Chapter 2
Chapter 2 — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
2.1 विद्युत विभव और विभवांतर
अवधारणा2.1 विद्युत विभव और विभवांतर
विद्युत विभव (Electric Potential) किसी बिंदु पर एकांक धनात्मक आवेश को अनंत से उस बिंदु तक लाने में किए गए कार्य के बराबर होती है। इसे V से दर्शाया जाता है। यह एक स्केलर राशि है और इसका मात्रक वोल्ट (V) है। विभव का अर्थ है किसी बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की स्थिति। यदि किसी बिंदु पर विभव ज्ञात हो, तो हम यह समझ सकते हैं कि उस बिंदु पर आवेश को लाने के लिए कितना कार्य करना होगा। विभवांतर (Potential Difference) दो बिंदुओं के बीच विभव का अंतर होता है। यह विभवांतर ही विद्युत धारा के प्रवाह के लिए प्रेरक बल का काम करता है। विभवांतर को V_AB = V_A - V_B से परिभाषित किया जाता है, जहाँ V_A और V_B क्रमशः बिंदु A और B के विभव हैं। विभवांतर को वोल्ट में मापा जाता है। **Table on page 34 (5 rows × 5 cols)** | भौतिक राशि | प्रतीक | विमाएँ | मात्रक | टिप्पणी | | --- | --- | --- | --- | --- | | विभव | अथवा V :selected: | [M' L2T3 A-1] | V | विभवांतर भौतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है। | | धारिता | C | [M-1L-27442] | F | | | ध्रुवण | P | [L-2 AT] | C m-2 | द्विध्रुव आघूर्ण प्रति एकांक आयतन | | परावैद्युतांक | K | [विमाहीन] | | shed |
- विद्युत विभव वह कार्य है जो एकांक धनात्मक आवेश को अनंत से किसी बिंदु तक लाने में किया जाता है।
- विभव एक स्केलर राशि है और इसका मात्रक वोल्ट (V) है।
- विभवांतर दो बिंदुओं के बीच विभव का अंतर होता है।
- विभवांतर विद्युत धारा के प्रवाह के लिए प्रेरक बल का कार्य करता है।
- विभव और विभवांतर विद्युत क्षेत्र की स्थिति को समझने में सहायक होते हैं।
- 📌 विद्युत विभव: किसी बिंदु पर आवेश को लाने में किया गया कार्य।
- 📌 विभवांतर: दो बिंदुओं के बीच विभव का अंतर।
- 📌 वोल्ट: विभव की मात्रक।
2.2 बिंदु आवेश के कारण विभव
अवधारणा2.2 बिंदु आवेश के कारण विभव
यदि किसी स्थान पर एक बिंदु आवेश q स्थित है, तो उसके कारण किसी दूरी r पर स्थित बिंदु P पर विद्युत विभव V उत्पन्न होता है। यह विभव आवेश q के अनुपाती होता है और दूरी r के व्युत्क्रमानुपाती होता है। निर्वात में यह विभव निम्नलिखित सूत्र द्वारा दिया जाता है: V = (1/4πε₀) × (q/r), जहाँ ε₀ निर्वात की पारगम्यता है। यह सूत्र दर्शाता है कि जैसे-जैसे दूरी r बढ़ती है, विभव घटता है। इस प्रकार, बिंदु आवेश के चारों ओर विभव का वितरण एकाकी आवेश के कारण उत्पन्न विद्युत क्षेत्र की प्रकृति को दर्शाता है।
- बिंदु आवेश q के कारण दूरी r पर विभव V = (1/4πε₀) × (q/r) होता है।
- विभव आवेश के समानुपाती और दूरी के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
- ε₀ निर्वात की पारगम्यता है, जिसका मान लगभग 8.854 × 10⁻¹² C²/N·m² होता है।
- जैसे-जैसे दूरी बढ़ती है, विभव कम होता जाता है।
- यह विभव एक स्केलर राशि है और इसका संकेत आवेश के संकेत के अनुसार धनात्मक या ऋणात्मक हो सकता है।
- 📌 बिंदु आवेश: एक ऐसा आवेश जिसका आयाम नगण्य माना जाता है।
- 📌 निर्वात की पारगम्यता (ε₀): निर्वात में विद्युत क्षेत्र की पारगम्यता।
2.3 विभव का वितरण (Equipotential Surfaces)
अवधारणा2.3 विभव का वितरण (Equipotential Surfaces)
समविभवीय पृष्ठ वे काल्पनिक पृष्ठ होते हैं जिनके प्रत्येक बिंदु पर विद्युत विभव समान होता है। इसका अर्थ है कि इन पृष्ठों पर किसी आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में कोई कार्य नहीं करना पड़ता। समविभवीय पृष्ठ विद्युत क्षेत्र की दिशा के प्रति
अभ्यास प्रश्न — Chapter 2
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.धारिता की विमा
उत्तर:
[ M -1 L -२ T 4 A २ ]
Q2.संधात्रित की धारिता निर्भर करती है
उत्तर:
उपरोक्त सभी
Q3.किन दशाओं मे आध्रुव्य परावैद्युत ,धुर्विय परावैद्युत की तरह व्यवहार करतीं हैं
उत्तर:
विशाल विधुत क्षेत्र की उपस्थति मे
Q4.विद्युत ध्रुवण घनत्व होता है
उत्तर:
प्ररित आवेश/ क्षेत्रफल
Q5.किसी मोबाइल को धातु के भीतर बंद कर दें
उत्तर:
मोबाइल धातु के भीतर विधुत क्षेत्र से संरक्षित हो जायगा
Q6.जब एक धातु को विधुत क्षेत्र मे रखा जाता है
उत्तर:
उपरोत्क सभी
Q7.किस सिथिति मे दिध्रूव की स्थितिजउर्जा न्यूनतम होती है
उत्तर:
0 o
Q8.दो बिन्दो आवेश + १० μC और- १० μC, एक दुसरे से २cm जलमे (K = ८०) पररखें हैइस निकाय के स्थितिजउर्जा
उत्तर:
0.५६ J
Bhautiki-I के सभी 8 अध्याय
Physics · Class 12