Chapter 13
Chapter 13 — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
फणीश्वर नाथ रेणु
व्याख्याफणीश्वर नाथ रेणु
फणीश्वर नाथ रेणु हिंदी साहित्य के एक सुप्रसिद्ध आंचलिक उपन्यासकार और कथाकार थे। उनका जन्म 4 मार्च 1921 को बिहार के औराही हिंगना (जिला पूर्णिया, अब अररिया) में हुआ था। उनका जीवन संघर्षों और उतार-चढ़ावों से भरा रहा। वे केवल साहित्यकार ही नहीं, बल्कि विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों में भी सक्रिय भागीदार थे। उनकी प्रमुख रचनाओं में उपन्यास 'मैला आँचल', 'परती परिकथा', 'दीर्घतपा', 'जुलूस', 'कितने चौराहे' शामिल हैं। इसके अलावा उन्होंने कहानी-संग्रह, संस्मरण, रिपोर्टाज और पाँच खंडों में 'रेणु रचनावली' भी लिखी। उनकी रचनाओं में गाँव की भाषा, संस्कृति और लोकजीवन का सजीव चित्रण मिलता है। रेणु की लेखनी में पात्र और परिवेश इतने वास्तविक लगते हैं कि ऐसा प्रतीत होता है कि वे जीवन को ही जी रहे हों। उन्होंने हिंदी साहित्य में आंचलिक उपन्यास को एक नई दिशा दी और लोक संस्कृति को साहित्य में प्रमुख स्थान दिलाया। उनकी रचनाओं में भाषा की सार्थकता बोली के साथ जुड़ी हुई है। फणीश्वर नाथ रेणु का निधन 11 अप्रैल 1977 को पटना में हुआ।
- फणीश्वर नाथ रेणु का जन्म 4 मार्च 1921 को बिहार में हुआ।
- वे आंचलिक उपन्यासकार और कथाकार के रूप में प्रसिद्ध हैं।
- उनकी प्रमुख रचनाएँ: मैला आँचल, परती परिकथा, दीर्घतपा, जुलूस, कितने चौराहे।
- साहित्य के साथ-साथ राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों में सक्रिय थे।
- उनकी रचनाएँ गाँव की भाषा, संस्कृति और लोकजीवन का सजीव चित्रण करती हैं।
- उन्होंने हिंदी साहित्य में आंचलिक उपन्यास को नई दिशा दी।
- 📌 आंचलिक उपन्यास: ऐसा उपन्यास जो किसी विशेष क्षेत्र की भाषा, संस्कृति और जीवनशैली को केंद्र में रखता है।
- 📌 लोककला: किसी क्षेत्र की पारंपरिक कला, संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियाँ।
पहलवान की ढोलक - कहानी का आरंभ
व्याख्यापहलवान की ढोलक - कहानी का आरंभ
कहानी की शुरुआत एक जाड़े के दिन, अमावस्या की रात से होती है, जब मलेरिया और हैजे से पीड़ित गाँव भयार्त शिशु की तरह थर-थर काँप रहा था। गाँव की पुरानी और उजड़ी झोंपड़ियों में अंधकार और सन्नाटा पसरा हुआ था। रात की निस्तब्धता करुण सिसकियों और आहों को दबाने की कोशिश कर रही थी। आकाश में तारे चमक रहे थे, लेकिन पृथ्वी पर कहीं कोई प्रकाश नहीं था। इस अंधेरे और भयावह माहौल में सियारों की क्रंदन और पेचक की डरावनी आवाज़ें सुनाई देती थीं। गाँव के लोग बीमारी और मौत से त्रस्त थे, बच्चे निर्बल आवाज़ में 'माँ-माँ' पुकारते थे। कुत्ते भी दिनभर सिकुड़कर पड़े रहते और रात को रोते थे। इस भयावह स्थिति के बीच एकमात्र जीवंतता थी पहलवान की ढोलक की आवाज़, जो संध्या से लेकर प्रातःकाल तक एक ही गति से बजती रहती थी। यह ढोलक मृत-गाँव में संजीवनी शक्ति भरती थी।
- कहानी की पृष्ठभूमि एक महामारी से पीड़ित गाँव है।
- रात्रि का माहौल ठंडा, काला और भयावह है।
- गाँव में अंधकार, सन्नाटा और मृत्यु का साम्राज्य है।
- सियारों और कुत्तों की आवाज़ें माहौल को और भयावह बनाती हैं।
- पहलवान की ढोलक की आवाज़ गाँव में जीवन की एकमात्र उम्मीद है।
- 📌 अमावस्या: चंद्रमा का वह चरण जब वह पृथ्वी से दिखाई नहीं देता।
- 📌 मलेरिया और हैजा: संक्रामक रोग जो विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में फैलते हैं।
लुट्टन सिंह पहलवान का जीवन परिचय
व्याख्यालुट्टन सिंह पहलवान का जीवन परिचय
लुट्टन सिंह पहलवान इस कहानी का मुख्य पात्र है। उसका बचपन संघर्षों से भरा रहा। नौ वर्ष की उम्र में उसके माता-पिता का निधन हो गया था, लेकिन उसकी शादी हो चुकी थी, इसलिए वह विधवा सास के संरक्षण में बड़ा हुआ। बचपन में वह गाय चराता, धारोपण दूध पीता और कसरत
अभ्यास प्रश्न — Chapter 13
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.‘नमक’ कहानी वर्तमान के किन तीन देशों से जुड़ी कहानी है ?
उत्तर:
भारत-पाकिस्तान-बांग्लादेश
Q2.कहानी में भारतीय कस्टम अफसर का क्या नाम है ?
उत्तर:
सुनील दास गुप्त
Q3.लाहौर और अमृतसर में अंतर करना सफ़िया के लिए क्यों मुश्किल था ?
उत्तर:
सामाजिक-सांस्कृतिक समानता के कारण
Q4.पाकिस्तानी कस्टम अफसर किसे अपना वतन मानता है ?
उत्तर:
दिल्ली
Q5.सफ़िया ने नमक की पुड़िया को कहाँ छिपाकर ले जाने का निश्चय किया ?
उत्तर:
कीनुओं की टोकरी में
Q6.सफ़िया के भाई ने नमक की पुड़िया ले जाने से क्यों मना कर दिया ?
उत्तर:
गैरकानूनी होने के कारण
Q7.सफ़िया के भाई की अदीबों (साहित्यकारों) के बारे में क्या राय है ?
उत्तर:
अदीबों का दिमाग घूमा होता है
Q8.सिख बीबी के प्रति सफ़िया के आकर्षण का क्या कारण था ?
उत्तर:
हुबहू उसकी माँ जैसी थी
Aroh के सभी 15 अध्याय
Hindi · Class 12