NCERTCh 5निःशुल्क

Chapter 5

🎓 Class 9📖 Kshitij📖 13 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~20 मिनट
Chapter 4अध्याय 5 / 13Chapter 6

Chapter 5अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 13 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

प्रस्तावना

व्याख्या

प्रस्तावना

इस खंड में 'नाना साहब की पुत्री देवी मैना को भस्म कर दिया गया' पाठ का परिचय दिया गया है। यह कहानी 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान घटित एक अत्यंत दुखद और मार्मिक घटना पर आधारित है। स्वतंत्रता संग्राम भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है, जिसमें देशवासियों ने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाई। इस कहानी में नाना साहब के परिवार की पीड़ा और विशेषकर उनकी पुत्री देवी मैना के साथ हुए अत्याचार को दर्शाया गया है। यह घटना हमें उस समय की राजनीतिक, सामाजिक और मानवीय परिस्थितियों से अवगत कराती है। पाठ में स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हुए बलिदान, मातृभूमि के प्रति निष्ठा और साहस की भावना को उजागर किया गया है। इस प्रस्तावना के माध्यम से विद्यार्थी पाठ की गंभीरता और महत्व को समझते हैं और आगे के अध्याय के लिए तैयार होते हैं।

  • 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की पृष्ठभूमि पर आधारित कहानी।
  • नाना साहब के परिवार की दुखद घटना का वर्णन।
  • देशभक्ति और बलिदान की भावना को उजागर करना।
  • विद्यार्थियों को इतिहास की मार्मिक घटनाओं से परिचित कराना।
  • 📌 स्वतंत्रता संग्राम - भारत के ब्रिटिश शासन के खिलाफ 1857 में हुआ पहला बड़ा विद्रोह।
  • 📌 नाना साहब - मराठा कुल के एक प्रतिष्ठित परिवार के प्रमुख, स्वतंत्रता संग्राम के नेता।
  • 📌 बलिदान - अपने उद्देश्य के लिए अपने जीवन या सुखों का त्याग।

नाना साहब और उनका परिवार

व्याख्या

नाना साहब और उनका परिवार

इस खंड में नाना साहब के जीवन, उनके परिवार और विशेषकर उनकी पुत्री देवी मैना का विस्तृत परिचय दिया गया है। नाना साहब का असली नाम धनाजी बालाजी टिळक था, जो मराठा कुल के एक प्रतिष्ठित परिवार से थे। वे पेशवा बाजीराव द्वितीय के पौत्र थे और 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में एक प्रमुख नेता के रूप में उभरे। नाना साहब का परिवार सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत सम्मानित था। उनकी पुत्री देवी मैना एक सशक्त और साहसी महिला थीं, जिनका जीवन स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अनेक कठिनाइयों और संकटों से भरा था। इस खंड में उनके पारिवारिक संबंधों, सामाजिक स्थिति और उनके व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं को समझाया गया है। यह परिचय पाठ के भाव को गहराई प्रदान करता है और विद्यार्थियों को नाना साहब के परिवार की पीड़ा के प्रति संवेदनशील बनाता है।

  • नाना साहब का असली नाम धनाजी बालाजी टिळक था।
  • वे मराठा कुल के प्रतिष्ठित परिवार से थे।
  • उनकी पुत्री देवी मैना स्वतंत्रता संग्राम की सशक्त महिला थीं।
  • परिवार की सामाजिक और राजनीतिक स्थिति महत्वपूर्ण थी।
  • 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में नाना साहब की भूमिका प्रमुख थी।
  • 📌 पेशवा - मराठा साम्राज्य में प्रधानमंत्री।
  • 📌 देवी मैना - नाना साहब की पुत्री, स्वतंत्रता संग्राम की एक महत्वपूर्ण महिला।
  • 📌 मराठा कुल - महाराष्ट्र के प्रमुख राजवंश।

स्वतंत्रता संग्राम की पृष्ठभूमि

व्याख्या

स्वतंत्रता संग्राम की पृष्ठभूमि

इस खंड में 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की पृष्ठभूमि और कारणों का विस्तृत वर्णन किया गया है। ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा भारत में आर्थिक शोषण, भारतीय राजाओं की सत्ता छिनना, धार्मिक और सामाजिक असंतोष, सैनिकों के साथ अन्याय, और अंग्रेजों की नीतियों

अभ्यास प्रश्नChapter 5

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.हरिशंकर परसाई ने प्रेमचंद का जो शब्दचित्र हमारे सामने प्रस्तुत किया है उससे प्रेमचंद के व्यक्तित्व की कौन-कौन सी विशेषताएँ उभरकर आती हैं?

उत्तर:

हरिशंकर परसाई के शब्दचित्र से प्रेमचंद के व्यक्तित्व की कई विशेषताएँ उभरकर आती हैं, जैसे कि उनकी सादगी, विनम्रता, सामाजिक चेतना, व्यंग्यात्मक दृष्टिकोण, और उनकी गहरी मानवीय समझ। वे अपने पहनावे में सरल थे, परन्तु उनके विचार और लेखन समाज की गहरी समस्याओं को उजागर करते थे। उनकी व्यंग्यात्मक मुस्कान उनके साहस और हिम्मत को दर्शाती है।

व्याख्या:

प्रेमचंद के व्यक्तित्व की विशेषताएँ उनके पहनावे, व्यवहार और लेखन से स्पष्ट होती हैं। परसाई ने उनके फटे जूते और साधारण पोशाक के माध्यम से उनकी सादगी और समाज के प्रति उनकी संवेदनशीलता को उजागर किया है।

MediumNCERT
Q2.सही कथन के सामने (✓) का निशान लगाइए— (क) बाएँ पाँव का जूता ठीक है मगर दाहिने जूते में बड़ा छेद हो गया है जिसमें से अँगुली बाहर निकल आई है। (ख) लोग तो इत्र चुपड़कर फोटो खिंचाते हैं जिससे फोटो में खुशबू आ जाए। (ग) तुम्हारी यह व्यंग्य मुसकान मेरे हौसले बढ़ाती है। (घ) जिसे तुम घृणित समझते हो, उसकी तरफ अँगूठे से इशारा करते हो?
A.(क) बाएँ पाँव का जूता ठीक है मगर दाहिने जूते में बड़ा छेद हो गया है जिसमें से अँगुली बाहर निकल आई है।
B.(ख) लोग तो इत्र चुपड़कर फोटो खिंचाते हैं जिससे फोटो में खुशबू आ जाए।
C.(ग) तुम्हारी यह व्यंग्य मुसकान मेरे हौसले बढ़ाती है।
D.(घ) जिसे तुम घृणित समझते हो, उसकी तरफ अँगूठे से इशारा करते हो?

उत्तर:

(क) ✓ (ख) ✗ (ग) ✓ (घ) ✗

व्याख्या:

कथन (क) और (ग) सही हैं क्योंकि वे पाठ के अनुसार हैं। (ख) गलत है क्योंकि लोग इत्र चुपड़कर फोटो नहीं खिंचवाते। (घ) गलत है क्योंकि घृणित समझे जाने वाले व्यक्ति की तरफ अँगूठे से इशारा नहीं किया जाता।

EasyNCERT
Q3.नीचे दी गई पंक्तियों में निहित व्यंग्य को स्पष्ट कीजिए— (क) जूता हमेशा टोपी से कीमती रहा है। अब तो जूते की कीमत और बढ़ गई है और एक जूते पर पचीसों टोपियाँ न्योछावर होती हैं। (ख) तुम परदे का महत्व ही नहीं जानते, हम परदे पर कुर्बान हो रहे हैं। (ग) जिसे तुम घृणित समझते हो, उसकी तरफ़ हाथ की नहीं, पाँव की अँगुली से इशारा करते हो?

उत्तर:

(क) यहाँ जूते की कीमत बढ़ने का अर्थ है कि जूते इतने फटे हुए हैं कि उन्हें छुपाने के लिए कई टोपी (ढकने वाली चीजें) लगानी पड़ती हैं। यह व्यंग्य है कि जूते की कीमत टोपी से अधिक हो गई है। (ख) 'परदा' का अर्थ यहाँ सामाजिक छुपाव या दिखावा है। व्यंग्य यह है कि वे लोग जो दिखावे के लिए परदा रखते हैं, वे खुद उस परदे पर कुर्बान हो रहे हैं यानी अपनी असलियत छुपा रहे हैं। (ग) यहाँ व्यंग्य यह है कि घृणित समझे जाने वाले व्यक्ति की तरफ इशारा करने के लिए हाथ की बजाय पाँव की अँगुली का प्रयोग किया जाता है, जो असभ्यता को दर्शाता है।

व्याख्या:

व्यंग्य का उद्देश्य पाठकों को सोचने पर मजबूर करना और सामाजिक या मानवीय विसंगतियों को उजागर करना होता है। इन पंक्तियों में व्यंग्य के माध्यम से जूते, परदा और इशारे की असलियत को मजाकिया ढंग से प्रस्तुत किया गया है।

MediumNCERT
Q4.पाठ में एक जगह पर लेखक सोचता है कि ‘फोटो खिंचाने की अगर यह पोशाक है तो पहनने की कैसी होगी?’ लेकिन अगले ही पल वह विचार बदलता है कि ‘नहीं, इस आदमी की अलग-अलग पोशाकें नहीं होंगी।’ आपके अनुसार इस संदर्भ में प्रेमचंद के बारे में लेखक के विचार बदलने की क्या वजहें हो सकती हैं?

उत्तर:

लेखक के विचार बदलने की वजह यह हो सकती है कि उन्होंने प्रारंभ में प्रेमचंद की पोशाक को देखकर उसे असामान्य और अलग समझा, परन्तु बाद में यह महसूस किया कि प्रेमचंद के पास अलग-अलग पोशाकें नहीं हो सकतीं क्योंकि वे साधारण जीवन जीते थे और उनके पास सीमित संसाधन थे। इसलिए उनकी पोशाकें भी सीमित और एक जैसी होंगी। यह बदलाव लेखक की समझ और प्रेमचंद के जीवन के प्रति सहानुभूति को दर्शाता है।

व्याख्या:

यह विचार परिवर्तन प्रेमचंद के व्यक्तित्व की सादगी और सीमित संसाधनों की ओर संकेत करता है। लेखक ने अपनी पहली धारणा को संशोधित किया और प्रेमचंद की वास्तविकता को समझा।

MediumNCERT
Q5.आपने यह व्यंग्य पढ़ा। इसे पढ़कर आपको लेखक की कौन सी बातें आकर्षित करती हैं?

उत्तर:

लेखक की बातें जो आकर्षित करती हैं, उनमें उनकी सादगी, व्यंग्यात्मक दृष्टिकोण, सामाजिक चेतना, और मानवीय संवेदनाएँ शामिल हैं। वे साधारण वस्तुओं जैसे जूते के माध्यम से गहरी सामाजिक सच्चाइयों को उजागर करते हैं। उनकी भाषा सरल लेकिन प्रभावशाली है, जो पाठक को सोचने पर मजबूर करती है।

व्याख्या:

व्यंग्य के माध्यम से लेखक ने समाज की विसंगतियों को उजागर किया है, जो पाठक को प्रभावित करता है। उनकी सोच में मानवीयता और सामाजिक सुधार की भावना झलकती है।

EasyNCERT
Q6.पाठ में ‘टीले’ शब्द का प्रयोग किन संदर्भों को इंगित करने के लिए किया गया होगा?

उत्तर:

पाठ में ‘टीले’ शब्द का प्रयोग संभवतः छोटे-छोटे ढेर या ऊँचे स्थान के लिए किया गया होगा, जो किसी वस्तु या स्थिति के अस्थायी या छोटे रूप को दर्शाता है। यह शब्द सामाजिक या भौतिक संदर्भ में किसी चीज़ के छोटे समूह या ढेर को इंगित कर सकता है।

व्याख्या:

टीले शब्द का अर्थ छोटे-छोटे ढेर या ऊँचे स्थान होते हैं, जो पाठ के संदर्भ में किसी वस्तु की स्थिति या उसके महत्व को दर्शाने के लिए प्रयुक्त हुआ होगा।

EasyNCERT
Q7.प्रेमचंद के फटे जूते को आधार बनाकर परसाई जी ने यह व्यंग्य लिखा है। आप भी किसी व्यक्ति की पोशाक को आधार बनाकर एक व्यंग्य लिखिए।

उत्तर:

यह एक रचनात्मक प्रश्न है। विद्यार्थी को किसी व्यक्ति की पोशाक के आधार पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी लिखनी होगी, जिसमें वे सामाजिक या मानवीय पहलुओं को व्यंग्य के माध्यम से उजागर करें। उदाहरण के लिए, किसी व्यक्ति के अत्यधिक फैशनेबल लेकिन असहज कपड़ों पर व्यंग्य किया जा सकता है कि वे अपनी असली पहचान छुपाने के लिए इतने कपड़े पहनते हैं कि खुद को भी पहचानना मुश्किल हो जाता है।

व्याख्या:

यह प्रश्न विद्यार्थियों की रचनात्मकता और व्यंग्यात्मक सोच को बढ़ावा देता है। इसमें वे अपने आस-पास की सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर व्यंग्यात्मक टिप्पणी लिख सकते हैं।

MediumNCERT
Q8.आपकी दृष्टि में वेश-भूषा के प्रति लोगों की सोच में आज क्या परिवर्तन आया है?

उत्तर:

आज के समय में वेश-भूषा के प्रति लोगों की सोच में कई परिवर्तन आए हैं। पहले जहाँ सादगी और पारंपरिक पोशाक को अधिक महत्व दिया जाता था, वहीं अब फैशन, ब्रांड और आधुनिकता को प्राथमिकता मिलती है। लोग अपनी पहचान और व्यक्तित्व को वेश-भूषा के माध्यम से व्यक्त करते हैं। साथ ही, सामाजिक और आर्थिक बदलावों के कारण पोशाक के प्रति दृष्टिकोण में विविधता आई है।

व्याख्या:

समय के साथ सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक परिवर्तनों ने वेश-भूषा के प्रति सोच को प्रभावित किया है। यह प्रश्न विद्यार्थियों को वर्तमान और पूर्व की सोच में तुलना करने के लिए प्रेरित करता है।

EasyNCERT