Chapter 8
Chapter 8 — अध्ययन नोट्स
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8.1 प्रस्तावना
व्याख्या8.1 प्रस्तावना
इस अनुभाग में माँग एवं पूर्ति की लोच की अवधारणा का परिचय दिया गया है। आर्थिक विश्लेषण में लोच का महत्त्वपूर्ण स्थान है क्योंकि यह बताता है कि किसी वस्तु की माँग या पूर्ति में कितनी मात्रा में परिवर्तन होता है जब उसके निर्धारक तत्वों (जैसे- मूल्य, आय, अन्य वस्तुओं के मूल्य) में परिवर्तन होता है। लोच की अवधारणा से उपभोक्ता, उत्पादक तथा नीति-निर्माता सभी लाभान्वित होते हैं। यह अध्याय माँग की मूल्य लोच, आय लोच, क्रॉस लोच तथा पूर्ति की मूल्य लोच की विस्तार से चर्चा करता है।
- लोच का अर्थ है किसी आर्थिक चर में परिवर्तन के प्रति संवेदनशीलता।
- मूल्य, आय एवं अन्य वस्तुओं के मूल्य में परिवर्तन से माँग व पूर्ति प्रभावित होती है।
- लोच की अवधारणा नीति-निर्माण, कर निर्धारण, मूल्य निर्धारण आदि में सहायक है।
- इस अध्याय में माँग व पूर्ति की विभिन्न प्रकार की लोच का अध्ययन किया जाएगा।
- 📌 लोच (Elasticity): किसी आर्थिक चर में परिवर्तन के प्रति संवेदनशीलता।
- 📌 मूल्य लोच (Price Elasticity): मूल्य में परिवर्तन के कारण माँग या पूर्ति में होने वाला प्रतिशत परिवर्तन।
8.2 माँग की मूल्य लोच
अवधारणा8.2 माँग की मूल्य लोच
माँग की मूल्य लोच (Price Elasticity of Demand) वह माप है, जिससे यह ज्ञात होता है कि किसी वस्तु के मूल्य में परिवर्तन होने पर उसकी माँग में कितनी प्रतिशत वृद्धि या कमी होती है। इसे प्रतिशत परिवर्तन के रूप में मापा जाता है। यदि माँग में परिवर्तन मूल्य में परिवर्तन की तुलना में अधिक है, तो माँग लोचशील कहलाती है; यदि कम है, तो अल्प-लोचशील कहलाती है।
- मूल्य लोच = (माँग में प्रतिशत परिवर्तन) ÷ (मूल्य में प्रतिशत परिवर्तन)
- लोच का मान 1 से अधिक, 1 के बराबर या 1 से कम हो सकता है।
- लोच का मान ऋणात्मक होता है क्योंकि मूल्य व माँग का संबंध विपरीत होता है।
- लोच की गणना बिन्दु विधि व चाप विधि से की जाती है।
- 📌 मूल्य लोच (Price Elasticity): मूल्य में परिवर्तन के कारण माँग में प्रतिशत परिवर्तन।
- 📌 लोचशील माँग (Elastic Demand): जब E_d > 1।
- 📌 अल्प-लोचशील माँग (Inelastic Demand): जब E_d < 1।
8.3 माँग की मूल्य लोच की गणना
सूत्र8.3 माँग की मूल्य लोच की गणना
माँग की मूल्य लोच की गणना मुख्यतः दो विधियों से की जाती है: (1) बिन्दु विधि (Point Method) और (2) चाप विधि (Arc Method)। बिन्दु विधि का प्रयोग तब किया जाता है जब परिवर्तन बहुत सूक्ष्म हो, जबकि चाप विधि का प्रयोग दो बिन्दुओं के बीच औसत परिवर्तन के लिए
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Micro Economic Theory · Vardhman Mahaveer Open University
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