढ़ाव के बाद 2021-22 में 11.9% तक कमी आई है, जो 2015-16 के 12.6% से कम है। इसलिए यह कहना सही होगा कि हिस्सेदारी में उतार-चढ़ाव के बाद कमी हुई है।

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