NCERTCh 7निःशुल्क

Chapter 7

🎓 Class 11📖 Shashwati📖 11 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~17 मिनट
Chapter 6अध्याय 7 / 11Chapter 8

Chapter 7अध्ययन नोट्स

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विज्ञाननौका का परिचय

व्याख्या

विज्ञाननौका का परिचय

विज्ञाननौका संस्कृत कक्षा 11 के पाठ्यक्रम का एक महत्वपूर्ण अध्याय है, जो आधुनिक विश्व में विज्ञान और तकनीकी के बढ़ते प्रभावों पर विचार करता है। यह पाठ कवि प्रो. श्रीनिवास रथ द्वारा रचित कविता-संग्रह 'तदेव गगनं सैव धरा' से संगृहीत है। श्रीनिवास रथ का जन्म 1933 में पुरी (उड़ीसा) में हुआ था। उन्होंने पारंपरिक पद्धति से संस्कृत का अध्ययन किया और काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की। वे विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन में संस्कृत विभाग के प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष भी रहे। इस पाठ में आधुनिक विश्व में यान्त्रिकता और कृत्रिमता के प्रति बढ़ते हुए मोह के प्रति सचेत किया गया है। यह चेतावनी देता है कि जीवन के मूल्यों को भूलकर नई भौतिक तकनीकी से मानव को अभिभूत नहीं होना चाहिए। विज्ञाननौका में यह भी बताया गया है कि विज्ञान के विकास के साथ-साथ उसके दुष्परिणामों पर भी ध्यान देना आवश्यक है। यह पाठ मानव जीवन में विज्ञान के प्रभाव, उसके लाभ और हानियों दोनों को समझाता है। इस खंड में संस्कृत श्लोकों के माध्यम से विज्ञान के विनाशकारी पक्ष को भी चित्रित किया गया है, जिसमें यान्त्रिकता के मोह और सामाजिक समस्याओं का उल्लेख है। पाठ का उद्देश्य विद्यार्थियों को विज्ञान के प्रति जागरूक करना और उसे विवेकपूर्ण तरीके से अपनाने के लिए प्रेरित करना है।

  • विज्ञाननौका पाठ कवि प्रो. श्रीनिवास रथ द्वारा रचित है।
  • यह आधुनिक यान्त्रिकता और कृत्रिमता के प्रति चेतावनी देता है।
  • जीवन मूल्यों को भूलकर विज्ञान के मोह में न पड़ने की सलाह देता है।
  • विज्ञान के लाभ और हानियों दोनों पर प्रकाश डालता है।
  • संस्कृत श्लोकों के माध्यम से विज्ञान के दुष्परिणामों का चित्रण करता है।
  • 📌 यान्त्रिकता: मशीनों और तकनीकी उपकरणों का बढ़ता प्रभाव।
  • 📌 कृत्रिमता: प्राकृतिक के विपरीत मानव निर्मित वस्तुएं।
  • 📌 विज्ञाननौका: विज्ञान की नाव, यहाँ विज्ञान के माध्यम से जीवन की यात्रा का प्रतीक।

विज्ञान का इतिहास और विकास

व्याख्या

विज्ञान का इतिहास और विकास

इस खंड में विज्ञान के इतिहास और उसके विकास की प्रक्रिया का विस्तृत वर्णन किया गया है। मानव सभ्यता के प्रारंभिक काल से ही विज्ञान का विकास होता रहा है। प्रारंभ में मानव ने प्रकृति के रहस्यों को समझने के लिए यन्त्रों और उपकरणों का निर्माण किया। प्राचीन भारत में विज्ञान का विकास अत्यंत उन्नत था, जहाँ वेधशालाओं का निर्माण किया जाता था और सूर्यसिद्धांत जैसे खगोलशास्त्रीय ग्रंथों में पृथ्वी, सूर्य, ग्रहों की गति का अध्ययन होता था। प्राचीन भारतीय शास्त्रों जैसे न्यायवैशेषिक में पदार्थों के सात मौलिक तत्वों का उल्लेख मिलता है, जो विज्ञान के मूलभूत सिद्धांतों को दर्शाते हैं। इस खंड में बताया गया है कि विज्ञान न केवल ज्ञान का संग्रह है, बल्कि यह मानव जीवन की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए निरंतर विकसित होता रहा है। आधुनिक युग में विज्ञान ने तकनीकी क्रांति के रूप में मानव जीवन को परिवर्तित किया है, परन्तु इसके साथ-साथ इसके दुष्परिणाम भी सामने आए हैं। विज्ञान का इतिहास हमें यह सिखाता है कि विज्ञान का सही और नैतिक उपयोग ही मानवता के कल्याण के लिए आवश्यक है।

  • प्राचीन काल से विज्ञान का विकास निरंतर होता रहा है।
  • प्राचीन भारत में वेधशालाओं और सूर्यसिद्धांत जैसे ग्रंथों का निर्माण हुआ।
  • न्यायवैशेषिक शास्त्र में सात मौलिक पदार्थों का उल्लेख है।
  • विज्ञान मानव जीवन की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विकसित हुआ।
  • आधुनिक युग में विज्ञान ने तकनीकी क्रांति लाई है।
  • विज्ञान के सही और नैतिक उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
  • 📌 वेधशाला: खगोलशास्त्रीय अध्ययन के लिए निर्मित स्थान।
  • 📌 सूर्यसिद्धांत: सूर्य और ग्रहों की गति का प्राचीन भारतीय ग्रंथ।
  • 📌 न्यायवैशेषिक: भारतीय दर्शन का एक शास्त्र जिसमें पदार्थों का वर्गीकरण है।

विज्ञान की शाखाएँ

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विज्ञान की शाखाएँ

इस खंड में विज्ञान की प्रमुख शाखाओं का विस्तृत परिचय दिया गया है। विज्ञान को मुख्यतः तीन भागों में बांटा गया है - भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, और जीव विज्ञान। भौतिक विज्ञान पदार्थ की संरचना, बल, गति, ऊर्जा, और ब्रह्माण्ड के नियमों का अध्ययन करता है

अभ्यास प्रश्नChapter 7

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.1. संस्कृतेन उत्तरं दीयताम्। (क) एषा गीतिका कस्मात् पुस्तकात् सङ्गृहीता? (ख) अस्या: गीतिकाया: लेखक: क:? (ग) अत्र का दरिद्रीकृता? (घ) निष्कुटेषु का आहिता? (ङ) वाटिकायोजनायां केषां कासां च रक्षा न कृता? (च) राजनीति-शमशानेषु किं न ज्ञायते? (छ) मानवानां कृते वर्तमानस्थिति: क्रीदृशी सल्लक्ष्यते। (ज) आधुनिकयुगे कस्या: अवलम्ब: न चिन्त्यते? (झ) विश्वशान्तिप्रयलेषु का उपास्यते? (ञ) जनै: अहर्निशं का सेव्यते?

उत्तर:

1.(क) एषा गीतिका प्रो. श्रीनिवासरथविरचितस्य गीतिकाया: पुस्तकात् सङ्गृहीता अस्ति। (ख) अस्या गीतिकाया लेखक: प्रो. श्रीनिवासरथः अस्ति। (ग) अत्र दरिद्रीकृता: पृथिव्याः संसाधनानां अनियमितविनाशः इति दर्श्यते। (घ) निष्कुटेषु (अर्थात् निष्कुटानि वा निष्कुटेषु) पर्यावरणस्य संरक्षणाय उपायाः आहिता: सन्ति। (ङ) वाटिकायोजनायां केषां कासां च संरक्षणं न कृता इति प्रश्ने उत्तरं तत्र प्रदत्तं पर्यावरणीय संरक्षणस्य अभावः अस्ति। (च) राजनीति-शमशानेषु किमपि न ज्ञायते इति तत्र सामाजिक-राजनीतिक समस्याः सूचिताः सन्ति। (छ) मानवानां कृते वर्तमानस्थिति: क्रीदृशी सल्लक्ष्यते इति तत्र मानवजीवनस्य वर्तमानपरिस्थितिः क्रीडारूपेण व्यक्तीक्रियते। (ज) आधुनिकयुगे कस्य अवलम्ब: न चिन्त्यते इति तत्र आधुनिकयुगस्य अवलम्बनस्य अभावः सूचितः। (झ) विश्वशान्तिप्रयलेषु का उपास्यते इति प्रश्ने विश्वशान्तेः साधनानि वा आदर्शाः उपास्यन्ते इति उत्तरं दातव्यं। (ञ) जनै: अहर्निशं का सेव्यते इति प्रश्ने जनानां अहर्निशं सेव्यमानं किम् इति उत्तरं दातव्यं।

व्याख्या:

प्रत्येकं प्रश्नं संस्कृतभाषायां स्पष्टतया उत्तरं दातव्यं। प्रश्नाः गीतिकाया: विषयानुसारं पर्यावरण, राजनीति, मानवजीवनादीनि विषयाणि स्पृशन्ति।

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Q2.2. रिक्तस्थानानि पूर्यत। (क) ज्ञानगढ़ा ... नालोक्यते? (ख) के कथं कुत्र वा ... कुर्वते? (ग) यत्र कुत्रापि ... समुद्रीक्ष्यते। (घ) गोपनीयायुधानां ... श्रूयते। (ङ) भूतले ... परिक्षीयते।

उत्तर:

2.(क) ज्ञानगढ़ा नालोक्यते? उत्तरः: ज्ञानगढ़ा नालोक्यते नित्यं नूतनज्ञानस्य स्रोतः इति। (ख) के कथं कुत्र वा कुर्वते? उत्तरः: के कथं कुत्र वा कार्यं कुर्वते इति प्रश्ने कर्मणः प्रकारः वा स्थानं पूर्यताम्। (ग) यत्र कुत्रापि समुद्रीक्ष्यते। उत्तरः: यत्र कुत्रापि समुद्रीक्ष्यते तत्र जलजीवनस्य विविधानि दृश्यन्ते। (घ) गोपनीयायुधानां ... श्रूयते। उत्तरः: गोपनीयायुधानां शब्दः श्रूयते तत्र गोपनीयतायुक्ताः अस्त्राणि सूचिताः सन्ति। (ङ) भूतले ... परिक्षीयते। उत्तरः: भूतले विविधाः प्राणी परिक्षीयन्ते इति।

व्याख्या:

प्रत्येकं रिक्तस्थानं पाठ्यवस्तुनुसारं पूर्यताम्। प्रश्नाः पाठ्यांशस्य अभावयुक्तस्थानानि पूरयन्ति।

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Q3.3. ‘संस्कृतोद्यानदूर्वा ... निर्मिता’ अस्य श्लोकस्य आशय: हिन्दीभाष्या स्पष्टीक्रियताम्।

उत्तर:

3. उक्त श्लोकस्य आशयः संस्कृतोद्यानदूर्वा नामकं वनस्पतिं निर्मितं यत् पर्यावरणस्य संरक्षणं कुर्वन् भूमेः सौन्दर्यं च वर्धयति। अयं श्लोकः प्रकृतिसंरक्षणस्य महत्त्वं सूचयति तथा मानवजीवनस्य समृद्धये आवश्यकं वनस्पतिं दर्शयति।

व्याख्या:

श्लोकस्य प्रत्येकं पदं अर्थेन विश्लेष्य तस्य सम्यक् व्याख्या कर्तव्यं। श्लोकः पर्यावरणीय सन्देशं ददाति।

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Q4.4. अधोलिखितपदानां संस्कृतवाक्येषु प्रयोगं कुरुत। ज्ञानगढ़ा, ज्ञायते, शान्ति:, विद्योतते, सन्दूष्यते जीवरक्षा, विक्रीयते।

उत्तर:

4. ज्ञानगढ़ा - ज्ञानगढ़ा नामकं स्थानं वा वस्तु संस्कृतवाक्येषु यथासम्भव प्रयोगः कर्तव्यः। ज्ञायते - ज्ञायते क्रियापदं वाक्येषु उचितं स्थानं दत्त्वा प्रयोगः। शान्ति: - शान्ति: शब्दः वाक्येषु शान्तिप्रदर्शनाय वा शान्तिप्राप्तये प्रयुज्यते। विद्योतते - विद्योतते क्रियापदं वाक्येषु प्रकाशस्य सूचनार्थं प्रयोजयेत्। सन्दूष्यते - सन्दूष्यते क्रियापदं दूषणस्य सूचनार्थं वाक्येषु प्रयोजयेत्। जीवरक्षा - जीवरक्षा शब्दः जीवस्य रक्षणार्थं वाक्येषु प्रयोज्यते। विक्रीयते - विक्रीयते क्रियापदं विक्रयस्य सूचनार्थं वाक्येषु प्रयोजयेत्।

व्याख्या:

प्रत्येकं पदं संस्कृतवाक्येषु सम्यक् स्थानं दत्त्वा तस्य प्रयोगं कर्तव्यं।

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Q5.5. ‘वर्तमान ... समायोज्यते’ अस्य श्लोकस्य अन्वयं कुरुत।

उत्तर:

5. उक्त श्लोकस्य अन्वयः - वर्तमानकालः यथा क्रीडारूपेण मानवजीवनं समायोज्यते तथा तस्य पर्यावरणीय, सामाजिक च पक्षाः सम्यक् व्यवस्थिताः भवन्ति। श्लोकः वर्तमानपरिस्थितेः विवेचनं कृत्वा तस्य समायोजनस्य आवश्यकतां सूचयति।

व्याख्या:

श्लोकस्य पदानां क्रमबद्धता अन्वयं स्पष्टं कर्तुं आवश्यकम्।

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Q6.6. अधोलिखितपदेषु सन्धिं सन्धिच्छेदं वा कुरुत। विलुप्तेति, कण्टकिनी + आहिता, प्रत्यहं, बत + अस्तं, अन्तरिक्षे + अनुसन्ध र्यते, यथोपास्यते।

उत्तर:

6. (क) विलुप्तेति - विलुप्तेति (एकत्र सन्धि) (ख) कण्टकिनी + आहिता - कण्टकिन्या आहिता (सन्धिच्छेदः) (ग) प्रत्यहं - प्रत्यहं (एकत्र सन्धि) (घ) बत + अस्तं - बतस्तं (सन्धिच्छेदः) (ङ) अन्तरिक्षे + अनुसन्ध र्यते - अन्तरिक्षे अनुसन्धार्यते (सन्धिच्छेदः) (च) यथोपास्यते - यथोपास्यते (एकत्र सन्धि)

व्याख्या:

प्रत्येकं पदं वा पदसमूहं सन्धि वा सन्धिच्छेदं कृत्वा स्पष्टं रूपं दर्शयेत्।

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Q7.विज्ञाननौका कविता संग्रह 'तदेव गगनं सैव धरा' में से ली गई है। इस कविता संग्रह के लेखक कौन हैं और उनका जन्म स्थान एवं वर्ष क्या है?
A.A) प्रो. श्रीनिवास रथ, पुरी, 1933
B.B) प्रो. रामकृष्ण शर्मा, वाराणसी, 1925
C.C) प्रो. हरिशंकर त्रिपाठी, उज्जैन, 1940
D.D) प्रो. माधव शास्त्री, भोपाल, 1930

उत्तर:

प्रो. श्रीनिवास रथ, पुरी, 1933

व्याख्या:

विज्ञाननौका पाठ कवि प्रो. श्रीनिवास रथ द्वारा रचित है, जिनका जन्म 1933 में पुरी (उड़ीसा) में हुआ था। वे संस्कृत में लगभग 40 वर्षों से गीत लिखते आ रहे हैं।

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Q8.विज्ञाननौका पाठ में कवि ने किस विषय पर चेतावनी दी है?
A.A) यान्त्रिकता और कृत्रिमता के प्रति बढ़ते हुए मोह के प्रति सचेत किया गया है
B.B) प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया गया है
C.C) प्राचीन संस्कृत साहित्य के अध्ययन की महत्ता बताई गई है
D.D) विज्ञान के विकास के लिए अधिक प्रयोगों की आवश्यकता बताई गई है

उत्तर:

यान्त्रिकता और कृत्रिमता के प्रति बढ़ते हुए मोह के प्रति सचेत किया गया है

व्याख्या:

पाठ में आधुनिक विश्व में यान्त्रिकता और कृत्रिमता के प्रति बढ़ते मोह के कारण जीवन मूल्यों के क्षरण की चेतावनी दी गई है।

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