Chapter 2
Chapter 2 — अध्ययन नोट्स
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विद्रोह का दर्रा
व्याख्याविद्रोह का दर्रा
1857 का विद्रोह भारतीय इतिहास में एक निर्णायक मोड़ था, जिसकी शुरुआत 10 मई 1857 को मेरठ छावनी से हुई। इस विद्रोह की शुरुआत भारतीय सैनिकों से बनी पैदल सेना (सिपाहियों) ने की, जो जल्द ही घुड़सवार फ़ौज और फिर शहरों तक फैल गया। सिपाहियों ने शस्त्रागार पर कब्ज़ा कर लिया जहाँ हथियार और गोला-बारूद रखे हुए थे। इसके बाद उन्होंने अंग्रेजों के बंगलों, सरकारी दफ्तरों, जेलों, अदालतों, डाकखानों और सरकारी खजानों को लूटना और जलाना शुरू कर दिया। टेलीग्राफ़ लाइन काट दी गई जिससे संचार बाधित हो गया। 11 मई को एक जत्था दिल्ली के लाल क़िले पहुँचा और बहादुर शाह ज़फर को विद्रोह का नेतृत्व स्वीकार करने के लिए मजबूर किया। इस प्रकार यह विद्रोह मुग़ल बादशाह के नाम पर वैधता प्राप्त कर गया। विद्रोह केवल सैनिकों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आम जनता, किसानों, जमींदारों, और शहरवासियों ने भी इसमें भाग लिया। लखनऊ, कानपुर, बरेली जैसे बड़े शहरों में विद्रोहियों ने ब्रिटिश अमीरों और साहूकारों को निशाना बनाया। इस विद्रोह ने ब्रिटिश शासन की सत्ता और उसके सोपानों की खुलेआम अवहेलना की। विद्रोह के दौरान संचार के माध्यमों का उपयोग करके विभिन्न छावनियों के सिपाहियों ने एक-दूसरे से संपर्क बनाए रखा और योजनाएं बनाई। इस समन्वय ने विद्रोह को व्यापक और सुनियोजित बनाया।
- 10 मई 1857 को मेरठ छावनी में सैनिक विद्रोह की शुरुआत हुई।
- सिपाहियों ने शस्त्रागार पर कब्ज़ा किया और सरकारी इमारतों को लूटा।
- विद्रोह दिल्ली के लाल क़िले तक फैल गया और बहादुर शाह ज़फर ने नेतृत्व स्वीकार किया।
- विद्रोह में सैनिकों के साथ आम जनता, किसान, जमींदार और शहरवासी भी शामिल हुए।
- संचार के माध्यमों से विद्रोहियों ने समन्वय और योजना बनाई।
- 📌 विद्रोह: सत्ता के विरुद्ध संगठित विरोध।
- 📌 शस्त्रागार: हथियारों और गोला-बारूद का भंडार।
- 📌 छावनी: सैनिकों का आवासीय क्षेत्र।
नेता और अनुयायी
व्याख्यानेता और अनुयायी
1857 के विद्रोह को सफल बनाने के लिए नेतृत्व और संगठन की आवश्यकता थी। मेरठ के सिपाहियों ने दिल्ली जाकर मुग़ल बादशाह बहादुर शाह ज़फर से नेतृत्व स्वीकार करने का आग्रह किया। बहादुर शाह ने दबाव में आकर विद्रोह का नेतृत्व स्वीकार किया, हालांकि वह नाममात्र का नेता थे। कानपुर में नाना साहिब ने विद्रोह की बागडोर संभाली, झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई को भी आम जनता के दबाव में नेतृत्व लेना पड़ा। बिहार के आरा के जमींदार कुँवर सिंह भी विद्रोह के प्रमुख नेता थे। अवध के नवाब वाजिद अली शाह को गद्दी से हटाए जाने के कारण वहाँ का असंतोष चरम पर था। नेता केवल दरबारों से जुड़े व्यक्ति नहीं थे, बल्कि आम पुरुष, महिलाएं और धार्मिक नेता भी विद्रोह का संदेश फैलाते थे। मेरठ में एक फकीर हाथी पर सवार होकर सिपाहियों से मिलता था। लखनऊ में कई धार्मिक नेता ब्रिटिश राज को खत्म करने का आह्वान कर रहे थे। स्थानीय स्तर पर किसानों, जमींदारों और आदिवासियों के नेता भी विद्रोह में सक्रिय थे, जैसे शाह मल और गोनू। ये नेता अंग्रेजों के खिलाफ़ लोगों को संगठित कर रहे थे।
- विद्रोह के लिए नेतृत्व और संगठन आवश्यक था।
- बहादुर शाह ज़फर ने नाममात्र का नेतृत्व स्वीकार किया।
- नाना साहिब, रानी लक्ष्मीबाई, कुँवर सिंह जैसे स्थानीय नेता सक्रिय थे।
- धार्मिक नेता और आम लोग भी विद्रोह का संदेश फैलाते थे।
- शाह मल और गोनू जैसे स्थानीय नेता किसानों और आदिवासियों को संगठित कर रहे थे।
- 📌 नेता: किसी आंदोलन या समूह का मार्गदर्शक।
- 📌 अनुयायी: नेता के निर्देशों का पालन करने वाले।
- 📌 ताल्लुक़दार: ज़मीनदार जो किसानों से लगान वसूलते थे।
अफवाहें और भविष्यवाणियाँ
व्याख्याअफवाहें और भविष्यवाणियाँ
1857 के विद्रोह के दौरान अफवाहों और भविष्यवाणियों ने लोगों को संगठित करने और विद्रोह के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मेरठ से दिल्ली पहुंचे सिपाहियों ने बहादुर शाह को बताया कि अंग्रेजों ने नए एन्फ्रील्ड राइफल के कारतूसों पर गाय और सुअ
अभ्यास प्रश्न — Chapter 2
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.अवधारणा 8 – अवध में विद्रोह (ज) “देह से जान जा चुकी थी”, यह गीत किस प्रसंग पर आधारित हैं ?
उत्तर:
अवध नवाब वाजिद अली शाह को अंग्रेजो द्वारा निष्काषित किये जाने पर
Q2.अवधारणा 7 – दमन (छ) अंग्रेजो ने विद्रोह के दमन के लिए क्या रास्ता अपनाया ?
उत्तर:
उपर्युक्त सभी
Q3.अवधारणा 6 – विद्रोह और छवियाँ (च) “नर्मी और दया भाव से सिपाहियों की वफ़ादारी हासिल करने में मदद मिलेगी”, यह बात किस अंग्रेजी अफसर ने कही थी?
उत्तर:
गवर्नर जनरल कैनिंग
Q4.अवधारणा 4 – विद्रोही ग्रामीण (घ) ग्रामीण विद्रोही यूरोपियों की पकड़ से बाहर रहे और उनपर अधिक भारी क्यों पड़े ?
उत्तर:
क्योंकि ग्रामीण संख्या में अधिक और एकजुट थे |
Q5.अवधारणा 3 – अवध में विद्रोह (ग) “यह गिलास फल (cherry) एक दिन हमारे मुह में आकर ही गिरेगा”, यह वाक्य किसने कहा था?
उत्तर:
लार्ड डलहौज़ी
Q6.अवधारणा 2 – विद्रोही क्या चाहते थे ? (ख) विद्रोही उद्घोषणा किस प्रकार के व्यापक डर को व्यक्त करती थी?
उत्तर:
उपर्युक्त सभी |
Q7.अवधारणा 1 – विद्रोह का ढर्रा (क) 10-11 मई, 1957 मेरठ छावनी में हुए विद्रोह में मुग़ल सम्राट बहादुर शाह के पास विद्रोही क्या आशा लेकर पहुँचे थे ?
उत्तर:
बहादुर शाह अपनी सहमति और आशीर्वाद दें |
Q8.बहुत सारे स्थानों पर विद्रोही सिपाहियों ने नेतृत्व संभालने के लिए पुराने शासकों से क्या आग्रह किया?
उत्तर:
विद्रोही सिपाहियों ने पुराने शासकों से आग्रह किया कि वे नेतृत्व संभालें ताकि विद्रोह को एक वैध और संगठित रूप दिया जा सके। वे चाहते थे कि पुराने शासक, जैसे बहादुर शाह ज़फ़र, जो दिल्ली के मुगल बादशाह थे, विद्रोह का नेतृत्व करें ताकि यह एक सामूहिक और संगठित आंदोलन बन सके। इससे विद्रोह को राजनीतिक वैधता मिलती और विभिन्न समूहों को एकजुट किया जा सकता था।
व्याख्या:
1857 के विद्रोह में सिपाहियों ने पुराने शासकों को नेतृत्व के लिए आमंत्रित किया क्योंकि वे चाहते थे कि विद्रोह एक संगठित और वैध रूप में सामने आए। इससे विद्रोह को व्यापक समर्थन मिला और विभिन्न सामाजिक समूह एक साथ आए।
Bharatiya Itihas ke kuchh Vishay-III के सभी 4 अध्याय
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