Chapter 8
Chapter 8 — अध्ययन नोट्स
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अंतर्राष्ट्रीय व्यापार
अवधारणाअंतर्राष्ट्रीय व्यापार
व्यापार एक तृतीयक क्रियाकलाप है जिसमें वस्तुओं और सेवाओं का स्वैच्छिक आदान-प्रदान होता है। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार वह व्यापार है जो विभिन्न राष्ट्रों के बीच राष्ट्रीय सीमाओं के पार होता है। इसमें वस्तुओं और सेवाओं का आदान-प्रदान होता है ताकि देश उन वस्तुओं को प्राप्त कर सकें जिन्हें वे स्वयं उत्पादन नहीं कर सकते या जिन्हें वे अन्य देशों से कम कीमत पर खरीद सकते हैं। आदिम काल में व्यापार विनिमय व्यवस्था के रूप में होता था, जिसमें वस्तु के बदले वस्तु का आदान-प्रदान होता था। मुद्रा के आविष्कार ने इस प्रक्रिया को सरल बनाया। आज भी भारत के गुवाहाटी के निकट जागीरेड में जॉन बील मेला होता है जहाँ विनिमय व्यवस्था जीवित है। व्यापार के लिए दो पक्ष आवश्यक होते हैं: एक विक्रेता और एक क्रेता। व्यापार दोनों पक्षों के लिए लाभकारी होता है।
- व्यापार वस्तुओं और सेवाओं के स्वैच्छिक आदान-प्रदान को कहते हैं।
- अंतर्राष्ट्रीय व्यापार राष्ट्रीय सीमाओं के पार होता है।
- आदिम काल में विनिमय व्यवस्था थी, जिसमें वस्तु के बदले वस्तु दी जाती थी।
- मुद्रा के आविष्कार ने व्यापार को सरल बनाया।
- व्यापार के लिए दो पक्ष आवश्यक होते हैं: विक्रेता और क्रेता।
- जॉन बील मेला भारत का एकमात्र मेला है जहाँ विनिमय व्यवस्था आज भी जीवित है।
- 📌 व्यापार: वस्तुओं और सेवाओं का स्वैच्छिक आदान-प्रदान।
- 📌 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार: विभिन्न देशों के बीच व्यापार।
- 📌 विनिमय व्यवस्था: वस्तु के बदले वस्तु का आदान-प्रदान।
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का इतिहास
व्याख्याअंतर्राष्ट्रीय व्यापार का इतिहास
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का इतिहास प्राचीन काल से शुरू होता है। प्रारंभ में लंबी दूरी तक वस्तुओं का परिवहन जोखिमपूर्ण था, इसलिए व्यापार स्थानीय बाजारों तक सीमित था। रेशम मार्ग, जो चीन को रोम से जोड़ता था, लंबी दूरी के व्यापार का एक प्रमुख उदाहरण है। इस मार्ग के माध्यम से चीन का रेशम, रोम की ऊन और बहुमूल्य धातुएँ व्यापार के लिए ले जाई जाती थीं। रोमन साम्राज्य के विखंडन के बाद 12वीं और 13वीं शताब्दी में यूरोप में वाणिज्य बढ़ा। समुद्री युद्धपोतों के विकास से यूरोप और एशिया के बीच व्यापार बढ़ा और अमेरिका की खोज हुई। 15वीं शताब्दी से यूरोपीय उपनिवेशवाद शुरू हुआ और दास व्यापार का उदय हुआ, जिसमें अफ्रीकी मूल के लोगों को अमेरिका में दास के रूप में बेचा गया। औद्योगिक क्रांति के बाद कच्चे माल की मांग बढ़ी और औद्योगिक राष्ट्रों ने कच्चे माल का आयात और तैयार माल का निर्यात किया। प्रथम और द्वितीय विश्व युद्धों के दौरान व्यापार पर प्रतिबंध लगे। विश्व युद्ध के बाद GATT और बाद में WTO ने व्यापार को बढ़ावा दिया।
- प्राचीन काल में व्यापार स्थानीय बाजारों तक सीमित था।
- रेशम मार्ग चीन और रोम को जोड़ता था।
- रोमन साम्राज्य के विखंडन के बाद यूरोप में वाणिज्य बढ़ा।
- 15वीं शताब्दी से यूरोपीय उपनिवेशवाद और दास व्यापार शुरू हुआ।
- औद्योगिक क्रांति के बाद कच्चे माल की मांग बढ़ी।
- विश्व युद्धों के बाद GATT और WTO ने व्यापार को बढ़ावा दिया।
- 📌 रेशम मार्ग: चीन और रोम के बीच व्यापार मार्ग।
- 📌 दास व्यापार: अफ्रीकी मूल के लोगों का दास के रूप में व्यापार।
- 📌 औद्योगिक क्रांति: उत्पादन में तकनीकी बदलाव।
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार अस्तित्व में क्यों है?
व्याख्याअंतर्राष्ट्रीय व्यापार अस्तित्व में क्यों है?
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार उत्पादन में विशिष्टीकरण का परिणाम है। विभिन्न राष्ट्र वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन में श्रम विभाजन और विशेषीकरण करते हैं, जिससे वे तुलनात्मक लाभ प्राप्त करते हैं। यह व्यापार तुलनात्मक लाभ, परिपूरकता और हस्तांतरणीयता के सिद्धांत
अभ्यास प्रश्न — Chapter 8
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.असम राज्य का जॉन बील मेला संभवत भारत का एकमात्र मेला है जो जाना जाता है
उत्तर:
वस्तु विनिमय व्यापार के लिए
Q2.प्राचीन समय में रेशम व्यापार मार्ग जोड़ता था
उत्तर:
रोम कोचीन से
Q3.17वी वा 18वी शताब्दी में किन लोगों के द्वारा दास व्यापार किया गया
उत्तर:
इन सभी के द्वारा
Q4.विश्व व्यापार में किस वस्तु समूह का मूल्य सबसे अधिक है
उत्तर:
मशीनरी तथा परिवहन उपकरण
Q5.वर्तमान में विश्व का सर्वाधिक बड़ा व्यापारिक साझेदार देश है
उत्तर:
संयुक्त राज्य अमेरिका
Q6.निम्नलिखित में से कौन से पत्तन को अरब सागर की रानी कहा जाता है?
उत्तर:
कोच्चि पत्तन
Q7.निम्नलिखित में से कौन से पत्तन की स्थापना मुंबई पत्तन के दबाव को कम करने के लिए की गई थी?
उत्तर:
जवाहरलाल नेहरू पत्तन
Q8.भारत के आयात में सबसे बड़ा हिस्सा किसका है?
उत्तर:
पेट्रोलियम एवं संबंधित उत्पाद
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