Chapter 14
Chapter 14 — अध्ययन नोट्स
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हजारी प्रसाद द्विवेदी का परिचय
व्याख्याहजारी प्रसाद द्विवेदी का परिचय
आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का जन्म सन् 1907 में उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के दुबे का छपरा में हुआ था। वे हिंदी साहित्य के एक महान साहित्यकार, आलोचक, इतिहासकार और निबंधकार थे। उनकी प्रमुख रचनाओं में निबंध-संग्रह जैसे 'अशोक के फूल', 'कल्पलता', 'विचार और वितर्क', 'कुटज', 'आलोक पर्व', 'प्राचीन भारत के कलात्मक विनोद' शामिल हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने उपन्यास जैसे 'बाणभट्ट की आत्मकथा', 'चारुचंद्रलेख', 'पुनर्नवा', 'अनामदास का पोथा' भी लिखे। आलोचना और साहित्येतिहास के क्षेत्र में उनकी महत्वपूर्ण कृतियाँ हैं जैसे 'सूर साहित्य', 'कबीर', 'मध्यकालीन बोध का स्वरूप', 'नाथ संप्रदाय', 'कालिदास की लालित्य-योजना', 'हिंदी साहित्य का आदिकाल', 'हिंदी साहित्य की भूमिका', 'हिंदी साहित्य: उद्भव और विकास'। द्विवेदी जी ने विश्व भारती (शांतिनिकेतन) पत्रिका का संपादन भी किया। उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार (विशेषकर 'आलोक पर्व' पर) और भारत सरकार द्वारा पद्मभूषण से सम्मानित किया गया। लखनऊ विश्वविद्यालय ने उन्हें डी.लिट् की उपाधि दी। उनका साहित्य कर्म भारतीय सांस्कृतिक इतिहास की गहन समझ और मानवतावाद की भावना से ओतप्रोत है। वे साहित्य को मनुष्य की दृष्टि से देखते थे और मानते थे कि ऐसा साहित्य ही सार्थक है जो मनुष्य को दुर्गति, हीनता और पराधीनता से बचाए, उसकी आत्मा को तेजोमय बनाए और हृदय को संवेदनशील करे। उनका साहित्य ज्ञान, पांडित्य, विचार की तेजस्विता, कथन की लालित्य और शास्त्रीय बंध की शुद्धता का संगम है। वे कबीर, रवींद्रनाथ और तुलसी के समन्वय से एक नवीन लोकधर्मी रोमांटिक धारा के प्रवर्तक थे। उनकी सांस्कृतिक दृष्टि व्यापक और समावेशी थी जिसमें भारतीय संस्कृति को अनेक जातियों के श्रेष्ठ साधनांशों का संयोजन माना गया। वे स्त्री की सामाजिक पीड़ा को गहराई से समझते थे और उसे साहित्य में प्रमुखता देते थे। उनकी आलोचना में लोक-परंपरा, नाथ-सिद्ध और भक्तिकाल की सहजता प्रमुख थी। निबंध विधा में उन्होंने साहित्य-दर्शन और समाज-व्यवस्था पर मौलिक विचार प्रस्तुत किए जो पांडित्य से परिपूर्ण होते हुए सहज और आत्मपरक शैली में थे।
- हजारी प्रसाद द्विवेदी का जन्म 1907 में बलिया, उत्तर प्रदेश में हुआ।
- वे निबंधकार, उपन्यासकार, आलोचक और साहित्य इतिहासकार थे।
- प्रमुख रचनाएँ: 'अशोक के फूल', 'कल्पलता', 'आलोक पर्व', 'बाणभट्ट की आत्मकथा' आदि।
- साहित्य को मनुष्य की दृष्टि से देखने वाले मानवतावादी।
- भारतीय संस्कृति को अनेक जातियों के श्रेष्ठ साधनांशों के संयोजन के रूप में देखते थे।
- स्त्री की सामाजिक पीड़ा पर गहरा साहित्यिक विश्लेषण किया।
- 📌 निबंध: विचारों को सरल और सजीव भाषा में प्रस्तुत करने की विधा।
- 📌 आलोचना: साहित्य के गुण-दोष का विवेचन।
- 📌 मानवतावाद: मानवता के प्रति संवेदनशीलता और सम्मान।
निबंध की भूमिका
व्याख्यानिबंध की भूमिका
'शिरीष के फूल' निबंध आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के संग्रह 'कल्पलता' से लिया गया है। इस निबंध में लेखक ने शिरीष के फूलों के माध्यम से जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य, अजेय जिजीविषा और आत्मबल का महत्व दर्शाया है। लेखक उस स्थान पर बैठा है जहाँ चारों ओर शिरीष के पेड़ हैं और जेठ की प्रचंड गर्मी में भी शिरीष के फूल खिल रहे हैं। यह फूल अपनी कोमलता के बावजूद कठोर परिस्थितियों का सामना करते हैं। लेखक इसे अवधूत की तरह मानते हैं जो सुख-दुख में अविचल रहता है। निबंध की भूमिका में लेखक ने शिरीष के फूलों की कोमलता और कठोरता के द्वैत को जीवन के संघर्षों के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया है। इसके साथ ही उन्होंने गांधीजी के व्यक्तित्व से इस अवधूत-भावना की तुलना की है। गांधीजी की कोमलता और कठोरता का समन्वय भी शिरीष के फूलों जैसा है। लेखक इस निबंध के माध्यम से जीवन में आत्मबल की आवश्यकता, संघर्ष के बीच स्थिरता और लोक के प्रति कर्तव्यशीलता का संदेश देते हैं। यह निबंध केवल वनस्पति का वर्णन नहीं, बल्कि उसमें छुपे गहरे मानवीय और सांस्कृतिक मूल्यों की व्याख्या है। लेखक ने शिरीष के फूलों के माध्यम से पुराने और नए पीढ़ी के संघर्ष, साहित्य और समाज में परिवर्तन की आवश्यकता को भी संकेतित किया है। इस भूमिका से पाठक को निबंध के गूढ़ अर्थ और उसकी सांस्कृतिक महत्ता की समझ प्राप्त होती है।
- निबंध 'कल्पलता' संग्रह से लिया गया है।
- शिरीष के फूलों के माध्यम से जीवन की जिजीविषा और धैर्य का चित्रण।
- अवधूत की तरह स्थिर और अजेय आत्मबल का प्रतीक।
- गांधीजी के व्यक्तित्व से शिरीष के फूलों की तुलना।
- पुरानी और नई पीढ़ी के संघर्ष का संकेत।
- साहित्य, समाज और राजनीति में परिवर्तन की आवश्यकता।
- 📌 अवधूत: सांसारिक बंधनों से ऊपर उठे हुए संन्यासी।
- 📌 जिजीविषा: जीवन के प्रति अटूट इच्छा और संघर्ष।
- 📌 कोमलता: नर्मी, सौम्यता।
शिरीष के फूल: प्रकृति और सौंदर्य
व्याख्याशिरीष के फूल: प्रकृति और सौंदर्य
लेखक ने जहाँ बैठकर यह लेख लिखा, वहाँ चारों ओर शिरीष के अनेक पेड़ थे। जेठ की प्रचंड गर्मी में भी शिरीष के पेड़ फूलों से लदे हुए थे। यह असाधारण बात है क्योंकि कम ही फूल इस प्रकार की गरमी में खिल पाते हैं। लेखक ने कर्णिकार (कनेर) और आरगवध (अमलतास) के फू
अभ्यास प्रश्न — Chapter 14
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.डच मंत्री की किस घोषणा से ऐन रोमांचित हो जाती है ?
उत्तर:
युद्ध के बाद युद्ध कालीन डायरियों के संग्रह की घोषणा से
Q2.ऐन का परिवार किस स्थान को अज्ञातवास के लिए चुनता है ?
उत्तर:
पिता का ऑफिस
Q3.ऐन का डायरी लिखने का प्रमुख कारण है-
उत्तर:
किसी अन्य का उसकी भावनाओं को समझने में असमर्थ होना
Q4.ऐन के अनुसार महिलाएं-
उत्तर:
सम्मान और सराहना की हक़दार
Q5.ऐन किससे प्रेम करती है ?
उत्तर:
पीटर
Q6.ऐन किन्हें सबक सिखाना चाहती है ?
उत्तर:
जो ब्रिटेन का विरोध करें
Q7.ऐन किसे जन्मजात बहादुर मानती है ?
उत्तर:
चर्चिल को
Q8.‘टर्की इंग्लैंड के पक्ष में’ यह खबर ऐन के परिवार के लिए कैसी थी ?
उत्तर:
उत्साहवर्धक
Aroh के सभी 15 अध्याय
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