Chapter 5 — Study Notes
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रहीम के दोहे
Explanationरहीम के दोहे
इस अध्याय में हम प्रसिद्ध हिंदी कवि रहीम के दोहों का अध्ययन करेंगे। रहीम, जिनका पूरा नाम अब्दुल रहीम खान-ए-खाना था, मुगल सम्राट अकबर के दरबार के एक महान कवि और सेनापति थे। उनके दोहे सरल भाषा में जीवन के महत्वपूर्ण संदेश देते हैं। रहीम के दोहे मुख्य रूप से नीति, जीवन के मूल्यों, और मानव व्यवहार के बारे में होते हैं। ये दोहे हमें नैतिकता, सहिष्णुता, और सदाचार की शिक्षा देते हैं। रहीम के दोहों की भाषा सरल और प्रभावशाली होती है, जो बच्चों और बड़ों दोनों के लिए समझने में आसान होती है। उनके दोहे जीवन के अनुभवों पर आधारित होते हैं और व्यवहारिक ज्ञान प्रदान करते हैं। इस अध्याय में दिए गए दोहों के माध्यम से हम सीखेंगे कि कैसे जीवन में विनम्रता, परिश्रम, और संयम का महत्व है। दोहे दो पंक्तियों के होते हैं, जिनमें पहली पंक्ति में विषय प्रस्तुत होता है और दूसरी पंक्ति में उसका सार या उपदेश होता है। रहीम के दोहों में छंदबद्धता और तुकबंदी का विशेष ध्यान रखा गया है, जिससे उनका प्रभाव और भी गहरा होता है। इस अध्याय के दोहों को पढ़कर विद्यार्थी न केवल भाषा की सुंदरता को समझेंगे, बल्कि जीवन के मूल्य भी सीखेंगे।
- रहीम मुगल सम्राट अकबर के दरबार के कवि थे।
- उनके दोहे सरल भाषा में जीवन के महत्वपूर्ण संदेश देते हैं।
- दोहे दो पंक्तियों में होते हैं, जिनमें पहला पंक्ति विषय और दूसरी सार होती है।
- रहीम के दोहे नैतिकता, सहिष्णुता और सदाचार की शिक्षा देते हैं।
- उनकी भाषा सरल और प्रभावशाली है, जो सभी के लिए समझने योग्य है।
- 📌 दोहा: दो पंक्तियों वाली कविता जिसमें जीवन की सीख होती है।
- 📌 रहीम: मुगल काल के प्रसिद्ध कवि और सेनापति।
- 📌 नीति: जीवन के नियम और नैतिकता।
रहीम के दोहे और उनका अर्थ
Explanationरहीम के दोहे और उनका अर्थ
इस अनुभाग में हम रहीम के कुछ प्रसिद्ध दोहों का अध्ययन करेंगे और उनके अर्थ को विस्तार से समझेंगे। रहीम के दोहे जीवन के विभिन्न पहलुओं को सरल और प्रभावी भाषा में प्रस्तुत करते हैं। पहला दोहा है - 'रहिमन धागा प्रेम का, मत तोरो चटकाय। टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गाँठ पड़ जाय।' इस दोहे में रहीम प्रेम को धागे के समान बताते हैं, जो बहुत नाजुक होता है। यदि प्रेम का धागा टूट जाता है, तो उसे फिर से जोड़ना मुश्किल होता है और यदि जुड़ भी जाता है तो गाँठ पड़ जाती है, जो प्रेम में बाधा बनती है। यह दोहा हमें प्रेम की नाजुकता और उसे संभालने की आवश्यकता की सीख देता है। दूसरा दोहा है - 'जो रहीम उत्तम प्रकृति, सोई सुमिरन हरि का।' इस दोहे में कहा गया है कि जो व्यक्ति अच्छा स्वभाव रखता है, वही सच्चे मन से भगवान का स्मरण करता है। अच्छा स्वभाव भगवान की भक्ति का सबसे बड़ा प्रमाण है। तीसरा दोहा - 'बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर। पंथी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर।' इस दोहे में रहीम बताते हैं कि केवल बड़ा होना या ऊंचा पद प्राप्त करना महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि दूसरों के लिए उपयोगी होना जरूरी है। खजूर का पेड़ ऊंचा होता है, लेकिन उसकी छाया नहीं मिलती और फल भी दूर होते हैं। इसलिए व्यक्ति को बड़ा बनने के साथ-साथ दूसरों के लिए सहायक भी होना चाहिए। इन दोहों के माध्यम से रहीम ने जीवन के महत्वपूर्ण सिद्धांतों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया है, जो आज भी प्रासंगिक हैं।
- प्रेम को धागे के समान नाजुक बताया गया है।
- अच्छा स्वभाव भगवान की भक्ति का प्रमाण है।
- ऊंचा होना पर्याप्त नहीं, दूसरों के लिए उपयोगी होना जरूरी है।
- रहीम के दोहे जीवन के व्यवहारिक सिद्धांत सिखाते हैं।
- 📌 प्रेम: स्नेह और लगाव की भावना।
- 📌 स्वभाव: व्यक्ति की प्राकृतिक प्रवृत्ति।
- 📌 सहायता: दूसरों की मदद करना।
रहीम के दोहों में नैतिक शिक्षा
Explanationरहीम के दोहों में नैतिक शिक्षा
रहीम के दोहे केवल सुंदर भाषा में नहीं, बल्कि गहरे नैतिक संदेशों से भरे हुए हैं। इस अनुभाग में हम देखेंगे कि उनके दोहों में कौन-कौन सी नैतिक शिक्षाएँ निहित हैं। रहीम के दोहों में सबसे प्रमुख शिक्षा है प्रेम और सहिष्णुता। जैसे कि दोहा 'रहिमन धागा प्र
Practice Questions — Chapter 5
Includes NCERT exercise questions with answers
Q1.(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सबसे सही (सटीक) उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (✗) बनाइए— (1) “रहिमन जिह्वा बावरी, कहि गढ़ सर्ग पताल। आपु तो कहि भीतर रही, जूती खात कपाल।” दोहे का भाव है— - सोच-समझकर बोलना चाहिए। - मधुर वाणी में बोलना चाहिए। - धीरे -धीरे बोलना चाहिए। - सदा सच बोलना चाहिए। (2) “रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिये डारि। जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तलवारि।” इस दोहे का भाव क्या है? - तलवार सुई से बड़ी होती है। - सुई का काम तलवार नहीं कर सकती। - तलवार का महत्व सुई से ज्यादा है। - हर छोटी-बड़ी चीज़ का अपना महत्व होता है।
Answer:
(1) सही उत्तर है: सोच-समझकर बोलना चाहिए। इस दोहे में कहा गया है कि जिह्वा (जीभ) बावरी (पागल) हो तो वह अंदर से झूठ बोलती है, इसलिए बोलते समय सोच-समझकर और सच बोलना चाहिए। (2) सही उत्तर है: हर छोटी-बड़ी चीज़ का अपना महत्व होता है। इस दोहे में कहा गया है कि बड़े को छोटा न समझो क्योंकि हर वस्तु का अपना काम और महत्व होता है, जैसे सुई का काम तलवार नहीं कर सकती।
Explanation:
पहले दोहे में जिह्वा बावरी अर्थात जीभ पागल हो तो वह झूठ बोलती है, इसलिए सोच-समझकर बोलना चाहिए। दूसरे दोहे में वस्तुओं के महत्व की बात की गई है कि हर वस्तु का अपना काम होता है, इसलिए किसी को छोटा या बड़ा नहीं समझना चाहिए।
Q2.(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने यही उत्तर क्यों चुने?
Answer:
यह प्रश्न चर्चा हेतु है। उत्तर में विद्यार्थी को अपने चुने हुए उत्तर के पीछे का कारण स्पष्ट करना होगा। उदाहरण के लिए, सोच-समझकर बोलना चाहिए क्योंकि बिना सोचे-समझे बोले गए शब्दों से गलतफहमी हो सकती है। हर वस्तु का अपना महत्व होता है इसलिए किसी को छोटा या बड़ा नहीं समझना चाहिए।
Explanation:
यह प्रश्न विद्यार्थियों को अपने विचार व्यक्त करने और समझ विकसित करने के लिए है।
Q3.पाठ में से कुछ दोहे स्तंभ 1 में दिए गए हैं और उनके भाव स्तंभ 2 में दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और रेखा खींचकर सही भाव से मिलान कीजिए। स्तंभ 1: 1. रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो छिटकाय। टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय। 2. कहि रहीम संपत्ति सगे, बनत बहुत बहु रीत। बिपति कसौटी जे कसे, ते ही साँचे मीत। 3. तरुवर फल नहिं खात हैं, सरवर पियहिं न पान। कहि रहीम पर काज हित, संपत्ति सँचहि सुजान। स्तंभ 2: 1. सज्जन परहित के लिए ही संपत्ति संचित करते हैं। 2. सच्चे मित्र विपत्ति या विपदा में भी साथ रहते हैं 3. प्रेम या रिश्तों को सहेजकर रखना चाहिए।
Answer:
सही मिलान इस प्रकार है: 1 - 3: 'रहिमन धागा प्रेम का...' प्रेम या रिश्तों को सहेजकर रखना चाहिए। 2 - 2: 'कहि रहीम संपत्ति सगे...' सच्चे मित्र विपत्ति या विपदा में भी साथ रहते हैं। 3 - 1: 'तरुवर फल नहिं खात...' सज्जन परहित के लिए ही संपत्ति संचित करते हैं।
Explanation:
पहले दोहे में प्रेम के धागे की बात है, इसलिए इसका भाव प्रेम या रिश्तों को सहेजकर रखने का है। दूसरे दोहे में मित्रता की कसौटी की बात है, इसलिए इसका भाव सच्चे मित्र विपत्ति में साथ रहते हैं। तीसरे दोहे में प्रकृति के उदाहरण से संपत्ति संचित करने की बात है।
Q4.नीचे दिए गए दोहों पर समूह में चर्चा कीजिए और उनके अर्थ या भावार्थ अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए— (क) “रहिमन बिपदाहू भली, जो थोरे दिन होय। हित अनहित या जगत में, जानि परत सब कोय।” (ख) “रहिमन जिह्वा बावरी, कहि गढ़ सरग पताल। आपु तो कहि भीतर रही, जूती खात कपाल।”
Answer:
यह प्रश्न विद्यार्थियों को दोहों के अर्थ और भावार्थ पर विचार करने के लिए है। (क) दोहे का अर्थ है कि थोड़े दिन के लिए आई हुई विपत्ति भी अच्छी होती है क्योंकि इससे जगत में हित और अनहित का ज्ञान होता है। (ख) दोहे का अर्थ है कि यदि जीभ बावरी (पागल) हो तो वह अंदर से झूठ बोलती है, इसलिए बोलते समय सोच-समझकर और सच बोलना चाहिए।
Explanation:
विद्यार्थी समूह में चर्चा कर दोहों के भावार्थ को समझें और अपनी भाषा में लिखें।
Q5.दोहों को एक बार फिर से पढ़िए और निम्नलिखित के बारे में पता लगाकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए— 1. “रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो छिटकाय। टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय।” (क) इस दोहे में ‘मिले’ के स्थान पर ‘जुड़े’ और ‘छिटकाय’ के स्थान पर ‘चटकाय’ शब्द का प्रयोग भी लोक में प्रचलित है। जैसे— “रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय। टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गाँठ पड़ जाय।” इसी प्रकार पहले दोहे में ‘डारि’ के स्थान पर ‘डार’, ‘तलवारि’ के स्थान पर ‘तरवार’ और चौथे दोहे में ‘मानुष’ के स्थान पर ‘मानस’ का उपयोग भी प्रचलित हैं। ऐसा क्यों होता है? (ख) इस दोहे में प्रेम के उदाहरण में धागे का प्रयोग ही क्यों किया गया है? क्या आप धागे के स्थान पर कोई अन्य उदाहरण सुझा सकते हैं? अपने सुझाव का कारण भी बताइए। 2. “तरवार फल नहीं खात हैं, सरवर पियाहिं न पान। कहि रहीम पर काज हित, संपत्ति सँचहि सुजान।” इस दोहे में प्रकृति के माध्यम से मनुष्य के किस मानवीय गुण की बात की गई है? प्रकृति से हम और क्या-क्या सीख सकते हैं?
Answer:
(1)(क) लोक में शब्दों के विभिन्न रूप प्रचलित होते हैं क्योंकि भाषा में क्षेत्रीय और सामाजिक भेद होते हैं। इसलिए ‘मिले’ के स्थान पर ‘जुड़े’, ‘छिटकाय’ के स्थान पर ‘चटकाय’ जैसे रूप प्रचलित हैं। यह भाषा की विविधता को दर्शाता है। (1)(ख) प्रेम के उदाहरण में धागे का प्रयोग इसलिए किया गया है क्योंकि धागा टूटने पर जुड़ना मुश्किल होता है, ठीक वैसे ही प्रेम टूटने पर फिर जुड़ना कठिन होता है। धागे के स्थान पर 'रस्सी' या 'संगीत' का उदाहरण भी दिया जा सकता है क्योंकि वे भी टूटने पर जुड़ना कठिन होते हैं। (2) इस दोहे में प्रकृति के माध्यम से मनुष्य के विवेक और समझदारी की बात की गई है। जैसे तरवार फल नहीं खाती और सरवर पानी नहीं पीता, वैसे ही समझदार व्यक्ति अपनी संपत्ति को सही जगह संचित करता है। प्रकृति से हम संयम, विवेक, और अपने कर्तव्यों का पालन सीख सकते हैं।
Explanation:
यह प्रश्न भाषा के विविध रूपों, प्रेम के उदाहरण और प्रकृति से सीखने वाले मानवीय गुणों पर विचार करने के लिए है।
Q6.कविता में आए कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। इन शब्दों को आपकी मातृभाषा में क्या कहते हैं? लिखिए। तरवार बिपति छिटकाय सुजान सरवर साँचे कपाल
Answer:
विद्यार्थी अपनी मातृभाषा के अनुसार इन शब्दों के समानार्थक शब्द लिखेंगे। उदाहरण के लिए: तरवार - तलवार बिपति - विपत्ति छिटकाय - टूटना सुजान - समझदार सरवर - तालाब साँचे - ढाँचा कपाल - सिर
Explanation:
यह प्रश्न शब्दों के अर्थ और समानार्थक शब्द जानने के लिए है।
Q7.इसी प्रकार कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। आप भी इन शब्दों के तीन-तीन अर्थ लिखिए। आप इस कार्य में शब्दकोश, इंटरनेट, शिक्षक या अभिभावकों की सहायता भी ले सकते हैं। कल — ————————————, ————————————, ———————————— पत्र — ————————————, ————————————, ———————————— कर — ————————————, ————————————, ———————————— फल — ————————————, ————————————, ————————————
Answer:
विद्यार्थी शब्दकोश या अन्य स्रोतों की सहायता से इन शब्दों के तीन-तीन अर्थ लिखेंगे। उदाहरण: कल - कल का दिन (काल), कलर (रंग), कल करना (भविष्य) पत्र - पत्र (कागज), पत्र (पत्रिका), पत्र (पत्राचार) कर - कर (हाथ), कर (कर देना), कर (कराधान) फल - फल (फल-फूल), फल (परिणाम), फल (सफलता)
Explanation:
यह प्रश्न शब्दों के बहुवचन और विभिन्न अर्थों को समझने के लिए है।
Q8.अपने मनपसंद दोहे को इस तरह की शैली में अपने शब्दों में लिखिए। दोहा पाठ से या पाठ से बाहर का हो सकता है।
Answer:
विद्यार्थी अपने पसंदीदा दोहे को सरल भाषा में लिखेंगे, जिसमें दोहे का भाव स्पष्ट हो। उदाहरण के लिए, ‘रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिये डारि। जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तलवारि।’ का भाव है कि हर व्यक्ति या वस्तु का अपना महत्व होता है, इसलिए सभी का सम्मान करना चाहिए।
Explanation:
यह प्रश्न विद्यार्थियों को अपनी भाषा में दोहे के भाव को व्यक्त करने के लिए है।