NCERTCh 10निःशुल्क

Chapter 10

🎓 Class 9📖 Kshitij📖 7 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~11 मिनट
Chapter 9अध्याय 10 / 13Chapter 11

Chapter 10अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 7 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

माखनलाल चतुर्वेदी

व्याख्या

माखनलाल चतुर्वेदी

माखनलाल चतुर्वेदी का जन्म मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले के बाबई गाँव में सन् 1889 में हुआ था। वे मात्र 16 वर्ष की उम्र में शिक्षक बने, जो उनके ज्ञान और प्रतिभा का परिचायक है। बाद में उन्होंने अध्यापन कार्य छोड़कर 'प्रभा' नामक पत्रिका का संपादन शुरू किया, जिससे उनकी साहित्यिक और पत्रकारिता की यात्रा प्रारंभ हुई। वे देशभक्त कवि और प्रखर पत्रकार थे, जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अपनी लेखनी से देशवासियों को जागरूक किया। माखनलाल चतुर्वेदी ने 'कर्मवीर' और 'प्रताप' पत्रिकाओं का भी संपादन किया। उनकी प्रमुख कृतियों में 'हिम किरीटनी', 'साहित्य देवता', 'हिम तरंगिनी', और 'वेणु लो गूँजे धरा' शामिल हैं। उन्हें पद्मभूषण और साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनकी रचनाएँ राष्ट्रीय भावना से ओतप्रोत हैं, जिनमें स्वतंत्रता की चेतना, देश के प्रति त्याग और बलिदान की भावना स्पष्ट रूप से झलकती है। इस कारण उन्हें 'एक भारतीय आत्मा' के नाम से जाना जाता है। वे कवि-कार्यकर्ता थे और स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कई बार जेल भी गए। उनकी कविताओं में भक्ति, प्रेम और प्रकृति के प्रति गहरा लगाव भी देखने को मिलता है। माखनलाल चतुर्वेदी कविता में शिल्प की तुलना में भाव को अधिक महत्व देते थे और उन्होंने परंपरागत छंदबद्धता के साथ-साथ रचना के अनुकूल शब्दों का प्रयोग किया।

  • माखनलाल चतुर्वेदी का जन्म 1889 में मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले के बाबई गाँव में हुआ।
  • 16 वर्ष की उम्र में शिक्षक बने और बाद में 'प्रभा' पत्रिका का संपादन किया।
  • देशभक्त कवि एवं प्रखर पत्रकार थे, स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भागीदार।
  • प्रमुख कृतियाँ: हिम किरीटनी, साहित्य देवता, हिम तरंगिनी, वेणु लो गूँजे धरा।
  • पद्मभूषण और साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित।
  • कविता में भाव प्रधानता, शिल्प की तुलना में भाव को अधिक महत्व।
  • 📌 प्रखर पत्रकार: जो सशक्त और प्रभावशाली पत्रकारिता करता है।
  • 📌 पद्मभूषण: भारत सरकार द्वारा दिया जाने वाला एक उच्च नागरिक सम्मान।
  • 📌 छंदबद्धता: कविता में छंदों का नियमबद्ध प्रयोग।

कैदी और कोकिला

व्याख्या

कैदी और कोकिला

माखनलाल चतुर्वेदी की कविता 'कैदी और कोकिला' ब्रिटानी उपनिवेशवाद के शोषण तंत्र का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करती है। यह कविता भारतीय स्वाधीनता सेनानियों के साथ जेल में किए गए दुर्व्यवहारों और यातनाओं का मार्मिक चित्रण है। कविता में कवि जेल की ऊँची काली दीवारों के भीतर कैद है, जहाँ उसे डाकू, चोर और बटमारों के समान समझा जाता है। उसे न तो पेट भर खाना दिया जाता है और न ही मरने की अनुमति। जीवन पर दिन-रात कड़ा पहरा है। कवि को लगता है कि शासन का प्रभाव तम (अंधकार) की तरह गहरा है और निराशा का माहौल है। कोकिला की कूक सुनकर कवि अपने मन की वेदना, असंतोष और ब्रिटिश शासन के प्रति आक्रोश व्यक्त करता है। कोकिला के मधुर गीतों के विपरीत कवि की स्थिति अत्यंत दयनीय है। कोकिला की आवाज़ कवि के लिए एक संदेश है, जो स्वतंत्रता के लिए संघर्ष का प्रतीक है। कविता में कोकिला की कूक को विद्रोह का बीज माना गया है, जो अंधकार को चीरने वाली है। कवि को कोकिला से ईर्ष्या भी होती है क्योंकि कोकिला को खुली हवा और हरियाली मिली है, जबकि कवि को काली कोठरी में कैद रहना पड़ता है। कवि ब्रिटिश शासन की कठोरता और अन्याय को काली रात, काली दीवारें, काली टोपी, काली कमली, लौह-शृंखला आदि प्रतीकों के माध्यम से दर्शाता है। कविता में जेल के भीतर कैदियों की पीड़ा और स्वतंत्रता की लालसा की गहरी अभिव्यक्ति है।

  • कविता ब्रिटानी उपनिवेशवाद के शोषण और जेलों में यातनाओं का मार्मिक चित्रण है।
  • कैदी को डाकू, चोर, बटमारों के समान समझा जाता है और उसे भूखा रखा जाता है।
  • कोकिला की कूक को स्वतंत्रता का संदेश और विद्रोह का प्रतीक माना गया है।
  • कवि को कोकिला की आज़ादी और मधुर गीतों से ईर्ष्या होती है।
  • ब्रिटिश शासन की कठोरता को काली रात, दीवार, टोपी, कमली जैसे प्रतीकों से दर्शाया गया है।
  • कविता में स्वतंत्रता के लिए संघर्ष और त्याग की भावना स्पष्ट है।
  • 📌 कैदी: जेल में बंद व्यक्ति।
  • 📌 कोकिला: एक पक्षी, यहाँ स्वतंत्रता और आशा का प्रतीक।
  • 📌 तम: अंधकार।

कविता का पाठ: कैदी और कोकिला

व्याख्या

कविता का पाठ: कैदी और कोकिला

यह खंड माखनलाल चतुर्वेदी की कविता 'कैदी और कोकिला' के पूर्ण पाठ को प्रस्तुत करता है। कविता में कैदी और कोकिला के संवाद के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जेल की यातनाओं और देशभक्ति की भावना को अभिव्यक्त किया गया है। कविता की पंक्तियाँ जेल की का

अभ्यास प्रश्नChapter 10

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.ललद्यद की रचनाएँ किस शैली में हैं?
A.वाख
B.दोहा
C.छंद
D.सोरठा

उत्तर:

वाख

MediumNCERT
Q2.`करें देव भवसागर पार' में कौन-सा अलंकार है?
A.रूपक अलंकार
B.अनुप्रास अलंकार
C.यमक अलंकार
D.उपमा अलंकार

उत्तर:

रूपक अलंकार

MediumNCERT
Q3.समभावी का अर्थ क्या है?
A.असमानता का भाव
B.समानता का भाव
C.पूर्णता का भाव
D.अपूर्णता का भाव

उत्तर:

समानता का भाव

MediumNCERT
Q4.माँझी किसे कहा गया है?
A.गुरु को
B.माँ को
C.प्रभु को
D.दोस्त को

उत्तर:

प्रभु को

MediumNCERT
Q5.'आत्म ज्ञान'को बताया है,-
A.हिंदू-मुस्लिम का भेदभाव
B.सच्ची भक्ति की पूँजी
C.सुषुम-सेतु
D.साहिब से पहचान

उत्तर:

साहिब से पहचान

MediumNCERT
Q6.परमात्मा की शरण को कवयित्री क्या मानती है?
A.अपना घर
B.अपना विद्यालय
C.अपना महल
D.अपना बगीचा

उत्तर:

अपना घर

MediumNCERT
Q7.` रस्सी ʼशब्द का प्रयोग किसके लिए हुआ है?
A.भक्ति के लिए
B.नाव के लिए
C.साँस के लिए
D.मनुष्य के लिए

उत्तर:

साँस के लिए

MediumNCERT
Q8.'शिव' के नाम से कवयित्री ने किसे पुकारा है?
A.मनुष्य को
B.अपने प्रभु को
C.ज्ञान को
D.भक्ति को

उत्तर:

अपने प्रभु को

MediumNCERT