challenges to India’s democratic politics and the institutional balance
challenges to India’s democratic politics and the institutional balance — Study Notes
NCERT-aligned · 10 notes · 3 shown free
Background to Emergency
ExplanationBackground to Emergency
1967 के बाद भारतीय राजनीति में कई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले। इंदिरा गांधी ने इस दौर में एक प्रभावशाली और लोकप्रिय नेता के रूप में उभर कर सामने आईं। इस अवधि में राजनीतिक दलों के बीच प्रतिस्पर्धा तीव्र और ध्रुवीकृत हो गई। सरकार और न्यायपालिका के बीच तनाव भी बढ़ा, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने कई सरकारी पहलों को संविधान के विरुद्ध पाया। कांग्रेस पार्टी ने न्यायपालिका की इस स्थिति को लोकतंत्र और संसदीय सर्वोच्चता के खिलाफ माना और कोर्ट को रूढ़िवादी संस्था करार दिया जो गरीबों के कल्याणकारी कार्यक्रमों के कार्यान्वयन में बाधा बन रही थी। कांग्रेस के विरोधी दलों ने राजनीति को व्यक्तिगतकरण की ओर बढ़ता हुआ देखा और सरकारी सत्ता के निजीकरण की आलोचना की। कांग्रेस के विभाजन ने इंदिरा गांधी और उनके विरोधियों के बीच मतभेदों को और बढ़ा दिया।
- 1967 के बाद भारतीय राजनीति में तीव्र बदलाव और ध्रुवीकरण हुआ।
- इंदिरा गांधी एक लोकप्रिय नेता के रूप में उभरीं।
- सरकार और सुप्रीम कोर्ट के बीच तनाव बढ़ा।
- कांग्रेस ने न्यायपालिका को रूढ़िवादी और लोकतंत्र विरोधी माना।
- राजनीति में व्यक्तिगतकरण और सत्ता के निजीकरण की आलोचना हुई।
- कांग्रेस पार्टी के विभाजन ने राजनीतिक मतभेदों को बढ़ावा दिया।
- 📌 संसदीय सर्वोच्चता: संसद की सर्वोच्चता को दर्शाता है।
- 📌 रूढ़िवादी संस्था: वह संस्था जो परिवर्तन के विरुद्ध होती है।
- 📌 व्यक्तिगतकरण: राजनीति का एक व्यक्ति के इर्द-गिर्द केंद्रित होना।
Economic context
ExplanationEconomic context
1971 के चुनावों में कांग्रेस ने 'गरीबी हटाओ' का नारा दिया था, लेकिन 1971-72 के बाद देश की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ। बांग्लादेश संकट ने भारत की अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव डाला, जब लगभग आठ मिलियन लोग पूर्वी पाकिस्तान से भारत में आ गए। इसके बाद पाकिस्तान के साथ युद्ध हुआ और युद्ध के बाद अमेरिका ने भारत को सहायता देना बंद कर दिया। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें कई गुना बढ़ गईं, जिससे वस्तुओं की कीमतों में व्यापक वृद्धि हुई। 1973 में महंगाई दर 23% और 1974 में 30% तक पहुंच गई, जिससे आम जनता को भारी कष्ट हुआ। औद्योगिक विकास धीमा था और बेरोजगारी विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत अधिक थी। सरकार ने खर्च कम करने के लिए कर्मचारियों के वेतन स्थगित कर दिए, जिससे सरकारी कर्मचारियों में असंतोष बढ़ा। 1972-73 में मानसून की विफलता के कारण कृषि उत्पादन में 8% की गिरावट आई। इस आर्थिक संकट के बीच विपक्षी दलों ने जन आंदोलनों का सफल आयोजन किया।
- 1971 के बाद गरीबी में कोई खास कमी नहीं आई।
- बांग्लादेश संकट और युद्ध ने अर्थव्यवस्था पर दबाव डाला।
- अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतों में वृद्धि से महंगाई बढ़ी।
- 1973-74 में महंगाई दर क्रमशः 23% और 30% थी।
- औद्योगिक विकास धीमा और बेरोजगारी अधिक थी।
- सरकारी कर्मचारियों के वेतन स्थगन से असंतोष बढ़ा।
- मानसून की विफलता से कृषि उत्पादन में गिरावट आई।
- 📌 महंगाई: वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में निरंतर वृद्धि।
- 📌 बेरोजगारी: काम करने योग्य लोगों के पास रोजगार का अभाव।
- 📌 मानसून: भारत में वर्षा का प्रमुख मौसम।
Gujarat and Bihar movements
ExplanationGujarat and Bihar movements
1974 में गुजरात और बिहार में छात्रों के विरोध प्रदर्शनों ने राज्य और राष्ट्रीय राजनीति पर गहरा प्रभाव डाला। जनवरी 1974 में गुजरात के छात्रों ने बढ़ती महंगाई, खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि और भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन शुरू किया। इस आंदोलन में प
Practice Questions — challenges to India’s democratic politics and the institutional balance
Includes NCERT exercise questions with answers
Q1.1. State whether the following statements regarding the Emergency are correct or incorrect. (a) It was declared in 1975 by Indira Gandhi. (b) It led to the suspension of all fundamental rights. (c) It was proclaimed due to the deteriorating economic conditions. (d) Many Opposition leaders were arrested during the emergency. (e) CPI supported the proclamation of the Emergency.
Answer:
उत्तर: (a) सही है। आपातकाल 1975 में इंदिरा गांधी द्वारा घोषित किया गया था। (b) सही है। आपातकाल के दौरान सभी मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए थे। (c) गलत है। आपातकाल की घोषणा का कारण आर्थिक स्थिति नहीं बल्कि राजनीतिक संकट था। (d) सही है। आपातकाल के दौरान कई विपक्षी नेता गिरफ्तार किए गए थे। (e) सही है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने आपातकाल की घोषणा का समर्थन किया था।
Explanation:
आपातकाल 1975 में इंदिरा गांधी द्वारा घोषित किया गया था, जिसमें मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए थे। इसका कारण राजनीतिक संकट था, न कि आर्थिक। विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार किया गया और CPI ने इसका समर्थन किया।
Q2.2. Find the odd one out in the context of proclamation of Emergency (a) The call for ‘Total Revolution. (b) The Railway Strike of 1974 (c) The Naxalite Movement (d) The Allahabad High Court verdict (e) The findings of the Shah Commission Report
Answer:
उत्तर: (e) The findings of the Shah Commission Report कारण: शाह आयोग की रिपोर्ट आपातकाल की घोषणा के बाद बनी थी, जबकि अन्य सभी घटनाएं आपातकाल की घोषणा से पहले हुईं और इसके कारण बनीं।
Explanation:
आपातकाल की घोषणा के संदर्भ में शाह आयोग की रिपोर्ट बाद में बनी, इसलिए यह अन्य घटनाओं से अलग है।
Q3.3. Match the following (a) Total Revolution (b) Garibi hatao (c) Students’ Protest (d) Railway Strike i. Indira Gandhi ii. Jayaprakash Narayan iii. Bihar Movement iv. George Fernandes
Answer:
उत्तर: (a) Total Revolution - ii. Jayaprakash Narayan (b) Garibi hatao - i. Indira Gandhi (c) Students’ Protest - iii. Bihar Movement (d) Railway Strike - iv. George Fernandes
Explanation:
टोटल रिवोल्यूशन जयप्रकाश नारायण द्वारा शुरू किया गया आंदोलन था। 'गरीबी हटाओ' नारा इंदिरा गांधी का था। छात्र आंदोलन बिहार आंदोलन के अंतर्गत आता है। रेलवे हड़ताल का नेतृत्व जॉर्ज फर्नांडीस ने किया था।
Q4.4. What were the reasons which led to the mid-term elections in 1980?
Answer:
उत्तर: 1980 के मध्यावधि चुनावों के कारण थे: - जनता पार्टी सरकार के अंदर गुटबाजी और अस्थिरता। - सरकार के अंदर विभिन्न दलों के बीच मतभेद। - कांग्रेस पार्टी के पुनर्गठन और इंदिरा गांधी की लोकप्रियता। - जनता पार्टी की कमजोर कार्यप्रणाली और नेतृत्व की कमी। इन कारणों से सरकार गिर गई और मध्यावधि चुनाव हुए।
Explanation:
जनता पार्टी सरकार के अंदर अस्थिरता और गुटबाजी के कारण सरकार का कार्य करना मुश्किल हो गया था। कांग्रेस पार्टी ने इस अवसर का फायदा उठाकर 1980 में चुनाव जीत लिया।
Q5.5. The Shah Commission was appointed in 1977 by the Janata Party Government. Why was it appointed and what were its findings?
Answer:
उत्तर: शाह आयोग की नियुक्ति 1977 में जनता पार्टी सरकार द्वारा की गई थी। इसका उद्देश्य आपातकाल के दौरान हुई दमनकारी कार्रवाइयों की जांच करना था। फैंडिंग्स: - आपातकाल के दौरान सरकार ने मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया। - विपक्षी नेताओं को बिना उचित प्रक्रिया के गिरफ्तार किया गया। - प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई। - पुलिस और प्रशासन ने अत्याचार किए। - न्यायपालिका की स्वतंत्रता को सीमित किया गया। शाह आयोग की रिपोर्ट ने आपातकाल की आलोचना की और लोकतंत्र की रक्षा के लिए आवश्यक कदम सुझाए।
Explanation:
शाह आयोग ने आपातकाल के दौरान हुई गैरकानूनी गतिविधियों का खुलासा किया, जिससे लोकतंत्र की रक्षा के लिए जागरूकता बढ़ी।
Q6.6. What reasons did the Government give for declaring a National Emergency in 1975?
Answer:
उत्तर: सरकार ने 1975 में राष्ट्रीय आपातकाल घोषित करने के लिए निम्नलिखित कारण दिए: - कानून और व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति। - देश में आंतरिक अशांति और दंगे। - राजनीतिक अस्थिरता और विपक्षी आंदोलनों का बढ़ना। - अदालत के फैसले (अल्लाहाबाद उच्च न्यायालय का फैसला) जिसने इंदिरा गांधी की चुनावी जीत को रद्द किया। सरकार ने इन कारणों को आपातकाल की घोषणा के लिए औचित्य बताया।
Explanation:
सरकार ने देश की सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए आपातकाल की घोषणा की, हालांकि आलोचक इसे राजनीतिक दबाव के रूप में देखते हैं।
Q7.7. The 1977 elections for the first time saw the Opposition coming into power at the Centre. What would you consider as the reasons for this development?
Answer:
उत्तर: 1977 के चुनावों में विपक्ष के सत्ता में आने के कारण: - आपातकाल के दौरान हुई दमनकारी नीतियों के खिलाफ जनता का गुस्सा। - विपक्षी दलों का एकजुट होकर कांग्रेस के विरुद्ध गठबंधन बनाना। - इंदिरा गांधी की छवि को नुकसान पहुंचना। - लोकतंत्र की रक्षा के लिए जनता की जागरूकता। - आर्थिक और सामाजिक समस्याओं का बढ़ना। इन कारणों से जनता ने कांग्रेस को परास्त कर विपक्ष को समर्थन दिया।
Explanation:
आपातकाल के दौरान लोकतंत्र के उल्लंघन ने जनता को नाराज किया, जिससे विपक्ष को पहली बार केंद्र में सत्ता मिली।
Q8.8. Discuss the effects of Emergency on the following aspects of our polity. - Effects on civil liberties for citizens. - Impact on relationship between the Executive and Judiciary - Functioning of Mass Media - Working of the Police and Bureaucracy.
Answer:
उत्तर: आपातकाल के प्रभाव: - नागरिक स्वतंत्रताएँ: मौलिक अधिकार निलंबित, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सीमित, गिरफ्तारी बिना मुकदमे के। - कार्यपालिका और न्यायपालिका: कार्यपालिका का प्रभुत्व बढ़ा, न्यायपालिका की स्वतंत्रता सीमित हुई। - जन मीडिया: प्रेस सेंसरशिप लागू, स्वतंत्र पत्रकारिता दबाई गई। - पुलिस और नौकरशाही: दमनकारी कार्यवाही, राजनीतिक आदेशों का पालन, मानवाधिकारों का उल्लंघन। इन प्रभावों ने भारतीय लोकतंत्र को गंभीर चुनौती दी।
Explanation:
आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिक अधिकारों पर गंभीर प्रभाव पड़ा, जिससे लोकतंत्र की नींव कमजोर हुई।
All 8 Chapters in Politics in India since Independence
Political Science · Class 12