NCERTCh 9Free

दो पृष्ठभूमियाँ – भारतीय और अंग्रेजी

🎓 Class 8📖 Bharat Ki Khoj📖 5 notes🧠 15 Q&A⏱️ ~8 min
rukoChapter 5 of 5

दो पृष्ठभूमियाँ – भारतीय और अंग्रेजीStudy Notes

NCERT-aligned · 5 notes · 3 shown free

दो पृष्ठभूमियाँ – भारतीय और अंग्रेजी

Explanation

दो पृष्ठभूमियाँ – भारतीय और अंग्रेजी

भारत में अगस्त 1942 में जो घटनाएँ हुईं, वे आकस्मिक नहीं थीं, बल्कि लंबे समय से चल रही राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों की चरम परिणति थीं। इस समय की घटनाओं को केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से देखना अधूरा होगा क्योंकि ये घटनाएँ राजनीति से कहीं अधिक गहरी और व्यापक थीं। जनता में एक तीव्र भावना व्याप्त थी कि अब विदेशी शासन को और बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। इस समय जनता की ओर से असंगठित प्रदर्शन और हिंसात्मक संघर्ष लगातार हो रहे थे, जिनका दमन ब्रिटिश हथियारबंद सेनाओं द्वारा किया जा रहा था। जनता की भावनाएँ उनके नेताओं की गिरफ्तारी से पहले भी प्रबल थीं, लेकिन गिरफ्तारी और गोलीकांडों ने जनता के क्रोध को और भड़काया। इस आंदोलन में स्थानीय नेताओं का भी योगदान था, लेकिन यह आंदोलन मूलतः एक सहज जनांदोलन था। पूरे भारत में युवा पीढ़ी, विशेषकर विश्वविद्यालयों के विद्यार्थी, हिंसक और शांतिपूर्ण दोनों प्रकार की कार्यवाहियों में सक्रिय थे। इस पृष्ठभूमि में 1942 का आंदोलन ब्रिटिश राज के खिलाफ पहली बार इतनी बड़ी जनसंख्या द्वारा बलपूर्वक चुनौती थी, हालांकि यह चुनौती हथियारबंद नहीं थी। इस आंदोलन की प्रतिक्रिया तत्कालीन परिस्थितियों में नासमझी से भरी हो सकती है, लेकिन इसने भारत की स्वतंत्रता के लिए जनता के प्रेम और विदेशी शासन के प्रति घृणा को स्पष्ट किया।

  • अगस्त 1942 की घटनाएँ आकस्मिक नहीं, बल्कि लंबे समय की परिणति थीं।
  • जनता में विदेशी शासन को बर्दाश्त न करने की तीव्र भावना थी।
  • असंगठित प्रदर्शन और हिंसात्मक संघर्ष लगातार हो रहे थे।
  • स्थानीय नेताओं का योगदान था, पर यह एक सहज जनांदोलन था।
  • युवा पीढ़ी और विद्यार्थी आंदोलन में सक्रिय थे।
  • यह पहली बार था जब इतनी बड़ी जनसंख्या ने ब्रिटिश राज को बलपूर्वक चुनौती दी।
  • 📌 जनांदोलन: जनता द्वारा स्वाभाविक रूप से शुरू किया गया आंदोलन।
  • 📌 हथियारबंद सेना: ब्रिटिश शासन की सशस्त्र सुरक्षा बल।
  • 📌 असंगठित प्रदर्शन: बिना किसी संगठन के अचानक हुए प्रदर्शन।

व्यापक उथल-पुथल और उसका दमन

Explanation

व्यापक उथल-पुथल और उसका दमन

1942 के आंदोलन के दौरान भारत में व्यापक उथल-पुथल मची हुई थी, जिसमें जनता के असंगठित प्रदर्शन और हिंसात्मक संघर्ष शामिल थे। ये संघर्ष ब्रिटिश शासन की सशस्त्र सेनाओं के विरुद्ध थे, जो अत्यंत शक्तिशाली थीं। जनता की भावनाएँ उनके नेताओं की गिरफ्तारी से पहले से ही प्रबल थीं, लेकिन गिरफ्तारियों और गोलीकांडों ने जनता के क्रोध को और बढ़ा दिया। इस कारण लोग चुप नहीं रह सके और स्थानीय नेता सामने आए। हालांकि उनके निर्देश पर्याप्त नहीं थे। इस आंदोलन की खास बात यह थी कि यह एक सहज जनांदोलन था, जिसमें पूरे भारत की युवा पीढ़ी और विद्यार्थी सक्रिय थे। इस आंदोलन में पुलिस और सेना की गोलीबारी से सरकारी आंकड़ों के अनुसार लगभग 1,028 लोग मारे गए और 3,200 घायल हुए। जनता के अनुमान के अनुसार मृतकों की संख्या 25,000 तक बताई जाती है, लेकिन यह संभवतः अतिरंजित है। इस आंदोलन के दौरान कई क्षेत्रों में ब्रिटिश शासन अस्थायी रूप से समाप्त हो गया था, जैसे बिहार, बंगाल के मिदनापुर जिले और संयुक्त प्रांत के दक्षिण-पूर्वी जिलों में। बलिया जिले में भीड़ के खिलाफ कोई गंभीर हिंसा नहीं हुई थी। इस आंदोलन ने ब्रिटिश शासन की कमजोरियों को उजागर किया और स्वतंत्रता की मांग को और मजबूत किया।

  • 1942 में व्यापक असंगठित प्रदर्शन और हिंसात्मक संघर्ष हुए।
  • ब्रिटिश सशस्त्र सेनाओं के विरुद्ध जनता की तीव्र भावनाएँ थीं।
  • सरकारी आंकड़ों के अनुसार 1,028 लोग मारे गए, 3,200 घायल।
  • जनता के अनुमान में मृतकों की संख्या अधिक बताई जाती है।
  • कई क्षेत्रों में ब्रिटिश शासन अस्थायी रूप से समाप्त हो गया।
  • यह आंदोलन ब्रिटिश शासन की कमजोरियों को उजागर करता है।
  • 📌 गोलीकांड: पुलिस या सेना द्वारा गोली चलाना।
  • 📌 असंगठित प्रदर्शन: बिना किसी योजना के अचानक हुए प्रदर्शन।
  • 📌 दोबारा विजय: किसी क्षेत्र पर फिर से कब्जा करना।

भारत की बीमारी – अकाल

Explanation

भारत की बीमारी – अकाल

1942-43 के दौरान भारत एक गंभीर अकाल की स्थिति से जूझ रहा था, जो ब्रिटिश शासन के पिछले 170 वर्षों में सबसे विनाशकारी था। यह अकाल बंगाल, पूर्वी और दक्षिणी भारत में व्यापक रूप से फैला था। इस अकाल की तुलना 1766-1770 के भयंकर अकालों से की जा सकती है, जो ब

Practice Questionsदो पृष्ठभूमियाँ – भारतीय और अंग्रेजी

15 practice questions with detailed answers

Q1.भारत में अगस्त 1942 में जो आंदोलन हुआ, वह आकस्मिक था या पहले से चल रही घटनाओं की परिणति? इसे संक्षेप में समझाइए।

Answer:

अगस्त 1942 में भारत में जो आंदोलन हुआ वह आकस्मिक नहीं था, बल्कि पहले से चल रही घटनाओं की चरम परिणति थी। यह आंदोलन राजनीतिक से अधिक गहरी भावना का परिणाम था जिसमें जनता अब ब्रिटिश शासन को बर्दाश्त नहीं कर सकती थी।

Explanation:

अगस्त 1942 का आंदोलन आकस्मिक नहीं था बल्कि यह पहले से चल रही घटनाओं और जनता की तीव्र भावनाओं का परिणाम था। जनता के क्रोध और असंतोष ने इस आंदोलन को जन्म दिया। आंदोलन केवल राजनीतिक पहलू नहीं था, बल्कि यह जनता की गहरी भावनाओं का प्रदर्शन था।

Easy
Q2.1942 के आंदोलन में युवा पीढ़ी, विशेष रूप से विश्वविद्यालय के छात्र, किस प्रकार की कार्यवाहियों में शामिल थे?
A.A) केवल शांतिपूर्ण प्रदर्शन
B.B) केवल हिंसक संघर्ष
C.C) हिंसक और शांतिपूर्ण दोनों प्रकार की कार्यवाहियाँ
D.D) आंदोलन में भाग नहीं लिया

Answer:

हिंसक और शांतिपूर्ण दोनों प्रकार की कार्यवाहियाँ

Explanation:

1942 के आंदोलन में युवा पीढ़ी और विश्वविद्यालय के छात्र दोनों तरह की कार्यवाहियों में शामिल थे। वे हिंसक और शांतिपूर्ण दोनों प्रकार की गतिविधियाँ करते थे जिससे आंदोलन को मजबूती मिली।

Medium
Q3.1857 के गदर के बाद भारत में ब्रिटिश राज को चुनौती देने वाली भीड़ की क्या विशेषताएँ थीं?

Answer:

1857 के गदर के बाद भारत में ब्रिटिश राज को चुनौती देने वाली भीड़ बड़ी थी लेकिन निहत्थी थी। यह चुनौती बिना तैयारी और बिना सही समय के उठी थी। भीड़ ने अपना प्रेम और विदेशी शासन के विरुद्ध घृणा प्रकट की।

Explanation:

1857 के गदर के बाद बड़ी जनसंख्या ने ब्रिटिश राज को चुनौती दी, लेकिन वे निहत्थे थे और न ही उन्होंने संघर्ष की तैयारी की थी। यह प्रतिक्रिया तत्कालिक थी और इससे उनकी स्वतंत्रता के प्रति प्रेम और विदेशी शासन के प्रति घृणा प्रकट हुई।

Medium
Q4.सन् 1942 के दंगों में सरकारी आँकड़ों के अनुसार कितने लोग मारे गए और घायल हुए? जनता के अनुमान के अनुसार मृतकों की संख्या क्या थी?

Answer:

1,028 मरे और 3,200 घायल / लगभग 10,000 मृतक

Explanation:

सरकारी आँकड़ों के अनुसार सन् 1942 के दंगों में 1,028 लोग मारे गए और 3,200 घायल हुए। जनता के अनुमान के अनुसार मृतकों की संख्या लगभग 10,000 थी, जो कि सरकारी आँकड़ों से अधिक थी।

Easy
Q5.सन् 1942 के दंगों के दौरान बिहार, बंगाल के मिदनापुर, और संयुक्त-प्रांत के दक्षिण-पूर्वी जिलों में ब्रिटिश शासन की स्थिति कैसी थी?
A.A) ब्रिटिश शासन पूरी तरह सुरक्षित था
B.B) ब्रिटिश शासन खत्म हो गया था और दोबारा विजय पाने में कई दिन लगे
C.C) ब्रिटिश शासन ने तुरंत कड़ी कार्रवाई की
D.D) कोई बदलाव नहीं हुआ था

Answer:

ब्रिटिश शासन खत्म हो गया था और दोबारा विजय पाने में कई दिन लगे

Explanation:

इन क्षेत्रों में ब्रिटिश शासन अस्थायी रूप से खत्म हो गया था और उसे दोबारा जीतने में कई दिन या हफ्ते लग गए। यह दर्शाता है कि जनता का विरोध कितना प्रभावशाली था।

Medium
Q6.सन् 1943 के बंगाल और पूर्वी भारत में पड़ा अकाल किस प्रकार का था और इसका प्रभाव क्या था?

Answer:

सन् 1943 का अकाल बहुत बड़ा और विनाशकारी था, जो बंगाल और पूर्वी भारत में फैला। इसने लाखों लोगों को प्रभावित किया और भूखमरी, महामारी जैसे हैजा और मलेरिया को जन्म दिया।

Explanation:

यह अकाल ब्रिटिश शासन के दौरान सबसे भयंकर था। इसने लोगों की जान ली और सामाजिक-आर्थिक स्थिति को बहुत खराब किया। अकाल ने ब्रिटिश शासन की असफलता को उजागर किया और भारत की गरीबी को बढ़ाया।

Medium
Q7.सन् 1943 के बंगाल के अकाल के दौरान कोलकाता के ऊपरी तबके के लोगों का जीवन कैसा था?
A.A) वे भी अकाल से पीड़ित थे
B.B) उनका जीवन विलासिता और उल्लास से भरा था
C.C) वे भूखे और गरीब थे
D.D) वे आंदोलनकारी थे

Answer:

उनका जीवन विलासिता और उल्लास से भरा था

Explanation:

अकाल के बावजूद कोलकाता के ऊपरी तबके के दस हजार लोगों का सामाजिक जीवन प्रभावित नहीं हुआ था। वे नाच-गाने और दावतों में व्यस्त थे, जो भारत में सामाजिक असमानता को दर्शाता है।

Easy
Q8.भारत को दिन-प्रतिदिन गरीब बनाती जा रही बुनियादी नीति का परिणाम क्या था?

Answer:

भारत को गरीब बनाती जा रही नीति के कारण लाखों लोग भुखमरी का जीवन जी रहे थे और अकाल की गहरी वजह बनी। इस नीति ने सामाजिक और आर्थिक असमानता को बढ़ाया।

Explanation:

ब्रिटिश शासन की आर्थिक नीतियाँ भारत की गरीबी और अकाल की वजह बनीं। इन नीतियों ने संसाधनों का दुरुपयोग और असमान वितरण किया जिससे आम जनता पर विपरीत प्रभाव पड़ा।

Medium