Chapter 12
Chapter 12 — अध्ययन नोट्स
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धर्मवीर भारती का परिचय
व्याख्याधर्मवीर भारती का परिचय
धर्मवीर भारती हिंदी साहित्य के एक प्रमुख और विशिष्ट रचनाकार थे जिनका जन्म सन् 1926 में इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश) में हुआ। उन्होंने हिंदी साहित्य को कविताओं, कहानियों, उपन्यासों, निबंधों, गीतिनाट्यों और रिपोर्टाज के माध्यम से समृद्ध किया। उनकी प्रमुख रचनाओं में उपन्यास 'गुनाहों का देवता', 'सूरज का सातवाँ घोड़ा', गीतिनाट्य 'अंधा युग', कविता संग्रह 'ठंडा लोहा', कहानी संग्रह 'बंद गली का आखिरी मकान' और निबंध संग्रह 'मानव मूल्य और साहित्य' शामिल हैं। धर्मवीर भारती को पद्मश्री, व्यास सम्मान सहित अनेक राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए। उनका लेखन मुख्यतः व्यक्ति की स्वतंत्रता, मानवीय संकट और सामाजिक उत्तरदायित्वों पर केंद्रित था। वे रूमानियत के प्रवक्ता थे और उनकी रचनाओं में संगीत और लय की अनुभूति होती है। 'गुनाहों का देवता' उनकी सबसे लोकप्रिय कृति है, जो प्रेम कथा के माध्यम से सामाजिक और नैतिक विषयों को उजागर करती है। 'सूरज का सातवाँ घोड़ा' में निम्न मध्यवर्ग की हताशा, आर्थिक संघर्ष और नैतिक विचलन को चित्रित किया गया है। 'अंधा युग' स्वतंत्रता के बाद के जीवन मूल्यों के पतन और अमानवीयता की अभिव्यक्ति है। धर्मवीर भारती ने पत्रकारिता में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे लंबे समय तक हिंदी साप्ताहिक पत्रिका 'धर्मयुग' के संपादक रहे और हिंदी पत्रकारिता को गंभीरता और मानक प्रदान किया। उनकी लेखन शैली सहज, आत्मीय और संवादात्मक है, जो पाठकों के मन को गहराई से छूती है। इस अध्याय में प्रस्तुत संस्मरण 'काले मेघा पानी दे' में उन्होंने लोक-विश्वास और विज्ञान के द्वंद्व को सुंदरता से चित्रित किया है, जो आज के पढ़े-लिखे समाज के लिए भी प्रासंगिक है।
- धर्मवीर भारती का जन्म 1926 में इलाहाबाद में हुआ।
- उनकी प्रमुख रचनाएँ उपन्यास, कविता, कहानी, गीतिनाट्य और निबंध हैं।
- उनका लेखन व्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक उत्तरदायित्वों पर केंद्रित था।
- उन्होंने हिंदी पत्रकारिता को गंभीरता और मानक प्रदान किया।
- धर्मवीर भारती को पद्मश्री और व्यास सम्मान सहित कई पुरस्कार मिले।
- उनकी रचनाएँ विभिन्न आयु और वर्ग के पाठकों में लोकप्रिय हैं।
- 📌 गीतिनाट्य: गीत और नाटक का संयोजन जिसमें भावनाओं का संगीतात्मक अभिव्यक्ति होता है।
- 📌 रूमानियत: प्रेम और सौंदर्य की भावना से प्रेरित साहित्यिक शैली।
- 📌 संपादक: किसी पत्रिका या समाचार पत्र का प्रमुख प्रबंधक जो सामग्री का चयन करता है।
लोक-विश्वास और विज्ञान का द्वंद्व
अवधारणालोक-विश्वास और विज्ञान का द्वंद्व
धर्मवीर भारती ने 'काले मेघा पानी दे' में लोक-विश्वास और विज्ञान के द्वंद्व को गहराई से प्रस्तुत किया है। विज्ञान एक तर्कसंगत और प्रमाण आधारित दृष्टिकोण है, जबकि लोक-विश्वास सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े होते हैं। लेखक ने दिखाया है कि कैसे विज्ञान के उपलब्ध तथ्यों और तकनीकी प्रगति के बावजूद जनमानस में लोक-विश्वासों की गहरी जड़ें होती हैं। यह द्वंद्व विशेष रूप से वर्षा और पानी की कमी के संदर्भ में उभरता है। जब सूखे की स्थिति में विज्ञान पानी की कमी को दूर करने में असमर्थ होता है, तब समाज लोक-विश्वासों और प्राचीन रीति-रिवाजों की ओर मुड़ता है। लेखक का तर्कशील मन इस स्थिति को समझने और स्वीकारने की कोशिश करता है, परन्तु वह पानी की बरबादी और अंधविश्वासों को भी चुनौती देता है। लेखक ने यह प्रश्न उठाया है कि क्या विज्ञान ही एकमात्र सत्य है या लोक-विश्वासों का भी समाज में कोई स्थान है? क्या लोक-विश्वास केवल अंधविश्वास हैं या उनकी भी कोई रचनात्मक भूमिका हो सकती है? यह द्वंद्व आज के पढ़े-लिखे समाज को भी उद्वेलित करता रहता है, क्योंकि विज्ञान और संस्कृति के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है। इस द्वंद्व के माध्यम से लेखक ने सामाजिक चेतना, परंपरा, और आधुनिकता के बीच के संघर्ष को उजागर किया है, जो भारतीय समाज की जटिलताओं को समझने में मदद करता है।
- विज्ञान तर्क और प्रमाण पर आधारित है, लोक-विश्वास सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े हैं।
- सूखे की स्थिति में लोक-विश्वासों की भूमिका बढ़ जाती है।
- लेखक ने लोक-विश्वासों और विज्ञान के बीच संतुलन की आवश्यकता पर बल दिया।
- लोक-विश्वासों को केवल अंधविश्वास मानना उचित नहीं है।
- यह द्वंद्व आज के समाज में भी प्रासंगिक है।
- 📌 लोक-विश्वास: समाज में प्रचलित परंपरागत विश्वास जो तर्क से परे होते हैं।
- 📌 अंधविश्वास: बिना वैज्ञानिक आधार के विश्वास जो हानिकारक भी हो सकते हैं।
- 📌 द्वंद्व: दो विरोधी विचारों या शक्तियों का संघर्ष।
काले मेघा पानी दे: इंदर सेना और मेढक-मंडली
व्याख्याकाले मेघा पानी दे: इंदर सेना और मेढक-मंडली
इस अनुभाग में लेखक ने गाँव के बच्चों की एक टोली का वर्णन किया है, जिन्हें दो नाम मिले थे — 'इंदर सेना' और 'मेढक-मंडली'। ये बच्चे दस से अठारह वर्ष के बीच के होते थे, जो गर्मी के दिनों में नग्न स्वरूप, केवल जाँघिया या लंगोटी पहने, गली-मुहल्ले में उछलते
अभ्यास प्रश्न — Chapter 12
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.'लघु सुरधनु से पंख पसारे- शीतल मलय समीर सहारे' से तात्पर्य है-
उत्तर:
आकाश में इंद्रधनुष उभर आया हो
Q2.रजनी का पर्यायवाची नहीं है -
उत्तर:
उषा
Q3.'लघु सुरधनु से' में अलंकार है-
उत्तर:
उपमा
Q4.'हेमकुम्भ ले उषा सवेरे' में अलंकार है -
उत्तर:
मानवीकरण
Q5.'समझ नीड़ निज प्यारा' में अलंकार है-
उत्तर:
अनुप्रास
Q6.कार्नेलिया कौन थी -
उत्तर:
सिकंदर के सेनापति सेल्यूकस की पुत्री
Q7.कार्नेलिया का गीत प्रसाद के किस नाटक से लिया गया है -
उत्तर:
चन्द्रगुप्त
Q8.‘उड़ते खग जिस ओर मुँह किए - समझ नीड़ निज प्यारा ' में भाव व्यक्त है कि -
उत्तर:
भारत में बाहर से आये अनजान लोगों का भी पूरा सम्मान होता है।
Aroh के सभी 15 अध्याय
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