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Chapter 5

🎓 Class 9📖 Shemushi Prathmo Bhag📖 9 नोट्स🧠 12 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~14 मिनट
Chapter 4अध्याय 5 / 16Chapter 6

Chapter 5अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

एषा सा कृतकबुद्धिः: मानवबुद्धेः सहकरी

व्याख्या

एषा सा कृतकबुद्धिः: मानवबुद्धेः सहकरी

इस पाठ में आधुनिक विज्ञान युग में कृत्रिम बुद्धि (Artificial Intelligence - AI) के महत्व और प्रभाव का परिचय दिया गया है। आज के युग में मानव जीवन तीव्र गति से परिवर्तित हो रहा है और कृत्रिम बुद्धि एक प्रभावशाली उपकरण के रूप में सामने आई है। यह यंत्र मानव की भांति सोचने, निर्णय लेने और कार्य करने में सक्षम होते हैं। पाठ में एक वार्तालाप के माध्यम से कृतकबुद्धि के स्वरूप, उपयोग, लाभ और सीमाओं पर चर्चा की गई है। अध्यापक और छात्र मिलकर कृतकबुद्धि के विभिन्न पहलुओं को समझते हैं, जिससे विद्यार्थियों की सोचने की क्षमता और विवेक जागृत होता है। कृतकबुद्धि यंत्र मानव बुद्धि के समान कार्य करते हैं, जैसे कि निर्णय लेना, समस्या का समाधान करना, और संवाद करना। इस पाठ में बताया गया है कि कैसे ये यंत्र मानव जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सहायक हो सकते हैं। यह न केवल तकनीकी ज्ञान प्रदान करता है, बल्कि विद्यार्थियों को यह सोचने के लिए प्रेरित करता है कि कृत्रिम बुद्धि का मानव हित में कैसे उपयोग किया जाए।

  • कृतकबुद्धि यंत्र मानव की तरह सोचने और निर्णय लेने में सक्षम होते हैं।
  • यह आधुनिक विज्ञान युग में मानव जीवन को प्रभावित कर रही है।
  • पाठ में कृतकबुद्धि के स्वरूप और उपयोग पर वार्तालाप प्रस्तुत है।
  • विद्यार्थियों की सोचने और विवेकशीलता बढ़ाने का प्रयास किया गया है।
  • कृतकबुद्धि मानव हित में उपयोग की जानी चाहिए।
  • 📌 कृतकबुद्धि: - कृत्रिम बुद्धि, जो यंत्रों में मानव बुद्धि के समान कार्य करने की क्षमता।
  • 📌 वार्तालाप: संवाद या बातचीत।

कृतकबुद्धि: का इतिहास एवं विकास

व्याख्या

कृतकबुद्धि: का इतिहास एवं विकास

इस खंड में कृत्रिम बुद्धि के इतिहास और विकास की चर्चा की गई है। मानव ने सदैव यंत्रों को सोचने और निर्णय लेने योग्य बनाने का प्रयास किया है। प्रारंभ में कंप्यूटरों का विकास हुआ जो केवल गणनात्मक कार्य करते थे, परन्तु धीरे-धीरे तकनीकी उन्नति के साथ ये यंत्र बुद्धिमान बनते गए। मशीन लर्निंग (यन्त्राधिगम) और डीप लर्निंग (गहनाधिगम) जैसी तकनीकों ने यंत्रों को स्वचालित रूप से सीखने और सुधारने की क्षमता प्रदान की। इस विकास ने कृत्रिम बुद्धि को आज के युग में प्रभावशाली और व्यापक उपयोगी बना दिया है। इस खंड में बताया गया है कि कैसे तकनीकी विशेषज्ञ (प्रौद्योगिकीविशारदा:) यंत्रों को प्रशिक्षित करते हैं ताकि वे मनुष्य के समान कार्य कर सकें। यंत्रों को डेटा (दत्तांश:) के माध्यम से प्रशिक्षित किया जाता है, जिसे 'डेटासेट्' कहा जाता है। यदि यह डेटा पक्षपातयुक्त (पूर्वाग्रह:) होता है तो यंत्र भी पक्षपातयुक्त निर्णय ले सकता है, जिसे सुधारने के प्रयास निरंतर जारी हैं।

  • कृतकबुद्धि का विकास प्रारंभिक कंप्यूटरों से हुआ।
  • मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग तकनीकें यंत्रों को सीखने योग्य बनाती हैं।
  • डेटासेट् यंत्रों के प्रशिक्षण के लिए आवश्यक डेटा का समूह है।
  • पूर्वाग्रहयुक्त डेटा से यंत्रों में भी पक्षपात उत्पन्न हो सकता है।
  • तकनीकी विशेषज्ञ यंत्रों को प्रशिक्षित करते हैं।
  • 📌 यन्त्राधिगम: मशीन लर्निंग, यंत्रों का डेटा से सीखना।
  • 📌 गहनाधिगम: डीप लर्निंग, यंत्रों का जटिल स्तर पर सीखना।
  • 📌 पूर्वाग्रह: पक्षपातयुक्त निर्णय या डेटा।

कृतकबुद्धि: के प्रकार

व्याख्या

कृतकबुद्धि: के प्रकार

इस भाग में कृत्रिम बुद्धि के मुख्य तीन प्रकारों का वर्णन किया गया है - सड्डकुचितकृतकबुद्धि (Narrow AI), सामान्यकृतकबुद्धि (General AI), और अत्युत्कृष्टकृतकबुद्धि (Super AI)। सड्डकुचितकृतकबुद्धि वे यंत्र हैं जो केवल विशिष्ट कार्यों को कुशलतापूर्वक क

अभ्यास प्रश्नChapter 5

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.१. पञ्चमी विभक्ति: (अपादानकारकम्) उपयोग: — ‘कस्मात्’? इत्यस्य उत्तररूपेण उपयुज्यते। वियोगं, कारणम् अपसरणं च सूचयति। प्रयोगविधानम् (क) कारणबोधक: — मूषक: बिडालात् बिभेति। (ख) वियोगबोधक: — छात्र: विद्यालयात् आगत:। (ग) अपसरणबोधक: — दुर्जन: मूर्खतया धर्मात् भ्रष्ट:।

उत्तर:

पञ्चमी विभक्ति का प्रयोग कारण, वियोग और अपसरण सूचित करने के लिए होता है। (क) मूषक: बिडालात् बिभेति। — यहाँ 'बिडालात्' पञ्चमी विभक्ति में कारण बताने के लिए है। (ख) छात्र: विद्यालयात् आगत:। — यहाँ 'विद्यालयात्' वियोग सूचित करता है अर्थात् छात्र विद्यालय से आया है। (ग) दुर्जन: मूर्खतया धर्मात् भ्रष्ट:। — यहाँ 'धर्मात्' अपसरण सूचित करता है अर्थात् धर्म से भ्रष्ट हुआ।

व्याख्या:

पञ्चमी विभक्ति का उपयोग 'कस्मात्?' प्रश्न के उत्तर में किया जाता है। यह विभक्ति कारण, वियोग और अपसरण को दर्शाती है। उदाहरणों में विभक्ति के प्रयोग को समझाया गया है।

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Q2.२. षष्ठी विभक्ति: (सम्बन्ध:) उपयोग: — ‘कस्य’? इत्यस्य उत्तररूपेण प्रयुज्यते। सम्बन्धं, स्वामित्वम्, अंशं विषयं च दर्शयति। प्रयोगविधानम् (क) सम्बन्धबोधक: — मम मित्रम्। (ख) स्वामित्वबोधक: — बालकस्य पुस्तकम्। (ग) अंशबोधक: — शरीरस्य ऊर्ध्वभागे हृदयं मस्तिष्कं च स्त:। (घ) विषयबोधक: — फलस्य स्वाद: रुचिकर:।

उत्तर:

षष्ठी विभक्ति का प्रयोग सम्बन्ध, स्वामित्व, अंश और विषय दर्शाने के लिए किया जाता है। (क) मम मित्रम्। — यहाँ 'मम' सम्बन्ध दर्शाता है अर्थात् मेरा मित्र। (ख) बालकस्य पुस्तकम्। — यहाँ 'बालकस्य' स्वामित्व दर्शाता है अर्थात् बालक की पुस्तक। (ग) शरीरस्य ऊर्ध्वभागे हृदयं मस्तिष्कं च स्त:। — यहाँ 'शरीरस्य' अंश दर्शाता है अर्थात् शरीर का ऊपरी भाग। (घ) फलस्य स्वाद: रुचिकर:। — यहाँ 'फलस्य' विषय दर्शाता है अर्थात् फल का स्वाद।

व्याख्या:

षष्ठी विभक्ति का उपयोग 'कस्य?' प्रश्न के उत्तर में होता है। यह विभक्ति सम्बन्ध, स्वामित्व, अंश और विषय को दर्शाती है। उदाहरणों में विभक्ति के प्रयोग को स्पष्ट किया गया है।

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Q3.३. सप्तमी विभक्ति: (अधिकरणकारकम्) उपयोग: — ‘कस्मिन्’? इत्यस्य उत्तररूपेण प्रयुज्यते। स्थानं, कालम् आधारं च बोधयति। प्रयोगविधानम् (क) स्थानबोधक: — विद्यालये पठति । (ख) कालबोधक: — प्रभाते सूर्य: उदेति । (ग) आधारबोधक: — भूमौ पादपा: रोहन्ति ।

उत्तर:

सप्तमी विभक्ति का प्रयोग स्थान, काल और आधार दर्शाने के लिए किया जाता है। (क) विद्यालये पठति। — यहाँ 'विद्यालये' स्थान सूचित करता है अर्थात् विद्यालय में पढ़ता है। (ख) प्रभाते सूर्य: उदेति। — यहाँ 'प्रभाते' काल सूचित करता है अर्थात् सुबह सूर्य उदय होता है। (ग) भूमौ पादपा: रोहन्ति। — यहाँ 'भूमौ' आधार सूचित करता है अर्थात् भूमि पर पेड़ उगते हैं।

व्याख्या:

सप्तमी विभक्ति का उपयोग 'कस्मिन्?' प्रश्न के उत्तर में होता है। यह विभक्ति स्थान, काल और आधार को दर्शाती है। उदाहरणों के माध्यम से इसका प्रयोग स्पष्ट किया गया है।

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Q4.२. मेलनं कुरुत — तन्त्रांशानां कार्याणि विचिन्त्य यथोचितं विकल्पं चिनुत — | स्तम्भ: अ | स्तम्भ: ब | | --- | --- | | (क) चैट-जीपीटी (Chat-GPT) | १. नैतिकताया: शिक्षां करोति | | (ख) डीप्-फेक् (Deepfake) | २. ए.आई. आधारित-शिक्षाप्रणाली | | (ग) शिक्षक: | ३. पथनिर्देशन करोति | | (घ) एलेक्सा (Alexa) | ४. संवादयन्त्रम् | | (ङ) डेटासेट (Dataset) | ५. पक्षपातयुक्त प्रशिक्षणफलम् | | (च) दीक्षा (DIKSHA) | ६. गीतं गायति, दीपं प्रकाशितं करोति च | | (छ) अपूर्वानुमेय-नियन्त्रणम् (Predictive Policing) | ७. मिथ्याचित्रस्य निर्माणम् | | (ज) गूगल मानचित्र (Google Maps) | ८. चित्रोत्पादनाय ए.आई.अनुप्रयोगः | | (झ) पूर्वग्रहः | ९. यन्त्रपाठशालायाः नाम | | (ञ) दॅल्लू-ई (DALL-E) | १०. अपराधशमनाय प्रयोगः |

उत्तर:

समीक्षा: (क) चैट-जीपीटी (Chat-GPT) — ४. संवादयन्त्रम् (ख) डीप्-फेक् (Deepfake) — ७. मिथ्याचित्रस्य निर्माणम् (ग) शिक्षक: — १. नैतिकताया: शिक्षां करोति (घ) एलेक्सा (Alexa) — ६. गीतं गायति, दीपं प्रकाशितं करोति च (ङ) डेटासेट (Dataset) — ९. यन्त्रपाठशालायाः नाम (च) दीक्षा (DIKSHA) — २. ए.आई. आधारित-शिक्षाप्रणाली (छ) अपूर्वानुमेय-नियन्त्रणम् (Predictive Policing) — १०. अपराधशमनाय प्रयोगः (ज) गूगल मानचित्र (Google Maps) — ३. पथनिर्देशन करोति (झ) पूर्वग्रहः — ५. पक्षपातयुक्त प्रशिक्षणफलम् (ञ) दॅल्लू-ई (DALL-E) — ८. चित्रोत्पादनाय ए.आई.अनुप्रयोगः व्याख्या: प्रत्येक तन्त्रांशस्य कार्यं तदनुरूपं मेलयितव्यं। उदाहरणतः चैट-जीपीटी संवादयन्त्रः अस्ति, अतः तस्य मेल संवादयन्त्रम् इति।

व्याख्या:

प्रत्येक स्तम्भ-अस्य तन्त्रांशस्य कार्यं स्तम्भ-बस्य विकल्पानुसारं मेलयित्वा यथोचितं विकल्पं चिनोत। उदाहरणार्थ, डीप्-फेक् मिथ्याचित्रस्य निर्माणं करोति, अतः तस्य मेल ७ इति।

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Q5.३. अधः प्रदत्तमञ्जूषातः शब्दान् चित्वा रिक्तस्थानानि पूर्यत — कृतकबुद्धिः, डेटासेट्, शिक्षकः, डीप्-फेक्, सम्वादयन्त्रम्, कृषिक्षेत्रे, प्रशिक्षणम्, पूर्वाग्रहः, नैतिकता (क) यन्त्राणां शिक्षणाय ... नामकः दत्तांशसमूहः उपयुज्यते। (ख) चैट-जीपीटी, एलेक्सा, सिरि इत्यादीनि ... इत्यस्य उदाहरणानि सन्ति। (ग) यः मनुष्यवत् प्रश्नोत्तरं करोति, सः ... इति उच्यते। (घ) यदा पक्षपातयुक्तः दत्तांशः प्रयुज्यते तर्हि कृतकबुद्धिः अपि ... करोति। (ड) ………………………… सदैव करुणां, विवेकं च शिक्षयन्ति, कृतकबुद्धिः तु तस्य सहायिका अस्ति । (च) कृतकबुद्धिः यन्त्राणि

उत्तर:

(क) यन्त्राणां शिक्षणाय डेटासेट् नामकः दत्तांशसमूहः उपयुज्यते। (ख) चैट-जीपीटी, एलेक्सा, सिरि इत्यादीनि सम्वादयन्त्रम् इत्यस्य उदाहरणानि सन्ति। (ग) यः मनुष्यवत् प्रश्नोत्तरं करोति, सः शिक्षकः इति उच्यते। (घ) यदा पक्षपातयुक्तः दत्तांशः प्रयुज्यते तर्हि कृतकबुद्धिः अपि पूर्वाग्रहः करोति। (ड) नैतिकता सदैव करुणां, विवेकं च शिक्षयन्ति, कृतकबुद्धिः तु तस्य सहायिका अस्ति । (च) कृतकबुद्धिः यन्त्राणि कृषिक्षेत्रे प्रशिक्षणम् करोति।

व्याख्या:

प्रत्येक रिक्तस्थानं पाठ्यपुस्तकस्य सन्दर्भे उचितं शब्देन पूर्यते। उदाहरणार्थ, यन्त्राणां शिक्षणाय डेटासेट् उपयुज्यते। चैट-जीपीटी, एलेक्सा, सिरि इत्यादयः संवादयन्त्राणि सन्ति। पक्षपातयुक्त दत्तांशः पूर्वाग्रहः उत्पन्नयति। नैतिकता करुणा विवेकं च शिक्षयति।

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Q6.५. अधोलिखितानि वाक्यानि पठित्वा शुद्धम् (✓) अशुद्ध (✗) वा चिनुत — (क) आर्य: यशिका च विद्यालये कृतकबुद्धे: उपयोगं कुरुत। ( ) (ख) कृतकबुद्धि: केवलं विनोदानुकूलम् उपकरणम् अस्ति। ( ) (ग) अथर्व: अपि शिक्षायां कृतकबुद्धे: प्रयोगं करोति। ( ) (घ) अक्षत: चैट्बोट् इत्यस्य साहाय्येन उपन्यासलेखनं करोति। ( ) (ङ) ए.आइ. डीप्-फेक् इत्यपि कश्चन दुरुपयोग: अस्ति। ( ) (च) आर्य: चित्रनिमाणाय कृतकबुद्धे: साहाय्यं प्राप्नोति। ( ) (छ) शिक्षक: गम्भीरतया चैट्बोट् वाक्यानां मूल्याङ्कनं करोति। ( )

उत्तर:

उत्तर: (क) ✓ - आर्य: यशिका च विद्यालये कृतकबुद्धे: उपयोगं कुर्वन्ति। (ख) ✗ - कृतकबुद्धि: केवलं विनोदानुकूलम् उपकरणम् नास्ति, शिक्षायाः, चिकित्सायाः, वाणिज्यस्य च क्षेत्रेषु उपयोगी अस्ति। (ग) ✓ - अथर्व: अपि शिक्षायां कृतकबुद्धे: प्रयोगं करोति। (घ) ✓ - अक्षत: चैट्बोट् इत्यस्य साहाय्येन उपन्यासलेखनं करोति। (ङ) ✓ - ए.आइ. डीप्-फेक् इत्यपि कश्चन दुरुपयोग: अस्ति। (च) ✓ - आर्य: चित्रनिमाणाय कृतकबुद्धे: साहाय्यं प्राप्नोति। (छ) ✓ - शिक्षक: गम्भीरतया चैट्बोट् वाक्यानां मूल्याङ्कनं करोति।

व्याख्या:

प्रत्येकं वाक्यं कृतकबुद्धेः उपयोगं वा दोषं सूचयति। विद्यालये, शिक्षायां, चित्रनिमाणे च कृतकबुद्धे: उपयोगः अस्ति। डीप्-फेक् इत्यस्य दुरुपयोगः अपि संभवति। अतः यथार्थं चिन्हितम्।

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Q7.६. एतत् चित्रम् आधारीकृत्य संस्कृतभाषायां पञ्च वाक्यानि रचयत — (क) (ख) (ग) (घ) (ङ)

उत्तर:

उत्तर उदाहरणम् — (क) एषा सा कृतकबुद्धि: मानवबुद्धि: सहकरी अस्ति। (ख) कृतकबुद्धे: साहाय्येन कार्याणि शीघ्रतया सम्पद्यन्ते। (ग) चैट्बोट् संवादं कुर्वन् प्रश्नान् उत्तराणि ददाति। (घ) शिक्षकेषु कृतकबुद्धे: प्रयोगः शिक्षां सुगमां करोति। (ङ) कृतकबुद्धे: उपयोगेन जीवनं सरलम् भवति।

व्याख्या:

चित्रस्य आधारतः संस्कृतभाषायां वाक्यानि रच्यन्ते ये कृतकबुद्धेः उपयोगं, लाभं च सूचयन्ति।

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Q8.9. अधोलिखित-वाक्येषु कर्तृपदं-क्रियापदं च चिनुत — (क) आर्य: संगणकस्य उपयोगं कुर्वन् आसीत्। (ख) यशिका कृतकबुद्धे: उपयुक्तानाम् उपयोगान् वर्णयति। (ग) शिक्षक: बालेभ्य: सतर्कताया: आवश्यकतां सूचयति। (घ) अथर्व: अपि कर्तव्यचित् रोबोटिक्-यन्त्रस्य ज्ञानं दत्तवान्। (ङ) वेद: अपि कृतकबुद्धे: दोषान् विवेचयति।

उत्तर:

उत्तर: (क) कर्तृपदम्: आर्य: क्रियापदम्: कुर्वन् आसीत् (ख) कर्तृपदम्: यशिका क्रियापदम्: वर्णयति (ग) कर्तृपदम्: शिक्षक: क्रियापदम्: सूचयति (घ) कर्तृपदम्: अथर्व: क्रियापदम्: दत्तवान् (ङ) कर्तृपदम्: वेद: क्रियापदम्: विवेचयति

व्याख्या:

प्रत्येकं वाक्यं विश्लेष्य कर्तृपदं तथा क्रियापदं चिनोति। कर्तृपदं तस्य वाक्यस्य कर्ता, क्रियापदं तस्य क्रिया सूचयति।

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