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Chapter 11

🎓 Class 11📖 Shashwati📖 13 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~20 मिनट
Chapter 10अध्याय 11 / 11

Chapter 11अध्ययन नोट्स

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एकादश: पाठ: नवद्रव्याणि

व्याख्या

एकादश: पाठ: नवद्रव्याणि

इस अध्याय में तर्कशास्त्र के मूलभूत तत्वों का परिचय दिया गया है। 'तर्क' शब्द का अर्थ है प्रमाण, अर्थात् यथार्थज्ञान का साधन। तर्क के विषयों में द्रव्यादि सप्त पदार्थ और प्रत्यक्षादि चार प्रमाण आते हैं। इस ग्रन्थ का मुख्य उद्देश्य इन पदार्थों का संक्षेप में लक्षण एवं परीक्षा करना है। तर्कशास्त्र व्याकरण एवं साहित्य जैसे अन्य शास्त्रों के लक्षणों को जानने की जिज्ञासा उत्पन्न करता है, इसलिए यह छात्रों के लिए अत्यंत उपयोगी है। इस ग्रन्थ के रचयिता अन्नम्भट्ट हैं, जिनका समय 17वीं शताब्दी माना जाता है। न्याय और वैशेषिक दर्शन के अनुसार द्रव्यादि सप्त पदार्थों के ज्ञान से लोकसिद्धि होकर निःश्रेयस अर्थात मोक्ष की प्राप्ति होती है। विश्व का समग्र ज्ञान इन सप्त पदार्थों में समाहित है। यह पाठ 'तर्कसंग्रह' नामक ग्रन्थ से लिया गया है, जो न्याय और वैशेषिक दर्शन के प्रवेश की कुञ्जी माना जाता है। वैशेषिक दर्शन को प्राचीन भारतीय भौतिक विज्ञान का पोषक ग्रन्थ माना गया है। इस पाठ के माध्यम से छात्र प्राच्य ज्ञान की समृद्ध परम्परा से परिचित होते हैं और उसकी अनुभूति प्राप्त करते हैं। इस अध्याय में द्रव्य, गुण, कर्म, सामान्य, विशेष, समवाय और अभाव — ये सप्त पदार्थ वर्णित हैं। द्रव्याणि पृथिवी, तेज, वायु, आकाश, काल, दिशा, आत्मा, मन आदि नवद्रव्य हैं। इनके गुणों में रूप, रस, गन्ध, स्पर्श, संख्या, परिमाण, पृथक्त्व, संयोग, विभाग, परत्व, अपरत्व, गुरुत्व, द्रवत्व, स्नेह, शब्द, बुद्धि, सुख, दुःख, इच्छा, द्वेष, प्रयत्न, धर्म, अधर्म, संस्कार आदि २४ गुण सम्मिलित हैं।

  • तर्क का अर्थ है प्रमाण, यथार्थज्ञान का साधन।
  • द्रव्यादि सप्त पदार्थ और प्रत्यक्षादि चार प्रमाण तर्क के विषय हैं।
  • अन्नम्भट्ट द्वारा रचित तर्कसंग्रह ग्रन्थ 17वीं शताब्दी का है।
  • द्रव्यादि सप्त पदार्थों के ज्ञान से मोक्ष की प्राप्ति संभव है।
  • वैशेषिक दर्शन प्राचीन भारतीय भौतिक विज्ञान का आधार है।
  • सप्त पदार्थ हैं: द्रव्य, गुण, कर्म, सामान्य, विशेष, समवाय, अभाव।
  • 📌 तर्क: प्रमाण या यथार्थज्ञान का साधन।
  • 📌 द्रव्य: वह जो गुण और कर्म का आधार हो।
  • 📌 सप्त पदार्थ: द्रव्य, गुण, कर्म, सामान्य, विशेष, समवाय, अभाव।

द्रव्यादि सप्त पदार्थ एवं तर्क के विषय

व्याख्या

द्रव्यादि सप्त पदार्थ एवं तर्क के विषय

इस खंड में द्रव्यादि सप्त पदार्थों का विस्तृत परिचय दिया गया है। द्रव्यादि सप्त पदार्थों में द्रव्य, गुण, कर्म, सामान्य, विशेष, समवाय और अभाव शामिल हैं। प्रत्येक पदार्थ का अपना स्वरूप, लक्षण और कार्य होता है। द्रव्य वह है जो गुण और कर्म का आधार होता है। द्रव्याणि पृथिवी, तेज, वायु, आकाश, काल, दिशा, आत्मा, मन आदि हैं। गुण वे लक्षण हैं जो द्रव्य में विद्यमान होते हैं जैसे रूप, रस, गन्ध, स्पर्श आदि। कर्म वे क्रियाएँ हैं जो द्रव्य में होती हैं जैसे उत्क्षेपण, अपक्षेपण, आकुंचन, प्रसारण, गमन आदि। सामान्य वह है जो अनेक वस्तुओं में समान रूप से पाया जाता है, जैसे 'सत्त्व' या 'जीव'। विशेष वह है जो किसी वस्तु को अन्य से भिन्न करता है। समवाय वह नित्य संबंध है जो एक वस्तु को दूसरी में समाहित करता है, जैसे गुण का द्रव्य में होना। अभाव वह है जो किसी वस्तु के न होने की अनुभूति है, और यह चार प्रकार का होता है: प्रागभाव (पूर्वाभाव), प्रध्वंसाभाव (पराभाव), अत्यन्ताभाव (परमाभाव), और अन्योन्याभाव। इस प्रकार द्रव्यादि सप्त पदार्थ तर्कशास्त्र के मुख्य विषय हैं, जिनके ज्ञान से विश्व की समग्र समझ प्राप्त होती है।

  • द्रव्य वह है जो गुण और कर्म का आधार होता है।
  • गुण द्रव्य के स्थायी लक्षण हैं, जैसे रूप, रस, गन्ध।
  • कर्म द्रव्य की क्रियाएँ हैं, जैसे उत्क्षेपण, अपक्षेपण।
  • सामान्य वस्तुओं में समानता दर्शाता है।
  • विशेष वस्तु को अन्य से भिन्न करता है।
  • समवाय नित्य संबंध है जो वस्तुओं को जोड़ता है।
  • अभाव वस्तु के न होने का अनुभव है, चार प्रकार का।
  • 📌 द्रव्य: गुण और कर्म का आधार।
  • 📌 गुण: द्रव्य में विद्यमान स्थायी लक्षण।
  • 📌 कर्म: द्रव्य की क्रियाएँ।

नवद्रव्याणि के नाम और वर्गीकरण

व्याख्या

नवद्रव्याणि के नाम और वर्गीकरण

नवद्रव्याणि को मुख्यतः नौ वर्गों में विभाजित किया गया है, जो भारतीय दर्शन और संस्कृत साहित्य में वर्णित हैं। ये नवद्रव्य हैं: भगण, सगण, रगण, मगण, जगण, यगण, तगण, नगण और अन्य। प्रत्येक वर्ग के नवद्रव्य अपने विशेष गुणों और स्वरूपों के आधार पर वर्गीकृत ह

अभ्यास प्रश्नChapter 11

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.1. एकपदेन उत्तरं लिखत। (क) पदार्थाः कति भवन्ति? (ख) पृथिव्या: कति भेदा: उक्ता:? (ग) तेज: कीदूशं कथ्यते? (घ) अतीतादिव्यवहारहेतु: क:? (ङ) आत्मा कतिविध:?

उत्तर:

उत्तर: (क) पदार्थाः नव भवन्ति। (ख) पृथिव्या: द्वे भेदा: उक्ता: - नित्याः च अनित्याः च। (ग) तेज: परमाणुरूप: कथ्यते। (घ) अतीतादिव्यवहारहेतु: काल:। (ङ) आत्मा त्रिविध: - सत्त्व, ज्ञान, आनन्द इति।

व्याख्या:

प्रत्येक प्रश्न का उत्तर पाठ के अनुसार संक्षेप में दिया गया है। पदार्थों की संख्या नव है। पृथिवी के भेद नित्य और अनित्य हैं। तेज का स्वरूप परमाणु के समान है। अतीतादि व्यवहार का कारण काल है। आत्मा तीन प्रकार की होती है।

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Q2.2. पूर्णवाक्येन उत्तरत। (क) कस्मात् ग्रन्थात् सङ्गुहीत: एष: पाठ:? (ख) कानि पञ्चकर्माणि पाठे वर्णितानि? (ग) मन: कस्य साधनम्? (घ) वायो: कतिभेदा:? (ङ) अतीतादिव्यवहारहेतु: काल:, स च कीदूश:?

उत्तर:

उत्तर: (क) एष: पाठ: तर्कसङ्ग्रह इति ग्रन्थात् सङ्गुहीत: अस्ति। (ख) पञ्चकर्माणि सन्ति - उत्क्षेपणम्, अपक्षेपणम्, आकुञ्चनम्, प्रसारणम्, गमनम्। (ग) मन: आत्मन: साधनम् अस्ति। (घ) वायो: द्वौ भेदौ सन्ति - नित्य: च अनित्य: च। (ङ) अतीतादिव्यवहारहेतु: काल: अस्ति, स च पदार्थाणां परिवर्तनस्य कारणम् अस्ति।

व्याख्या:

प्रत्येक प्रश्न का पाठ के अनुसार पूर्णवाक्य में उत्तर दिया गया है। ग्रन्थ तर्कसङ्ग्रह है। पञ्चकर्माणि पाँच क्रियाएँ हैं। मन: आत्मा का साधन है। वायु के दो भेद हैं। काल अतीतादि व्यवहार का कारण है।

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Q3.3. मञ्जूषात: पदान्यादाय रिक्तस्थानानि पूर्यत। त्रिविधम्, गन्धवती, प्रसारण, परमाणुरूप:, अनन्तम्

उत्तर:

उत्तर: (क) त्रिविधम् (ख) गन्धवती (ग) प्रसारण (घ) परमाणुरूप: (ङ) अनन्तम्

व्याख्या:

मञ्जूषा से पद लेकर रिक्त स्थानों को उचित शब्दों से पूरित किया गया है।

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Q4.4. यथोचितं योजयत। (क) शीतस्पर्शवत्य: - सर्वज्ञ: (ख) चतुर्विध: - रूपरहित: (ग) ईश्वर: - अभाव: (घ) वायु: - आकाशम् (ङ) शब्दगुणकम् - आप:

उत्तर:

उत्तर: (क) शीतस्पर्शवत्य: - आप: (ख) चतुर्विध: - शब्दगुणकम् (ग) ईश्वर: - सर्वज्ञ: (घ) वायु: - आकाशम् (ङ) शब्दगुणकम् - रूपरहित:

व्याख्या:

प्रत्येक शब्द को उसके उचित युग्म से जोड़ा गया है। शीतस्पर्शवती आप है, चतुर्विध शब्दगुणकम् है, ईश्वर सर्वज्ञ है, वायु आकाशम् है, शब्दगुणकम् रूपरहित है।

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Q5.5. सन्धिविच्छेदं कृत्वा सन्धे: नाम लिखत। नाम (क) चैक: ...+...... (ख) प्रत्यात्मम् ...+...... (ग) तच्च ...+...... (घ) अभावश्च ...+...... (ङ) पृथिव्यप्तेज: ...+......

उत्तर:

उत्तर: (क) चैक: = च + ऐक: (ख) प्रत्यात्मम् = प्रत्य + आत्मम् (ग) तच्च = तत् + च (घ) अभावश्च = अभाव + च (ङ) पृथिव्यप्तेज: = पृथिव्यप् + तेज:

व्याख्या:

प्रत्येक शब्द का सन्धि विच्छेद कर उसके भाग लिखे गए हैं।

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Q6.6. प्रदत्तपदान्यधिकृत्य वाक्यानि रचयत। अनित्यम्, चतुर्विंशति:, नवैव, समवाय:, रूपरहित:।

उत्तर:

उत्तर: 1. अनित्यम् सर्वत्र परिवर्तनशीलम् अस्ति। 2. चतुर्विंशति: अक्षराणि संस्कृतस्य वर्णमाले सन्ति। 3. नवैव पदार्थाः संसारस्य मूलम्। 4. समवाय: पदार्थानां सम्बन्धस्य आधारः अस्ति। 5. रूपरहित: पदार्थः केवल् भावरूपेण अस्ति।

व्याख्या:

प्रत्येक शब्द का प्रयोग करते हुए वाक्य बनाए गए हैं जो उनके अर्थ को स्पष्ट करते हैं।

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Q7.7. पाठात् विपरीतार्थकपदानि चित्वा लिखत। (क) उत्क्षेपणम् (ख) सामान्यम् (ग) अनित्या (घ) पृथिवी (ङ) अनन्तम्

उत्तर:

उत्तर: (क) उत्क्षेपणम् - अपक्षेपणम् (ख) सामान्यम् - विशेषः (ग) अनित्या - नित्याः (घ) पृथिवी - आकाशः (ङ) अनन्तम् - सीमितम्

व्याख्या:

प्रत्येक शब्द का विपरीतार्थक शब्द पाठ से चयनित किया गया है।

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Q8.8.अ. अधोलिखितपदानां मूलशब्दं, विभक्तिं, वचनं, लिङ्गं च लिखत। (क) द्रव्याणि (ख) मनांसि (ग) विभ्वी (घ) गुणा: (ङ) लक्षणानि आ. समस्तपदानां विग्रहं कृत्वा लिखत । (क) सप्तपदार्था: (ख) अनन्ता: (ग) शरीरेन्द्रियविषयभेदात् (घ) व्यवहारहेतु: (ङ) रूपरहित:

उत्तर:

उत्तर: अ. (क) द्रव्याणि - मूलशब्द: द्रव्य, विभक्ति: प्रथमा, वचनं बहुवचनम्, लिङ्गं नपुंसकलिङ्गम्। (ख) मनांसि - मूलशब्द: मनस्, विभक्ति: प्रथमा, वचनं बहुवचनम्, लिङ्गं नपुंसकलिङ्गम्। (ग) विभ्वी - मूलशब्द: पृथिवी, विभक्ति: प्रथमा, वचनं एकवचनम्, लिङ्गं स्त्रीलिङ्गम्। (घ) गुणा: - मूलशब्द: गुण, विभक्ति: प्रथमा, वचनं बहुवचनम्, लिङ्गं पुल्लिङ्गम्। (ङ) लक्षणानि - मूलशब्द: लक्षण, विभक्ति: प्रथमा, वचनं बहुवचनम्, लिङ्गं नपुंसकलिङ्गम्। आ. (क) सप्तपदार्था: - सप्त + पदार्थ + आः (ख) अनन्ता: - अनन्त + आः (ग) शरीरेन्द्रियविषयभेदात् - शरीर + इन्द्रिय + विषय + भेद + अत् (घ) व्यवहारहेतु: - व्यवहार + हेतु + अः (ङ) रूपरहित: - रूप + रहित + अः

व्याख्या:

प्रत्येक पद का मूलशब्द, विभक्ति, वचन और लिङ्ग निर्धारित किए गए हैं। साथ ही समस्त पदों का विग्रह भी किया गया है।

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