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Industrial Sickness 135-140

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Business Environment (Hindi)📖 9 नोट्स⏱️ ~14 मिनट
Industrial Policy of India 117-134अध्याय 20 / 20

Industrial Sickness 135-140अध्ययन नोट्स

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औद्योगिक बीमारियाँ : अर्थ एवं परिभाषा

परिभाषा

औद्योगिक बीमारियाँ : अर्थ एवं परिभाषा

औद्योगिक बीमारियाँ (Industrial Sickness) का तात्पर्य उन औद्योगिक इकाइयों से है जो अपनी उत्पादन क्षमता का एक निश्चित प्रतिशत (आमतौर पर 50% से कम) उपयोग कर रही होती हैं, लगातार घाटे में चल रही होती हैं, और अपनी वित्तीय जिम्मेदारियों को पूरा करने में असमर्थ होती हैं। औद्योगिक बीमारियाँ भारतीय औद्योगिक क्षेत्र के लिए एक गंभीर समस्या रही हैं, जिससे न केवल पूंजी का अपव्यय होता है, बल्कि बेरोजगारी, संसाधनों की बर्बादी और आर्थिक असंतुलन भी उत्पन्न होता है। औद्योगिक बीमारियों की परिभाषा विभिन्न संस्थाओं द्वारा भिन्न-भिन्न दी गई है, जैसे कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), बोर्ड फॉर इंडस्ट्रियल एंड फाइनेंशियल रिकंस्ट्रक्शन (BIFR) आदि। सामान्यतः, जब कोई औद्योगिक इकाई लगातार तीन वर्षों तक घाटे में चलती है, उसकी नेटवर्थ (शुद्ध मूल्य) पूरी तरह नष्ट हो जाती है, और वह अपनी वित्तीय देनदारियों को पूरा करने में असमर्थ हो जाती है, तो उसे 'बीमार' घोषित किया जाता है।

  • औद्योगिक बीमारियाँ उन इकाइयों को कहा जाता है जो लगातार घाटे में चल रही हों।
  • बीमार इकाइयाँ अपनी उत्पादन क्षमता का 50% से कम उपयोग करती हैं।
  • ऐसी इकाइयाँ अपनी वित्तीय जिम्मेदारियाँ पूरी नहीं कर पातीं।
  • RBI और BIFR ने औद्योगिक बीमारियों की परिभाषा दी है।
  • बीमार इकाइयाँ अर्थव्यवस्था के लिए हानिकारक होती हैं।
  • 📌 औद्योगिक बीमारियाँ: ऐसी इकाइयाँ जो लगातार घाटे में चल रही हों और वित्तीय जिम्मेदारियाँ पूरी न कर पा रही हों।
  • 📌 नेटवर्थ: कुल संपत्ति में से कुल देनदारियाँ घटाने के बाद बची राशि।

औद्योगिक बीमारियों के कारण

अवधारणा

औद्योगिक बीमारियों के कारण

औद्योगिक बीमारियों के कारणों को मुख्यतः दो भागों में बाँटा जा सकता है: (1) आंतरिक कारण (Internal Causes) और (2) बाहरी कारण (External Causes)। आंतरिक कारण वे होते हैं जो उद्योग के प्रबंधन, उत्पादन, वित्त, मानव संसाधन आदि से संबंधित होते हैं। बाहरी कारण वे होते हैं जो उद्योग के बाहर के कारकों जैसे आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक, तकनीकी आदि से जुड़े होते हैं। आंतरिक कारणों में कुप्रबंधन, वित्तीय कुप्रबंधन, तकनीकी पिछड़ापन, श्रमिक असंतोष, कच्चे माल की अनुपलब्धता, उत्पादन लागत में वृद्धि आदि शामिल हैं। बाहरी कारणों में बाजार में माँग की कमी, सरकारी नीतियों में बदलाव, आयात प्रतिस्पर्धा, प्राकृतिक आपदाएँ, आर्थिक मंदी आदि आते हैं। इन कारणों के कारण उद्योगों का संचालन प्रभावित होता है और वे बीमार पड़ जाती हैं।

  • औद्योगिक बीमारियों के कारण आंतरिक और बाहरी दोनों प्रकार के होते हैं।
  • आंतरिक कारणों में कुप्रबंधन, वित्तीय समस्याएँ, तकनीकी पिछड़ापन शामिल हैं।
  • बाहरी कारणों में बाजार की मंदी, सरकारी नीतियों में बदलाव, आयात प्रतिस्पर्धा शामिल हैं।
  • कच्चे माल की अनुपलब्धता भी एक महत्वपूर्ण कारण है।
  • प्राकृतिक आपदाएँ भी उद्योगों को बीमार बना सकती हैं।
  • 📌 कुप्रबंधन: प्रबंधन में गलत निर्णय या योजनाओं की असफलता।
  • 📌 तकनीकी पिछड़ापन: नवीनतम तकनीक का उपयोग न करना।

औद्योगिक बीमारियों के प्रभाव

व्याख्या

औद्योगिक बीमारियों के प्रभाव

औद्योगिक बीमारियाँ न केवल संबंधित उद्योग के लिए, बल्कि सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था, समाज और सरकार के लिए भी हानिकारक होती हैं। बीमार उद्योगों के कारण पूंजी का अपव्यय, संसाधनों की बर्बादी, बेरोजगारी में वृद्धि, उत्पादन में गिरावट, सरकार की आय में कमी, सामाज