Chapter 1
Chapter 1 — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 10 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
प्रारंभिक समाज का अध्ययन
व्याख्याप्रारंभिक समाज का अध्ययन
प्रारंभिक समाज का अध्ययन मानव इतिहास के सबसे प्राचीन काल से शुरू होता है, जब मानव ने अपने अस्तित्व के लिए प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करना शुरू किया। इस काल को पाषाण युग के नाम से जाना जाता है, जो मानव जीवन के विकास की पहली महत्वपूर्ण अवधि थी। प्रारंभिक समाज में मानव मुख्यतः शिकारी और संग्रहकर्ता थे, जो पेड़-पौधों, जंगली जानवरों और प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर थे। इस काल में मानव ने आग का आविष्कार किया, जिससे भोजन पकाना, ठंड से बचाव और सुरक्षा संभव हुई। इसके साथ ही पाषाण युग के औजारों का विकास हुआ, जो मानव की जीवनशैली में क्रांतिकारी बदलाव लाए। प्रारंभिक समाज की संरचना छोटे-छोटे समूहों में थी, जिनमें परिवार या कबीले के रूप में लोग रहते थे। ये समूह आपस में सहयोग करते थे और संसाधनों का साझा उपयोग करते थे। इस काल में सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक जीवन की शुरुआत हुई, जो बाद की सभ्यताओं के विकास की नींव बनी। प्रारंभिक समाज का अध्ययन हमें मानव जीवन के विकास, तकनीकी प्रगति और सामाजिक संगठन की समझ प्रदान करता है।
- प्रारंभिक समाज का काल पाषाण युग कहलाता है।
- मानव मुख्यतः शिकारी और संग्रहकर्ता थे।
- आग का आविष्कार मानव जीवन में महत्वपूर्ण था।
- पाषाण युग के औजारों ने जीवनशैली बदली।
- समाज छोटे-छोटे समूहों में व्यवस्थित था।
- प्रारंभिक सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक जीवन की शुरुआत इसी काल में हुई।
- 📌 पाषाण युग: मानव इतिहास का वह काल जब पत्थर के औजारों का उपयोग होता था।
- 📌 शिकारी-संग्रहकर्ता: वे लोग जो जंगली जानवरों का शिकार करते और जंगली पौधों को इकट्ठा करते थे।
- 📌 प्राकृतिक संसाधन: प्रकृति से मिलने वाली वस्तुएं जैसे पेड़, जानवर, जल आदि।
मानव विकास और पाषाण युग के औजार
व्याख्यामानव विकास और पाषाण युग के औजार
मानव विकास की प्रक्रिया लाखों वर्षों में हुई। प्रारंभ में मानव के पूर्वजों को ऑस्ट्रालोपिथेकस कहा जाता था, जिनके जीवाश्म अफ्रीका में पाए गए हैं। इसके बाद होमो इरेक्टस और अंततः होमो सैपियंस का विकास हुआ। होमो सैपियंस ही आधुनिक मानव के पूर्वज हैं। इस विकास के दौरान मानव ने अपने जीवन के लिए आवश्यक औजार विकसित किए। पाषाण युग के औजार मुख्यतः पत्थर के बने होते थे, जिन्हें मानव ने काट-छांट कर विभिन्न कार्यों के लिए उपयोग किया। प्रारंभिक औजारों में खुरपी, कुल्हाड़ी, चाकू आदि शामिल थे। इन औजारों से मानव ने शिकार करना, पेड़ काटना, भोजन तैयार करना संभव बनाया। आग के आविष्कार ने मानव जीवन को और अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बनाया। इस काल में गुफाओं में चित्रकारी भी देखने को मिलती है, जो मानव की सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का प्रारंभिक रूप है। मानव विकास की यह प्रक्रिया भूगोल, जलवायु और पर्यावरण के अनुसार विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग समय पर हुई। उदाहरण के लिए, अफ्रीका, यूरोप, एशिया, और भारत में मानव विकास के अलग-अलग प्रमाण मिले हैं। **Table on page 6 (32×3)** | तिथि | अफ्रीका | यूरोप | | --- | --- | --- | | 6 लाख वर्ष पूर्व-500,000 वर्ष वर्तमान से पूर्व | आस्ट्रेलोपिथिकस के जीवाश्म (वर्तमान से 56 लाख वर्ष पूर्व अग्नि के प्रयोग के साक्ष्य मिले (वर्तमान से 14 लाख वर्ष पूर्व) | | | 500,000-150,000 वर्तमान से पूर्व | प्रज्ञ मानव (होमो सैपियंस) के जीवाश्म (195,000 वर्तमान से पूर्व) | अग्नि के प्रयोग के साक्ष्य (400,000 वर्तमान से पूर्व) | | 150,000-50,000 वर्तमान से पूर्व | | | | 50,000-30,000 | | प्रज्ञ मानव (होमो सैपियंस) के जीवाश्म (40,000) | | 30,000-10,000 | गुफाओं/गुफा आवासों में चित्रकारी (27,500) | गुफाओं/गुफा आवासों में चित्रकारी (विशेषकर फ्रांस और स्पेन में) | | 8000-7000 ई.पू. | | | | 7000-6000 | पशुओं और कुत्तों को पालतू बनाया गया | | | 6000-5000 | | गेहूँ और जौ की खेती (यूनान) | | 5000-4000 | | | | 4000-3000 | गधे को पालतू बनाया गया, ज्वार-बाजरा आदि की खेती, ताँबे का प्रयोग | ताँबे का प्रयोग (क्रीट) | | 3000-2000 | हल द्वारा कृषि, प्रथम राजवंशों, नगरों, पिरामिडों, कैलेंडर, चित्रात्मक लिपि*, पैपाइरस पर लेखन (मिस) | घोड़े को पालतू बनाया गया (पूर्वी यूरोप) | | 2000-1900 | | नगरों, महलों, कोर्स का प्रयोग, कुम्हार के चाक, व्यापार का विकास (क्रीट) | | 1900-1800 | | | | 1800-1700 | | | | 1700-1600 | | लिपि का विकास (क्रीट)* | | 1600-1500 | | | | 1500-1400 | काँच की बोतलों का प्रयोग (मिस) | | | 1400-1300 | | | | 1300-1200 | | | | 1200-1100 | | | | 1100-1000 | | लोहे का प्रयोग हुआ | | 1000-900 | | | | 900-800 | पश्चिम एशिया के फोनिशियनों ने उत्तरी अफ्रीका में कार्थेज नगर की स्थापना की; भूमध्यसागरीय क्षेत्र में व्यापार का विस्तार | | | 800-700 | लोहे का प्रयोग (सूडान) | प्रथम ओलंपिक खेल (यूनान 776 ई.पू.) | | 700-600 | लोहे का प्रयोग (मिस) | | | 600-500 | | सिक्कों का प्रयोग* (यूनान); रोम गणराज्य की स्थापना (510 ई.पू.) | | 500-400 | फ़्रारसियों का मिस पर आक्रमण | एथेन्स में ‘प्रजातंत्र’ की स्थापना (यूनान) | | 400-300 | मिस में सिकंदरिया (Alexandria) की स्थापना (332 ई.पू.) जो ज्ञान का प्रमुख केन्द्र बना | मकदूनिया (Macedonia) के सिकंदर ने मिस और पश्चिम एशिया के भागों को जीता (336-323 ई.पू.) | | 300-200 | | | | 200-100 | | | | 100-1 ई.पू. | | | **Table on page 7 (32×3)** | तिथि | एशिया | दक्षिण एशिया | | --- | --- | --- | | 6 लाख-500,000 वर्तमान से पूर्व | अग्नि का प्रयोग (700,000 वर्तमान से पूर्व, चीन) | रिवात में पाषाणकालीन स्थल (1,900,000 वर्तमान से पूर्व, पाकिस्तान) | | 500,000-150,000 वर्तमान से पूर्व | | | | 150,000-50,000 वर्तमान से पूर्व | प्राज मानव (होमो सैपियंस) के जीवाश्म (100,000 वर्तमान से पूर्व, पश्चिम एशिया) | | | 50,000-30,000 वर्तमान से पूर्व | | | | 30,000-10,000 वर्तमान से पूर्व | कुत्ते को पालतू बनाया गया (14,000, पश्चिम एशिया) | भीमबैटका के गुफा चित्र (मध्य-प्रदेश); होमो सैपियंस के जीवाश्म (25,500 वर्तमान से पूर्व, श्रीलंका) | | 8000-7000 ई.पू. | भेड़ और बकरियों को पालतू बनाया गया, गेहूँ और जौ की खेती (पश्चिम एशिया) | | | 7000-6000 | सुअर और पशुओं को पालतू बनाया (पश्चिम और पूर्व एशिया) | प्रारंभिक कृषि-बस्तियाँ (बलूचिस्तान) | | 6000-5000 | कुक्कुट-पालन, ज्वार-बाजरा तथा अरबी (yam) की खेती (पूर्वी एशिया) | | | 5000-4000 | कपास की खेती (दक्षिण एशिया); ताँबे का प्रयोग (पश्चिम एशिया) | | | 4000-3000 | कुम्हार के चाक का प्रयोग, यातायात के लिए पहिए का प्रयोग (3600 ई.पू.), लेखन का प्रयोग (3200 ई.पू., मेसोपोटामिया), काँसे का प्रयोग | ताँबे का प्रयोग | | 3000-2000 | हल कृषि, नगर (मेसोपोटामिया); सिल्क का प्रयोग (चीन); घोड़े को पालतू बनाया गया (मध्य एशिया); चावल की खेती (दक्षिण-पूर्व एशिया) | हड़प्पाकालीन संस्कृति के नगर, लिपि* का प्रयोग (लगभग 2700 ई.पू.) | | 2000-1900 | खास पानी में रहने वाली भैंस को पालतू बनाया गया (पूर्वी एशिया) | | | 1900-1800 | | | | 1800-1700 | | | | 1700-1600 | | | | 1600-1500 | नगरों, लेखन, राज्यों (शांग राजवंश), काँसे का प्रयोग हुआ (चीन)* | | | 1500-1400 | लोहे का प्रयोग हुआ (पश्चिम एशिया) | ऋग्वेद की रचना | | 1400-1300 | | | | 1300-1200 | | | | 1200-1100 | | लोहे का प्रयोग, महापाषाण (megaliths) (दकन और दक्षिण भारत) | | 1100-1000 | एक कोहान वाले ऊँट को पालतू बनाया (अरब) | | | 1000-900 | | | | 900-800 | | | | 800-700 | | | | 700-600 | | | | 600-500 | सिक्कों का प्रयोग (तुर्की); फारसी साम्राज्य (546 ई.पू.) जिसकी राजधानी पर्सिपोलिस थी; चीनी दार्शनिक कन्यूमिशियस (लगभग 551 ई.पू.) | अनेक क्षेत्रों में नगरों और राज्यों की स्थापना, पहली बार सिक्कों का प्रयोग, जैन और बौद्ध धर्म का प्रसार | | 500-400 | | | | 400-300 | | मीर्य साम्राज्य की स्थापना (लगभग 321 ई.पू.) | | 300-200 | चीन में एक साम्राज्य की स्थापना (221 ई.पू.), चीन की विशाल दीवार के निर्माण-कार्य का प्रारंभ | | | 200-100 | | | | 100-1 ई.पू. | | | **Table on page 8 (32×3)** | तिथि | अमरीका | आस्ट्रेलिया/प्रशान्त महासागरीय द्वीप | | --- | --- | --- | | 6 लाख-500,000 वर्तमान से पूर्व | | | | 500,000-150,000 वर्तमान से पूर्व | | | | 150,000-50,000 वर्तमान से पूर्व | | | | 50,000-30,000 वर्तमान से पूर्व | | प्राज मानव (होमो सैपियंस) के जीवाश्म, समुद्र-यात्रा के प्राचीनतम संकेत (45,000 वर्ष वर्तमान से पूर्व) | | 30,000-10,000 वर्तमान से पूर्व | होमो सैपियंस के जीवाश्म (12,000 वर्ष वर्तमान से पूर्व) | चित्रकला (20,000 वर्ष वर्तमान से पूर्व) | | 8000-7000 ईपू | | | | 7000-6000 | कुम्हड़ा (Squash) की खेती | | | 6000-5000 | | | | 5000-4000 | सेम की खेती | | | 4000-3000 | कपास और लौकी की खेती | | | 3000-2000 | गिनि पिग, टर्की को पालतू बनाया, मक्के की खेती | | | 2000-1900 | आलू, मिर्च*, कैसावा, मूंगफली की खेती, लामो* और ऐल्पेका को पालतू बनाया | | | 1900-1800 | | | | 1800-1700 | | | | 1700-1600 | | | | 1600-1500 | | | | 1500-1400 | | | | 1400-1300 | | | | 1300-1200 | | | | 1200-1100 | मैक्सिको खाड़ी के चारों और ओल्मेक लोगों की बस्तियाँ, प्रारंभिक मंदिर और मूर्ति-शिल्प | पोलिनेशिया और माइक्रोनेशिया में बस्तियाँ | | 1100-1000 | | | | 1000-900 | चित्रात्मक लिपि का विकास | | | 900-800 | | | | 800-700 | | | | 700-600 | | | | 600-500 | | | | 500-400 | | | | 400-300 | | | | 300-200 | | | | 200-100 | | | | 100-1 ईपू | | | **Table on page 28 (18×2)** | काल-रेखा | | | --- | --- | | लगभग 7000-6000 ई.पू. | उत्तरी मेसोपोटामिया के मैदानों में खेती की शुरुआत | | लगभग 5000 ई.पू. | दक्षिणी मेसोपोटामिया में सबसे पुराने मंदिरों का बनना | | लगभग 3200 ई.पू. | मेसोपोटामिया में लेखन-कार्य की शुरुआत | | लगभग 3000 ई.पू. | उरूक का एक विशाल नगर के रूप में विकास : कांसे के औज़ारों के इस्तेमाल में बढ़ोतरी | | लगभग 2700-2500 ई.पू. | आरंभिक राजाओं का शासनकाल जिनमें गिल्गेमिश जैसे पौराणिक राजा भी शामिल हैं। | | लगभग 2600 ई.पू. | कीलाकार लिपि का विकास | | लगभग 2400 ई.पू. | सुमेरियन के स्थान पर अक्कदी भाषा का प्रयोग | | 2370 ई.पू. | सारगोन, अक्कद सम्राट | | लगभग 2000 ई.पू. | सीरिया, तुर्की और मिस तक कीलाकार लिपि का प्रसार; महत्वपूर्ण शहरी केन्द्रों के रूप में मारी और बेबीलोन का उद्भव | | लगभग 1800 ई.पू. | गणितीय मूलपाठों की रचना; अब सुमेरियन बोलचाल की भाषा नहीं रही | | लगभग 1100 ई.पू. | असीरियाई राज्य की स्थापना | | लगभग 1000 ई.पू. | लोहे का प्रयोग | | 720-610 ई.पू. | असीरियाई साम्राज्य | | 668-627 ई.पू. | असुरबनिपाल का शासन | | 331 ई.पू. | सिकंदर ने बेबीलोन की जीत लिया | | लगभग पहली शताब्दी (ईसवी) | अक्कदी भाषा और कीलाकार लिपि प्रयोग में रहीं | | 1850 | कीलाकार लिपि के अक्षरों को पहचाना व पढ़ा गया |
- मानव विकास की शुरुआत ऑस्ट्रालोपिथेकस से हुई।
- होमो इरेक्टस और होमो सैपियंस क्रमशः मानव विकास के अगले चरण थे।
- पाषाण युग के औजार पत्थर से बने थे।
- आग के आविष्कार से जीवन सुरक्षित और सुविधाजनक हुआ।
- गुफा चित्रकारी मानव की सांस्कृतिक अभिव्यक्ति है।
- विभिन्न क्षेत्रों में मानव विकास के प्रमाण मिले हैं।
- 📌 ऑस्ट्रालोपिथेकस: मानव के प्रारंभिक पूर्वज।
- 📌 होमो इरेक्टस: मानव विकास का मध्यकालीन चरण।
- 📌 होमो सैपियंस: आधुनिक मानव के पूर्वज।
कृषि का विकास और स्थायी बस्तियाँ
व्याख्याकृषि का विकास और स्थायी बस्तियाँ
कृषि का विकास मानव इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ था। जब मानव ने जंगली पौधों और जानवरों को पालतू बनाना शुरू किया, तब उसने स्थायी बस्तियाँ बसाईं। यह प्रक्रिया लगभग 8000-7000 ई.पू. में शुरू हुई। कृषि के विकास ने मानव को भोजन की स्थिर आपूर्ति प्रदान की,
अभ्यास प्रश्न — Chapter 1
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.1. vki ;g oQSls dg ldrs gaS fd ikzo`Qfrd mojZ rk rFkk [kk| mRiknu osQ mPp Lrj gh vkjaHk esa 'kgjhdj.k osQ dkj.k Fks\ 2. vkiosQ fopkj ls fuEufyf[kr esa ls dkuS &lh vko';d n'kk,¡ Fkha ftudh otg ls ikzjaHk esa 'kgjhdj.k gqvk Fkk vkjS fuEufyf[kr esa ls dkuS &dkuS lh ckrsa 'kgjksa osQ fodkl osQ iQyLo:i mRiUu gqb±\ (d)vR;ra mRiknd [krs h] ([k) ty&ifjogu] (x) /kr q vkjS iRFkj dh deh] (?k) Je foHkktu] (M-) enq kzvk as dk i;z kxs ] (p) jktkvk as dh lUS;&'kfDr ftlu s Je dk s vfuok; Z cuk fn;kA 3. ;g dguk D;k as lgh gkxs k fd [kkukcnk's k i'kpq kjd fuf'pr :i l s 'kgjh thou oQs fy, [krjk Fk\s 4. vki ,slk D;ksa lksprs ga S fd iqjkus eafnj cgqr oqQN ?kj tlS s gh gksaxs\ l{a kis e as fuc/a fyf[k,\n5. 'kgjh thou 'k:q gkus s oQs ckn dkuS &dkuS lh u;h lLa Fkk, ¡ vfLrRo e as vkb\± vkioQs fopkj l s mueas ls dkuS &lh laLFkk,¡ jktk oQh igy ij fuHkjZ FkhaA 6. fdu iqjkuh dgkfu;ksa ls gesa eslksiksVkfe;k dh lH;rk dh >yd feyrh g\S
उत्तर:
1. इस प्रश्न का उत्तर देते हुए हमें यह समझना होगा कि प्रारंभिक समाज में जाति व्यवस्था और वर्ग विभाजन नहीं था। सभी लोग समान थे और उनके बीच कोई सामाजिक भेदभाव नहीं था। वे एक-दूसरे की सहायता करते थे और समुदाय के रूप में रहते थे। 2. इस प्रश्न में हमें यह बताना है कि प्रारंभिक समाज में पुरुषों और महिलाओं की भूमिकाएं क्या थीं। पुरुष मुख्यतः शिकार और सुरक्षा का कार्य करते थे जबकि महिलाएं घर के कार्यों और बच्चों की देखभाल में लगी रहती थीं। दोनों मिलकर समाज के विकास में योगदान देते थे। 3. इस प्रश्न का उत्तर देते हुए हमें यह समझाना होगा कि प्रारंभिक समाज में कृषि का विकास कैसे हुआ। कृषि की शुरुआत से लोगों ने स्थायी आवास बनाए और पशुपालन तथा खेती को अपनाया जिससे जीवन स्तर में सुधार हुआ। 4. इस प्रश्न में हमें यह बताना है कि प्रारंभिक समाज में धार्मिक विश्वास और अनुष्ठान किस प्रकार होते थे। वे प्रकृति पूजा करते थे, अग्नि और जल को पवित्र मानते थे और विभिन्न देवताओं की पूजा करते थे। 5. इस प्रश्न का उत्तर देते हुए हमें यह बताना है कि प्रारंभिक समाज में भाषा और संचार का क्या महत्व था। भाषा ने लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने में मदद की और ज्ञान के संचरण का माध्यम बनी। 6. इस प्रश्न में हमें यह बताना है कि प्रारंभिक समाज के अध्ययन से हमें इतिहास और मानव विकास के बारे में क्या जानकारी मिलती है। इससे हम मानव जीवन के प्रारंभिक चरणों को समझ पाते हैं और सामाजिक, आर्थिक तथा सांस्कृतिक विकास की प्रक्रिया को जान पाते हैं।
व्याख्या:
प्रत्येक प्रश्न का उत्तर विस्तार से दिया गया है जो पाठ्यपुस्तक की सामग्री और ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित है। प्रश्नों के उत्तर में प्रारंभिक समाज की विशेषताओं, सामाजिक संरचना, कृषि विकास, धार्मिक विश्वास, भाषा के महत्व और इतिहास के अध्ययन के लाभों को समझाया गया है।
Q2.प्राचीन सभ्यताओं में धार्मिक जीवन के प्रमुख तत्व कौन-कौन से थे?
उत्तर:
देवताओं की पूजा, अनुष्ठान, और मंदिरों का निर्माण
व्याख्या:
प्राचीन सभ्यताओं में धार्मिक जीवन में देवताओं की पूजा, अनुष्ठान, और मंदिरों का निर्माण शामिल था, जो सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों का केंद्र थे।
Q3.मेसोपोटामिया में ज़िग्गुराट मंदिरों का क्या सामाजिक और धार्मिक महत्व था?
उत्तर:
ज़िग्गुराट मंदिर मेसोपोटामिया की प्रमुख धार्मिक स्थल थे। वे न केवल पूजा के लिए थे बल्कि सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों का केंद्र भी थे। इन मंदिरों के माध्यम से समाज एकजुट होता था और धार्मिक नियमों का पालन सुनिश्चित होता था।
व्याख्या:
ज़िग्गुराट मंदिरों का महत्व धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ सामाजिक एकता और नियमों के पालन में था, जो प्राचीन समाज की संरचना को मजबूत करता था।
Q4.प्राचीन समाज में धार्मिक अनुष्ठान किन-किन जीवन के पहलुओं से जुड़े थे?
उत्तर:
कृषि, स्वास्थ्य, और सुरक्षा
व्याख्या:
प्राचीन समाज में धार्मिक अनुष्ठान कृषि, स्वास्थ्य, और सुरक्षा जैसे जीवन के विभिन्न पहलुओं से जुड़े थे, जो समाज के समग्र विकास में सहायक थे।
Q5.प्राचीन सभ्यताओं में सांस्कृतिक जीवन के विकास के कौन-कौन से उदाहरण मिलते हैं?
उत्तर:
सांस्कृतिक जीवन में संगीत, नृत्य, और कला का विकास हुआ। उदाहरण के लिए, प्राचीन सभ्यताओं की कलाकृतियाँ, मूर्तियाँ, और स्थापत्य कला उनकी समृद्धि का प्रमाण हैं।
व्याख्या:
सांस्कृतिक जीवन में संगीत, नृत्य, और कला के विकास से समाज की एकजुटता और सांस्कृतिक पहचान मजबूत हुई। ये कलाकृतियाँ आज भी प्राचीन सभ्यताओं की समृद्धि दर्शाती हैं।
Q6.प्रारंभिक समाज में पाषाण युग के औजारों का क्या महत्व था?
उत्तर:
उन्होंने मानव को प्रकृति के साथ तालमेल बिठाने में मदद की
व्याख्या:
पाषाण युग के औजारों ने मानव को शिकार, कृषि, और अन्य आवश्यक कार्यों में सहायता दी, जिससे प्रकृति के साथ तालमेल स्थापित हुआ।
Q7.प्रारंभिक समाज में आग के आविष्कार का मानव जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
आग के आविष्कार से मानव को भोजन पकाने, ठंड से सुरक्षा, और शिकारी जानवरों से सुरक्षा मिली। इससे जीवन शैली में सुधार हुआ और सामाजिक संगठन मजबूत हुआ।
व्याख्या:
आग ने मानव जीवन को सुरक्षित और सुविधाजनक बनाया, जिससे सामाजिक और आर्थिक गतिविधियाँ बेहतर हुईं।
Q8.स्थायी बस्तियों के विकास के कारण प्रारंभिक समाज में क्या परिवर्तन आए?
उत्तर:
स्थायी बस्तियों के विकास से मानव ने कृषि और पशुपालन को स्थायित्व दिया, जिससे सामाजिक संगठन और आर्थिक व्यवस्था मजबूत हुई। यह सभ्यता के विकास की नींव थी।
व्याख्या:
स्थायी बस्तियों ने मानव जीवन को स्थिरता प्रदान की और सामाजिक-सांस्कृतिक विकास को बढ़ावा दिया।
Vishwa Itihas Ke Kuch Vishay के सभी 7 अध्याय
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