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Chapter 6

🎓 Class 12📖 Bharat log aur arthvyasastha(Bhugol)📖 9 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~14 मिनट
Chapter 5अध्याय 6 / 9Chapter 7

Chapter 6अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

भारत के संदर्भ में नियोजन और सततपोषणीय विकास

व्याख्या

भारत के संदर्भ में नियोजन और सततपोषणीय विकास

‘नियोजन’ शब्द हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा है, जिसका अर्थ है किसी कार्य या उद्देश्य की पूर्ति के लिए पूर्व में सोच-विचार कर कार्यक्रम बनाना और उसे लागू करना। यह केवल व्यक्तिगत स्तर पर ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी आर्थिक विकास की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत में स्वतंत्रता के बाद केंद्रीकृत योजनाओं को अपनाया गया, जिसमें योजना आयोग ने केंद्र, राज्य और जिला स्तर पर योजनाओं को तैयार किया। जनवरी 1, 2015 से योजना आयोग की जगह नीति आयोग ने ले ली है, जिसका उद्देश्य राज्यों की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए आर्थिक नीति निर्माण में सुधार करना है। नियोजन के दो मुख्य प्रकार होते हैं: खंडीय (Sectoral) नियोजन और प्रादेशिक नियोजन। खंडीय नियोजन में कृषि, सिंचाई, विनिर्माण, ऊर्जा, परिवहन, संचार, सामाजिक अवसंरचना आदि सेक्टरों के विकास के लिए योजनाएं बनायी जाती हैं। प्रादेशिक नियोजन का उद्देश्य क्षेत्रीय असंतुलन को कम करना है क्योंकि सभी क्षेत्रों में समान विकास नहीं होता। इसलिए, नियोजन में क्षेत्रीय विषमताओं को ध्यान में रखना आवश्यक है। इस प्रकार, भारत में नियोजन का स्वरूप बहुस्तरीय और विकेंद्रीकृत है, जो विभिन्न स्तरों पर आर्थिक विकास को संतुलित करने का प्रयास करता है। नीति आयोग की स्थापना से राज्यों की भागीदारी और तकनीकी सलाह को बढ़ावा मिला है, जिससे योजनाओं की प्रभावशीलता में सुधार हुआ है।

  • नियोजन का अर्थ है पूर्व योजना बनाकर उद्देश्यों की पूर्ति के लिए कार्य करना।
  • भारत में स्वतंत्रता के बाद केंद्रीकृत योजनाएं अपनाई गईं, बाद में विकेंद्रीकृत योजनाओं की ओर बढ़ा गया।
  • योजना आयोग की जगह जनवरी 2015 से नीति आयोग ने ले ली है।
  • नियोजन के दो प्रकार हैं: खंडीय नियोजन और प्रादेशिक नियोजन।
  • खंडीय नियोजन में कृषि, ऊर्जा, परिवहन आदि सेक्टरों का विकास शामिल है।
  • प्रादेशिक नियोजन का उद्देश्य क्षेत्रीय असंतुलन को कम करना है।
  • 📌 नियोजन: किसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए पूर्व में योजना बनाना।
  • 📌 खंडीय नियोजन: अर्थव्यवस्था के विभिन्न सेक्टरों के विकास के लिए योजना।
  • 📌 प्रादेशिक नियोजन: क्षेत्रीय असंतुलन को कम करने के लिए योजना।

लक्ष्य क्षेत्र नियोजन

व्याख्या

लक्ष्य क्षेत्र नियोजन

लक्ष्य क्षेत्र नियोजन का उद्देश्य आर्थिक रूप से पिछड़े हुए क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देना है। किसी क्षेत्र का आर्थिक विकास उसके संसाधनों पर निर्भर करता है, लेकिन केवल संसाधनों की उपलब्धता ही विकास के लिए पर्याप्त नहीं होती। तकनीक, निवेश और उचित प्रबंधन भी आवश्यक हैं। भारत में कुछ क्षेत्र संसाधनों से समृद्ध होने के बावजूद पिछड़े रह गए हैं, जिससे क्षेत्रीय असंतुलन बढ़ा है। पिछड़े क्षेत्रों के विकास के लिए योजना आयोग ने ‘लक्ष्य क्षेत्र’ और ‘लक्ष्य समूह’ योजना उपागम प्रस्तुत किए हैं। लक्ष्य क्षेत्र योजनाओं में कमान नियंत्रित क्षेत्र विकास, सूखा संभावी क्षेत्र विकास, पर्वतीय क्षेत्र विकास जैसे कार्यक्रम शामिल हैं। लक्ष्य समूह योजनाओं में लघु कृषक विकास संस्था (SFDA), सीमांत किसान विकास संस्था (MFDA) आदि आते हैं। आठवीं पंचवर्षीय योजना में पर्वतीय क्षेत्रों, उत्तर-पूर्वी राज्यों, जनजातीय एवं पिछड़े क्षेत्रों में अवसंरचना विकास के लिए विशिष्ट क्षेत्र योजना तैयार की गई। इस प्रकार, लक्ष्य क्षेत्र नियोजन के माध्यम से आर्थिक विकास में असंतुलन को कम करने और पिछड़े क्षेत्रों को मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया जाता है।

  • लक्ष्य क्षेत्र नियोजन आर्थिक रूप से पिछड़े क्षेत्रों पर केंद्रित है।
  • संसाधनों की उपलब्धता के साथ तकनीक और निवेश भी आवश्यक हैं।
  • लक्ष्य क्षेत्र योजनाओं में पर्वतीय क्षेत्र, सूखा संभावी क्षेत्र, कमान क्षेत्र विकास शामिल हैं।
  • लक्ष्य समूह योजनाओं में लघु और सीमांत कृषक विकास संस्थाएं शामिल हैं।
  • आठवीं पंचवर्षीय योजना में पिछड़े क्षेत्रों के अवसंरचना विकास पर विशेष ध्यान दिया गया।
  • लक्ष्य क्षेत्र नियोजन से क्षेत्रीय असंतुलन कम करने का प्रयास होता है।
  • 📌 लक्ष्य क्षेत्र नियोजन: आर्थिक रूप से पिछड़े क्षेत्रों के विकास के लिए विशेष योजनाएं।
  • 📌 लक्ष्य समूह योजना: विशेष सामाजिक या आर्थिक समूहों के लिए विकास योजना।
  • 📌 अवसंरचना: आधारभूत संरचनाएं जैसे सड़क, बिजली, जल आपूर्ति।

पर्वतीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम

व्याख्या

पर्वतीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम

पर्वतीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम की शुरुआत पाँचवीं पंचवर्षीय योजना में हुई थी। इस कार्यक्रम के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के पर्वतीय जिले (वर्तमान उत्तराखण्ड), मिकिर पहाड़ी, असम की उत्तरी कछार की पहाड़ियाँ, पश्चिम बंगाल का दार्जिलिंग जिला और तमिलनाडु के नील

अभ्यास प्रश्नChapter 6

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.इंदिरा गांधी नहर को पहले जाना जाता था-
A.राजस्थान नहर
B.मध्यप्रदेश नहर
C.उत्तर प्रदेश नहर
D.हिमाचल प्रदेश नहर

उत्तर:

राजस्थान नहर

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Q2.पर्वतीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम की शुरुआत हुई-
A.तीसरी पंचवर्षीय योजना में
B.चौथी पंचवर्षीय योजना में
C.पांचवी पंचवर्षीय योजना में
D.छठवीं पंचवर्षीय योजना में

उत्तर:

पांचवी पंचवर्षीय योजना में

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Q3.पिछड़े क्षेत्रों पर राष्ट्रीय समिति का गठन कब हुआ ?
A.1982 में
B.1981 में
C.1980 में
D.उपर्युक्त में से कोई नहीं

उत्तर:

1981 में

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Q4.ब्रंडटलैंड रिपोर्ट किससे संबंधित है
A.अवनीकरण
B.सुपोषण
C.आर्थिक विकास
D.सतत पोषणीय विकास

उत्तर:

सतत पोषणीय विकास

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Q5.‘द पॉपुलेशन बम’ नामक पुस्तक किसने लिखी
A.मिडोस
B.एहार्लीच
C.रूसो
D.उपर्युक्त में से कोई नहीं

उत्तर:

एहार्लीच

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Q6.योजना आयोग के स्थान पर नीति आयोग की स्थापना कब की गई
A.2013 में
B.2014 में
C.2015 में
D.2016 में

उत्तर:

2015 में

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Q7.सूखा संभावित क्षेत्र विकास कार्यक्रम की शुरुआत किस पंचवर्षीय योजना में की गई
A.चौथी
B.प्रथम
C.पांचवी
D.द्वितीय

उत्तर:

चौथी

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Q8.योजना आयोग के सर्वेक्षण के अनुसार निम्नलिखित में से कौन क्षेत्र सूखा - संभावित क्षेत्रों में नहीं आता
A.मध्य प्रदेश
B.राजस्थान
C.गुजरात
D.कर्नाटक पठार

उत्तर:

मध्य प्रदेश

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