Industrial Policy of India 117-134
Industrial Policy of India 117-134 — अध्ययन नोट्स
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9.1 औद्योगिक नीति: परिचय
व्याख्या9.1 औद्योगिक नीति: परिचय
औद्योगिक नीति भारत सरकार द्वारा निर्धारित वह दिशा-निर्देश एवं नियम हैं, जिनके माध्यम से देश के औद्योगिक क्षेत्र का विकास, नियंत्रण एवं संचालन किया जाता है। यह नीति विभिन्न समयों पर बदलती रही है, जिससे देश की आर्थिक स्थिति, सामाजिक आवश्यकताओं एवं वैश्विक परिस्थितियों के अनुसार औद्योगिक क्षेत्र को दिशा दी जा सके। औद्योगिक नीति का मुख्य उद्देश्य औद्योगिक उत्पादन को बढ़ाना, रोजगार के अवसर उत्पन्न करना, क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करना, तकनीकी विकास को प्रोत्साहित करना तथा सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्रों में संतुलन स्थापित करना है। औद्योगिक नीति के अंतर्गत उद्योगों की स्थापना, विस्तार, लाइसेंसिंग, विदेशी पूंजी निवेश, तकनीकी सहयोग, आयात-निर्यात आदि के लिए नियम बनाए जाते हैं। भारत में स्वतंत्रता के बाद औद्योगिक नीति का विशेष महत्व रहा है क्योंकि इससे देश के औद्योगिक ढांचे का निर्माण हुआ।
- औद्योगिक नीति देश के औद्योगिक विकास की दिशा निर्धारित करती है।
- यह नीति समय-समय पर बदलती रही है।
- औद्योगिक नीति के तहत उद्योगों की स्थापना, विस्तार एवं नियंत्रण के नियम बनाए जाते हैं।
- इसका उद्देश्य उत्पादन, रोजगार, तकनीकी विकास एवं क्षेत्रीय संतुलन है।
- औद्योगिक नीति में सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र दोनों को शामिल किया जाता है।
- 📌 औद्योगिक नीति: सरकार द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देश एवं नियम, जिनसे औद्योगिक क्षेत्र का संचालन होता है।
- 📌 सार्वजनिक क्षेत्र: वे उद्योग जो सरकार के स्वामित्व में होते हैं।
- 📌 निजी क्षेत्र: वे उद्योग जो निजी व्यक्तियों या कंपनियों के स्वामित्व में होते हैं।
9.2 भारत की औद्योगिक नीति का ऐतिहासिक विकास
व्याख्या9.2 भारत की औद्योगिक नीति का ऐतिहासिक विकास
भारत में औद्योगिक नीति का विकास स्वतंत्रता के बाद से कई चरणों में हुआ है। 1948 में पहली औद्योगिक नीति घोषित की गई, जिसमें सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्रों की भूमिका स्पष्ट की गई। 1956 की औद्योगिक नीति में सार्वजनिक क्षेत्र को प्राथमिकता दी गई और उद्योगों को तीन श्रेणियों में बांटा गया: (i) केवल सार्वजनिक क्षेत्र के लिए आरक्षित, (ii) सार्वजनिक एवं निजी दोनों के लिए, (iii) निजी क्षेत्र के लिए। 1977 की नीति में छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। 1980 की नीति में लाइसेंसिंग प्रणाली में कुछ छूट दी गई। 1991 की नई औद्योगिक नीति में लाइसेंसिंग प्रणाली को समाप्त कर दिया गया, विदेशी निवेश को प्रोत्साहित किया गया, और निजी क्षेत्र को अधिक स्वतंत्रता दी गई। इन नीतियों के माध्यम से भारत में औद्योगिक ढांचे का विस्तार हुआ, तकनीकी विकास हुआ, और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भागीदारी बढ़ी।
- 1948 में पहली औद्योगिक नीति घोषित की गई।
- 1956 की नीति में सार्वजनिक क्षेत्र को प्राथमिकता दी गई।
- 1977 की नीति में छोटे उद्योगों को बढ़ावा मिला।
- 1980 की नीति में लाइसेंसिंग प्रणाली में छूट दी गई।
- 1991 की नीति में लाइसेंसिंग प्रणाली समाप्त हुई और विदेशी निवेश को प्रोत्साहन मिला।
- 📌 लाइसेंसिंग प्रणाली: उद्योगों की स्थापना के लिए सरकार से अनुमति लेना आवश्यक।
- 📌 विदेशी निवेश: विदेशी कंपनियों द्वारा भारतीय उद्योगों में पूंजी लगाना।
9.3 औद्योगिक नीति के उद्देश्य
अवधारणा9.3 औद्योगिक नीति के उद्देश्य
औद्योगिक नीति के उद्देश्य देश के औद्योगिक विकास को दिशा देने के लिए निर्धारित किए जाते हैं। मुख्य उद्देश्य हैं: (i) औद्योगिक उत्पादन को बढ़ाना, (ii) रोजगार के अवसर उत्पन्न करना, (iii) क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करना, (iv) तकनीकी विकास को प्रोत्साहित
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Business Environment · Vardhman Mahaveer Open University
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