Chapter 7
Chapter 7 — अध्ययन नोट्स
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ह्रास (Depreciation)
व्याख्याह्रास (Depreciation)
ह्रास का अर्थ है किसी स्थायी संपत्ति के मूल्य में समय के साथ होने वाली कमी। स्थायी संपत्तियाँ जैसे मशीनरी, भवन, फर्नीचर आदि का उपयोग करते समय उनका मूल्य घटता रहता है। यह मूल्य में कमी केवल उपयोग से ही नहीं, बल्कि तकनीकी प्रगति, प्राकृतिक प्रभाव और आर्थिक कारणों से भी होती है। ह्रास एक लेखांकन प्रक्रिया है जो यह सुनिश्चित करती है कि संपत्ति के मूल्य में कमी को उसके उपयोगी जीवनकाल में उचित रूप से खर्च के रूप में दिखाया जाए। इससे व्यवसाय की वास्तविक वित्तीय स्थिति का पता चलता है। ह्रास को खर्च के रूप में लाभ-हानि खाते में दिखाया जाता है, जिससे उस वर्ष के लाभ में कमी आती है और संपत्ति का मूल्य भी बैलेंस शीट में सही रूप में प्रस्तुत होता है।
- ह्रास स्थायी संपत्ति के मूल्य में समय के साथ कमी है।
- यह उपयोग, तकनीकी प्रगति, प्राकृतिक प्रभाव और आर्थिक कारणों से होता है।
- ह्रास को लेखांकन में खर्च के रूप में दिखाया जाता है।
- ह्रास से संपत्ति का मूल्य सही रूप में बैलेंस शीट में आता है।
- ह्रास व्यवसाय की वित्तीय स्थिति को वास्तविक बनाता है।
- 📌 ह्रास: स्थायी संपत्ति के मूल्य में समय के साथ कमी।
- 📌 स्थायी संपत्ति: ऐसी संपत्ति जो एक वर्ष से अधिक समय तक उपयोग की जाती है।
ह्रास के कारण (Causes of Depreciation)
व्याख्याह्रास के कारण (Causes of Depreciation)
ह्रास के कारण वे विभिन्न कारक हैं जिनके कारण किसी स्थायी संपत्ति का मूल्य घटता है। प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं: 1) उपयोग से ह्रास: संपत्ति का लगातार उपयोग होने पर उसकी कार्यक्षमता और मूल्य में कमी आती है। 2) तकनीकी प्रगति: नई तकनीक आने से पुरानी मशीनें या उपकरण अप्रचलित हो जाते हैं, जिससे उनकी कीमत कम हो जाती है। 3) प्राकृतिक प्रभाव: जैसे मौसम, जलवायु, जंग लगना आदि से संपत्ति का मूल्य घटता है। 4) आर्थिक कारण: बाजार की मांग में कमी, प्रतिस्पर्धा, या अन्य आर्थिक परिस्थितियाँ भी ह्रास का कारण बनती हैं। इन कारणों से ह्रास को समझना और सही तरीके से उसका लेखांकन करना आवश्यक होता है।
- उपयोग से संपत्ति की कार्यक्षमता कम होती है।
- तकनीकी प्रगति से पुरानी संपत्ति अप्रचलित हो जाती है।
- प्राकृतिक प्रभाव जैसे जंग लगना, मौसम से ह्रास होता है।
- आर्थिक कारणों से संपत्ति का मूल्य घट सकता है।
- ह्रास के कारणों को समझकर सही लेखांकन किया जाता है।
- 📌 उपयोग से ह्रास: संपत्ति के लगातार उपयोग से मूल्य में कमी।
- 📌 तकनीकी प्रगति: नई तकनीक के कारण पुरानी संपत्ति अप्रचलित होना।
- 📌 प्राकृतिक प्रभाव: पर्यावरणीय कारणों से संपत्ति का ह्रास।
ह्रास की गणना के तरीके (Methods of Depreciation Calculation)
व्याख्याह्रास की गणना के तरीके (Methods of Depreciation Calculation)
ह्रास की गणना के लिए विभिन्न विधियाँ अपनाई जाती हैं, जो संपत्ति के मूल्य में कमी को सही ढंग से दर्शाती हैं। प्रमुख विधियाँ निम्नलिखित हैं: 1) सीधे घटाव विधि (Straight Line Method): इसमें संपत्ति की लागत से अवशिष्ट मूल्य घटाकर उपयोगी आयु से भाग दिया ज
अभ्यास प्रश्न — Chapter 7
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.1. ह्रास क्या है?
उत्तर:
ह्रास वह प्रक्रिया है जिसमें किसी स्थायी परिसम्पत्ति के मूल्य में उसके उपयोग, समय के प्रभाव, तकनीकी अप्रचलन या अन्य कारणों से धीरे-धीरे कमी आती है। यह कमी परिसम्पत्ति के उपयोगी जीवन के दौरान होती है।
व्याख्या:
ह्रास का अर्थ है परिसम्पत्ति के मूल्य में नियमित रूप से होने वाली वह कमी जो उसके उपयोग, समय के प्रभाव, तकनीकी परिवर्तन, प्राकृतिक कारणों या अप्रचलन के कारण होती है। उदाहरण के लिए, मशीनरी, फर्नीचर आदि के मूल्य में समय के साथ कमी आना।
Q2.2. ह्रास की आवश्यकता को संक्षेप में बताइए?
उत्तर:
ह्रास की आवश्यकता इसलिए होती है ताकि परिसम्पत्तियों के मूल्य में आई कमी को सही ढंग से लाभ-हानि खाते में दिखाया जा सके, कर निर्धारण के लिए सही लाभ ज्ञात किया जा सके, परिसम्पत्तियों के प्रतिस्थापन के लिए धन संचय किया जा सके, और वित्तीय स्थिति का सही चित्रण किया जा सके।
व्याख्या:
ह्रास की गणना करने से लाभ-हानि खाता और बैलेंस शीट में परिसम्पत्तियों का सही मूल्यांकन होता है। इससे व्यापार की वास्तविक आय और वित्तीय स्थिति का पता चलता है। साथ ही, भविष्य में परिसम्पत्तियों के प्रतिस्थापन के लिए भी यह आवश्यक है।
Q3.3. ह्रास के क्या कारण हैं?
उत्तर:
ह्रास के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं: 1. परिसम्पत्ति का उपयोग (Wear and Tear) 2. समय का प्रभाव (Passage of Time) 3. तकनीकी अप्रचलन (Obsolescence) 4. प्राकृतिक कारण (Natural Factors) 5. आकस्मिक क्षति (Accidental Loss)
व्याख्या:
1. उपयोग के कारण परिसम्पत्तियों के मूल्य में कमी आती है। 2. समय के साथ-साथ भी मूल्य में कमी आती है, भले ही परिसम्पत्ति का उपयोग न हो। 3. नई तकनीक के आने से पुरानी परिसम्पत्तियाँ अप्रचलित हो जाती हैं। 4. प्राकृतिक कारण जैसे जंग लगना, सड़ना आदि। 5. आग, दुर्घटना आदि के कारण भी ह्रास हो सकता है।
Q4.4. ह्रास की राशि को प्रभावित करने वाला तत्वों को समझाइए?
उत्तर:
ह्रास की राशि को प्रभावित करने वाले तत्व: 1. परिसम्पत्ति की लागत (Cost of Asset) 2. अनुमानित उपयोगी जीवन (Estimated Useful Life) 3. अनुमानित अवशिष्ट मूल्य (Estimated Residual Value) 4. ह्रास की विधि (Method of Depreciation) 5. परिसम्पत्ति का उपयोग (Usage of Asset)
व्याख्या:
1. परिसम्पत्ति की लागत जितनी अधिक होगी, ह्रास की राशि भी अधिक होगी। 2. उपयोगी जीवन जितना कम होगा, वार्षिक ह्रास उतना अधिक होगा। 3. अवशिष्ट मूल्य जितना कम होगा, ह्रास की राशि उतनी अधिक होगी। 4. ह्रास की विधि (सीधी रेखा या क्रमागत) से भी राशि प्रभावित होती है। 5. परिसम्पत्ति का उपयोग अधिक होने पर ह्रास भी अधिक होगा।
Q5.5. हास की गणना करने के लिए सीधी रेखा विधि एवं क्रमागत विधि में अन्तर्भेद कीजिए
उत्तर:
सीधी रेखा विधि (Straight Line Method): - इसमें हर वर्ष समान राशि का ह्रास लगाया जाता है। - ह्रास = (मूल्य - अवशिष्ट मूल्य) / उपयोगी जीवन क्रमागत विधि (Written Down Value Method): - इसमें हर वर्ष शेष मूल्य पर निश्चित प्रतिशत से ह्रास लगाया जाता है। - प्रत्येक वर्ष ह्रास की राशि घटती जाती है। अन्तर्भेद: 1. सीधी रेखा विधि में ह्रास राशि स्थिर रहती है, क्रमागत विधि में घटती है। 2. सीधी रेखा विधि में परिसम्पत्ति का मूल्य शून्य या अवशिष्ट मूल्य तक पहुँचता है, क्रमागत विधि में कभी शून्य नहीं होता।
व्याख्या:
सीधी रेखा विधि में ह्रास की गणना मूल लागत पर की जाती है, जबकि क्रमागत विधि में शेष मूल्य पर। सीधी रेखा विधि में लाभ-हानि पर प्रभाव स्थिर रहता है, क्रमागत विधि में आरंभ में अधिक और बाद में कम।
Q6.6. दीर्घ अवधि की परिसम्पत्तियों के मरम्मत एवं रखरखाव व्ययों में बाद के वर्षों में पहले के वर्षों की अपेक्षा वृद्धि की सम्भावना रहती है। यदि प्रबन्धक मूल्य ह्रास एवं मरम्मत के कारण लाभ-हानि खाते पर भार बढ़ाना नहीं चाहें तो मूल्य ह्रास लगाने की कौनसी विधि उपर्युक्त रहेगी?
उत्तर:
ऐसी स्थिति में क्रमागत विधि (Written Down Value Method) उपयुक्त रहेगी, क्योंकि इसमें आरंभिक वर्षों में ह्रास अधिक होता है और बाद के वर्षों में कम, जिससे मरम्मत व्यय के बढ़ने पर कुल भार लगभग समान रहता है।
व्याख्या:
क्रमागत विधि में आरंभ में ह्रास अधिक और बाद में कम होता है। मरम्मत व्यय आरंभ में कम और बाद में अधिक होता है, जिससे दोनों का कुल भार हर वर्ष लगभग बराबर रहता है।
Q7.7. ह्रास का लाभ-हानि खाते एवं तुलन-पत्र पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
लाभ-हानि खाते में ह्रास को व्यय के रूप में दिखाया जाता है, जिससे शुद्ध लाभ कम हो जाता है। तुलन-पत्र में परिसम्पत्ति के मूल्य में ह्रास की राशि घटा दी जाती है, जिससे परिसम्पत्ति का शेष मूल्य दिखाया जाता है।
व्याख्या:
ह्रास लाभ-हानि खाते में व्यय के रूप में आता है, जिससे लाभ घटता है। तुलन-पत्र में परिसम्पत्ति की लागत में से संचित ह्रास घटाकर शेष मूल्य दिखाया जाता है।
Q8.8. प्रावधान एवं पूँजी संचय में अन्तर्भेद कीजिए।
उत्तर:
प्रावधान: यह भविष्य के संभावित व्ययों या हानियों के लिए लाभ में से अलग रखी गई राशि है। पूँजी संचय: यह लाभ का वह भाग है जिसे भविष्य के विस्तार या विशेष प्रयोजन के लिए अलग रखा जाता है। अन्तर्भेद: 1. प्रावधान व्यय या हानि के लिए, पूँजी संचय लाभ के वितरण को रोकने के लिए। 2. प्रावधान लाभ-हानि खाते में व्यय के रूप में, पूँजी संचय लाभ के विनियोग के रूप में।
व्याख्या:
प्रावधान अनिवार्य होता है, जबकि पूँजी संचय ऐच्छिक। प्रावधान से लाभ कम होता है, पूँजी संचय से नहीं।
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Accountancy · Class 11