NCERTCh 6निःशुल्क

Chapter 6

🎓 Class 11📖 Bhugol Main Prayogatmak Karya📖 12 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~18 मिनट
Chapter 5अध्याय 6 / 6

Chapter 6अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 12 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

सुदूर संवेदन का परिचय

अवधारणा

सुदूर संवेदन का परिचय

सुदूर संवेदन वह तकनीक है जिसके माध्यम से पृथ्वी की सतह और उसके तत्वों से संबंधित सूचनाएँ बिना सीधे संपर्क किए प्राप्त की जाती हैं। यह प्रक्रिया विद्युत-चुंबकीय विकिरण के परावर्तन, उत्सर्जन, अवशोषण और पारगम्यता के सिद्धांतों पर आधारित है। सुदूर संवेदन की शुरुआत 1960 के दशक में हुई, और तब से यह तकनीक भूगोल, पर्यावरण अध्ययन, कृषि, वनस्पति विज्ञान आदि क्षेत्रों में अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। इसमें संवेदक युक्तियाँ पृथ्वी की सतह से परावर्तित या उत्सर्जित ऊर्जा को ग्रहण कर उसे डिजिटल या फ़ोटोग्राफ़िक रूप में अभिलेखित करती हैं। यह तकनीक मानवीय नेत्र की तुलना में अधिक विस्तृत और सटीक जानकारी प्रदान करती है क्योंकि यह ऊर्जा के व्यापक क्षेत्र और विभिन्न तरंग दैर्ध्य का उपयोग करती है। सुदूर संवेदन की प्रक्रिया में ऊर्जा स्रोत, ऊर्जा का संचरण, धरातल के साथ ऊर्जा की अन्योन्यक्रिया, वायुमंडल से ऊर्जा का प्रवर्धन, संवेदक द्वारा ऊर्जा का अभिसूचन, प्राप्त ऊर्जा का अभिसारण और अंत में सूचनाओं का विश्लेषण शामिल होता है।

  • सुदूर संवेदन के माध्यम से पृथ्वी की सतह की जानकारी बिना सीधे संपर्क के प्राप्त होती है।
  • यह तकनीक विद्युत-चुंबकीय विकिरण के सिद्धांतों पर आधारित है।
  • सूर्य ऊर्जा सुदूर संवेदन का मुख्य ऊर्जा स्रोत है।
  • संवेदक युक्तियाँ परावर्तित या उत्सर्जित ऊर्जा को ग्रहण कर सूचना प्रदान करती हैं।
  • सुदूर संवेदन की प्रक्रिया में ऊर्जा स्रोत से लेकर सूचनाओं के मानचित्रण तक कई चरण होते हैं।
  • 📌 सुदूर संवेदन: बिना सीधे संपर्क के पृथ्वी की सतह से जानकारी प्राप्त करने की तकनीक।
  • 📌 संवेदक: उपकरण जो विद्युत-चुंबकीय ऊर्जा को ग्रहण कर संकेतों में परिवर्तित करता है।
  • 📌 विद्युत-चुंबकीय विकिरण: ऊर्जा का वह रूप जो प्रकाश की गति से फैलता है।

सुदूर संवेदन के आँकड़े अर्जन करने के चरण

व्याख्या

सुदूर संवेदन के आँकड़े अर्जन करने के चरण

सुदूर संवेदन के आँकड़े प्राप्त करने की प्रक्रिया कई चरणों में सम्पन्न होती है। सबसे पहले ऊर्जा का स्रोत होता है, जो सामान्यतः सूर्य होता है, किन्तु कृत्रिम स्रोत भी उपयोग किए जा सकते हैं जैसे राडार। दूसरी अवस्था में ऊर्जा स्रोत से पृथ्वी के धरातल तक ऊर्जा का संचरण होता है, जिसे विद्युत-चुंबकीय विकिरण कहा जाता है। यह ऊर्जा विभिन्न तरंगदैर्घ्यों में होती है और इन्हें विद्युत-चुंबकीय स्पेक्ट्रम में वर्गीकृत किया जाता है। तीसरे चरण में पृथ्वी की सतह के साथ ऊर्जा की अन्योन्यक्रिया होती है, जिसमें ऊर्जा का अवशोषण, परावर्तन, उत्सर्जन आदि शामिल हैं। चौथे चरण में वायुमंडल से परावर्तित या उत्सर्जित ऊर्जा का प्रवर्धन होता है, जहाँ वायुमंडलीय गैसें, जलकण और धूलकण ऊर्जा को अवशोषित या प्रकीर्णित करते हैं। पांचवे चरण में संवेदक द्वारा इस ऊर्जा का अभिसूचन किया जाता है, जो उपग्रहों में लगे होते हैं। छठे चरण में प्राप्त ऊर्जा को फ़ोटोग्राफ़ या अंकीय आँकड़ों के रूप में अभिसारित किया जाता है। सातवें चरण में इन आँकड़ों का विषयानुरूप विश्लेषण किया जाता है और अंत में आठवें चरण में सूचनाओं को मानचित्र एवं सारणी के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। यह पूरी प्रक्रिया सुदूर संवेदन की मूलभूत संरचना है।

  • ऊर्जा का स्रोत मुख्यतः सूर्य होता है, किन्तु कृत्रिम स्रोत भी हो सकते हैं।
  • ऊर्जा का संचरण विद्युत-चुंबकीय विकिरण के रूप में होता है।
  • धरातल के साथ ऊर्जा की अन्योन्यक्रिया में अवशोषण, परावर्तन और उत्सर्जन शामिल हैं।
  • वायुमंडल ऊर्जा के प्रवर्धन में बाधा उत्पन्न कर सकता है।
  • संवेदक उपग्रहों में लगे होते हैं जो ऊर्जा को संकेतों में परिवर्तित करते हैं।
  • प्राप्त आँकड़ों का विश्लेषण कर सूचनाएँ मानचित्रों में बदली जाती हैं।
  • 📌 ऊर्जा संचरण: ऊर्जा का स्रोत से धरातल तक पहुंचना।
  • 📌 परावर्तन: ऊर्जा का वस्तु से वापस लौटना।
  • 📌 उत्सर्जन: वस्तु द्वारा ऊर्जा का उत्सर्जित होना।

विद्युत-चुंबकीय स्पेक्ट्रम

अवधारणा

विद्युत-चुंबकीय स्पेक्ट्रम

विद्युत-चुंबकीय स्पेक्ट्रम ऊर्जा की विभिन्न तरंगदैर्घ्यों का समूह है, जिसमें गामा किरणें, ऐक्स किरणें, पराबैंगनी, दृश्य, अवरक्त, माइक्रोवेव और रेडियो तरंगें शामिल हैं। ये सभी तरंगें प्रकाश की गति से फैलती हैं, परन्तु उनकी तरंगदैर्घ्य और आवृत्ति भिन्न

अभ्यास प्रश्नChapter 6

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.प्रथम वायव फोटो फ्रांस के द्वारा कब लिया गया था ?
A.१८५८
B.१९२०
C.१८७६
D.१९०९

उत्तर:

१८५८

MediumNCERT
Q2.भारत में सबसे पहला वायव फोटो बड़े पैमाने पर _________________ लिया गया था।
A.१८७६
B.१९२०
C.१९११
D.१८७९

उत्तर:

१९२०

MediumNCERT
Q3.अग्र अतिव्यापन उड़ान की दिशा में खींचे गए एक ही क्षेत्र के दो क्रमिक फोटोग्राफ़ पुनरावृतिक भाग होते हैं। इसे प्रायः ______________________________ में व्यक्त किया जाता है।
A.डिग्री
B.प्रतिशत
C.मीटर
D.सेंटीमीटर

उत्तर:

प्रतिशत

MediumNCERT
Q4.- चार विकल्पों में से सही विकल्प को चुने - लक्ष्यों के बिंबों को पहचानने एवं उसके सापेक्षित महत्व के सम्बन्ध को जानने का कार्य क्या कहलाताहै।
A.प्रतिबिंब निर्वचन
B.वायु फिल्म
C.वायु फिल्म
D.वायु कैमरा

उत्तर:

प्रतिबिंब निर्वचन

MediumNCERT
Q5.- वायव फोटो के माध्यम से विश्वसनीय माप लेने की तकनीक किस नाम से प्रचलित है।
A.फोटोग्राममिति
B.वायु कैमरा
C.छायांकन
D.उपरोक्त में से कोई नहीं

उत्तर:

फोटोग्राममिति

MediumNCERT
Q6.उपयुक्त शब्दावली बतायें - परिशुद्ध हवाई कैमरे द्वारा किसी वायुवाहित प्लेटफार्म से लिए गए चित्र।
A.वायव फोटो
B.कृत्रिम फोटो
C.स्थल फोटो
D.चलचित्र फोटो

उत्तर:

वायव फोटो

MediumNCERT
Q7.वायम फोटो ______________________________ एवं अवास्य क्षेत्रों के अध्ययन के लिए बहुत उपयोगी होता है।
A.समतल
B.अगम्य
C.तिर्य्रक
D.कृषि

उत्तर:

अगम्य

MediumNCERT
Q8.कैमरा लैंस एवं नेगेटिव सतह के बीच के लंबवत दूरी को क्या कहते है।
A.आवासीय दूरी
B.मानचित्र दूरी
C.फोकस दूरी
D.समतल दूरी

उत्तर:

फोकस दूरी

MediumNCERT