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Chapter 11

🎓 Class 11📖 Vyavsay Adhyanan📖 9 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~14 मिनट
Chapter 10अध्याय 11 / 11

Chapter 11अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

11.1 परिचय

व्याख्या

11.1 परिचय

अंतर्राष्ट्रीय व्यापार आज के वैश्विक युग में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह वह व्यावसायिक क्रियाएँ हैं जो किसी देश की सीमाओं के बाहर की जाती हैं। आज विश्व के विभिन्न देशों में वस्तुओं एवं सेवाओं के उत्पादन एवं उनके विक्रय के तरीकों में आधारभूत परिवर्तन आ रहे हैं। पहले के समय में अधिकांश देश आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर थे, परंतु अब वे विभिन्न वस्तुओं एवं सेवाओं के उत्पादन एवं आपूर्ति के लिए एक-दूसरे पर निर्भर हो गए हैं। संप्रेषण, तकनीक, आधारभूत ढाँचा आदि के क्षेत्र में हुए विकास ने देशों को एक-दूसरे के और करीब ला दिया है। संचार एवं परिवहन के तीव्र साधनों के कारण भौगोलिक दूरी की बाधाएँ कम हो गई हैं। विश्व व्यापार संघ (डब्ल्यू.टी.ओ.) तथा विभिन्न देशों की सरकारों द्वारा किए गए सुधारों ने अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा दिया है। भारत भी वैश्वीकरण की प्रक्रिया में तेजी से जुड़ रहा है। 1991 में आर्थिक उदारीकरण की शुरुआत के बाद भारत ने विश्व अर्थव्यवस्था में अपनी भागीदारी बढ़ाई है। आज भारत की कई कंपनियाँ विदेशों में अपने उत्पादों एवं सेवाओं का विपणन कर रही हैं। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार केवल वस्तुओं के आयात-निर्यात तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सेवाओं, पूंजी, तकनीक, बौद्धिक संपदा आदि का भी आदान-प्रदान शामिल है।

  • अंतर्राष्ट्रीय व्यापार राष्ट्र की सीमाओं के पार होने वाली व्यावसायिक क्रियाएँ हैं।
  • संचार और परिवहन के विकास ने देशों को एक-दूसरे के करीब लाया है।
  • विश्व व्यापार संघ (डब्ल्यू.टी.ओ.) ने अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा दिया है।
  • भारत ने 1991 के बाद आर्थिक उदारीकरण के माध्यम से वैश्वीकरण को अपनाया।
  • अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में वस्तुओं के साथ-साथ सेवाओं, पूंजी एवं तकनीक का भी आदान-प्रदान होता है।
  • 📌 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार: वह व्यापार जो एक देश की सीमाओं के बाहर होता है।
  • 📌 वैश्वीकरण: विश्व के विभिन्न देशों के आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से जुड़ना।
  • 📌 डब्ल्यू.टी.ओ. (विश्व व्यापार संगठन): एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था जो विश्व व्यापार को नियंत्रित करती है।

11.1.1 अंतर्राष्ट्रीय व्यवसाय/व्यापार का अर्थ

परिभाषा

11.1.1 अंतर्राष्ट्रीय व्यवसाय/व्यापार का अर्थ

अंतर्राष्ट्रीय व्यवसाय वह व्यावसायिक क्रियाएँ हैं जो किसी राष्ट्र की सीमाओं के पार की जाती हैं। इसमें केवल वस्तुओं का आयात-निर्यात ही नहीं बल्कि सेवाओं, पूंजी, तकनीक, बौद्धिक संपदा आदि का भी आदान-प्रदान शामिल होता है। घरेलू व्यापार केवल एक देश की सीमाओं के भीतर होता है जबकि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में दो या अधिक देशों के बीच व्यापार होता है। अंतर्राष्ट्रीय व्यवसाय एक व्यापक शब्द है, जिसमें वस्तुओं के साथ-साथ सेवाओं का व्यापार, विदेशी निवेश, लाइसेंसिंग, फ्रैंचाइजी, संयुक्त उपक्रम आदि शामिल हैं। उदाहरण के लिए, भारत से अमेरिका को कपड़े निर्यात करना अंतर्राष्ट्रीय व्यापार है, वहीं अमेरिका में फैक्ट्री लगाकर कपड़े बनाना और फिर उन्हें बेचने की प्रक्रिया भी अंतर्राष्ट्रीय व्यवसाय का हिस्सा है।

  • घरेलू व्यापार केवल देश की सीमाओं के भीतर होता है।
  • अंतर्राष्ट्रीय व्यवसाय में वस्तुओं, सेवाओं, पूंजी, तकनीक आदि का व्यापार होता है।
  • अंतर्राष्ट्रीय व्यवसाय एक व्यापक अवधारणा है, जिसमें कई प्रकार की क्रियाएँ शामिल हैं।
  • सेवाओं का व्यापार अदृश्य व्यापार कहलाता है।
  • विदेशी निवेश भी अंतर्राष्ट्रीय व्यवसाय का एक महत्वपूर्ण भाग है।
  • 📌 अंतर्राष्ट्रीय व्यवसाय: वह व्यवसाय जो राष्ट्र की सीमाओं के पार होता है।
  • 📌 अदृश्य व्यापार: सेवाओं का अंतर्राष्ट्रीय व्यापार।
  • 📌 विदेशी निवेश: किसी देश के बाहर पूंजी निवेश।

11.1.2 अंतर्राष्ट्रीय व्यवसाय के कारण

व्याख्या

11.1.2 अंतर्राष्ट्रीय व्यवसाय के कारण

अंतर्राष्ट्रीय व्यवसाय का मुख्य कारण यह है कि सभी देश अपनी आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन पूरी तरह से नहीं कर सकते। इसके पीछे प्राकृतिक संसाधनों का असमान वितरण, उत्पादन लागत में अंतर, श्रम की उत्पादकता, तकनीकी दक्षता, पूंजी की उपलब्धता आदि कारण

अभ्यास प्रश्नChapter 11

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.1. व्यवसाय किसे कहते हैं? व्यवसाय की दो प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर:

व्यवसाय वह आर्थिक गतिविधि है जिसमें व्यक्ति या समूह वस्तुओं या सेवाओं का उत्पादन, वितरण और बिक्री करते हैं ताकि लाभ अर्जित किया जा सके। व्यवसाय की दो प्रमुख विशेषताएँ हैं: 1. आर्थिक गतिविधि होना: व्यवसाय का मुख्य उद्देश्य लाभ कमाना होता है। 2. जोखिम का तत्व: व्यवसाय में लाभ के साथ-साथ हानि की संभावना भी होती है।

व्याख्या:

व्यवसाय की परिभाषा के अनुसार, यह लाभ कमाने के उद्देश्य से वस्तुओं या सेवाओं के उत्पादन, वितरण और बिक्री की प्रक्रिया है। इसकी पहली विशेषता है कि यह आर्थिक गतिविधि है, अर्थात् इसका उद्देश्य लाभ कमाना है। दूसरी विशेषता है कि इसमें हमेशा जोखिम जुड़ा रहता है, क्योंकि लाभ या हानि दोनों की संभावना होती है।

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Q2.2. व्यवसाय के दो आर्थिक उद्देश्य एवं दो सामाजिक उद्देश्य लिखिए।

उत्तर:

व्यवसाय के दो आर्थिक उद्देश्य: 1. लाभ अर्जित करना 2. पूंजी की सुरक्षा व्यवसाय के दो सामाजिक उद्देश्य: 1. समाज की आवश्यकताओं की पूर्ति करना 2. रोजगार के अवसर प्रदान करना

व्याख्या:

आर्थिक उद्देश्य वे होते हैं जो व्यवसाय की आर्थिक स्थिति को मजबूत करते हैं, जैसे लाभ कमाना और पूंजी की सुरक्षा। सामाजिक उद्देश्य वे होते हैं जो समाज के हित में होते हैं, जैसे समाज की आवश्यकताओं की पूर्ति और रोजगार देना।

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Q3.3. व्यवसाय के प्रकारों को समझाइए।

उत्तर:

व्यवसाय के प्रकार मुख्य रूप से तीन हैं: 1. विनिर्माण व्यवसाय: इसमें कच्चे माल को तैयार उत्पादों में परिवर्तित किया जाता है, जैसे कपड़ा उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण आदि। 2. व्यापार: इसमें वस्तुओं की खरीद-फरोख्त की जाती है, जैसे थोक व्यापारी, खुदरा व्यापारी आदि। 3. सेवा व्यवसाय: इसमें उपभोक्ताओं को सेवाएँ प्रदान की जाती हैं, जैसे बैंकिंग, बीमा, परिवहन आदि।

व्याख्या:

व्यवसाय को उसके कार्य के आधार पर तीन भागों में बाँटा गया है। विनिर्माण व्यवसाय में उत्पादन होता है, व्यापार में वस्तुओं की खरीद-बिक्री होती है और सेवा व्यवसाय में सेवाएँ दी जाती हैं। प्रत्येक प्रकार की अपनी विशेषताएँ और कार्यप्रणाली होती है।

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Q4.4. व्यवसाय के लिए आवश्यक संसाधनों के नाम लिखिए।

उत्तर:

व्यवसाय के लिए आवश्यक संसाधन हैं: 1. मानव संसाधन 2. भौतिक संसाधन 3. वित्तीय संसाधन 4. सूचना संसाधन

व्याख्या:

व्यवसाय को सफलतापूर्वक संचालित करने के लिए विभिन्न प्रकार के संसाधनों की आवश्यकता होती है, जिनमें मानव, भौतिक, वित्तीय और सूचना संसाधन प्रमुख हैं।

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Q5.5. व्यवसाय और समाज के बीच संबंध स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:

व्यवसाय और समाज के बीच गहरा संबंध होता है। व्यवसाय समाज की आवश्यकताओं को पूरा करता है और समाज से ही संसाधन प्राप्त करता है। व्यवसाय का सामाजिक दायित्व होता है कि वह समाज के हित में कार्य करे, जैसे रोजगार देना, पर्यावरण की रक्षा करना, उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण वस्तुएँ व सेवाएँ देना आदि।

व्याख्या:

व्यवसाय समाज के बिना अस्तित्व में नहीं रह सकता क्योंकि उसे अपने उत्पादों के लिए ग्राहक, संसाधन और श्रमिक समाज से ही मिलते हैं। इसी प्रकार, व्यवसाय समाज की आवश्यकताओं की पूर्ति करता है और सामाजिक दायित्व निभाता है।

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Q6.व्यवसाय की परिभाषा क्या है?

उत्तर:

व्यवसाय वह आर्थिक गतिविधि है जिसमें व्यक्ति या समूह वस्तुओं या सेवाओं का उत्पादन, वितरण और बिक्री करते हैं ताकि लाभ अर्जित किया जा सके। उदाहरण के लिए, कपड़ा उद्योग एक व्यवसाय है जिसमें वस्त्रों का उत्पादन और बिक्री की जाती है।

व्याख्या:

व्यवसाय आर्थिक गतिविधि है जिसमें लाभ कमाने के उद्देश्य से वस्तुओं या सेवाओं का उत्पादन, वितरण एवं बिक्री की जाती है। उदाहरण: खाद्य प्रसंस्करण उद्योग।

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Q7.व्यवसाय की मुख्य विशेषताएँ कौन-कौन सी हैं?

उत्तर:

व्यवसाय की मुख्य विशेषताएँ हैं: (1) आर्थिक गतिविधि होना, (2) उत्पादन या सेवा का निरंतर प्रवाह, (3) जोखिम लेना, (4) संसाधनों का संयोजन, (5) सामाजिक उद्देश्य। उदाहरण: व्यापार में लगातार वस्तुओं की बिक्री होती है और जोखिम रहता है।

व्याख्या:

व्यवसाय की विशेषताएँ निम्न हैं: 1. आर्थिक गतिविधि होना 2. निरंतरता 3. जोखिम 4. संसाधनों का संयोजन 5. सामाजिक उद्देश्य उदाहरण: कपड़ा उद्योग में उत्पादन और बिक्री नियमित होती है।

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Q8.लाभ अर्जित करना व्यवसाय का मुख्य उद्देश्य क्यों है?

उत्तर:

लाभ अर्जित करना व्यवसाय का मुख्य उद्देश्य है क्योंकि इसके बिना व्यवसाय का संचालन संभव नहीं है और व्यवसाय की दीर्घकालिक सफलता के लिए आवश्यक है। उदाहरण: यदि कोई कंपनी लाभ नहीं कमाती तो वह बंद हो सकती है।

व्याख्या:

लाभ व्यवसाय के संचालन के लिए आवश्यक है क्योंकि इससे व्यवसाय चल सकता है, विस्तार कर सकता है और पूंजी की सुरक्षा होती है। उदाहरण: खुदरा व्यापार में लाभ से ही व्यवसायी अपना कार्य जारी रख सकता है।

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