Chapter 3
Chapter 3 — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 11 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
परिचय
व्याख्यापरिचय
ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल कार्बनिक यौगिकों के महत्वपूर्ण वर्ग हैं जिनमें मुख्यतः कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन परमाणु होते हैं। ये यौगिक कार्बनिक रसायन विज्ञान में विशेष महत्व रखते हैं क्योंकि इनके अणुओं में कार्बोनिल समूह (C=O) मौजूद होता है, जो इनके रासायनिक गुणों को निर्धारित करता है। ऐल्डिहाइड और कीटोन दोनों में कार्बोनिल समूह होता है, परन्तु ऐल्डिहाइड में यह समूह श्रृंखला के अंत में होता है जबकि कीटोन में श्रृंखला के बीच में। कार्बोक्सिलिक अम्लों में कार्बोनिल समूह के साथ -OH समूह जुड़ा होता है, जिससे यह अम्लीय गुण प्रदर्शित करते हैं। इन यौगिकों का अध्ययन इसलिए आवश्यक है क्योंकि ये जैविक और औद्योगिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उदाहरण के लिए, फॉर्मल्डिहाइड का उपयोग कीटाणुनाशक के रूप में होता है, एसिटोन एक सामान्य सॉल्वैंट है, और कार्बोक्सिलिक अम्ल जैसे एसीटिक अम्ल का उपयोग खाद्य पदार्थों में होता है। इस अध्याय में हम इन यौगिकों की संरचना, नामकरण, भौतिक एवं रासायनिक गुणों, तथा उनकी विशिष्ट प्रतिक्रियाओं का विस्तार से अध्ययन करेंगे।
- ऐल्डिहाइड, कीटोन और कार्बोक्सिलिक अम्ल में कार्बोनिल समूह (C=O) होता है।
- ऐल्डिहाइड में कार्बोनिल समूह श्रृंखला के अंत में होता है, कीटोन में बीच में।
- कार्बोक्सिलिक अम्लों में कार्बोनिल समूह के साथ -OH समूह जुड़ा होता है।
- ये यौगिक जैविक और औद्योगिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।
- इन यौगिकों की रासायनिक प्रतिक्रियाएँ मुख्यतः कार्बोनिल समूह की प्रतिक्रिया क्षमता पर निर्भर करती हैं।
- 📌 कार्बोनिल समूह: एक कार्बन और ऑक्सीजन के बीच डबल बॉन्ड (C=O)।
- 📌 ऐल्डिहाइड: कार्बोनिल समूह श्रृंखला के अंत में होता है।
- 📌 कीटोन: कार्बोनिल समूह श्रृंखला के बीच में होता है।
ऐल्डिहाइड और कीटोन के नामकरण
व्याख्याऐल्डिहाइड और कीटोन के नामकरण
ऐल्डिहाइड और कीटोन के नामकरण के लिए IUPAC नियमों का पालन किया जाता है। ऐल्डिहाइड के नामकरण में सबसे लंबी कार्बन श्रृंखला जिसमें कार्बोनिल समूह अंत में होता है, उसका नाम लिया जाता है और अंत में '-अल' प्रत्यय जोड़ा जाता है। यदि कार्बोनिल समूह श्रृंखला के अंत में होता है तो कार्बन को C1 माना जाता है। उदाहरण के लिए, CH3-CHO को एथेनाल कहा जाता है। कीटोन के नामकरण में सबसे लंबी कार्बन श्रृंखला जिसमें कार्बोनिल समूह मध्य में होता है, उसका नाम लिया जाता है और अंत में '-ओन' प्रत्यय जोड़ा जाता है। कार्बोनिल समूह वाले कार्बन को सबसे कम संख्या दी जाती है। उदाहरण के लिए, CH3-CO-CH3 को प्रोपानोन कहा जाता है। ऐल्डिहाइड और कीटोन के सामान्य नाम भी प्रचलित हैं जैसे फॉर्मल्डिहाइड (HCHO) और एसिटोन (CH3COCH3)। इसके अतिरिक्त, ऐल्डिहाइड और कीटोन के नामकरण में साइड चेन और अन्य उपसमूहों के लिए भी IUPAC नियम लागू होते हैं।
- ऐल्डिहाइड के नामकरण में अंत में '-अल' प्रत्यय जोड़ा जाता है।
- कीटोन के नामकरण में अंत में '-ओन' प्रत्यय जोड़ा जाता है।
- कार्बोनिल समूह को सबसे कम संख्या दी जाती है।
- सर्वप्रथम सबसे लंबी कार्बन श्रृंखला चुनी जाती है।
- सामान्य नाम भी प्रचलित हैं जैसे फॉर्मल्डिहाइड और एसिटोन।
- 📌 IUPAC नामकरण: अंतर्राष्ट्रीय रासायनिक नामकरण प्रणाली।
- 📌 ऐल्डिहाइड: अंत में कार्बोनिल समूह।
- 📌 कीटोन: मध्य में कार्बोनिल समूह।
ऐल्डिहाइड और कीटोन के भौतिक गुण
व्याख्याऐल्डिहाइड और कीटोन के भौतिक गुण
ऐल्डिहाइड और कीटोन के भौतिक गुण उनके अणु संरचना और इंटरमॉलेक्यूलर बलों पर निर्भर करते हैं। ये यौगिक सामान्यतः रंगहीन द्रव होते हैं जिनका गंध विशिष्ट होता है। छोटे ऐल्डिहाइड और कीटोन पानी में घुलनशील होते हैं क्योंकि वे हाइड्रोजन बंध बना सकते हैं, परन
अभ्यास प्रश्न — Chapter 3
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.8.6 साइक्लोहेक्सेनकार्बील्डिहाइड की निम्नलिखित अभिकर्मकों के साथ अभिक्रिया से बनने वाले उत्पादों को पहचानिए- (i) PhMgBr एवं तत्पश्चात् H₂O⁺ (ii) टॉलेन अभिकर्मक (iii) सेमीकार्बजाइड एवं दुर्बल अम्ल (iv) एथेनॉल का आधिक्य तथा अम्ल (vi) जिंक अम्लगम एवं तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल
उत्तर:
साइक्लोहेक्सेनकार्बील्डिहाइड की अभिक्रियाएँ: (i) PhMgBr एवं H₂O⁺ के साथ अभिक्रिया में 3-फेनिलप्रोपेनॉइक अम्ल बनता है। (ii) टॉलेन अभिकर्मक के साथ अभिक्रिया में 2,4,6-ट्राईनाइट्रोबेन्जोइक अम्ल बनता है। (iii) सेमीकार्बजाइड एवं दुर्बल अम्ल के साथ अभिक्रिया में 2-मेथिलसाइक्लोपेन्टेनकार्बोक्सिलिक अम्ल बनता है। (iv) एथेनॉल का आधिक्य तथा अम्ल के साथ अभिक्रिया में 3-मेथिलब्यूट-2-इनोइक अम्ल बनता है। (vi) जिंक अम्लगम एवं तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ अभिक्रिया में उपयुक्त उत्पाद बनते हैं।
व्याख्या:
प्रत्येक अभिकर्मक के साथ साइक्लोहेक्सेनकार्बील्डिहाइड की अभिक्रिया से विशिष्ट उत्पाद बनते हैं, जो उनके रासायनिक गुणों पर आधारित हैं। PhMgBr एक ग्रिग्नार्ड अभिकर्मक है जो कार्बील्डिहाइड के साथ अभिक्रिया कर 3-फेनिलप्रोपेनॉइक अम्ल बनाता है। टॉलेन अभिकर्मक ऐल्डिहाइड की उपस्थिति में प्रतिक्रिया करता है। सेमीकार्बजाइड से कार्बोनिल यौगिक की पहचान होती है। एथेनॉल एवं अम्ल के साथ एस्टरकरण होता है। जिंक अम्लगम के साथ हाइड्रोजन की आपूर्ति होती है।
Q2.8.7 निम्नलिखित में से कौन से यौगिकों में ऐल्डोल संघनन होगा, किनमें कैनिजारो अभिक्रिया होगी और किनमें उपरोक्त में से कोई क्रिया नहीं होगी? ऐल्डोल संघनन तथा कैनिजारो अभिक्रिया में संभावित उत्पादों की संरचना लिखिए। (i) मेथेनैल (ii) 2-मेथिलपेन्टेनैल (iii) बेंजील्डिहाइड (iv) बेंजोफीनॉन (vi) साइक्लोहेक्सेनोन (vi) 1-फेनिलप्रोपेनोन (vii) फेनिलऐसीटैल्डिहाइड (viii) ब्यूटेन-1-ऑल (ix) 2,2-डाइमेथिलब्यूटेनैल
उत्तर:
ऐल्डोल संघनन और कैनिजारो अभिक्रिया के लिए यौगिकों का वर्गीकरण: ऐल्डोल संघनन होगा: (i) मेथेनैल, (ii) 2-मेथिलपेन्टेनैल, (iii) बेंजील्डिहाइड, (vii) फेनिलऐसीटैल्डिहाइड कैनिजारो अभिक्रिया होगी: (ix) 2,2-डाइमेथिलब्यूटेनैल कोई क्रिया नहीं होगी: (iv) बेंजोफीनॉन, (vi) साइक्लोहेक्सेनोन, (vi) 1-फेनिलप्रोपेनोन, (viii) ब्यूटेन-1-ऑल संरचनाएँ: - ऐल्डोल संघनन में, ऐल्डिहाइड के α-हाइड्रोजन के कारण दो अणु जुड़कर β-हाइड्रॉक्सी एल्डिहाइड बनाते हैं। - कैनिजारो अभिक्रिया में, बिना α-हाइड्रोजन वाले ऐल्डिहाइड एक दूसरे के साथ ऑक्सीकरण और अपचयन करते हैं।
व्याख्या:
ऐल्डोल संघनन के लिए यौगिक में α-हाइड्रोजन होना आवश्यक है। इसलिए मेथेनैल, 2-मेथिलपेन्टेनैल, बेंजील्डिहाइड और फेनिलऐसीटैल्डिहाइड में यह क्रिया होती है। कैनिजारो अभिक्रिया उन ऐल्डिहाइड में होती है जिनमें α-हाइड्रोजन नहीं होता, जैसे 2,2-डाइमेथिलब्यूटेनैल। कीटोन और अल्कोहॉल में ये क्रियाएँ नहीं होती।
Q3.8.8 एथेनैल को निम्नलिखित यौगिकों में कैसे परिवर्तित करेंगे? (i) ब्यूटेन-1,3-डाईऑल (ii) ब्यूट-2-ईनैल (iii) ब्यूट-2-इनॉइक अम्ल
उत्तर:
एथेनैल से यौगिकों का रूपांतरण: (i) ब्यूटेन-1,3-डाईऑल: एथेनैल को एल्डोल संघनन के द्वारा ब्यूटेन-1,3-डाईऑल में बदला जा सकता है। (ii) ब्यूट-2-ईनैल: एथेनैल का एल्डोल संघनन और तत्पश्चात् डिहाइड्रेशन से ब्यूट-2-ईनैल प्राप्त होता है। (iii) ब्यूट-2-इनॉइक अम्ल: ब्यूट-2-ईनैल का ऑक्सीकरण कर ब्यूट-2-इनॉइक अम्ल प्राप्त होता है।
व्याख्या:
एथेनैल का एल्डोल संघनन कर ब्यूटेन-1,3-डाईऑल प्राप्त होता है। इसके बाद डिहाइड्रेशन से ब्यूट-2-ईनैल बनता है। अंत में ब्यूट-2-ईनैल का ऑक्सीकरण कर ब्यूट-2-इनॉइक अम्ल प्राप्त होता है।
Q4.8.9 प्रोपेनैल एवं ब्यूटेनैल के ऐल्डोल संघनन से बनने वाले चार संभावित उत्पादों के नाम एवं संरचना सूत्र लिखिए। प्रत्येक में बताइए कि कौन सा ऐल्डिहाइड नाभिकरागी और कौन सा इलेक्ट्रॉनरागी होगा?
उत्तर:
प्रोपेनैल और ब्यूटेनैल के ऐल्डोल संघनन से बनने वाले संभावित उत्पाद: 1. प्रोपेनैल + प्रोपेनैल 2. प्रोपेनैल + ब्यूटेनैल 3. ब्यूटेनैल + प्रोपेनैल 4. ब्यूटेनैल + ब्यूटेनैल संरचना सूत्र और भूमिका: - नाभिकरागी (Electrophile): वह ऐल्डिहाइड जो कार्बोनिल कार्बन पर सकारात्मक आंशिक आवेश रखता है। - इलेक्ट्रॉनरागी (Nucleophile): वह ऐल्डिहाइड जो α-हाइड्रोजन खोकर एनोल या एनोलैट रूप में होता है और नाभिकरागी पर हमला करता है। प्रत्येक संघनन में एक यौगिक नाभिकरागी और दूसरा इलेक्ट्रॉनरागी होता है।
व्याख्या:
ऐल्डोल संघनन में α-हाइड्रोजन वाले ऐल्डिहाइड एनोल रूप में बदलते हैं जो इलेक्ट्रॉनरागी होते हैं। वे नाभिकरागी कार्बोनिल कार्बन पर हमला करते हैं। प्रोपेनैल और ब्यूटेनैल दोनों में α-हाइड्रोजन होते हैं, इसलिए वे दोनों नाभिकरागी और इलेक्ट्रॉनरागी के रूप में कार्य कर सकते हैं।
Q5.8.10 एक कार्बनिक यौगिक जिसका अणुसूत्र C₉H₁₀O है 2,4 DNP व्युत्पन्न बनाता है, टॉलेन अभिकर्मक को अपचित करता है तथा कैनिजारो अभिक्रिया देता है। प्रबल ऑक्सीकरण पर वह 1,2-बेंजीनडाईकार्बॉक्सिलिक अम्ल बनाता है। यौगिक को पहचानिए।
उत्तर:
दिया गया यौगिक C₉H₁₀O है, 2,4-DNP से प्रतिक्रिया करता है, टॉलेन अभिकर्मक को अपचित करता है और कैनिजारो अभिक्रिया देता है। प्रबल ऑक्सीकरण पर 1,2-बेंजीनडाईकार्बॉक्सिलिक अम्ल बनाता है। यह विशेषताएँ दर्शाती हैं कि यौगिक एक ऑर्थो-हाइड्रॉक्सीबेंजैल्डिहाइड है। इसलिए यौगिक है: 2-हाइड्रॉक्सीबेंजैल्डिहाइड (ओ-हाइड्रॉक्सीबेंजैल्डिहाइड)।
व्याख्या:
2,4-DNP प्रतिक्रिया से पता चलता है कि यौगिक में कार्बोनिल समूह है। टॉलेन अभिकर्मक को अपचित करना दर्शाता है कि यह एक कीटोन नहीं बल्कि ऐल्डिहाइड है। कैनिजारो अभिक्रिया से पता चलता है कि यौगिक में α-हाइड्रोजन नहीं है। प्रबल ऑक्सीकरण पर 1,2-बेंजीनडाईकार्बॉक्सिलिक अम्ल बनना दर्शाता है कि कार्बोनिल समूह बेंजीन रिंग के साथ ऑर्थो स्थिति में है।
Q6.8.11 एक कार्बनिक यौगिक 'क' (आण्विक सूत्र, C₉H₁₀O₂) को तनु सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ जलअपघटित करने के उपरांत एक कार्बॉक्सिलिक अम्ल 'ख' एवं एक ऐल्कोहॉल 'ग' प्राप्त हुई। 'ग' को क्रोमिक अम्ल के साथ ऑक्सीकृत करने पर 'ख' उत्पन्न होता है। 'ग' निर्जलीकरण पर ब्यूट-1-ईन देता है। अभिक्रियाओं में प्रयुक्त होने वाली सभी रासायनिक समीकरणों को लिखिए।
उत्तर:
प्रतिक्रियाएँ: 1. जलअपघटन: क (C₉H₁₀O₂) + H₂SO₄ (तनु) + H₂O → ख (कार्बॉक्सिलिक अम्ल) + ग (ऐल्कोहॉल) 2. ऑक्सीकरण: ग + क्रोमिक अम्ल → ख 3. निर्जलीकरण: ग → ब्यूट-1-ईन + H₂O रासायनिक समीकरण: (i) C₉H₁₀O₂ + H₂O (H₂SO₄) → C₄H₈O₂ (ख) + C₅H₁₂O (ग) (ii) C₅H₁₂O + [O] (क्रोमिक अम्ल) → C₄H₈O₂ (ख) (iii) C₅H₁₂O → C₄H₈ + H₂O
व्याख्या:
यौगिक 'क' का जलअपघटन तनु सल्फ्यूरिक अम्ल में होता है, जिससे कार्बॉक्सिलिक अम्ल 'ख' और ऐल्कोहॉल 'ग' बनते हैं। ऐल्कोहॉल 'ग' का क्रोमिक अम्ल से ऑक्सीकरण करने पर वही कार्बॉक्सिलिक अम्ल 'ख' बनता है। ऐल्कोहॉल 'ग' का निर्जलीकरण करने पर ब्यूट-1-ईन प्राप्त होता है।
Q7.8.12 निम्नलिखित यौगिकों को उनसे संबंधित (कोष्टकों में दिए गए) गुणधर्मों के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए— (i) ऐसीटैल्डिहाइड, ऐसीटोन, डाइ-तृत्वीयक-ब्यूटिलकीटोन, मेथिलतृत्वीयक-ब्यूटिलकीटोन (HCN के प्रति अभिक्रियाशीलता) (ii) CH₃CH₂CH(Br)COOH, CH₃CH(Br)CH₂COOH, (CH₃)₂CHCOOH, CH₃CH₂CH₂COOH (अम्लता के क्रम में) (iii) बेंजोइक अम्ल; 4-नाइट्रोबेंजोइक अम्ल; 3,4-डाईनाइट्रोबेंजोइक अम्ल; 4-मेथॉक्सी बेंजोइक अम्ल (अम्लता की सामथ्य के क्रम में)
उत्तर:
(i) HCN के प्रति अभिक्रियाशीलता के अनुसार बढ़ते क्रम में: मेथिलतृत्वीयक-ब्यूटिलकीटोन < डाइ-तृत्वीयक-ब्यूटिलकीटोन < ऐसीटोन < ऐसीटैल्डिहाइड (ii) अम्लता के क्रम में: CH₃CH₂CH₂COOH < (CH₃)₂CHCOOH < CH₃CH(Br)CH₂COOH < CH₃CH₂CH(Br)COOH (iii) अम्लता की सामथ्य के क्रम में: 4-मेथॉक्सी बेंजोइक अम्ल < बेंजोइक अम्ल < 4-नाइट्रोबेंजोइक अम्ल < 3,4-डाईनाइट्रोबेंजोइक अम्ल
व्याख्या:
(i) HCN के प्रति अभिक्रियाशीलता में एल्डिहाइड अधिक सक्रिय होते हैं, इसलिए ऐसीटैल्डिहाइड सबसे अधिक अभिक्रियाशील है। (ii) अम्लता पर इलेक्ट्रॉन खींचने वाले समूह प्रभाव डालते हैं, ब्रोमीन समूह के स्थान के अनुसार अम्लता बदलती है। (iii) नाइट्रो समूह इलेक्ट्रॉन खींचने वाला है, जिससे अम्लता बढ़ती है, जबकि मेथॉक्सी समूह इलेक्ट्रॉन धकेलने वाला है, जिससे अम्लता कम होती है।
Q8.8.13 निम्नलिखित यौगिक युगलों में विभेद करने के लिए सरल रासायनिक परीक्षणों को दीजिए— (i) प्रोपेनैल एवं प्रोपेनोन (ii) एसीटोफीनॉन एवं बेंजोफीनोन (iii) फीनॉल एवं बेंजोइक अम्ल (iv) बेंजोइक अम्ल एवं एथिनबेंजोएट (v) पेन्टेन-2-ऑन एवं पेन्टेन-3-ऑन (vi) बेंजोइकाइड एवं एसीटोफीनोन (vii) एथेनैल एवं प्रोपेनैल
उत्तर:
रासायनिक परीक्षण: (i) प्रोपेनैल और प्रोपेनोन: टॉलेन अभिकर्मक (सिल्वर मिरर टेस्ट) प्रोपेनैल को प्रतिक्रिया करता है, प्रोपेनोन नहीं। (ii) एसीटोफीनॉन और बेंजोफीनोन: 2,4-DNP परीक्षण से दोनों प्रतिक्रिया करते हैं, परंतु कैनिजारो अभिक्रिया से भेद होता है। (iii) फीनॉल और बेंजोइक अम्ल: फेनॉल का लौह(III) क्लोराइड परीक्षण सकारात्मक होता है, बेंजोइक अम्ल नहीं। (iv) बेंजोइक अम्ल और एथिनबेंजोएट: NaHCO₃ परीक्षण से बेंजोइक अम्ल प्रतिक्रिया करता है, एथिनबेंजोएट नहीं। (v) पेन्टेन-2-ऑन और पेन्टेन-3-ऑन: 2,4-DNP परीक्षण से भेद। (vi) बेंजोइकाइड और एसीटोफीनोन: टॉलेन अभिकर्मक से भेद। (vii) एथेनैल और प्रोपेनैल: कैनिजारो अभिक्रिया से भेद।
व्याख्या:
प्रत्येक यौगिक युगल के बीच भेद करने के लिए विशिष्ट रासायनिक परीक्षण होते हैं जो उनके रासायनिक गुणों पर आधारित होते हैं। टॉलेन अभिकर्मक, 2,4-DNP, NaHCO₃, लौह(III) क्लोराइड आदि परीक्षणों का उपयोग किया जाता है।
Rasayan vigyan bhag II के सभी 5 अध्याय
Chemistry · Class 12